06. मांग की लोच (Elasticity of Demand) – कीमत, आय और क्रॉस लोच – अनुमान – बिंदु और चाप लोच (Point and arc elasticity) – गिफेन वस्तुएं – सामान्य और घटिया वस्तुएं – स्थानापन्न और पूरक वस्तुएं
मांग की लोच (ELASTICITY OF DEMAND)
मांग की लोच कीमत में होने वाले बदलावों के प्रति मांग की संवेदनशीलता (sensitiveness or responsiveness) को दर्शाती है। मांग की कीमत लोच (Price elasticity of demand) को आमतौर पर मांग की लोच कहा जाता है। इसके अलावा, मांग की आय लोच (income elasticity) और मांग की क्रॉस लोच (cross elasticity) भी होती है।
i) मांग की कीमत लोच
यह किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन (proportionate change in quantity demanded) और उसकी कीमत में दिए गए आनुपातिक परिवर्तन (proportionate change in price) का अनुपात है। मांग की कीमत लोच (EP) इस प्रकार दी गई है:
Ep = (मांगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन) / (कीमत में प्रतिशत परिवर्तन)
या: Ep = (ΔQ / ΔP) × (P / Q)
मान लीजिए कि एक उपभोक्ता 1 रुपये की कीमत पर 10 संतरे (oranges) मांगता है। यदि इसकी कीमत गिरकर 95 पैसे हो जाती है, तो वह 12 संतरे मांगता है। यहाँ कीमत 5 प्रतिशत गिरती है, और मांगी गई मात्रा 20 प्रतिशत बढ़ जाती है। लोच (elasticity) = 20 / -5 = -4। अतः संतरे की कीमत में एक प्रतिशत की कमी के कारण इसकी मांग में चार प्रतिशत की वृद्धि होती है।
a) मांग की लोच के प्रकार (Types of Elasticity of Demand):
मांग की कीमत लोच को निम्नलिखित पांच प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
- पूर्णतया लोचदार मांग (Perfectly elastic demand - Ep = ∞): यहाँ कीमत में मामूली वृद्धि वस्तु की मांगी गई मात्रा को शून्य तक गिरा देती है और वर्तमान कीमत पर लोग अनंत मात्रा की मांग करते हैं।
- पूर्णतया बेलोचदार मांग (Perfectly inelastic demand - Ep = 0): कीमत में पर्याप्त बदलाव भी मांगी गई मात्रा में कोई बदलाव नहीं करते हैं, यानी कीमत में किसी भी बदलाव के लिए मांग स्थिर रहती है।
- सापेक्ष लोचदार मांग (Relatively elastic demand - Ep > 1): कीमत में छोटे आनुपातिक परिवर्तन से मांगी गई मात्रा में बड़ा आनुपातिक परिवर्तन होता है।
- सापेक्ष बेलोचदार मांग (Relatively Inelastic demand - Ep < 1): कीमत में बड़े आनुपातिक परिवर्तन से मांगी गई मात्रा में छोटा आनुपातिक परिवर्तन होता है।
- इकाई लोचदार मांग (Unitary elastic demand - Ep = 1): कीमत में जितना आनुपातिक परिवर्तन होता है, मांगी गई मात्रा में भी उतना ही आनुपातिक परिवर्तन होता है।
b) मांग की लोच को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Influencing the Elasticity of Demand):
- आवश्यकता की डिग्री (Degree of necessity): आवश्यक वस्तुओं (necessities) की मांग विलासिता (luxuries) की तुलना में बेलोचदार (inelastic) होती है, क्योंकि आवश्यक वस्तुएं हर हाल में खरीदी जानी चाहिए (जैसे नमक)।
- उपभोक्ता की आय का अनुपात (Proportion of income spent): जिन वस्तुओं पर उपभोक्ता अपनी आय का एक छोटा हिस्सा खर्च करता है (जैसे माचिस), उनकी मांग कम लोचदार होती है।
- स्थानापन्न की उपलब्धता (Existence of substitutes): यदि किसी वस्तु के अच्छे स्थानापन्न (substitutes) मौजूद हैं, तो उसकी मांग अधिक लोचदार होगी।
- वस्तु के कई उपयोग (Several uses of the commodity): यदि किसी वस्तु के कई उपयोग हो सकते हैं (जैसे बिजली), तो उसकी मांग अधिक लोचदार होगी।
