37. कृषि मूल्य और जोखिम प्रबंधन (AGRICULTURAL PRICES AND RISK MANAGEMENT)

प्रशासित मूल्य (Administered Prices)

कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices - CACP)

बाजार तंत्र (market mechanism) में हस्तक्षेप का एक अन्य तरीका विभिन्न प्रशासित मूल्यों की घोषणा रहा है, जैसे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support prices - MSP), वैधानिक न्यूनतम मूल्य (statutory minimum prices), खरीद मूल्य (procurement prices) और निर्गम मूल्य (issue prices)। भारत सरकार द्वारा विभिन्न कृषि फसलों के लिए इन कीमतों की घोषणा कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों पर की जाती है। इस आयोग की स्थापना मूल रूप से जनवरी 1965 में कृषि मूल्य आयोग (Agricultural Prices Commission - APC) के नाम से की गई थी।

कृषि मूल्य आयोग की स्थापना श्री एल.के. झा की अध्यक्षता वाली खाद्यान्न मूल्य समिति (Foodgrains Prices Committee) की सिफारिशों पर की गई थी, जिसका उद्देश्य उत्पादकों और उपभोक्ताओं (consumers) दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि वस्तुओं की मूल्य नीति पर सरकार को सलाह देना था। देश की मूल्य नीति का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के दोनों समूहों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और एकीकृत मूल्य संरचना (balanced and integrated price structure) विकसित करना है।

मूल्य नीति (Price Policy)

सरकार ने कृषि उपज के लिए एक मूल्य नीति तैयार की है जिसका उद्देश्य किसानों को कृषि उत्पादन में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु लाभकारी मूल्य (remunerative prices) सुरक्षित करना है। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार हर साल प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support prices) की घोषणा करती है। ये कीमतें कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों को ध्यान में रखने के बाद तय की जाती हैं। CACP कीमतों की सिफारिश करते समय निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखता है:

मार्च 1980 में आयोग के संदर्भ की शर्तों (terms of reference) को व्यापक बनाया गया और इसका नाम बदलकर कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) कर दिया गया। CACP एक वैधानिक निकाय (statutory body) है जो खरीफ और रबी सीजन की फसलों के लिए प्रशासित कीमतों की सिफारिश करते हुए अलग-अलग रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

कृषि वस्तुओं के लिए सरकार द्वारा निर्धारित खरीद / न्यूनतम समर्थन / वैधानिक न्यूनतम मूल्य (As On 12.2.2001) (रु. प्रति क्विंटल)
फसल 1995-96 1998-99 1999-2000 2000-01
धान360440490510
ज्वार (Jowar)300390415445
बाजरा (Bajra)300390415445
मक्का (Maize)310390415445
गेहूं380510550580
चना (Gram)7008158951015
मूंगफली (Groundnut)900104011551220
सोयाबीन (Soyabean)600705755775
कपास1150144015751625
गन्ना42.5052.7056.10-

विपणन में जोखिम और उसका प्रबंधन (RISK IN MARKETING AND ITS MANAGEMENT)

जोखिम का अर्थ और महत्व (Meaning and Importance of Risk)

हार्डी (Hardy) ने जोखिम को लागत, हानि या क्षति (cost, loss or damage) के बारे में अनिश्चितता (uncertainty) के रूप में परिभाषित किया है। जोखिम सभी विपणन लेनदेन (marketing transactions) में अंतर्निहित (inherent) है। आग, कृन्तकों (rodents) या अन्य तत्वों द्वारा उपज के विनाश का जोखिम, गुणवत्ता में गिरावट, मूल्य में गिरावट, स्वाद, आदतों या फैशन में बदलाव का जोखिम हमेशा बना रहता है।

कृषि उत्पादों के उत्पादन और खपत के बीच समय का अंतर (time lag) होता है। समय का अंतर जितना अधिक होगा, जोखिम उतना ही अधिक होगा। विपणन से जुड़े जोखिम को समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह जोखिम लाभ में योगदान देता है। अधिकांश जोखिम बाजार के बिचौलियों (market middlemen) द्वारा लिया जाता है क्योंकि उनमें इसे वहन करने की क्षमता होती है।

विपणन में जोखिम के प्रकार (Types of Risk in Marketing)

विपणन प्रक्रिया (marketing process) से जुड़े जोखिम तीन बुनियादी प्रकार के होते हैं:

