19. कृषि ऋण (Agricultural Credit) - अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता और वर्गीकरण

परिभाषा (Definition)

ऋण (Credit) भविष्य में कुछ समय पर चुकाने के वादे (promise to repay) के बदले में वर्तमान समय में धन के उपयोग पर नियंत्रण प्राप्त करना है।

क्रेडिट को क्रय शक्ति (purchasing power) के अस्थायी हस्तांतरण (temporary transfer) को उन लोगों से सुगम बनाने के लिए एक उपकरण के रूप में भी परिभाषित किया गया है, जिनके पास इसका अधिशेष (surpluses) है और जिन्हें इसकी आवश्यकता है। इस प्रकार, ऋण में धन का अस्थायी हस्तांतरण शामिल है।

कृषि ऋण (Agricultural Credit) निवेश निधि (investment funds) की वह राशि है जो कृषि क्षेत्र के बाहर के संसाधनों से कृषि उत्पादन के लिए उपलब्ध कराई जाती है।

कृषि वित्त (Agricultural Finance) को संगठनों और किसानों द्वारा ऋण देने (lending) और उधार लेने (borrowing) से निपटने वाले अध्ययन के एक अलग क्षेत्र के रूप में माना जाता है।

फार्म वित्त (Farm Finance) कृषि अर्थशास्त्र की एक शाखा है जो व्यक्तिगत फार्म इकाइयों से संबंधित वित्तीय संसाधनों (financial resources) की सेवाओं के प्रावधान और प्रबंधन से संबंधित है।

फार्म वित्त को कृषि पर उपयोग के लिए फार्म के बाहर के स्रोतों (off-farm sources) से प्राप्त धन की मात्रा के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है, जो भविष्य में चुकाने योग्य (repayable) है, जिस पर ब्याज स्पष्ट रूप से (explicitly) या परोक्ष रूप से (implicitly) सहमत है।

फार्म वित्त (Farm Finance):

  1. न केवल अधिक उत्पादन के लिए है बल्कि कृषि संसाधनों (farm resources) की उत्पादकता बढ़ाने के लिए भी है;
  2. महज एक ऋण (loan) या अग्रिम (advance) नहीं है, बल्कि यह कृषक समुदाय की भलाई को बढ़ावा देने का एक साधन (instrument) है;
  3. पैसे के प्रबंधन (manage the money) के लिए केवल एक विज्ञान नहीं है, बल्कि इष्टतम उत्पादन (optimum output) प्राप्त करने के लिए दुर्लभ संसाधनों (scarce resources) को आवंटित करने का एक अनुप्रयुक्त विज्ञान (applied science) है; और
  4. समाज पर केवल एक सामाजिक दायित्व (social obligation) नहीं है; बल्कि यह सूक्ष्म और वृहद दोनों स्तरों (micro and macro level) पर आर्थिक विकास (economic development) से पिछड़े और अग्रगामी जुड़ाव (backward and forward linkages) वाला एक लीवर है।

मैक्रो स्तर (macro level) पर, फार्म वित्त को कृषि क्षेत्र और पूरी अर्थव्यवस्था (economy as a whole) पर वित्त (बिचौलियों द्वारा किसानों तक विस्तारित) के प्रभाव के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। माइक्रो स्तर (micro level) पर, फार्म वित्त को उन बिचौलियों (intermediaries) के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कृषि क्षेत्र को वित्त प्रदान करते हैं और वित्तीय बाजारों (financial markets) से अपने ऋण योग्य धन (loanable funds) प्राप्त करते हैं।

इस प्रकार, फार्म वित्त में निम्नलिखित विशेषताएं (features) होनी चाहिए:

  1. कृषि गतिविधियों (farm activities) के लिए किसानों को वित्त प्रदान किया जाना चाहिए;
  2. वित्त को कृषि संसाधनों की उत्पादकता (productivities) को प्रोत्साहित करना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप निवेश के लिए उच्च आर्थिक लाभ (higher economic returns) हो;
  3. वित्त को किसान परिवारों (farm households) के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना चाहिए; और
  4. देश के आर्थिक विकास के साथ पिछड़े और अग्रगामी जुड़ाव को मजबूत करने के लिए किसी बाहरी एजेंसी (external agency) द्वारा वित्त प्रदान किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, किसान और बैंकर फार्म वित्त को अलग-अलग तरीकों से देखते हैं जैसा कि नीचे बताया गया है:

