38. कृषि व्यवसाय (AGRIBUSINESS)
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन एच. डेविस (John H. Davis) ने पहली बार 1955 में कृषि व्यवसाय (agribusiness) शब्द का इस्तेमाल किया था। वर्तमान में, कृषि व्यवसाय को उन सभी व्यावसायिक उद्यमों (business enterprises) कहलाता है जो किसानों, व्यापारियों या उपभोक्ताओं को बेचते हैं। लेनदेन में इनपुट, उपज या सेवा शामिल हो सकती है और इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- उत्पादक संसाधन (Productive resources): फ़ीड, बीज, उर्वरक, उपकरण, ऊर्जा, कीटनाशक, मशीनरी, आदि।
- कृषि वस्तुएं (Agricultural commodities): खाद्य और फाइबर की कच्चे और संसाधित (raw and processed) वस्तुएं।
- सुविधाजनक सेवाएं (Facilitative services): ऋण, बीमा, विपणन, भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकिंग, वितरण, परामर्श, मिट्टी परीक्षण आदि।
भारत में कृषि व्यवसाय की गुंजाइश (Scope for Agribusiness in India)
- भारत में विविध कृषि-जलवायु (agro-climate) है, जो समशीतोष्ण (temperate), उपोष्णकटिबंधीय (sub-tropical) और उष्णकटिबंधीय (tropical) कृषि वस्तुओं के उत्पादन की सुविधा प्रदान करती है।
- चारा, अकार्बनिक उर्वरक (inorganic fertilizers) और जैव-उर्वरक (bio-fertilizers) जैसे कृषि इनपुट (agricultural inputs) की मांग बढ़ रही है।
- कृषि में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के उपयोग से बीज उत्पादन और जैव-नियंत्रण एजेंटों (bio-control agents) के उत्पादन में अपार गुंजाइश है।
- निर्यात (Export) को आर्थिक विकास के स्रोत के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- समुद्री और अंतर्देशीय मछली (marine and inland fish) तथा सजावटी मछली संस्कृति (ornamental fish culture) के उत्पादन के लिए अपार अवसर उपलब्ध हैं।
- पशुधन (livestock) संपदा मांस, दूध और दूध उत्पादों, पोल्ट्री उत्पादों आदि के उत्पादन के लिए बहुत गुंजाइश देती है।
- भारत में मधुमक्खी पालन (Beekeeping and apiary) को बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है।
- भारत में जैविक खेती (Organic farming) की क्षमता सबसे अधिक है क्योंकि दुनिया के औद्योगिक देशों की तुलना में भारत में कीटनाशक और अकार्बनिक उर्वरकों का उपयोग कम है।
- सब्जियों और फूलों का ग्रीन हाउस (green house) के तहत उत्पादन निर्यात बाजार का दोहन करने के लिए लिया जा सकता है।
लघु व्यवसायों के प्रकार (Types of Small Businesses)
सरकार को छोड़कर, अधिकांश छोटे व्यवसायों को निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- उत्पादन: इसमें फसलों और पशुधन के कृषि उत्पादन के साथ-साथ वानिकी (forestry) सहित सभी प्रकार के उत्पादन शामिल हैं।
- वितरण: ये वे व्यवसाय हैं जो उपभोक्ता या उपयोगकर्ता (consumer or user) तक सामान और सेवाएं लाते हैं। इसमें पैकेजिंग, लेबलिंग, परिवहन, रेफ्रिजरेटिंग, प्रसंस्करण और भंडारण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
- खुदरा बिक्री (Retailing): खुदरा बिक्री वितरण का वह चरण है जो उपभोक्ताओं (consumers) से संबंधित है। उदाहरण के लिए - किराना, स्वयं-सेवा स्टोर, कृषि इनपुट रिटेलिंग आदि।
- व्यक्तिगत सेवाएँ (Personal services): सेवा व्यवसाय वे हैं जो मुख्य रूप से जनता को सामान की आपूर्ति नहीं करते हैं, बल्कि एक सेवा करते हैं। उदाहरण के लिए - होटल, रेस्तरां, कृषि-सेवा केंद्र।
- व्यावसायिक सेवाएँ (Professional services): जनता की सुरक्षा के लिए, कुछ प्रकार की सेवाओं को काफी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। पेशेवर सेवाओं को अपनी सेवाएं देने के लिए लाइसेंस (licenses) प्राप्त करने से पहले एक औपचारिक शिक्षा और परीक्षा से गुजरना चाहिए। उदाहरण - निवेश दलाल, बीमा एजेंट आदि।
- वित्तीय (Financial): वित्तीय व्यवसाय आमतौर पर सेवा-उन्मुख होते हैं लेकिन वे मुख्य रूप से धन को उधार देने या निवेश करने का काम करते हैं। उदाहरण - वाणिज्यिक बैंक, बीमा कंपनियां आदि।
- फ्रेंचाइज़िंग (Franchising): यह एक ब्रांड नाम (brand name) या ट्रेडमार्क के तहत विशेष उत्पादों या सेवाओं के विपणन के लिए एक पेटेंट, ट्रेडमार्क या लाइसेंस (license) है।
व्यापार संगठनों के रूप (Forms of the Business Organizations)
