02. आर्थिक प्रणालियां – परिभाषाएं और विशेषताएं (Economic Systems – Definitions and Characteristics) - पूंजीवादी, समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्था

C. आर्थिक प्रणालियां (Economic Systems)

i) आर्थिक प्रणाली में वस्तुओं और धन का चक्रीय प्रवाह (Circular Flow of Goods and Money)

प्रत्येक अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसमें मानव की अनेक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई वस्तुओं के उत्पादन को व्यवस्थित किया जाता है। एक आर्थिक प्रणाली में, दो मुख्य आर्थिक इकाइयां - परिवार (households) और उद्यम (enterprises) - आर्थिक गतिविधियों के एक चक्रीय (circular) पैटर्न से जुड़ी होती हैं। इन दोनों इकाइयों के विकल्प और निर्णय ही आर्थिक गतिविधि को आगे बढ़ाते हैं।

परिवार (Households) व्यवसाय या उद्यम (Businesses or Enterprises)
  • व्यावसायिक क्षेत्र (business sector) द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करते हैं।
  • व्यावसायिक फर्मों को इनपुट (श्रम और पूंजी) प्रदान करते हैं।
  • उपभोक्ताओं को वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करते हैं।
  • परिवारों द्वारा प्रदान किए गए संसाधनों (inputs) का उपयोग करते हैं।

चित्र 1.1: एक सरल अर्थव्यवस्था में वस्तुओं, सेवाओं, संसाधनों और धन के भुगतान का प्रवाह

अपने घरों में, लोग दो तरह के निर्णय लेते हैं: a) अपने पास मौजूद इनपुट (मुख्य रूप से उनका श्रम) बेचना और b) अपनी आय से वस्तुएं खरीदना। उद्यम या व्यवसाय (enterprises or businesses) उत्पादन में संलग्न होते हैं, जिसमें वे परिवारों से खरीदे गए श्रम और अन्य इनपुट का उपयोग करते हैं। फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को अंततः परिवारों को बेच दिया जाता है।

परिवारों और फर्मों की बातचीत अर्थशास्त्र के दो पहलुओं को एक साथ लाती है: मांग और आपूर्ति (demand and supply)। यह क्रिया दो तरह के बाजारों (markets) में होती है; इनपुट के लिए और आउटपुट के लिए। इनपुट बाजारों में, परिवार अपना श्रम (labour), भूमि (land) और पूंजी (capital) प्रदान करते हैं। फर्में इन इनपुट को बाजारों में तय की गई कीमतों पर खरीदती हैं। आउटपुट बाजारों में, उद्यम अपनी वस्तुओं और सेवाओं को उपभोक्ताओं या परिवारों को बेचते हैं।

ii) अर्थव्यवस्था के प्रकार (Types of Economy)

किसी भी अर्थव्यवस्था को इस तरह से डिज़ाइन किया जा सकता है कि क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन करना है - इन तीन मूलभूत निर्णयों (fundamental decisions) के लिए वह पूरी तरह से या तो बाजार (market) पर निर्भर रहे या सरकार (government) पर। आर्थिक प्रणाली को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जा सकता है: a) पूंजीवाद (capitalism) और b) समाजवाद (socialism)।

a) पूंजीवाद (Capitalism)

पूंजीवाद आर्थिक संगठन (economic organization) की एक ऐसी प्रणाली है जिसकी विशेषता लाभ के उद्देश्य (profit motive) के साथ पूंजी का निजी स्वामित्व (private ownership) और उपयोग है। पूंजीवाद की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता निजी संपत्ति (private property) का अस्तित्व है। हर किसी को अपनी पसंद की कोई भी फर्म बनाने की स्वतंत्रता है, बशर्ते उसके पास आवश्यक पूंजी और क्षमता हो। यह 'अहस्तक्षेप' (laissez-faire) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि आर्थिक गतिविधियों में राज्य का हस्तक्षेप (state interference) कम से कम होना चाहिए।

b) समाजवाद (Socialism)

