अध्याय 41 (Lec. 8): एग्रोसिल्वोपास्टोरल और अन्य प्रणालियां
एग्रोसिल्वोपास्टोरल प्रणाली (Agrisilvopastural System): वार्षिक फसलों (annuals) और चारागाहों (pastures) के साथ बारहमासी वृक्षीय (woody perennial) वाले पेड़ों के उत्पादन को एग्रोसिल्वोपास्टोरल प्रणाली कहा जाता है। इसे मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
i) होम गार्डन या गृह वाटिका (Home gardens):
- यह प्रणाली दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पाई जाती है। भारत में यह केरल और तमिलनाडु की नम जलवायु में होती है, जहाँ नारियल मुख्य फसल है।
- इसमें पेड़, झाड़ियां, सब्जियां और अन्य जड़ी-बूटियों को बहुत सघन रूप से (dense) लगाया जाता है।
- अधिकांश होम गार्डन में विभिन्न जानवरों (animals) को भी पाला जाता है। मवेशियों की चारे की आवश्यकता को पूरा करने के लिए चारा घास और फलियां (legumes) उगाई जाती हैं। भारत में, हर घर के पास व्यक्तिगत उत्पादन के लिए लगभग 0.20 से 0.50 हेक्टेयर जमीन होती है।
- प्रबंधन: होम गार्डन घर के आंगन / परिसर (compounds) के भीतर बहुउद्देशीय वृक्षों, फसलों और पशुओं का एक सुनियोजित प्रबंधन है। पूरी प्रणाली पारिवारिक श्रम (family labour) द्वारा प्रबंधित की जाती है।
- इसे मल्टीटियर सिस्टम (Multitier system) या मल्टीटियर क्रॉपिंग भी कहा जाता है। ये अत्यधिक उत्पादक और टिकाऊ होते हैं, और भोजन उत्पादन इनका प्राथमिक कार्य है।
होम गार्डन की संरचना (Structure of Home Gardens):
होम गार्डन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उच्च प्रजाति विविधता (high species diversity) और 3-4 ऊर्ध्वाधर स्तर (vertical layers) हैं:
- निचली परत (Lower layer): 1.0 मीटर से कम ऊंचाई पर सब्जियां, और 1.0-3.0 मीटर की ऊंचाई पर केला, पपीता आदि उगाई जाती हैं।
- मध्यवर्ती परत (Intermediate layer): 5-10 मीटर की ऊंचाई पर विभिन्न फलदार वृक्ष होते हैं।
- ऊपरी परत (Upper layer): 25 मीटर तक की ऊंचाई वाले बड़े फल और इमारती लकड़ी (timber) वाले पेड़ सबसे ऊपर होते हैं।
प्रजातियों का चुनाव (Choice of species):
- वृक्षीय प्रजातियां (Woody species): काजू, कटहल, नींबू, अमरूद, आम, नीम, नारियल आदि।
- शाकीय प्रजातियां (Herbaceous species): भिंडी, प्याज, गोभी, कद्दू, शकरकंद, केला, बीन्स आदि।
ii) वृक्षीय बाड़ (Woody Hedgerows):
इस प्रणाली में विभिन्न वृक्षीय बाड़, विशेष रूप से तेजी से बढ़ने वाली और चारे वाली झाड़ियों/पेड़ों को चारे (browse), मल्च (mulch), हरी खाद (green manure) और मिट्टी संरक्षण (soil conservation) के लिए लगाया जाता है।
प्रजातियां: एरिथ्रिना प्रजाति, सुबबूल (Leucaena leucocephala), सेस्बानिया (Sesbania grandiflora)।
अन्य प्रणालियां (OTHER SYSTEMS):
- पेड़ों के साथ मधुमक्खी पालन (Apiculture with trees): इस प्रणाली में कृषि खेत की सीमाओं (boundaries) पर विभिन्न शहद/नेक्टर (nectar) उत्पादक पेड़ लगाए जाते हैं, जहां मधुमक्खियां अक्सर आती हैं।
- एक्वावानिकी (Aquaforestry): इस प्रणाली में मछली के तालाबों की सीमा (boundary) के आसपास विभिन्न पेड़ों और झाड़ियों को लगाया जाता है। पेड़ों की पत्तियों का उपयोग मछलियों के चारे (forage) के रूप में किया जाता है। इसका मुख्य काम मछली का उत्पादन बढ़ाना और तालाब के किनारों (bunds) को स्थिर (stabilize) करना है।
- मिश्रित वृक्ष खंड (Mixed wood lots): इस प्रणाली में बहुउद्देशीय वृक्षों (MPTs) को लकड़ी, चारा, मिट्टी संरक्षण, मृदा पुनर्स्थापन (soil reclamation) आदि के लिए अलग से या मिश्रित रूप से उगाया जाता है।
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अंतिम अद्यतन (Last Updated): 28 अगस्त 2026
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