सिल्वोपास्टोरल प्रणाली (Silvipasture System): चारागाह (pasture) के साथ-साथ लकड़ी वाले पौधों (woody plants) के उत्पादन को सिल्वोपास्टोरल प्रणाली कहा जाता है। इसमें पेड़ों और झाड़ियों का उपयोग मुख्य रूप से पशुओं के लिए चारा (fodder) पैदा करने के लिए किया जाता है, या उन्हें लकड़ी, ईंधन, फल उगाने या मिट्टी में सुधार करने के लिए भी लगाया जा सकता है।
इस प्रणाली को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत (classified) किया गया है:
इस सिल्वोपास्टोरल प्रणाली में, सर्दियों में चारे की कमी के दौरान पशुओं की फ़ीड आवश्यकता को पूरा करने के लिए विभिन्न बहुउद्देशीय वृक्षों (प्रोटीन युक्त पेड़ - protein rich trees) को कृषि भूमि और चारागाहों (range lands) पर या उनके आसपास लगाया जाता है। यहां से चारे को काटकर जानवरों तक ले जाया (cut and carry) जाता है।
उदाहरण (Example): बबूल (Acacia nilotica), सिरिस (Albizia lebbeck), नीम (Azadirachta indica), सुबबूल (Leucaena leucocephala), ग्लिरिसिडिया सेपियम (Gliricidia sepium), सेस्बानिया ग्रैंडिफ्लोरा (Sesbania grandiflora)।
इस प्रणाली में, अपनी संपत्ति (खेतों) को आवारा जानवरों (stray animals) या अन्य जैविक प्रभावों (biotic influences) से बचाने के लिए विभिन्न चारे वाले पेड़ों और हेजेज को जीवित बाड़ (live fence) के रूप में लगाया जाता है। ये बाड़ सुरक्षा के साथ-साथ चारा भी प्रदान करते हैं।
उदाहरण (Example): ग्लिरिसिडिया सेपियम (Gliricidia sepium), सेस्बानिया ग्रैंडिफ्लोरा (Sesbania grandiflora), एरिथ्रिना प्रजाति (Erythrina sp), बबूल प्रजाति (Acacia sp)।
इस प्रणाली में, चारे के उत्पादन (forage production) को बढ़ाने के लिए विभिन्न पेड़ों और झाड़ियों की प्रजातियों को या तो अनियमित (irregularly) रूप से बिखेरा जाता है या किसी व्यवस्थित पैटर्न (systemic pattern) के अनुसार लगाया जाता है। इससे खुले चारागाहों में पशुओं को छाँव और अतिरिक्त चारा मिलता है।
उदाहरण (Example): बबूल (Acacia nilotica), रेंजा (Acacia leucophloea), इमली (Tamarindus indica), नीम (Azadirachta indica)।
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