समाजवाद एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जिसमें उत्पादन के साधनों (capital equipment, buildings and land) पर राज्य (state) का स्वामित्व होता है। समाजवाद का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था को निजी लाभ (private profit) के बजाय सामाजिक लाभ (social benefit) के लिए चलाना है। यह किसी की क्षमता के अनुसार काम करने और जाति, वर्ग और विरासत में मिले विशेषाधिकारों (inherited privileges) की परवाह किए बिना सभी के लिए समान अवसर (equal opportunities) पर जोर देता है।

साम्यवाद (Communism) समाजवाद का ही एक रूप है। इसे तत्कालीन सोवियत संघ (Soviet Union) में अपनाया गया था। साम्यवाद का अर्थ एक आदर्शवादी प्रणाली (idealistic system) से है जिसमें उत्पादन के सभी साधनों और संपत्ति के अन्य रूपों पर पूरे समुदाय का स्वामित्व होता है, जिसमें समुदाय के सभी सदस्य इसके काम और आय में हिस्सा लेते हैं। लोगों से उनकी क्षमताओं के अनुसार काम करने और उनकी जरूरतों के अनुसार प्राप्त करने की उम्मीद की जाती है। इसका उद्देश्य एक वर्गहीन समाज (classless society) बनाना है और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राज्य तंत्र (state machinery) का उपयोग सभी विरोधों को कुचलने के लिए किया जाता है। साम्यवाद और समाजवाद के बीच मुख्य अंतर यह है कि साम्यवाद सरकार की मशीनरी पर कब्जा करने के लिए हिंसक क्रांतिकारी तरीकों (violent revolutionary methods) में विश्वास करता है और अपनाता है, जबकि समाजवाद शांतिपूर्ण और संसदीय तरीकों (peaceful and parliamentary methods) में विश्वास करता है।

c) मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy)

यह न तो शुद्ध पूंजीवाद है और न ही शुद्ध समाजवाद, बल्कि दोनों का मिश्रण है। इस प्रणाली में, हम पूंजीवाद और समाजवाद दोनों की विशेषताएं पाते हैं। मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी उद्यम (private enterprises) और सार्वजनिक उद्यम (public enterprises) दोनों काम करते हैं। सरकार कई तरीकों से निजी उद्यमों को विनियमित (regulate) करने के लिए हस्तक्षेप करती है। आम तौर पर, रक्षा उपकरण (defense equipments), परमाणु ऊर्जा (atomic power), भारी इंजीनियरिंग सामान (heavy engineering goods) आदि का उत्पादन करने वाले बुनियादी और भारी उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र (public sector) में रखा जाता है। दूसरी ओर, उपभोक्ता सामान उद्योग (consumer goods industries), लघु और कुटीर उद्योग, कृषि आदि निजी क्षेत्र (private sector) को सौंपे जाते हैं। यह महसूस किया जाता है कि भारत जैसे विकासशील देशों में, सक्रिय सरकारी मदद और मार्गदर्शन के बिना विकास की वांछित दर से आर्थिक विकास (economic development) हासिल नहीं किया जा सकता है। इसलिए, ऐसे देशों में सरकार पूंजीवाद की बुराइयों को कम करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेती है।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था (capitalistic economy) में, उद्यमी (entrepreneurs) उपलब्ध संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करते हैं, क्योंकि उनके पास लाभ कमाने की मजबूत पहल होती है। लेकिन निजी उद्यमों के स्वतंत्र कामकाज के परिणामस्वरूप आय और धन की अत्यधिक असमानताएं (inequalities) पैदा होती हैं। समाजवादी अर्थव्यवस्था (socialistic economy) में, आय और धन में असमानताएं न्यूनतम हो जाती हैं और राष्ट्रीय आय को अधिक समान रूप से वितरित किया जाता है। लेकिन समाजवादी अर्थव्यवस्था में निजी पहल की कमी (lack of private initiative) की समस्या होती है, जिसके परिणामस्वरूप आविष्कारशील क्षमता (inventive ability) और उद्यमशीलता की भावना (enterprising spirit) की कमी होती है और अंततः ये उपलब्ध संसाधनों के अक्षम उपयोग की ओर ले जाते हैं। मिश्रित अर्थव्यवस्था का उद्देश्य पूंजीवाद और समाजवाद दोनों के लक्ष्यों (अर्थात्, संसाधनों का कुशल उपयोग और आय और धन का समान वितरण) को प्राप्त करना है और साथ ही, यह पूंजीवाद और समाजवाद की बुराइयों को कम करने पर जोर देता है।

