खरपतवार (Weeds) – हानिकारक और लाभदायक प्रभाव
खरपतवार वे पौधे हैं जो किसी दी गई स्थिति में अवांछित (unwanted) होते हैं और हानिकारक, खतरनाक या आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकते हैं। खरपतवार प्राथमिक उत्पादन (primary production) और जैव विविधता (biodiversity) के लिए एक गंभीर खतरा हैं। वे खेत और जंगल की उत्पादकता को कम करते हैं, देशी प्रजातियों (native species) को विस्थापित करते हैं और भूमि तथा जल के क्षरण (degradation) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। प्राकृतिक पर्यावरण (natural environment) को खरपतवारों से होने वाला नुकसान भी अधिक है, जहां जैव विविधता में गिरावट का कारण बनने में आवास के नुकसान (habitat loss) के बाद खरपतवार के आक्रमण (weed invasion) को दूसरा स्थान दिया गया है।
पर्याप्त सरकारी और निजी क्षेत्र के निवेश के बावजूद, खरपतवार का आक्रमण अभी भी भूमि और पानी की उत्पादक क्षमता (productive capacity) और हमारे प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र (natural ecosystems) की अखंडता के लिए एक बड़ा खतरा है। एक कुशल खरपतवार नियंत्रण कार्यक्रम (weed control program) केवल खरपतवार की ठीक से पहचान होने के बाद ही विकसित किया जा सकता है। खरपतवारों का प्रबंधन कई अलग-अलग तरीकों का उपयोग करके किया जा सकता है। खरपतवारों का सबसे प्रभावी प्रबंधन आमतौर पर समुदाय, भूमि मालिकों, कृषि, उद्योग और सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच सहयोग (collaboration) और साझेदारी के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, जिसमें गहन अनुवर्ती अभियान (follow-up campaign) के साथ-साथ विभिन्न तरीकों के संयोजन का उपयोग किया जाता है।
खरपतवार प्रबंधन (Weed management) पौध संरक्षण (plant protection) का एक महत्वपूर्ण घटक है जो फसलों की उत्पादन क्षमता (production potential) में सुधार करता है। इसमें खरपतवारों का इस तरह से प्रबंधन शामिल है कि फसल खरपतवारों से नुकसान सहे बिना अपनी उत्पादन क्षमता को बनाए रखती है। खरपतवार प्रबंधन यांत्रिक (mechanical), सांस्कृतिक (cultural) और रासायनिक (chemical) माध्यमों से किया जाता है। खेत की फसलों में जैविक नियंत्रण (biological control) विधियों के उपयोग पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी भी इसका बहुत अधिक उपयोग नहीं हो रहा है। शाकनाशियों (herbicides) का उपयोग खरपतवार-प्रबंधन प्रौद्योगिकी की आधुनिक अवधारणा में एक महत्वपूर्ण तरीका है। खरपतवार-प्रबंधन कार्यक्रम में सहायता के लिए नए हाथ-उपकरण (hand-tools) और उपकरण भी डिजाइन किए गए हैं।
खरपतवारों की विशेषताएँ (Characteristics of weeds)
खरपतवार भी अन्य पौधों की तरह होते हैं लेकिन इनमें विशेष विशेषताएं होती हैं जो उन्हें अवांछित पौधों की श्रेणी में रखती हैं।
- अधिकांश खरपतवार विशेष रूप से वार्षिक (annuals) बीज की भारी मात्रा का उत्पादन करते हैं, उदाहरण के लिए जंगली जई (wild oats - Avena fatua), प्रति पौधा 250 बीज पैदा करता है, जबकि जंगली चौलाई (wild amaranth - Amaranthus viridis) लगभग 1.1 करोड़ (11 million) बीज पैदा करता है। यह देखा गया है कि 61 बहुवर्षीय (perennial) खरपतवारों में, औसत बीज-उत्पादन क्षमता 26,500 प्रति पौधा थी।
- खरपतवारों में खेत में प्रतिकूल परिस्थितियों (adverse conditions) का सामना करने की क्षमता होती है, क्योंकि वे नमी और तापमान की उपलब्धता के अनुसार अपने बीज उत्पादन और विकास को संशोधित कर सकते हैं। वे प्रतिकूल मिट्टी-नमी स्थितियों के तहत अंकुरित (germinate) हो सकते हैं, उनके पौधे के विकास की अवधि छोटी होती है, वे आमतौर पर तेज गति से बढ़ते हैं और साथ में बढ़ने वाली अधिकांश फसलों की तुलना में पहले बीज का उत्पादन करते हैं।
