अध्याय 39 (Lec. 6): कृषि प्रणालियों की कुछ उप-प्रणालियां

viii) शेल्टर-बेल्ट (Shelter-belt):

ये पेड़ों की कई पंक्तियों से बने बेल्ट या ब्लॉक होते हैं जिन्हें मुख्य रूप से चलने वाली हवा (prevailing wind) के समकोण (right angles) पर स्थापित किया जाता है।

उद्देश्य: हवा की धाराओं को मोड़ना, प्रचलित हवाओं के वेग (velocity) को कम करना, हवा के कटाव (wind erosion) और गर्म हवाओं से लीवार्ड (leeward - हवा के विपरीत दिशा) क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करना, तथा भोजन, चारा, और लकड़ी प्रदान करना।

शेल्टर-बेल्ट की मुख्य विशेषताएं:

ix) विंड-ब्रेक या हवा रक्षक (Wind-break):

विंड-ब्रेक पेड़ों और/या झाड़ियों की पट्टियां (strips) हैं जिन्हें खेतों, घरों और नहरों को तेज हवा, उड़ती हुई मिट्टी या रेत से बचाने के लिए लगाया जाता है।

लगाने के कारण: पशुओं को ठंडी हवाओं से बचाना, फसलों को गर्म व सूखने वाली हवाओं से बचाना, मिट्टी के कटाव को रोकना, खेतों से पानी के वाष्पीकरण (evaporation) को कम करना और बाड़ लगाना (fencing)।

विंड-ब्रेक की विशेषताएं:

x) मृदा संरक्षण हेजेज (Soil Conservation Hedges):

इसमें पेड़ों को भौतिक मिट्टी संरक्षण कार्यों (जैसे- घास की पट्टियों, मेड़ों, छतों या टेरेस) पर लगाया जाता है। पेड़ों की मूसला जड़ प्रणाली (root system) मिट्टी की संरचना को स्थिर (stabilise) करती है। पहाड़ी ढलानों पर छतों (terraces) पर पेड़ों को सघन (densely) रूप से लगाया जाता है। इनका मुख्य काम मिट्टी का संरक्षण करना और फल, चारा, तथा ईंधन लकड़ी प्रदान करना है।

उपयुक्त प्रजातियां: ग्रेविलिया रोबस्टा (Grevillea robusta), बबूल (Acacia catechu), पाइनस रॉक्सबर्घी, ल्यूकेना ल्यूकोसेफला आदि।

अस्वीकरण (Disclaimer):
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