व्यापार संगठन के तीन मूल रूप (basic forms) हैं: एकमात्र स्वामित्व (sole proprietorship), साझेदारी (partnership), और निगम (corporation)। चुने गए व्यावसायिक रूप को प्रभावित करने वाले कारक (factors) हैं:
- गठन में आसानी (Ease of formation)
- वित्तीय जोखिम का जोखिम (Exposure to financial risk)
- पूंजी जुटाने की क्षमता (Ability to raise capital)
- आय का कर उपचार (Tax treatment of income)
- मालिक की मृत्यु पर व्यवसाय की निरंतरता (Continuity of business upon the death of owner)
व्यावसायिक संगठन के तीन रूपों की तुलना (A comparison of the three forms of Business organization)
| कारक (FACTORS) |
एकमात्र स्वामित्व (SOLE PROPRIETORSHIP) |
साझेदारी (PARTNERSHIP) |
निगम (CORPORATION) |
| मालिकों की संख्या (Number of owners) | एक (One) | दो या दो से अधिक (Two or more) | एक या अधिक (One or more) |
| गठन में आसानी | बहुत आसान (Very easy) | आसान से बहुत आसान (Easy to very easy) | मध्यम से आसान (Moderate to easy) |
| वित्तीय जोखिम की डिग्री (Degree of financial risk) | मालिक सभी ऋणों के लिए जिम्मेदार है (Owner is responsible for all debts) | साझेदार ऋणों के लिए जिम्मेदारी साझा करते हैं (Partners share responsibility) | कंपनी के नाम पर ऋणों के लिए मालिकों की केवल सीमित जिम्मेदारी होती है (Limited responsibility) |
| उधार लेने की क्षमता (Ability to borrow funds) | उधार लेने की सीमित क्षमता (Limited ability) | कई मालिकों के कारण उधार लेने की बेहतर क्षमता (Improved ability) | सार्वजनिक रूप से शेयर और डिबेंचर के माध्यम से सीधे धन उधार ले सकते हैं (Can borrow directly from public) |
| कानूनी आवश्यकताएं (Legal requirements) | नाम की संभावित घोषणा को छोड़कर कोई नहीं (None, except name declaration) | एकमात्र स्वामित्व के समान; साझेदारों के बीच लिखित अनुबंध (written contract) अनुशंसित है | चार्टर (Charter) राज्य से सुरक्षित होना चाहिए |
| कर | मालिक के व्यक्तिगत कर रिटर्न (personal tax return) के हिस्से के रूप में | मुनाफे को मालिकों के बीच विभाजित किया जाता है और प्रत्येक साझेदार के कर रिटर्न पर कर लगाया जाता है | अपना खुद का आयकर (income tax) का भुगतान करता है |
| निरंतरता (Continuity) | मालिक की मृत्यु पर व्यवसाय समाप्त (Business is terminated) | किसी भी साझेदार की मृत्यु पर समाप्त हो सकता है, जब तक कि निरंतरता (continuation) के प्रावधान न किए गए हों | शेयरधारक (stockholder) की मृत्यु के बाद भी व्यवसाय जारी रहता है |
उद्यमी (Entrepreneur)
कई आर्थिक सिद्धांत व्यक्ति उद्यमियों (individual entrepreneurs) द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हैं। जोसेफ शुम्पीटर (Joseph Schumpeter) आर्थिक विकास की प्रक्रिया में मानव एजेंट (human agent) को उजागर करने वाले पहले प्रमुख लेखक थे। उनका मानना था कि अर्थव्यवस्था उन व्यक्तियों की गतिविधियों से प्रेरित है जो नए सामान और उत्पादन के नए तरीकों को बढ़ावा देना चाहते हैं। आर्थर डब्ल्यू लेविस (Arthur W. Lewis) ने तर्क दिया कि आर्थिक विकास (economic growth) तब तक धीमा होना तय था जब तक कि उद्यमियों की पर्याप्त आपूर्ति न हो जो नए विचारों की तलाश में हों और उन्हें पेश करने का जोखिम उठाने को तैयार हों।
विशेषज्ञों ने उद्यमी को विभिन्न रूपों में वर्णित किया है:
- एक व्यक्ति जो नवप्रवर्तन (innovates) करता है।
- वह जो उत्पादन के कारकों (factors of production) को आवंटित और प्रबंधित करता है और जोखिम वहन करता है।
- वह व्यक्ति जो व्यावसायिक विचारों (business ideas) की कल्पना करता है, फर्मों के संगठन को डिजाइन करता है, पूंजी जमा करता है, श्रम की भर्ती करता है और अवधारणा को एक कार्यात्मक संगठन (functional organization) में परिवर्तित करता है।
व्यवसाय में व्यक्तित्व का महत्व (The Importance of Personality in Business)
किसी भी व्यवसाय के मालिक की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक उसका व्यक्तित्व (personality) है, जो चुने गए व्यवसाय के प्रकार के अनुकूल होता है।
- शारीरिक गुण (Physical Qualities): दिखावट (Appearance), सामान्य स्वास्थ्य (General health), सहनशक्ति (Endurance), दृष्टि (Vision), और श्रवण (Hearing)।