- खरपतवार के बीज अपनी व्यवहार्यता (viability) खोए बिना लंबी अवधि तक व्यवहार्य रहते हैं, उदाहरण के लिए वार्षिक घास (annual meadow grass - Poa annua) और स्कार्लेट पिंपरनेल (scarlet pimpernel - Anagallis arvensis) लगभग 8 वर्षों तक व्यवहार्य रहते हैं; रेंगने वाला गोखरू (creeping thistle - Cirsium arvense) 20 वर्षों के लिए और फील्ड बाइंड वीड (field bind weed - Convolvulus arvensis) लगभग 50 वर्षों के लिए।
- खरपतवार के बीजों में हवा, पानी और मनुष्यों सहित जानवरों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलने (disperse) की जबरदस्त क्षमता होती है। कई बार, खरपतवार के बीज अपने आकार के कारण फसल के बीजों के साथ मिल (mimic) जाते हैं और उनके साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच जाते हैं।
हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)
- खरपतवारों का कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह अनुमान लगाया गया है कि आम तौर पर खरपतवार अधिकांश विकसित देशों (developed countries) में कृषि उत्पादन में 5% का नुकसान, कम विकसित देशों में 10% का नुकसान और सबसे कम विकसित देशों में 25% का नुकसान करते हैं।
भारत में, खरपतवारों के कारण उपज का नुकसान कीटों और बीमारियों (pest and diseases) से होने वाले नुकसान से अधिक है। खरपतवारों के कारण उपज का नुकसान फसलों के साथ भिन्न होता है। हर फसल को खरपतवारों से कड़ी प्रतिस्पर्धा (competition) का सामना करना पड़ता है। इनमें से अधिकांश खरपतवार स्वयं-बोए (self-sown) गए होते हैं और वे फसल के विकास के शुरुआती चरणों में अपनी तेज वृद्धि दर के कारण प्रतिस्पर्धा प्रदान करते हैं। कुछ फसलों में, खरपतवार के संक्रमण (infestation) के कारण उपज 50% से अधिक कम हो जाती है। कुछ महत्वपूर्ण फसलों में खरपतवारों से होने वाले ये नुकसान निम्नलिखित तालिका (table) में दिए गए हैं।
खरपतवारों के कारण फसल की उपज में कमी (Loss in crop yields due to weeds)
| फसल (Crop) |
खरपतवारों के कारण उपज में कमी (%) (Reduction in yields due to weeds %) |
फसल (Crop) |
खरपतवारों के कारण उपज में कमी (%) (Reduction in yield due to weeds %) |
| चावल (Rice) |
41.6 |
मूंगफली (Groundnut) |
33.8 |
| गेहूँ (Wheat) |
16.0 |
गन्ना (Sugarcane) |
34.2 |
| मक्का (Maize) |
39.8 |
चुकंदर (Sugar beet) |
70.3 |
| बाजरा/मोटे अनाज (Millets) |
29.5 |
गाजर (Carrot) |
47.5 |
| सोयाबीन (Soybean) |
30.5 |
कपास (Cotton) |
72.5 |
| चना (Gram) |
11.6 |
प्याज (Onion) |
68.0 |
| मटर (Pea) |
32.9 |
आलू (Potato) |
20.1 |
- खरपतवार पानी, मिट्टी, पोषक तत्वों (nutrients), प्रकाश और स्थान के लिए फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, और इस प्रकार फसल की उपज को कम करते हैं। एक अनुमान से पता चलता है कि खरपतवार फसलों को उनके पोषक तत्वों के उठाव (nutrient uptake) का 47% नाइट्रोजन (N), 42% फास्फोरस (P), 50% पोटेशियम (K), 39% कैल्शियम (Ca) और 24% मैग्नीशियम (Mg) से वंचित कर सकते हैं।
- खरपतवार वैकल्पिक मेजबान (alternate hosts) के रूप में भी कार्य करते हैं जो कीड़ों, कीटों और बीमारियों और अन्य सूक्ष्मजीवों (micro-organisms) को आश्रय देते हैं। कुछ कीटों और बीमारियों के वैकल्पिक मेजबान नीचे दिए गए हैं:
कुछ कीटों और बीमारियों के वैकल्पिक मेजबान (Alternate hosts of some of the pest and diseases)
| फसल (Crop) |
कीट (Pest) |
वैकल्पिक मेजबान (Alternate host) |
| अरहर (Red gram) |
चना सुंडी (Gram caterpillar) |
Amaranthus, Datura |
| अरंडी (Castor) |
रोएंदार सुंडी (Hairy caterpillar) |
Crotalaria sp |
| चावल (Rice) |
तना छेदक (Stem Borer) |
Echinocholoa, Panicum |
| गेहूँ (Wheat) |
काला रतुआ (Black Rust) |
Agropyron repens |
| बाजरा (Pearl Millet) |
अरगट (Ergot) |
Cenchrus ciliaris |
| मक्का (Maize) |
डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew) |
Sacharum spontaneum |