किसान (Farmers) ऋण देने वाली एजेंसियां (Lending Agencies)
i) कृषि आवश्यकताओं के लिए उचित समय (proper time) पर वित्त प्राप्त करें। ऐसा वित्त विस्तारित (extend) करें जिसे आसानी से एकत्र (collected) किया जा सके।
ii) उचित लागत (reasonable cost) पर वित्त प्राप्त करने का प्रयास करें। पूंजी के लिए उचित प्रतिफल दर (reasonable rate of return) प्राप्त करने का प्रयास करें।
iii) यह सुनिश्चित करें कि उनकी अपनी संपत्ति (own assets) उच्च जोखिमों (high risks) के संपर्क में न आए। सुरक्षा (safety) के लिए प्रतिभूतियों (securities) की तरलता (liquidity) की उचित डिग्री सुनिश्चित करें।

कृषि ऋण का वर्गीकरण (Classification of Agricultural credit)

कृषि ऋण को उद्देश्य (purpose), समय (पुनर्भुगतान अवधि - repayment period), सुरक्षा (security), अधिशेष धन का सृजन (generation of surplus funds), लेनदार (creditor) और उन गतिविधियों की संख्या (number of activities) के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है जिनके लिए ऋण प्रदान किया जाता है।

i) उद्देश्य (Purpose):

जिस उद्देश्य के लिए ऋण दिया जाता है, उसके आधार पर कृषि ऋण को वर्गीकृत किया जाता है:

  1. विकास ऋण या निवेश ऋण (Development credit or Investment Credit): यह टिकाऊ संपत्ति (durable assets) प्राप्त करने या मौजूदा संपत्तियों में सुधार करने के लिए प्रदान किया जाता है। इसके तहत निम्नलिखित के लिए ऋण दिया जाता है:
  2. उत्पादन ऋण (Production credit): फसल उत्पादन (crop production) के लिए दिया जाता है: यहां ऋण राशि का उपयोग इनपुट (inputs) खरीदने और मजदूरी (wages) का भुगतान करने के लिए किया जाता है।
  3. विपणन ऋण (Marketing credit): यह विपणन कार्यों (marketing functions) को पूरा करने और उपज (produce) के लिए उच्च मूल्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
  4. उपभोग ऋण (Consumption credit): यह किसान को अपने परिवार के खर्चों (family expenses) को पूरा करने के लिए आवश्यक ऋण है।

ii) पुनर्भुगतान अवधि (Repayment Period):

उधारकर्ता को जिस अवधि के लिए ऋण की आवश्यकता होती है, उसके आधार पर इसे विभाजित किया जाता है:

  1. अल्पावधि ऋण (Short-Term Credit): यह किसानों को 6 से 18 महीने की अवधि के लिए दिया जाता है और मुख्य रूप से खेती के खर्चों (cultivation expenses) यानी बीज (seed), उर्वरक (fertilizer), कीटनाशकों (pesticides) की खरीद और मजदूरों को मजदूरी (wages to labourers) के भुगतान को पूरा करने के लिए होता है। यह खेत को कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए कार्यशील पूंजी (working capital) के रूप में कार्य करता है और फसलों की कटाई/विपणन (harvesting/marketing) के समय चुकाए जाने की उम्मीद है। इसे एक किस्त (one instalment) में चुकाया जाना चाहिए।
  2. मध्यम अवधि का ऋण (Medium-Term Credit): पुनर्भुगतान 2 से 5 साल की अवधि के लिए होता है, यह पंप-सेट (pump-sets), कृषि मशीनरी (farm machineries), बैलों, डेयरी जानवरों (dairy animals) की खरीद और खेत में छोटे सुधार (minor improvement) करने के लिए है। इसे छमाही (half yearly) या वार्षिक किश्तों (annual installments) में चुकाया जा सकता है।
  3. दीर्घकालिक ऋण (Long-Term Credit): यह 5 साल से अधिक की अवधि के लिए उन्नत (advanced) है और विकास कार्यों यानी कुएं खोदने (sinking wells), ट्रैक्टर की खरीद (purchase of tractor), और खेत में स्थायी सुधार (permanent improvements) करने के लिए अचल संपत्ति के बंधक (mortgage of immovable property) के खिलाफ पच्चीस साल तक बढ़ता है। इसे छमाही या वार्षिक किश्तों में चुकाना होता है।

iii) सुरक्षा (Security):

