अध्याय 38 (Lec. 5): कृषि प्रणालियां और उप-प्रणालियां (Agrisilvicultural systems)
कृषि प्रणाली (Agrisilvicultural system) में कृषि फसलों (agricultural crops) और वृक्ष फसलों (tree crops) के समवर्ती (concurrent) उत्पादन के लिए भूमि का सचेत और जानबूझकर उपयोग शामिल है। घटकों के आधार पर इसे विभिन्न रूपों में बांटा गया है:
i) झूम खेती में उन्नत परती प्रजातियां (Improved fallow species in shifting cultivation):
- परती (Fallows): वह फसल भूमि है जिसे एक मौसम या कई वर्षों तक बिना फसल के छोड़ दिया जाता है। इसका उद्देश्य घटे हुए पोषक तत्वों (depleted soil nutrients) को वापस पाना है।
- झूम खेती (Shifting cultivation): इसमें भूमि को साफ करके 1-3 साल के लिए फसल उगाई जाती है, फिर उसे आराम करने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में 'झूम' और आंध्र प्रदेश/उड़ीसा में 'पोडू (podu)' कहा जाता है। यह जंगल के लिए बहुत विनाशकारी है।
- उन्नत परती प्रणाली: इसमें पेड़ों और फसलों को एक ही समय में एक ही भूखंड पर नहीं उगाया जाता है। इसके लिए वे पेड़ सर्वोत्तम हैं जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) करते हैं और उनके उत्पाद बेचे जा सकते हैं।
- स्थापना: इसे सीधी बुवाई, झाड़ियों की चयनात्मक कटाई और लंबे पौधों के रोपण (planting) द्वारा स्थापित किया जा सकता है।
ii) तौंग्या प्रणाली (The Taungya system):
- उत्पत्ति: तौंग्या (तौंग = पहाड़ी, या = खेती) 1850 के दशक में बर्मा (Burma) में गढ़ा गया शब्द है। भारत में इसे 1890 में ब्रैंडिस द्वारा लाया गया था। दक्षिण भारत में इसे 'कुमेरी (kumri)' कहा जाता है।
- परिभाषा: यह झूम खेती का एक संशोधित रूप है जिसमें मजदूरों को जंगल के पेड़ों के साथ-साथ फसल उगाने की अनुमति दी जाती है। 1-3 साल बाद जब छाया घनी हो जाती है, तो वे दूसरी जगह चले जाते हैं।
- तौंग्या के प्रकार:
- विभागीय तौंग्या (Departmental Taungya): वन विभाग द्वारा दैनिक मजदूरी पर मजदूरों को लगाकर फसलें उगाई जाती हैं।
- पट्टे पर तौंग्या (Leased Taungya): भूमि उन लोगों को पट्टे (lease) पर दी जाती है जो सबसे अधिक पैसे देते हैं।
- ग्राम तौंग्या (Village Taungya): यह सबसे सफल प्रणाली है, जिसमें जंगल के अंदर बसे गांव के लोग 3-4 साल तक फसल उगाते हैं (0.8 से 1.7 हेक्टेयर भूमि प्रति परिवार)।
- तौंग्या प्रणाली के लाभ: जंगल का कृत्रिम पुनर्जनन (artificial regeneration) सस्ता होता है, बेरोजगारी दूर होती है, साइट का अधिकतम उपयोग होता है और यह वन विभाग के लिए अत्यधिक लाभकारी है।
- हानियां: मिट्टी की उर्वरता (soil fertility) कम होना, कटाव (erosion) का खतरा और यह मानव श्रम का शोषण है।
- किसानों को रियायतें (Concessions): जानवरों के लिए मुफ्त चराई, घर और कृषि उपकरणों के लिए मुफ्त लकड़ी, बच्चों के लिए स्कूल, कम ब्याज पर ऋण (loan), कुएं और तालाबों से पानी की आपूर्ति।
iii) बहु-प्रजाति वृक्ष उद्यान (Multispecies Tree Gardens):
इसमें विभिन्न प्रकार के पेड़ों की प्रजातियों को मिश्रित (mixed) रूप में उगाया जाता है। इसका मुख्य कार्य घरेलू खपत और बिक्री के लिए भोजन, चारा और लकड़ी का उत्पादन है। (उदा: बबूल, सुपारी, नारियल, आम, कटहल)।
iv) गली फसल या एले क्रॉपिंग (Alley Cropping / Hedgerow Intercropping):
- एले क्रॉपिंग में लकड़ी के पौधों (woody plants) को पंक्तियों में करीब-करीब (hedges) लगाया जाता है, और उनके बीच की गलियों (alleys) में वार्षिक फसलें उगाई जाती हैं।
- पौधों की नियमित रूप से कटाई (pruning) की जाती है और उनकी पत्तियों व टहनियों का उपयोग मल्च (mulch) के रूप में किया जाता है, ताकि मिट्टी की नमी बचे, खरपतवार कम हो और पोषक तत्व मिलें। इसके लिए नाइट्रोजन फिक्सिंग पौधे मुख्य रूप से उपयोग किए जाते हैं।
- डिजाइन: हेजेज (Hedgerows) को पूर्व-पश्चिम दिशा (East-West direction) में लगाया जाना चाहिए ताकि धूप मिल सके। पंक्तियों के बीच की दूरी 4 से 8 मीटर और पेड़ों के बीच 25 सेमी से 2 मीटर होनी चाहिए।
- उपयुक्त प्रजातियां: इनका मुकुट (crown) छोटा होना चाहिए जो कटाई के बाद तेजी से बढ़े। गहरी मूसला जड़ (deep taproot) प्रणाली होनी चाहिए ताकि यह फसलों से प्रतिस्पर्धा न करे। (उदा: ल्यूकेना ल्यूकोसेफला, ग्लिरिसिडिया)।
v) खेतों पर बहुउद्देशीय वृक्ष और झाड़ियां (Multipurpose Trees and Shrubs on Farmlands):
इसमें बहुउद्देशीय वृक्षों को मेड़ों, छतों या खेत की सीमाओं (boundaries) पर बेतरतीब ढंग से या व्यवस्थित रूप से लगाया जाता है। इसका मुख्य काम पेड़ उत्पादों का उत्पादन करना, बाड़ लगाना (fencing) और सीमांकन (demarcation) करना है। (उदा: नीम, कैसुरीना, नारियल, बबूल)।
vi) वृक्षारोपण फसलों के साथ फसल संयोजन (Crop Combinations with Plantation Crops):
कॉफी, चाय, नारियल, और कोको जैसी बारहमासी (perennial) वृक्ष फसलों को इंटरक्रॉपिंग में शामिल किया जाता है। इसमें मिश्रित बागान, वैकल्पिक व्यवस्था, छाया वृक्ष (shade trees) और कृषि फसलें शामिल हैं।
vii) कृषि वानिकी ईंधन लकड़ी उत्पादन (Agroforestry Fuel wood Production):
इसमें बहुउद्देशीय जलाऊ लकड़ी (firewood) की प्रजातियों को कृषि भूमि पर या उसके आसपास लगाया जाता है (उदा: बबूल, शीशम, नीलगिरी)। इसका उत्पादक कार्य ईंधन लकड़ी देना है और सुरक्षात्मक कार्य बाड़ लगाना तथा शेल्टर-बेल्ट (shelterbelts) का निर्माण करना है।
🔄 Updated Version 2.0
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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