39. लघु व्यवसाय (SMALL BUSINESS)
भारतीय अर्थव्यवस्था में लघु उद्योग (Small Scale Industry in the Indian Economy)
विकास
लघु व्यवसाय (Small businesses) या लघु-स्तरीय औद्योगिक इकाइयां (small-scale industrial units) किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भारत में, SSI (Small Scale Industries) क्षेत्र में 32.25 लाख लघु-स्तरीय औद्योगिक इकाइयां / व्यवसाय हैं, जो 177.30 लाख व्यक्तियों (1999-2000) को रोजगार देते हैं। इस क्षेत्र का उत्पादन लगभग 5,78,470 करोड़ रुपये है और निर्यात 53,975 करोड़ रुपये है। SSI विनिर्माण क्षेत्र (manufacturing sector) में सकल कारोबार (gross turnover) का 40%, विनिर्माण निर्यात का 45% और कुल निर्यात का 35% योगदान करते हैं। SSI क्षेत्र, GDP का 7% योगदान देता है। आर्थिक उदारीकरण (economic liberalization) के इस युग में, SSI क्षेत्र का विकास काफी स्पष्ट है।
लघु उद्योग की परिभाषा (Definition of Small Scale Industry)
‘लघु व्यवसाय’ (small business) की कोई आम तौर पर स्वीकृत परिभाषा नहीं है। परिभाषाएं हर देश और एक ही देश में सरकार-दर-सरकार अलग-अलग होती हैं। अमेरिका में लघु व्यवसाय अधिनियम (Small Business Act) 1953 में एक छोटे व्यवसाय को परिभाषित किया गया था जो स्वतंत्र रूप से स्वामित्व और संचालित होता है और जो अपने संचालन के क्षेत्र में प्रमुख (dominant) नहीं है।
भारत में, लघु उद्योग और कृषि एवं ग्रामीण उद्योग विभाग (Department of Small Scale and Agro and Rural Industries) ने छोटे व्यवसायों को एक क्षेत्र माना और निम्नलिखित परिभाषाएँ दीं:
- लघु औद्योगिक उपक्रम (Small Scale Industrial Undertaking): वह औद्योगिक उपक्रम जिसमें संयंत्र और मशीनरी (Plant and Machinery) में निश्चित संपत्तियों (fixed assets) में निवेश 100 लाख रुपये से अधिक नहीं है।
- सहायक औद्योगिक उपक्रम (Ancillary Industrial Undertaking): वह औद्योगिक उपक्रम जो कलपुर्जों (parts), घटकों (components) या मध्यवर्ती (intermediates) के उत्पादन में लगा है और जो अपने उत्पादन का कम से कम 50% किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम को आपूर्ति करता है, तथा जिसका निवेश 100 लाख रुपये से अधिक नहीं है।
- अति लघु उद्यम (Tiny Enterprises): वे सभी लघु इकाइयाँ जिनकी संयंत्र और मशीनरी में निवेश सीमा 25 लाख रुपये तक है।
- निर्यात उन्मुख इकाइयाँ (Export Oriented Units - EOU): वे इकाइयाँ जिनका निवेश 100 लाख रुपये से अधिक नहीं है और जो उत्पादन शुरू होने की तारीख से तीसरे वर्ष के अंत तक अपने वर्तमान उत्पादन का कम से कम 30% निर्यात (export) करती हैं।
- लघु सेवा और व्यावसायिक उद्यम (Small Scale Service and Business Enterprises - SSSBE): भूमि और भवन को छोड़कर अचल संपत्तियों में 5 लाख रुपये तक के निवेश वाले उद्योग संबंधी सेवा और व्यावसायिक उद्यम।
- महिला उद्यम (Women Enterprises): महिला उद्यम वे लघु इकाइयाँ हैं, जहाँ एक या एक से अधिक महिला उद्यमियों के पास 51% से कम वित्तीय हिस्सेदारी (financial holding) नहीं है।
- ग्राम एवं लघु उद्योग (Village and Small Scale Industries): इसमें आधुनिक खंड (जैसे पावर लूम) और पारंपरिक खंड (जैसे खादी और ग्रामोद्योग, हथकरघा, रेशम उत्पादन, हस्तशिल्प, कॉयर इकाइयां) शामिल हैं।
लघु व्यवसाय के उद्देश्य (Objectives of A Small Business)
- सेवा
- लाभ
- सामुदायिक भागीदारी (Community participation)
- विकास
- सहायक (Subsidiaries)
लक्षण (Characteristics)
