54. कृषि प्रबंधन निर्णय लेने की प्रक्रिया (FARM MANAGEMENT DECISION MAKING PROCESS)
कृषि प्रबंधन कार्यों को उत्पादन, प्रशासन और विपणन (production, administration and marketing) कार्यों में वर्गीकृत (categorized) किया जा सकता है।
1) उत्पादन और संगठन निर्णय (Production and Organization Decisions)
फार्म मैनेजर को उद्यमों (enterprises) के उत्पादन और अपने व्यवसाय के संगठन पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं। उसके निर्णय इस बात पर केंद्रित होते हैं कि क्या उत्पादन करना है और कैसे उत्पादन करना है। इन्हें आगे (i) रणनीतिक और (ii) परिचालन निर्णयों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
i. सामरिक प्रबंधन निर्णय (Strategic Management Decisions)
ये वे प्रबंधन निर्णय हैं, जिनमें भारी निवेश (heavy investment) शामिल है और जिनका लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव (long lasting effect) होता है।
- खेत का सबसे अच्छा आकार तय करना (Deciding the best size of the farm): खेत का आकार कृषि व्यवसाय के प्रकार, सिंचाई क्षमता (irrigation potential), मशीनीकरण के स्तर, भूमि के उपयोग की तीव्रता और किसान की प्रबंधकीय क्षमता पर निर्भर करता है।
- खेतिहर मजदूर और मशीनरी कार्यक्रमों पर निर्णय (Farm labour and machinery programmes): अधिकतम रिटर्न प्राप्त करने के लिए कृषि श्रम और मशीनरी का कौन सा संयोजन (combination) अपनाया जाना चाहिए?
- भवनों के निर्माण पर निर्णय (Construction of buildings): भवनों के आकार और प्रकार पर निर्णय में भारी निवेश शामिल होता है, जो व्यवसाय के लिए निश्चित संसाधन (fixed resource) बन जाता है।
- सिंचाई, संरक्षण और सुधार कार्यक्रमों के संबंध में निर्णय (Irrigation, conservation and reclamation): क्षारीयता, लवणता (salinity) और अन्य मिट्टी के दोषों (soil defects) के सुधार के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है, इसलिए ये कार्यक्रम अक्सर वर्षों तक फैले होते हैं।
2. परिचालन प्रबंधन निर्णय (Operational Management Decisions)
कृषि व्यवसाय के दिन-प्रतिदिन के कार्यों (day-to-day operations) को पूरा करने के लिए परिचालन प्रबंधन निर्णय लगातार लिए जाते हैं। इनमें शामिल निवेश अपेक्षाकृत छोटा होता है।
- क्या उत्पादन करें? (What to produce?): विभिन्न उद्यमों का सबसे अच्छा संयोजन (best combination) चुनकर रिटर्न को अधिकतम करना।
- कितना उत्पादन करें? (How much to produce?): इसके दो पहलू हैं: एंटरप्राइज मिक्स (Enterprise mix - फसल और पशुधन का संयोजन) और संसाधन उपयोग (Resource Use)।
- कैसे उत्पादन करें? (How to produce?): सबसे कम लागत (least cost) शामिल करने वाले सर्वोत्तम अभ्यास या तरीकों के संयोजन पर निर्णय।
- कब उत्पादन करें? (When to produce?): चूँकि कृषि उत्पादन मौसम-बद्ध (season-bound) होता है, इसलिए इसका समय उचित रूप से तय किया जाना चाहिए।
3. प्रशासनिक निर्णय (Administrative Decisions)
उत्पादन और संगठन निर्णय के साथ-साथ फार्म मैनेजर को यह देखना होता है कि काम सही तरीके से हो।
- कृषि व्यवसाय का वित्तपोषण (Financing the farm business): निधियों (funds) का उपयोग और निधियों का अधिग्रहण (acquisition) - उचित एजेंसी, समय, प्रकार और ऋण की शर्तें।
- कार्य का पर्यवेक्षण (Supervision of work): यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक कार्य योजना के अनुसार ईमानदारी से किया जाए।
- लेखांकन और बहीखाता (Accounting and book keeping): किसी भी समय खेत के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए आंकड़े का संग्रह, विश्लेषण और मूल्यांकन (evaluation)।
- सरकारी कार्यक्रमों और नीतियों में समायोजन (Adjustments to government programmes): किसान को सरकारी नीतियों के अनुरूप अधिकतम आर्थिक दक्षता (economic efficiency) के साथ उत्पादन के स्तर पर निर्णय लेना होता है।
4. विपणन निर्णय (Marketing Decisions)
एक फार्म मैनेजर को विभिन्न कृषि आदान (farm inputs) खरीदने होते हैं और उत्पादों (produces) को बेचना होता है।
- इनपुट खरीदते समय (While purchasing inputs): क्या खरीदें? कब खरीदें? किससे खरीदें? कैसे खरीदें? और कितना खरीदें?
