पूंजी गहन कृषि प्रौद्योगिकियों (capital intensive agricultural technologies) के आगमन के कारण फार्म वित्त (farm finance) एक महत्वपूर्ण इनपुट बन गया है। विभिन्न कृषि संसाधनों की उत्पादकता (productivities) बढ़ाने के लिए किसानों को पूंजी की आवश्यकता होती है। भारतीय कृषि, सामान्य रूप से, कम और अनिश्चित रिटर्न (low and uncertain returns) की विशेषता है। कम रिटर्न → कम बचत → कम निवेश → कम रिटर्न (low returns → low savings → low investment → low returns) के इस दुष्चक्र (vicious cycle) को तोड़ने के लिए, किसानों को बाहरी वित्त (external finance) का प्रावधान अपरिहार्य (inevitable) हो जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में संगठित और असंगठित ऋण एजेंसियां (organized and unorganized credit agencies) विकास और उपभोग (consumption) दोनों उद्देश्यों के लिए ऋण प्रदान करती हैं। इन एजेंसियों द्वारा ऋण के प्रावधान में बैंकरों द्वारा पालन की जाने वाली बैंकिंग प्रणाली में अंतर, उधारकर्ताओं की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों (socio-economic conditions) और उधारकर्ताओं को दी जाने वाली संस्थागत सहायता के कारण बैंकरों और उधारकर्ताओं दोनों के लिए कई बाधाएं (obstacles) शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार अक्सर संस्थागत ऋण सेट-अप (institutional credit set-up), क्रेडिट राशनिंग (credit rationing), ब्याज दरों (rates of interest), सब्सिडी (subsidy) और बाजारों और अन्य विकास एजेंसियों के कामकाज के संबंध में अपनी कृषि ऋण नीतियों को बदलती है जो किसान-उधारकर्ता को उपलब्ध ऋण की सीमा को प्रभावित करेगी। इसलिए, इन सभी कारकों का अंततः कृषि रिटर्न (farm returns) पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए, पूंजी से संबंधित समस्याओं को अच्छी तरह से समझा जा सकता है, अगर कोई भारत में कृषि ऋण प्रणाली के सैद्धांतिक आधार, बैंकरों और उधारकर्ताओं के सामने आने वाली बाधाओं (bottlenecks) और कृषि ऋण प्रणाली में शामिल समस्याओं को हल करने में सरकार के प्रयासों (efforts) का एहसास कर सके।
कृषि विकास और समग्र रूप से अर्थव्यवस्था के विकास के लिए ऋण (credit) आवश्यक है। कृषि वित्त की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
कृषि के वित्तपोषण के लिए खेती की स्थितियों (farming conditions) की गहन समझ (thorough understanding) की आवश्यकता होती है क्योंकि यह अन्य क्षेत्रों को उधार (lending) देने से अलग है। अन्य ऋण देने से कृषि वित्त को अलग करने वाले महत्वपूर्ण कारक इस प्रकार हैं:
| कृषि वित्तपोषण (Financing Agriculture) | अन्य क्षेत्रों का वित्तपोषण (Financing other sectors) |
|---|---|
| (i) किसान क्रेडिट नीतियों (credit policies) और प्रक्रियाओं के बारे में नहीं जानते हैं। | वे बैंकिंग प्रक्रियाओं (banking procedures) से अवगत हैं। |
| (ii) फार्म रिकॉर्ड (farm records) के अभाव में खेती की दक्षता (efficiency) का अनुमान लगाना मुश्किल है। | दक्षता का आकलन किया जा सकता है क्योंकि सभी रिटर्न दर्ज (recorded) किए जाते हैं। |
| (iii) खेती प्राकृतिक आपदाओं (natural calamities) और अनिश्चितताओं के संपर्क में है। | किसी उद्यम (enterprise) में शामिल जोखिम (risk) और अनिश्चितताओं का पूर्वाभास (foreseen) और प्रबंधन किया जा सकता है। |
| (iv) खेत बिखरे (scattered) होने के कारण ऋण संवितरण (loan disbursement) के बाद बार-बार पर्यवेक्षण (frequent supervision) और अनुवर्ती (follow-up) कार्रवाई मुश्किल है। | निगरानी (Monitoring) आसान और कम समय लेने वाली है। |
| (v) भूमि (land) मुख्य सुरक्षा (security) के रूप में अचल (immovable) होने के कारण अत्यधिक तरल (liquid) नहीं है। | अचल संपत्तियों के अलावा, चल संपत्ति (movable assets) भी सुरक्षा के रूप में ली जाती है जिसे आसानी से तरल (liquidated) किया जा सकता है। |
| (vi) भूमि के स्वामित्व (ownership) को सत्यापित (verify) करना मुश्किल है क्योंकि भूमि रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए हैं। | रिकॉर्ड का सत्यापन करके स्वामित्व की पहचान आसानी से की जा सकती है। |
| (vii) चूंकि कृषि उत्पाद खराब (perishable) होने वाले होते हैं, इसलिए उन्हें संकटपूर्ण बिक्री (distress sales) के अधीन किया जाता है। | चूंकि औद्योगिक उत्पाद खराब नहीं होने वाले (non-perishable) हैं, इसलिए उत्पादक कीमतें तय कर सकते हैं। |
| (viii) निवेश और रिटर्न के बीच लंबी गर्भधारण अवधि (long gestation period)। | बहुत कम गर्भधारण अवधि (short gestation period)। |
| (ix) चूंकि आय मौसमी (seasonal) है, इसलिए पुनर्भुगतान अनुसूची (repayment schedule) निवेश से आय सृजन के अनुसार तैयार की जाती है। | चूंकि आय सृजन (income generation) एक सतत प्रक्रिया (continuous process) है, इसलिए पुनर्भुगतान (repayments) लगातार किए जाएंगे। |
| (x) नई तकनीकों (technologies) को लागू करने के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं (infrastructural facilities) उपलब्ध नहीं हैं। | उनकी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा (sufficient infrastructure) उपलब्ध है। |
| (xi) किसान बाहरी प्रभाव (external influence) के प्रति संवेदनशील होते हैं और इसलिए कुछ निहित स्वार्थ (vested interests) उनका शोषण (exploit) करते हैं और उन्हें गलत दिशा (wrong direction) में निर्देशित करते हैं। | उद्यमियों को आमतौर पर बाहरी प्रभाव से गुमराह (misled) नहीं किया जाता है क्योंकि वे अच्छी तरह से संगठित (well organized) होते हैं। |