- लघुता (smallness) द्वारा विशेषता।
- कम पूंजी (lesser capital) शामिल है।
- ज्यादातर एक व्यक्ति का उद्यम (one man venture)।
- अत्यधिक विविधतापूर्ण (highly diversified) - उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला।
- भौगोलिक रूप से व्यापक फैलाव (Wide dispersal geographically)।
लघु व्यवसाय का महत्व और लाभ (Importance and Advantages)
महत्व (Importance)
- वे प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं और बड़ी फर्मों की आर्थिक शक्ति को चुनौती देते हैं।
- वे आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के वितरण को व्यापक बनाते हैं।
- वे नवाचार और रचनात्मकता (innovation and creativity) के स्रोत हैं।
- न्यूनतम निवेश के साथ रोजगार (employment) पैदा करते हैं।
- निर्यात को बढ़ावा देते हैं।
- जोखिम लेने वालों (risk takers) को विकसित करते हैं।
लाभ (Advantages)
- कम पूंजी परिव्यय (capital outlay) लेकिन अधिक रोजगार सृजन।
- परिष्कृत तकनीक (sophisticated technology) की आवश्यकता नहीं है।
- व्यावसायिक इकाइयों के विकेंद्रीकरण (decentralization) और फैलाव की सुविधा प्रदान करता है।
- विशिष्ट जरूरतों (specialized needs) को पूरा कर सकता है।
- अपव्यय के बिना संसाधनों का पूरा उपयोग करता है।
नुकसान (Disadvantages)
- अपर्याप्त प्रबंधन क्षमता (Inadequate management ability)
- अपर्याप्त वित्त (Inadequate finance)
- खराब प्रतिस्पर्धी स्थिति (Poor competitive position)
- अनिश्चित व्यापार निरंतरता (Uncertain business continuity)
विकास के चरण (Growth Stages)
- पहला चरण (First stage): एक व्यक्ति का संचालन (One person operation) - जहाँ मालिक ही सब कुछ करता है (निदेशक-संस्थापक-मालिक-प्रबंधक-कार्यकर्ता)।
- दूसरा चरण (Second stage): प्रारंभिक विकास (Early Growth) - प्रबंधन और गैर-प्रबंधन कार्यों का पृथक्करण; मालिक प्रबंधन करता है और कुछ शारीरिक/मानसिक गतिविधियों को करने के लिए अधीनस्थों (subordinates) को काम पर रखता है।
- तीसरा चरण (Third stage): स्वामित्व और प्रबंधन कार्यों का पृथक्करण (Separation of ownership and management functions) - मालिक दिन-प्रतिदिन के व्यवसाय को चलाने की जिम्मेदारियों को एक पेशेवर प्रबंधक (professional manager) को सौंपना शुरू करता है।
- चौथा चरण (Fourth stage): बहु-स्तरीय प्रबंधन (Multi-layer management) - अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, और उत्पादन, वित्त, विपणन के अलग-अलग प्रबंधक।
संगठन और प्रशासन (Organization and Administration)
भारत में लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष विभाग (Department of Small Scale & Agro and Rural industries) है। विकास आयुक्त (लघु उद्योग) का कार्यालय (Office of Development Commissioner) शीर्ष/नोडल अंग के रूप में काम करता है।
- लघु उद्योग विकास संगठन (Small Industries Development Organization - SIDO): यह नीतियां (policies) बनाने के लिए एक शीर्ष निकाय है। यह तकनीकी-आर्थिक और प्रबंधकीय परामर्श, प्रौद्योगिकी उन्नयन, मानव संसाधन विकास और आर्थिक सूचना सेवाएं प्रदान करता है।
- लघु उद्योग बोर्ड (SSI Board): यह सरकार को लघु-स्तरीय क्षेत्र से संबंधित सभी मुद्दों पर सलाह देने के लिए गठित एक शीर्ष सलाहकार निकाय (advisory body) है।