- उत्पादों को बेचते समय (While selling produces): क्या बेचें? कब बेचें? किसे बेचें? कैसे बेचें? और कितना बेचें?
कृषि प्रबंधन और अन्य विज्ञानों के बीच संबंध (Relationship between Farm Management and Other Sciences)
कृषि प्रबंधन कृषि उत्पादन अर्थशास्त्र (agricultural production economics) का एक अभिन्न अंग है। कृषि प्रबंधन एक अंतर-कृषि विज्ञान (intra farm science) है जबकि कृषि उत्पादन अर्थशास्त्र एक अंतर-खेत या अंतर-क्षेत्र (inter region) विज्ञान है।
कृषि प्रबंधन मनोविज्ञान (psychology) और समाजशास्त्र (sociology) जैसे अन्य सामाजिक विज्ञानों से भी निकटता से संबंधित है। किसान की जोखिम और अनिश्चितता (uncertainty) सहन करने की क्षमता उसके मनोवैज्ञानिक (psychological) विशेषताओं से प्रभावित होती है। इसके अलावा, सांख्यिकी (Statistics) उन तरीकों और प्रक्रियाओं को प्रदान करने में मदद करती है जिनके द्वारा विशिष्ट कृषि समस्याओं के बारे में आंकड़े एकत्र, विश्लेषण और मूल्यांकन किया जा सकता है। यह कृषि विज्ञान की अन्य शाखाओं (एग्रोनॉमी, मृदा विज्ञान, पशुपालन आदि) पर भी निर्भर करता है।
व्यवसाय के रूप में खेती के लक्षण (Characteristics of Farming as Business)
खेती और अन्य उद्योगों (industries) के बीच प्रमुख अंतर हैं:
- कृषि उत्पादन जैविक (biological) प्रकृति का है।
- कृषि उत्पादन कृषि-जलवायु (agro-climatic) स्थितियों पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
- कृषि उत्पादन ज्यादातर छोटे आकार की जोत (small-sized holdings) में किया जाता है।
- कृषि उत्पादन में अक्सर और त्वरित (speedy) निर्णय लिए जाने होते हैं।
- कृषि मूल्य और उत्पादन आमतौर पर विपरीत दिशा (opposite direction) में चलते हैं।
- प्रथाओं और उत्पादों के मानकीकरण का अभाव (Lack of standardization)।
- धीमा टर्न-ओवर (Slow turn-over): निवेश की वसूली में लंबा समय लगता है।
- सूखे (drought), कीट (pest) और बीमारी के हमले आदि के कारण कृषि वित्तपोषण (Farm financing) अधिक जोखिम भरा (risky) है।
- कृषि वस्तुओं की नाशवान (Perishable) और भारी प्रकृति के कारण भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन समस्याएं होती हैं।
भारतीय परिस्थितियों में कृषि प्रबंधन की समस्याएं (Farm Management Problems under Indian Conditions)
- कृषि व्यवसाय का छोटा आकार (Small size): भारत में जोत का औसत आकार बहुत छोटा है।
- खेत एक घर के रूप में (Farm as a household): किसान पारंपरिक फसल संयोजन और खेती के तरीकों का पालन करते हैं। खेत किसानों की आजीविका (livelihood) का साधन बन गया है।
- अपर्याप्त पूंजी (Inadequate capital): नई तकनीक के लिए महंगे इनपुट की आवश्यकता होती है, लेकिन लगातार कर्ज (debt) और कम विपणन योग्य अधिशेष (marketable surplus) किसानों को रोकते हैं।
- अल्परोजगार (Under employment): खेत का छोटा आकार और उत्पादन की मौसमी प्रकृति के कारण।
- नवाचारों को अपनाने में धीमी गति (Slow adoption of innovations): छोटे किसान आमतौर पर रूढ़िवादी (conservative) होते हैं।
- प्रबंधकीय कौशल की कमी (Lack of managerial skill): छोटे किसानों में प्रबंधकीय कौशल की कमी के कारण नई तकनीकों को अपनाना मुश्किल होता है।
- बुनियादी सुविधाओं की कमी (Lack of infrastructural facilities): विपणन, परिवहन और संचार (communication) सुविधाएं अपर्याप्त हैं।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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