D. कृषि से संबंधित अर्थशास्त्र (Economics as Related to Agriculture)

अर्थशास्त्र के सिद्धांत (principles of economics) किसानों को खेत और घर (farm and household) के बीच संतुलन बनाने में मार्गदर्शन करते हैं। उत्पादकों (producers) के रूप में, किसान दुर्लभ संसाधनों से अधिकतम लाभ कमाना चाहते हैं, जिनके वैकल्पिक उपयोग (alternative uses) हो सकते हैं, और साथ ही, वे उपभोग इकाइयों के रूप में अपने परिवारों को अधिकतम संतुष्टि (maximum satisfaction) प्रदान करना चाहते हैं। इस प्रकार, एक ऐसे वातावरण में जहां एक किसान लाभ को अधिकतम करने और उत्पादन के कारकों (भूमि, श्रम, पूंजी और संगठन) के सीमित स्टॉक के साथ परिवार के जीवन स्तर में सुधार करने की इच्छा रखता है, जिसे वैकल्पिक उपयोगों में रखा जा सकता है, आर्थिक सिद्धांतों (economic principles) को लागू किया जा सकता है। आर्थिक सिद्धांत मैक्रो स्तर (macro level) पर कृषि वृद्धि और विकास (agricultural growth and development) को प्रभावित करने वाली नीतियों के निर्माण में भी एक मार्गदर्शक शक्ति बनते हैं।

अध्याय 1: समीक्षा के लिए प्रश्न (Questions for Review)

1. रिक्त स्थान भरें (Fill up the blanks):

  1. अर्थशास्त्र की लियोनेल रॉबिंस (Lionel Robbins) की परिभाषा को _____________ के रूप में जाना जाता है।
  2. चावल एक _____________ वस्तु है जबकि चिकित्सा सेवा एक _____________ वस्तु है।
  3. धन की परिभाषा (Wealth definition) _____________ द्वारा प्रतिपादित की गई थी।
  4. पॉल सैमुएलसन (Paul Samuelson) ने अर्थशास्त्र की _____________ परिभाषा दी।
  5. 'अहस्तक्षेप' (Laissez faire) का पालन _____________ अर्थव्यवस्था में किया जा रहा है।

2. संक्षिप्त नोट्स लिखें (Write short notes):

  1. एक अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएं (Central problems of an economy)
  2. एक अर्थव्यवस्था का चक्रीय प्रवाह (Circular flow of an economy)
  3. अर्थशास्त्र की कमी/दुर्लभता की परिभाषा (Scarcity definition of economics)
  4. प्रो. सैमुएलसन द्वारा परिभाषित अर्थशास्त्र (Economics as defined by Prof. Samuelson)
  5. अर्थशास्त्र एक विज्ञान और कला दोनों है (Economics is both a science and an art)
  6. कृषि से संबंधित अर्थशास्त्र (Economics as related to agriculture)

3. निम्नलिखित में अंतर करें (Differentiate the following):

  1. निगमनात्मक विधि और आगमनात्मक विधि (Deductive method and inductive method)
  2. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र (Micro economics and macro economics)
  3. सकारात्मक अर्थशास्त्र और मानक अर्थशास्त्र (Positive economics and normative economics)

4. निम्नलिखित के उत्तर दें (Answer the following):

  1. एडम स्मिथ की अर्थशास्त्र की परिभाषा में क्या कमियां हैं? (What are the defects in Adam Smith’s definition of economics?)
  2. अर्थशास्त्र की कमी/दुर्लभता की परिभाषा के गुण और दोष क्या हैं? (What are the merits and demerits of scarcity definition of economics?)
  3. अर्थशास्त्र के अध्ययन के पारंपरिक दृष्टिकोण की व्याख्या करें। (Explain the traditional approach to the study of economics.)
  4. मिश्रित अर्थव्यवस्था अन्य प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है - पुष्टि करें। (Mixed economy is better than other types of economies-Substantiate.)
अस्वीकरण (Disclaimer):
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