किसानों को उनके द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा के आधार पर ऋण प्रदान किया जाता है।

  1. फार्म बंधक ऋण (Farm Mortgage Credit): यह भूमि (land) के बंधक (mortgage) के खिलाफ सुरक्षित है।
  2. संपार्श्विक ऋण या चल संपत्ति ऋण (Collateral Credit or Chattel Credit): यह पशुधन (livestock), फसल या गोदाम रसीद (warehouse receipt) की सुरक्षा के खिलाफ दिया जाता है।
  3. व्यक्तिगत ऋण (Personal Credit): यह व्यक्ति के चरित्र (character) और चुकाने की क्षमता (repaying capacity) के आधार पर दिया जाता है न कि किसी मूर्त संपत्ति (tangible assets) पर। सामान्य तौर पर, दीर्घकालिक (LT) ऋण आमतौर पर भूमि की सुरक्षा के खिलाफ उन्नत किया जाता है जबकि मध्यम अवधि (MT) और अल्पकालिक (ST) ऋण व्यक्तिगत और संपार्श्विक (collateral) सुरक्षा के खिलाफ स्वीकृत किए जाते हैं।

iv) अधिशेष धन का सृजन (Generation of Surplus Funds):

अधिशेष धन (surplus funds) के सृजन के आधार पर, ऋण को स्वयं-परिसमापन (self-liquidating) और गैर-स्वयं-परिसमापन (non-self-liquidating) ऋण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

  1. सेल्फ लिक्विडेटिंग क्रेडिट (Self Liquidating Credit): इस मामले में, ऋण राशि एक वर्ष या उत्पादन अवधि में उत्पादन प्रक्रिया (production process) में अवशोषित (absorbed) हो जाती है और उत्पन्न अतिरिक्त आय (additional income) पूरी ऋण राशि चुकाने के लिए पर्याप्त (sufficient) होती है।
  2. नॉन-सेल्फ लिक्विडेटिंग क्रेडिट (Non-Self Liquidating Credit): यहां उधार ली गई धनराशि से प्राप्त संसाधनों की परियोजना अवधि (project period) के दौरान उत्पादन प्रक्रिया में खपत (consumed) नहीं होती है। निवेश (investment) कई वर्षों की अवधि में फैला हुआ है। एक वर्ष में उत्पन्न अतिरिक्त आय संपूर्ण ऋण राशि को चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसलिए पुनर्भुगतान कई वर्षों तक फैला हुआ है।

v) लेनदार या ऋणदाता वार क्रेडिट (Creditor or Lender wise Credit):

लेनदार के दृष्टिकोण (point of view) से ऋण को वर्गीकृत किया जा सकता है।

  1. गैर-संस्थागत एजेंसियां (Non-Institutional Agencies): इनमें साहूकार (money lenders), व्यापारी (traders), कमीशन एजेंट (commission agents), दोस्त और रिश्तेदार (friends and relatives) शामिल हैं। इस तरह का कर्ज आम तौर पर शोषक (exploitative) होता है।
  2. संस्थागत एजेंसियां (Institutional Agencies): इनमें सहकारी समितियां (co-operative’s), वाणिज्यिक बैंक (commercial bank) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (regional rural bank) शामिल हैं।

vi) गतिविधियों की संख्या (Number of Activities Served):

उन गतिविधियों की संख्या के आधार पर जिनके लिए ऋण का उपयोग किया जा सकता है, ऋण को a) एकल उद्देश्य ऋण (single purpose loan) और b) मिश्रित ऋण (composite loan) में वर्गीकृत किया जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):
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