- मानसिक क्षमताएं (Mental Abilities): सामान्य बुद्धि (General intelligence), व्यवसाय का ज्ञान (Knowledge of business), प्रतिक्रिया की गति (Speed of reaction), स्मृति (Memory), रचनात्मकता (Creativeness), पहल (Initiative), और चरित्र की समझ (Insight into character)।
- नैतिकता: ईमानदारी (Honesty), वफादारी (Loyalty), निर्भरता (Dependability), और दृढ़ता (Perseverance)।
- सामाजिक गुण (Social Qualities): शिष्टाचार (Courtesy), सहानुभूति (Sympathy), दूसरों के साथ काम करने की क्षमता (Ability to work with others), हंसमुखता (Cheerfulness), आत्मविश्वास (Self-confidence), अनुकूलन क्षमता (Adaptability), और उत्साह (Enthusiasm)।
- कार्यकारी गुण (Executive Qualities): दूसरों को निर्देशित करने की क्षमता (Ability to direct others), संगठित करने की क्षमता (Ability to organize), निर्णय लेने की क्षमता (Ability to make decisions), जिम्मेदारी लेने की क्षमता (Ability to take responsibility), और सुझाव स्वीकार करने की क्षमता (Ability to accept suggestions)।
उद्यमीय क्षमताएं (Entrepreneurial Competencies)
दक्षता (competence) ज्ञान, कौशल और उद्देश्यों (motives) का एक संयोजन है जो किसी व्यक्ति के पास किसी दिए गए कार्य को प्रभावी और कुशलता से करने के लिए होता है। पहचानी गई पंद्रह उद्यमीय क्षमताएं नीचे दी गई हैं:
- पहल: नौकरी की आवश्यकताओं या स्थिति की मांग से परे जाकर कार्रवाई करना। बिना पूछे चीजें करना।
- अवसरों को देखना और उन पर कार्य करना (Seeing and acting on opportunities): व्यवसाय, शैक्षिक या व्यक्तिगत विकास के अवसरों की तलाश करना और उन पर कार्य करना।
- दृढ़ता (Persistence): बाधाओं (obstacles) को दूर करने के लिए बार-बार या अलग-अलग कार्रवाई करना।
- जानकारी प्राप्त करना (Information seeking): उद्देश्यों (objectives) तक पहुंचने या समस्याओं को स्पष्ट करने में मदद के लिए जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वयं कार्रवाई करना।
- काम की उच्च गुणवत्ता के लिए चिंता (Concern for high quality of work): उत्कृष्टता के मौजूदा मानकों (standards of excellence) को पूरा करने या उनसे बेहतर करने के लिए कार्य करना।
- कार्य अनुबंध के प्रति प्रतिबद्धता (Commitment to work contract): किसी कार्य को पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता (highest priority) देना और इसके लिए व्यक्तिगत त्याग (personal sacrifice) करना।
- दक्षता उन्मुखीकरण (Efficiency orientation): चीजों को तेजी से, कम संसाधनों के साथ या कम लागत (lower cost) पर करने के तरीके खोजना।
- व्यवस्थित योजना (Systematic planning): लक्ष्यों (goals) तक पहुंचने के लिए तार्किक (logical) और चरण-दर-चरण (step-by-step) योजनाएं विकसित करना और उनका उपयोग करना।
- समस्या का समाधान (Problem solving): लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए नए और संभावित रूप से अद्वितीय विचारों (unique ideas) की पहचान करना।
- आत्मविश्वास: स्वयं और अपनी क्षमताओं पर दृढ़ विश्वास (strong belief) होना।
- मुखरता (Assertiveness): दूसरों के साथ समस्याओं और मुद्दों का सीधे सामना (confront) करना।
- अनुनय (Persuasion): सफलतापूर्वक दूसरों को राजी करना (persuade)। जैसे किसी को उत्पाद या सेवा खरीदने के लिए मनाना।
- प्रभाव रणनीतियों का उपयोग (Use of influence strategies): व्यावसायिक संपर्क (business contacts) विकसित करने के लिए कार्य करना और अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रभावशाली लोगों का उपयोग करना।
- निगरानी (Monitoring): यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं (procedures) का विकास या उपयोग करना कि कार्य पूरा हो गया है और गुणवत्ता (quality) मानकों को पूरा करता है।
- प्रासंगिक अन्य लोगों के कल्याण के लिए चिंता (Concern for relevant others welfare): कर्मचारियों के कल्याण (welfare of employees) में सुधार के लिए कार्रवाई करना।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं देते। यह फाइल अभी सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए उपलब्ध है। बहुत जल्द हम इसे PDF फॉर्मेट में भी अपडेट करेंगे।
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