07. पारिवारिक व्यय पर एंगेल का नियम और महत्व - उपभोक्ता की बचत (Consumer's Surplus) – अनुमान और अनुप्रयोग (Applications)

पारिवारिक व्यय पर एंगेल का नियम (Engel’s Law on Family Expenditure)

हर परिवार को जीवन की आवश्यक वस्तुओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कपड़े, मकान का किराया, प्रकाश और ईंधन, मनोरंजन (recreation) आदि पर पैसा खर्च करना पड़ता है। परिवार द्वारा इन मदों (items) पर किए गए व्यय (expenditure) वाली सूची को 'पारिवारिक बजट (Family Budget)' कहा जाता है। अर्नेस्ट एंगेल (Earnest Engel - 1857) ने पारिवारिक बजट पर एक जांच (investigation) की। इसके लिए उन्होंने गरीब, मध्यम और अमीर तीन समूहों का अध्ययन किया। अपने अध्ययन से, उन्होंने निम्नलिखित निष्कर्ष (conclusions) निकाले, जिन्हें 'पारिवारिक व्यय पर एंगेल का नियम (Engel’s Law on Family Expenditure)' कहा जाता है:

  1. जैसे-जैसे परिवार की आय बढ़ती है, भोजन पर खर्च होने वाली आय का प्रतिशत (percentage) घटता है, हालांकि वास्तविक राशि बढ़ जाती है।
  2. कपड़े, मकान का किराया, प्रकाश और ईंधन पर प्रतिशत व्यय (percentage expenditure) किसी भी आय स्तर के लिए समान रहता है।
  3. परिवार की आय में प्रत्येक वृद्धि के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन पर प्रतिशत व्यय बढ़ता है।

i) एंगेल के नियम के निहितार्थ (Implications of Engel’s law):

तालिका 3.3: विभिन्न आकार के परिवारों में उपभोग पैटर्न (प्रति माह रुपये में)
विवरणछोटा (Small)मध्यम (Middle)बड़ा (Large)
राशि (Amount)प्रतिशत (%)राशिप्रतिशत (%)राशिप्रतिशत (%)
भोजन79266139258180050
कपड़े और घर का किराया (Clothing & House rent)120102401036010
ईंधन और प्रकाश (Fuel and lighting)96819282888
शिक्षा (Education)1217231805
चिकित्सा (Medical)36312052527
मनोरंजन1214821444
सामाजिक और धार्मिक कार्य3639641805
सेवाएं3639641805
अन्य (Others)60514462166
कुल120010024001003600100

ii) पारिवारिक बजट का महत्व (Importance of Family Budget):

  1. पारिवारिक बजट का अध्ययन हमें विभिन्न देशों में लोगों के उपभोग पैटर्न (consumption pattern) का पता लगाने में मदद करता है।
  2. हम लोगों के जीवन यापन की लागत (cost of living) के रुझान को समझने में सक्षम होते हैं।
  3. सरकार देश में लोगों के जीवन स्तर (standard of living) को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वस्तुओं की कीमतों, सब्सिडी (subsidies) और करों पर अपनी नीतियां बना सकती है।

मांग की क्रॉस लोच (Cross Elasticity of Demand)

मांग की क्रॉस लोच को वस्तु X की मांगी गई मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन (proportionate change) और संबंधित वस्तु Y की कीमत में दिए गए आनुपातिक परिवर्तन के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

Ec = (वस्तु X की मांगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन) / (वस्तु Y की कीमत में प्रतिशत परिवर्तन)

या: Ec = (ΔQx / ΔPy) × (Py / Qx)

उदाहरण के लिए, यदि कॉफी की कीमत 4.50 रुपये से बढ़कर 5 रुपये हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप, चाय की मांग 60 से बढ़कर 70 हो जाती है, तो चाय के लिए मांग की क्रॉस लोच (cross elasticity) 1.5 होगी। इसका मतलब है कि यदि स्थानापन्न (substitute) वस्तु (कॉफी) की कीमत 1% बढ़ती है, तो चाय की मांग 1.5% बढ़ जाती है। दो स्थानापन्न वस्तुओं (substitute goods) के बीच मांग की क्रॉस लोच सकारात्मक (positive) होती है।

दूसरी ओर, जब दो वस्तुएं एक-दूसरे की पूरक होती हैं (जैसे ब्रेड और मक्खन), तो एक वस्तु की कीमत में वृद्धि से दूसरी वस्तु की मांग में कमी आती है। इसलिए दो पूरक वस्तुओं के बीच मांग की क्रॉस लोच नकारात्मक (negative) होती है।

