आपूर्ति (Supply) से तात्पर्य उस मात्रा या वस्तु से है जो वास्तव में एक विशेष समय पर एक विशेष कीमत (price) पर बिक्री (sale) के लिए प्रस्तुत की जाती है। आपूर्ति अनुसूची (Supply schedule) किसी वस्तु की वे विभिन्न मात्राएं हैं जो विभिन्न कीमतों पर बिक्री के लिए पेश की जाएंगी।
| चावल की कीमत (रुपये/किलो) - Price of Rice | आपूर्ति की गई चावल की मात्रा (टन में) - Quantity Supplied |
|---|---|
| 6.50 | 100 |
| 7.00 | 125 |
| 7.50 | 150 |
| 8.00 | 175 |
| 8.50 | 200 |
| 9.00 | 250 |
पूरे बाजार के लिए आपूर्ति अनुसूची को बाजार आपूर्ति (market supply) कहा जाता है। यह विभिन्न कीमतों पर सभी विक्रेताओं द्वारा आपूर्ति की गई मात्राओं को जोड़कर प्राप्त की जाती है।
आपूर्ति का नियम इस प्रकार है: "अन्य बातें समान रहने पर, जैसे-जैसे किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, उसकी आपूर्ति का विस्तार (extended) होता है, और जैसे-जैसे कीमत गिरती है, उसकी आपूर्ति सिकुड़ती (contracted) है।" बिक्री के लिए पेश की गई मात्रा सीधे कीमत के साथ बदलती है, यानी कीमत जितनी अधिक होगी, आपूर्ति उतनी ही अधिक होगी, और इसके विपरीत। इस प्रकार, किसी वस्तु की कीमत और आपूर्ति की गई मात्रा के बीच एक सकारात्मक या सीधा संबंध (positive or direct relationship) होता है। आपूर्ति वक्र (supply curve), जैसा कि चित्र 5.1 में दिखाया गया है, बाएं से दाएं ऊपर की ओर (upward) झुकता है।
अन्य कारकों के स्थिर रहने पर, जैसे-जैसे कीमत (price) बढ़ती है, आपूर्ति की गई मात्रा बढ़ती है। इसे आपूर्ति का विस्तार (extension of supply) कहा जाता है, यानी जब कीमत P0 से P2 तक बढ़ जाती है, तो आपूर्ति की गई मात्रा भी Q0 से Q2 तक बढ़ जाती है। जैसे-जैसे कीमत कम होती है, आपूर्ति की गई मात्रा भी कम होती जाती है। इसे आपूर्ति का संकुचन (contraction of supply) कहा जाता है। चित्र में, यदि कीमत P0 से P1 तक घट जाती है, तो मात्रा Q0 से Q1 तक घट जाती है। आपूर्ति का विस्तार और संकुचन एक ही आपूर्ति वक्र (supply curve) पर होता है।
जब कीमत (price) के अलावा किसी अन्य कारक में बदलाव के कारण आपूर्ति में परिवर्तन होता है, तो आपूर्ति वक्र ऊपर या नीचे की ओर शिफ्ट (shift) हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब तकनीक (technology) में सुधार होता है, तो समान कीमत के लिए अधिक मात्रा में आपूर्ति की जाएगी। इसे आपूर्ति में वृद्धि (increase in supply) कहा जाता है। चित्र 5.2 में, यदि आपूर्ति Q0 से Q2 तक बढ़ जाती है, तो आपूर्ति वक्र S0S0 नीचे की ओर या मूल बिंदु से दूर यानी S2S2 पर शिफ्ट हो जाता है।
इसी तरह, बाढ़, आग आदि के कारण, समान कीमत पर आपूर्ति की जाने वाली मात्रा कम होगी, जिसके परिणामस्वरूप आपूर्ति में कमी (decrease in supply) होगी। मात्रा Q0 से घटकर Q1 हो जाती है और आपूर्ति वक्र S0S0 से S1S1 ऊपर की ओर चला जाता है।