  1. भौतिक जोखिम (Physical Risk): इसमें विपणन प्रक्रिया के दौरान उत्पाद की मात्रा और गुणवत्ता में नुकसान शामिल है। यह आग, बाढ़, भूकंप, कृंतक, कीड़े, कीट, कवक (fungus), अत्यधिक नमी या तापमान, लापरवाह हैंडलिंग और अवैज्ञानिक भंडारण (unscientific storage) के कारण हो सकता है।
  2. मूल्य जोखिम (Price Risk): कृषि उत्पादों की कीमतें न केवल साल-दर-साल, बल्कि महीने-दर-महीने, दिन-प्रतिदिन और यहां तक कि एक ही दिन में उतार-चढ़ाव (fluctuate) करती हैं। कीमतों में गिरावट व्यापारी या किसान को नुकसान पहुंचा सकती है जो उपज का स्टॉक करता है।
  3. संस्थागत जोखिम (Institutional Risks): इन जोखिमों में सरकार की नीति में बदलाव, टैरिफ और कर कानूनों, आवाजाही प्रतिबंधों (movement restrictions), वैधानिक मूल्य नियंत्रण और लेवी (levies) लगाने से उत्पन्न होने वाले जोखिम शामिल हैं।

जोखिम का न्यूनीकरण (Minimization of Risk)

  1. भौतिक नुकसान में कमी (Reduction in Physical Loss):
  2. बीमा कंपनियों को जोखिम का हस्तांतरण (Transfer of Risks to Insurance Companies): भौतिक जोखिम का बोझ बीमा कंपनियों (insurance companies) को स्थानांतरित करके कम किया जा सकता है। ये एजेंसियां प्रीमियम एकत्र करती हैं और नुकसान के मामले में पूरा मुआवजा प्रदान करती हैं।
  3. मूल्य जोखिम को कम करना (Minimization of Price Risk):

सट्टेबाजी और हेजिंग (Speculation and Hedging)

सट्टेबाजी

सट्टेबाजी के पीछे मूल विचार भविष्य की तारीख में अनुकूल कीमत पर बिक्री या खरीद के उद्देश्य से वर्तमान मूल्य पर किसी वस्तु की खरीद या बिक्री है। सट्टेबाज (speculator) आम तौर पर मूल्य आंदोलनों (price movements) से लाभ कमाने से चिंतित होता है। वह तब खरीदता है जब कीमतें कम होती हैं।

सट्टेबाजी दो प्रकार की होती है:

हेजिंग

हेजिंग मूल्य जोखिम को स्थानांतरित करने की एक व्यापारिक तकनीक (trading technique) है। यह व्यापारियों को कीमतों में भारी गिरावट से बचाता है।

शेफर्ड (Shepherd) के अनुसार: "हेजिंग नकद बाजार (cash market) में किए गए भौतिक उत्पादों की खरीद या बिक्री को ऑफसेट (offset) करने के लिए वायदा बाजार (futures market) में विपरीत बिक्री या खरीद को निष्पादित करना है।"

सट्टेबाजी और हेजिंग के बीच अंतर (Difference between Speculation and Hedging):

सट्टेबाजी हेजिंग
नकदी के साथ-साथ वायदा बाजारों (futures markets) में खरीद और बिक्री लाभ कमाने के उद्देश्य से की जाती है।नकद और वायदा बाजारों में खरीद और बिक्री खुद को अत्यधिक मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए की जाती है।
खरीदने और बेचने की गतिविधियाँ (activities) आवश्यक रूप से एक दूसरे के विपरीत नहीं होती हैं।खरीदारों और विक्रेताओं की गतिविधियाँ हमेशा एक दूसरे के विपरीत होती हैं।
यह आवश्यक नहीं है कि दोनों प्रकार के लेन-देन समान मात्रा के हों।दोनों बाजारों में समान मात्रा में सामान खरीदना और बेचना अनिवार्य है।
वस्तुओं को व्यापारियों द्वारा संग्रहीत नहीं किया जाता है। नियत तारीख पर केवल कीमत में अंतर दिया या लिया जाता है।व्यापारियों द्वारा वस्तुओं को भौतिक रूप से नियंत्रित और संग्रहीत किया जाता है।

अनुबंध खेती / विपणन (Contract Farming / Contract Marketing)

अनुबंध खेती (Contract farming) मूल रूप से उत्पादक-किसानों और कृषि-व्यवसाय फर्मों (agri-business firms) के बीच एक विशेष कीमत और समय पर उपज की कुछ पूर्व-सहमत मात्रा (pre-agreed quantity) और गुणवत्ता (quality) का उत्पादन करने की एक व्यवस्था है।

इसमें कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन में लगी कंपनियां किसानों के साथ अनुबंध (contract) कर रही हैं। वे किसानों को इनपुट प्रदान करते हैं और पहले से निर्दिष्ट दर (specified rate) पर उत्पाद वापस खरीदते हैं। कंपनी द्वारा सामान्यतः किसानों को बीज, कीटनाशक, तकनीकी मार्गदर्शन और उर्वरक प्रदान किए जाते हैं।

अनुबंध खेती के लाभ (Advantages):

🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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