उपभोक्ता की बचत (CONSUMER’S SURPLUS)

सरकार द्वारा कराधान (taxation) और एकाधिकार विक्रेता (monopolist seller) द्वारा अपनाई गई मूल्य नीति जैसी आर्थिक नीतियों में उपभोक्ता की बचत (consumer's surplus) की अवधारणा महत्वपूर्ण है। उपभोक्ता की बचत का मूल अर्थ यह है कि उपभोक्ता अपनी दैनिक खरीदारी से उस कीमत की तुलना में अतिरिक्त (या अधिशेष) संतुष्टि (extra satisfaction) प्राप्त करता है जो वह वास्तव में उनके लिए चुकाता है। मार्शल (Marshall) द्वारा किसी वस्तु को खरीदने से उपभोक्ता को मिलने वाली इस अतिरिक्त संतुष्टि को उपभोक्ता की बचत (consumer's surplus) कहा गया है।

मार्शल ने इसे इस प्रकार परिभाषित किया है: "वह अतिरिक्त कीमत जो एक उपभोक्ता किसी वस्तु के बिना रहने के बजाय भुगतान करने को तैयार होता है, उस कीमत से जो वह वास्तव में भुगतान करता है, अधिशेष संतुष्टि (surplus satisfaction) का आर्थिक माप है।"

उपभोक्ता की बचत = (जो उपभोक्ता भुगतान करने के लिए तैयार है) - (जो वह वास्तव में भुगतान करता है)

या: उपभोक्ता की बचत = (कुल उपयोगिता) - (कीमत × खरीदी गई इकाइयों की संख्या)

a) उपभोक्ता की बचत का मापन (Measurement of Consumer’s Surplus):

यह अवधारणा घटती सीमांत उपयोगिता के नियम (law of diminishing marginal utility) से ली गई है। उपभोक्ता उस वस्तु की इकाइयों को खरीदकर संतुलन (equilibrium) में आता है जहाँ सीमांत उपयोगिता कीमत के बराबर होती है। लेकिन जो इकाइयां उसने पहले खरीदी थीं, उनके लिए उसे मिली सीमांत उपयोगिता वास्तव में चुकाई गई कीमत से अधिक थी।

तालिका 3.4: उपभोक्ता की बचत
इकाइयां (Units)कुल उपयोगिता (Total Utility)सीमांत उपयोगिता (Marginal Utility)कीमतउपभोक्ता की बचत
120201020-10 = 10
238181018-10 = 8
354161016-10 = 6
468141014-10 = 4
580121012-10 = 2
690101010-10 = 0
798810-
कुल बचत (Total Surplus):30

चित्र 3.13 में, उपभोक्ता को मिलने वाली कुल उपयोगिता ODSM है। लेकिन कीमत OP के अनुसार, वह वास्तव में OPSM का भुगतान करता है। अतः उपभोक्ता को (ODSM - OPSM) = DPS के बराबर अतिरिक्त संतुष्टि (बचत) मिलती है, जिसे छायांकित (shaded) किया गया है।

Consumer's Surplus
चित्र 3.13: उपभोक्ता की बचत (Consumer's Surplus)

b) उपभोक्ता की बचत का महत्व (Importance of Consumer’s Surplus):

  1. उपयोग-मूल्य (value-in-use) और विनिमय-मूल्य (value-in-exchange) के बीच अंतर: नमक जैसी वस्तु की उपयोगिता बहुत अधिक है लेकिन इसका विनिमय मूल्य बहुत कम है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता की बचत बहुत अधिक होगी। हीरे जैसी वस्तु की उपयोगिता सीमित है लेकिन विनिमय मूल्य बहुत अधिक है, यहाँ उपभोक्ता की बचत कम होगी।
  2. मूल्य निर्धारण में एकाधिकारवादी (monopolist) के लिए सहायक: एकाधिकारवादी अपनी वस्तु की कीमत इस तरह तय करता है कि वह उपभोक्ता की बचत का कम से कम एक हिस्सा प्राप्त कर सके। हालांकि, वह पूरा हिस्सा नहीं ले सकता क्योंकि उपभोक्ताओं का विरोध हो सकता है।
  3. नीति निर्माताओं (policy makers) के लिए सहायक: यदि किसी वस्तु के लिए उपभोक्ता की बचत बहुत अधिक है तो नीति निर्माता कर लगा सकते हैं। इसी तरह, यदि उपभोक्ता की बचत कम है, तो सब्सिडी (subsidy) दी जा सकती है।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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