10. आपूर्ति (SUPPLY) - घटते सीमांत प्रतिफल का नियम (Law of Diminishing Marginal Return) - कृषि में इसके अनुप्रयोग - लागत अवधारणाएं (Cost Concepts) - अल्पकालिक और दीर्घकालिक लागत वक्र - उत्पादन का अनुकूलतम स्तर

आपूर्ति (Supply)

आपूर्ति (Supply) से तात्पर्य उस मात्रा या वस्तु से है जो वास्तव में एक विशेष समय पर एक विशेष कीमत (price) पर बिक्री (sale) के लिए प्रस्तुत की जाती है। आपूर्ति अनुसूची (Supply schedule) किसी वस्तु की वे विभिन्न मात्राएं हैं जो विभिन्न कीमतों पर बिक्री के लिए पेश की जाएंगी।

तालिका 5.1: चावल की आपूर्ति अनुसूची (Supply schedule of Rice)
चावल की कीमत (रुपये/किलो) - Price of Riceआपूर्ति की गई चावल की मात्रा (टन में) - Quantity Supplied
6.50100
7.00125
7.50150
8.00175
8.50200
9.00250

पूरे बाजार के लिए आपूर्ति अनुसूची को बाजार आपूर्ति (market supply) कहा जाता है। यह विभिन्न कीमतों पर सभी विक्रेताओं द्वारा आपूर्ति की गई मात्राओं को जोड़कर प्राप्त की जाती है।

A. आपूर्ति का नियम (LAW OF SUPPLY)

आपूर्ति का नियम इस प्रकार है: "अन्य बातें समान रहने पर, जैसे-जैसे किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, उसकी आपूर्ति का विस्तार (extended) होता है, और जैसे-जैसे कीमत गिरती है, उसकी आपूर्ति सिकुड़ती (contracted) है।" बिक्री के लिए पेश की गई मात्रा सीधे कीमत के साथ बदलती है, यानी कीमत जितनी अधिक होगी, आपूर्ति उतनी ही अधिक होगी, और इसके विपरीत। इस प्रकार, किसी वस्तु की कीमत और आपूर्ति की गई मात्रा के बीच एक सकारात्मक या सीधा संबंध (positive or direct relationship) होता है। आपूर्ति वक्र (supply curve), जैसा कि चित्र 5.1 में दिखाया गया है, बाएं से दाएं ऊपर की ओर (upward) झुकता है।

i) आपूर्ति का विस्तार और संकुचन (Extension and Contraction of Supply):

अन्य कारकों के स्थिर रहने पर, जैसे-जैसे कीमत (price) बढ़ती है, आपूर्ति की गई मात्रा बढ़ती है। इसे आपूर्ति का विस्तार (extension of supply) कहा जाता है, यानी जब कीमत P0 से P2 तक बढ़ जाती है, तो आपूर्ति की गई मात्रा भी Q0 से Q2 तक बढ़ जाती है। जैसे-जैसे कीमत कम होती है, आपूर्ति की गई मात्रा भी कम होती जाती है। इसे आपूर्ति का संकुचन (contraction of supply) कहा जाता है। चित्र में, यदि कीमत P0 से P1 तक घट जाती है, तो मात्रा Q0 से Q1 तक घट जाती है। आपूर्ति का विस्तार और संकुचन एक ही आपूर्ति वक्र (supply curve) पर होता है।

Extension and Contraction of Supply
चित्र 5.1: आपूर्ति का विस्तार और संकुचन

ii) आपूर्ति में वृद्धि और कमी (Increase and Decrease in Supply):

जब कीमत (price) के अलावा किसी अन्य कारक में बदलाव के कारण आपूर्ति में परिवर्तन होता है, तो आपूर्ति वक्र ऊपर या नीचे की ओर शिफ्ट (shift) हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब तकनीक (technology) में सुधार होता है, तो समान कीमत के लिए अधिक मात्रा में आपूर्ति की जाएगी। इसे आपूर्ति में वृद्धि (increase in supply) कहा जाता है। चित्र 5.2 में, यदि आपूर्ति Q0 से Q2 तक बढ़ जाती है, तो आपूर्ति वक्र S0S0 नीचे की ओर या मूल बिंदु से दूर यानी S2S2 पर शिफ्ट हो जाता है।

इसी तरह, बाढ़, आग आदि के कारण, समान कीमत पर आपूर्ति की जाने वाली मात्रा कम होगी, जिसके परिणामस्वरूप आपूर्ति में कमी (decrease in supply) होगी। मात्रा Q0 से घटकर Q1 हो जाती है और आपूर्ति वक्र S0S0 से S1S1 ऊपर की ओर चला जाता है।

Increase and Decrease in Supply
चित्र 5.2: आपूर्ति में वृद्धि और कमी

iii) आपूर्ति के निर्धारक (Determinants of Supply):

  1. उत्पादन के कारकों की लागत (The cost of factors of production): जब इनपुट की लागत बढ़ती है, तो उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी और उत्पादकों (producers) को बढ़ी हुई लागत को कवर करने के लिए अधिक कीमत तय करनी पड़ सकती है। इनपुट की कीमत में गिरावट से लागत कम होगी और कम कीमत पर आपूर्ति की अनुमति मिलेगी।
  2. प्रौद्योगिकी की स्थिति (State of Technology): प्रौद्योगिकी (technology) में सुधार से उत्पादन की लागत कम होती है और आपूर्ति बढ़ती है।
  3. आर्थिक दायरे से बाहर के कारक (Factors outside economic sphere): बाढ़, सूखा (drought) आदि कारक आपूर्ति को कम कर देंगे।
  4. कराधान और सब्सिडी (Taxation and subsidy): उच्च कराधान से कीमत बढ़ेगी और परिणामस्वरूप आपूर्ति कम हो जाएगी। (जैसे यदि टेलीविजन पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है, तो इसकी आपूर्ति कम हो जाएगी)। सब्सिडी देने से आपूर्ति बढ़ेगी (जैसे बायोगैस प्लांट या उर्वरक के लिए सब्सिडी)।
  5. वस्तु की कीमत (Price of the commodity): जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो उसकी आपूर्ति भी बढ़ती है।
  6. संबंधित वस्तुओं की कीमत (Price of related goods): यदि बाजार में सोयाबीन की कीमत बढ़ती है, तो अन्य सभी स्थितियां समान रहने पर, किसान अन्य फसलों के लिए निर्धारित अधिक भूमि सोयाबीन को आवंटित करेगा, और इसलिए सोयाबीन की आपूर्ति बढ़ जाएगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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