- लघु उद्योग सेवा संस्थान (Small Industries Service Institutes - SISIs): देश भर में 28 SISIs और 30 शाखा SISIs हैं। वे संभावित उद्यमियों को परामर्श देते हैं, जिला औद्योगिक संभावित सर्वेक्षण तैयार करते हैं, और कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development Programmes) चलाते हैं।
लघु व्यवसायियों की वर्तमान समस्याएं (Current Problems Worrying Small Businessmen)
- सरकारी विनियमन/नीति (Govt.regulation/ policy)
- मुद्रास्फीति (Inflation)
- कर
- सरकारी कागजी कार्रवाई (Govt. paper works)
- श्रम संघ (Labour unions)
- उच्च ब्याज दरें (High interest rates)
- पर्यावरणीय प्रतिबंध (Environmental restrictions)
- आवश्यक पूंजी की कमी (Lack of required capital)
- भ्रष्ट और नौकरशाही अधिकारी (Corruptive and bureaucratic officialdom)
- कच्चे माल की उपलब्धता में रुकावटें (Interruptions in raw materials availability)
- उपयुक्त तकनीक का अभाव (Lack of appropriate technology)
व्यावसायिक विफलता के कारण (Business Failure May Result From)
- व्यापार रिकॉर्ड (business records) का अभाव।
- व्यापार अनुभव (business experience) का अभाव।
- अपर्याप्त स्टॉक-टर्नओवर और खराब इन्वेंट्री नियंत्रण (Poor inventory control)।
- वित्त (finance) की कमी और बिक्री (sales) की कमी।
- अज्ञानता के कारण महत्वपूर्ण बाधाओं (obstacles) पर ध्यान न देना।
आधुनिक कृषि में उद्यमशीलता के अवसर (Entrepreneurial Opportunities in Modern Agriculture)
| FARMING (ON FARM) |
PRODUCT MARKETING |
INPUTS MARKETING |
PROCESSING |
FACILITATIVE |
| 1. Crop | 1. Wholesale | 1. Fertilizer | 1. Milk | 1. R & D |
| 2. Dairy / Poultry | 2. Retail | 2. Agrl. Chemicals | 2. Fruits | 2. Mktg. Info |
| 3. Goat / Sheep | 3. Commission Agent | 3. Seeds | 3. Vegetables | 3. Quality control |
| 4. Rabbit | 4. Transport | 4. Machineries | 4. Paddy | 4. Insurance |
| 5. Vegetables | 5. Export | 5. Animal feed | 5. Sugarcane | 5. Energy |
| 6. Flowers | 6. Finance | 6. Poultry hatchery | 6. Cashew | |
| 7. Ornamental plants | 7. Storage | 7. Vet medicines | 7. Coir | |
| 8. Palmrosa | 8. Consultancy | 8. Landscaping | 8. Poultry | |
| 9. Fodder | | 9. Agrl. credit | 9. Cattle | |
| 10. Sericulture | | 10. Custom service | 10. Tannery | |
| 11. Agro-forestry | | 11. Bio-control | 11. Brewery | |
| 12. Beekeeping | | 12. Bio-tech | 12. P. board | |
| 13. Mushroom | | | | |
पर्यावरण विश्लेषण का महत्व (Importance of Environment Analysis)
व्यवसाय की सफलता को प्रभावित करने वाले पर्यावरण कारक हैं: (1) आर्थिक पर्यावरण (Economic environment), (2) जनसांख्यिकीय पर्यावरण (Demographic environment), (3) सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण (Socio-cultural environment), (4) तकनीकी पर्यावरण (Technological environment), (5) राजनीतिक पर्यावरण (Political environment), और (6) कानूनी पर्यावरण (Legal environment)।
पर्यावरण स्कैनिंग (environment scanning) के लाभ:
- यह प्रबंधन की ओर से पर्यावरणीय परिवर्तनों (environmental changes) के बारे में जागरूकता पैदा करता है।
- यह विपणन विश्लेषण (marketing analysis) में मदद करता है।
- यह विविधीकरण (diversification) और संसाधन आवंटन में सुधार का सुझाव देता है।
- यह फर्मों को अवसरों की पहचान करने और उनका लाभ उठाने में मदद करता है।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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