- कुछ खरपतवार मिट्टी में ऐसे अवरोधक (inhibitors) या जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं जो फसल के पौधों, मनुष्यों और पशुओं (livestock) के लिए हानिकारक हो सकते हैं। मनुष्यों को खरपतवारों से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं:
खरपतवारों से स्वास्थ्य समस्याएं (Health problems caused by weeds to humans)
| स्वास्थ्य समस्या (Health problem) |
खरपतवार (Weed) |
| हे फीवर और अस्थमा (Hay fever and Asthma) |
Ambrosia और Franseria के पराग (Pollen) |
| त्वचा रोग (Dermatitis) |
Parthenium, Ambrosia |
| खुजली और सूजन (Itching and Inflammation) |
Utrica sp |
| अफ्रीकी स्लीपिंग सिकनेस (African sleeping sickness) |
ब्रश खरपतवार (Brush weeds) |
| मच्छर के कारण मलेरिया, एन्सेफलाइटिस और फाइलेरिया (Malaria, encephalitis and filaria caused by mosquito) |
जलीय खरपतवार (Aquatic weeds) जैसे Pistia lanceolate, Salvinia auriculata |
- खरपतवार विपणन योग्य (marketable) कृषि उपज की गुणवत्ता को कम करते हैं। धतूरा (Datura), आर्जेमोन (Argemone), सरसों (Brassica) आदि के खरपतवार बीजों का संदूषण (contamination) मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और उपज में मौजूद खरपतवार के बीज कभी-कभी अजीब गंध (odour) पैदा करते हैं।
- खरपतवार न केवल उपज को कम करते हैं बल्कि कृषि कार्यों में भी बाधा डालते हैं। खरपतवार यांत्रिक बुवाई (mechanical sowing) को एक कठिन प्रक्रिया बनाते हैं और कटाई को कठिन बनाते हैं, जिससे उनके हटाने के लिए श्रम (labour), उपकरण और रसायनों पर खर्च बढ़ जाता है।
- जलीय पर्यावरण (aquatic environment) में, खरपतवार नहरों, जल-परिवहन प्रणाली (water-transport system) और जल निकासी प्रणाली (drainage system) में पानी के प्रवाह को रोकते हैं, जिससे नेविगेशन मुश्किल हो जाता है। जलीय खरपतवारों की घनी वृद्धि पानी को ऑक्सीजन रहित (deoxygenating) करके और मछलियों को मारकर प्रदूषित करती है।
- खरपतवार रेलवे लाइनों, सड़कों, रास्तों, हवाई अड्डों, जंगल और औद्योगिक स्थलों के साथ-साथ एक उपद्रव (nuisance) और आग का खतरा (fire hazard) भी हैं।
लाभदायक प्रभाव (Beneficial Effects)
खरपतवारों से होने वाली सभी कठिनाइयों के बावजूद, वे कुछ लाभदायक गुण प्रदान कर सकते हैं, विशेष रूप से जब कम घनत्व (low densities) पर होते हैं। इन पहलुओं का उपयोग खेती प्रणाली (farming system) में किया जाना चाहिए, हालांकि यह जैविक प्रबंधन (organic management) को रासायनिक आधारित प्रणालियों की तुलना में अधिक जटिल बना सकता है। खरपतवारों के कुछ संभावित लाभ नीचे सूचीबद्ध हैं:
- मिट्टी की नमी को संरक्षित (conserve soil moisture) करने और क्षरण (erosion) को रोकने में मदद करते हैं। खरपतवारों का भूमि आवरण (ground cover) खुली मिट्टी की मात्रा को कम करेगा जिससे पोषक तत्वों, विशेष रूप से नाइट्रोजन (N) को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, जो अन्यथा लीच (leached) हो सकता है, विशेष रूप से हल्की मिट्टी पर।
- कीटों के प्राकृतिक दुश्मनों (natural enemies) के लिए भोजन और आश्रय (shelter) और फसल कीटों के लिए वैकल्पिक खाद्य स्रोत भी प्रदान किए जा सकते हैं। खरपतवार आवरण की वास्तविक उपस्थिति कीटों के जैविक नियंत्रण (biological control) की प्रभावशीलता बढ़ाने और कीटों के नुकसान को कम करने में एक कारक हो सकती है।
- खरपतवार खेत में बढ़ने की स्थिति, उदाहरण के लिए पानी के स्तर, संघनन (compaction) और पीएच (pH) के मूल्यवान संकेतक (indicators) भी हो सकते हैं।
- खरपतवार वन्यजीवों (wildlife), विशेष रूप से पक्षियों के लिए भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। पिछले कुछ दशकों में कृषि भूमि पर पक्षियों की आबादी कम हो रही है और खरपतवारों को एक संसाधन के रूप में छोड़ने से पक्षियों की आबादी को पुनर्जीवित (revive) करने में मदद मिली है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल
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