- समय (Time): सामान्यतः लंबी अवधि (longer period) के लिए मांग अधिक लोचदार होती है, क्योंकि लोगों को अनुकूलन (adjustments) करने का समय मिल जाता है।
c) मांग की लोच का मापन (Measurement of Elasticity of Demand):
मांग की कीमत लोच को तीन तरीकों से मापा जा सकता है:
1) कुल व्यय या परिव्यय विधि (Total Expenditure or Outlay Method):
इस विधि में यह देखा जाता है कि कीमत में बदलाव के कारण वस्तु पर कुल व्यय (total expenditure) बढ़ता है, घटता है या स्थिर रहता है।
- यदि कीमत घटने पर कुल व्यय बढ़ता है, तो मांग लोचदार (Elastic - Ep > 1) है।
- यदि कुल व्यय स्थिर रहता है, तो मांग इकाई लोचदार (Unitary - Ep = 1) है।
- यदि कुल व्यय घटता है, तो मांग बेलोचदार (Inelastic - Ep < 1) है।
चित्र 3.9: कुल व्यय या परिव्यय विधि
2) एक बिंदु पर लोच मापना (Measuring Elasticity at a Point):
जब कीमत और मांगी गई मात्रा में परिवर्तन बहुत छोटा होता है, तो मांग वक्र के किसी एक बिंदु (point) पर लोच मापी जाती है। बिंदु विधि (Point Method) में:
बिंदु पर लोच = (निचला क्षेत्र / ऊपरी क्षेत्र) (Lower sector / Upper sector)
चित्र 3.10 (a)
चित्र 3.10 (b)
3) चाप विधि (Arc Method):
जब कीमत और मात्रा में बड़े बदलाव होते हैं, तो प्रारंभिक या अंतिम कीमतों को लेने से अलग-अलग लोच आती है। इसलिए चाप लोच (arc elasticity) का उपयोग किया जाता है जहाँ प्रारंभिक और अंतिम कीमतों तथा मात्राओं का औसत (average) लिया जाता है।
चित्र 3.11: चाप विधि
d) मांग की लोच के उपयोग (Uses of Elasticity of Demand):
- व्यापारिक फर्में वस्तुओं के मूल्य निर्धारण (pricing) के संबंध में निर्णय लेते समय मांग की लोच को ध्यान में रखती हैं।
- कृषि उत्पादों की कीमतों के नियमन से संबंधित आर्थिक नीति (economic policy) में सरकार द्वारा इसका उपयोग किया जाता है।
ii) मांग की आय लोच (Income Elasticity of Demand)
इसे उपभोक्ता की आय में दिए गए आनुपातिक परिवर्तन (proportionate change) के प्रति किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
Ei = (मांगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन) / (आय में प्रतिशत परिवर्तन)
या: Ei = (ΔQ / ΔY) × (Y / Q)
a) आय लोच के प्रकार (Types of Income Elasticity of Demand):
- शून्य आय लोच (Zero income elasticity - Ei = 0): आय बढ़ने पर वस्तु की मांग में कोई वृद्धि नहीं होती है।
- नकारात्मक आय लोच (Negative income elasticity - Ei < 0): आय बढ़ने पर वस्तु की मांग में वास्तव में गिरावट आती है। ऐसा घटिया वस्तुओं (inferior goods) के मामले में होता है।
- इकाई आय लोच (Unitary income elasticity - Ei = 1): आय में वृद्धि के अनुपात में ही वस्तु की मांग में वृद्धि होती है।
चित्र 3.12 (a, b, c)
- इकाई से अधिक आय लोच (Income elasticity greater than unity - Ei > 1): आय में वृद्धि के अनुपात से अधिक वस्तु की मांग में वृद्धि होती है (विलासिता की वस्तुओं के मामले में)।
- इकाई से कम आय लोच (Income elasticity less than unity - Ei < 1): आय में वृद्धि के अनुपात से कम वस्तु की मांग में वृद्धि होती है (आवश्यक वस्तुओं के मामले में)।
चित्र 3.12 (d, e)
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अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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