समेकित खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management)

समेकित खरपतवार प्रबंधन को किसी दिए गए फसल प्रणाली (cropping system) में खरपतवार की प्रतिस्पर्धा को आर्थिक दहलीज स्तर (economical threshold level) से नीचे कम करने के लिए, कम लागत (low input levels) पर दो या दो से अधिक खरपतवार नियंत्रण विधियों के संयोजन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह कुछ मामलों में एक मूल्यवान अवधारणा साबित हुई है, हालांकि छोटे किसानों के स्तर तक इसका विस्तार करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

समेकित खरपतवार प्रबंधन (IWM) दृष्टिकोण का उद्देश्य पौधों, मिट्टी, हवा और पानी में अवशेष (residue) की समस्या को कम करना है। एक IWM में खरपतवार प्रबंधन के यांत्रिक (mechanical), रासायनिक (chemical) और कृषि (cultural) अभ्यासों के संयोजन का एक नियोजित क्रम (planned sequence) में उपयोग शामिल है, जिसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) प्रभावित न हो। नियंत्रित की जाने वाली प्रजातियों की प्रकृति और तीव्रता, फसल चक्र (rotation) में उगाई जाने वाली फसलों का क्रम, फसल पालन (crop husbandry) का स्तर, और किसी भी विधि की सुलभ और समय पर उपलब्धता तथा विभिन्न खरपतवार-प्रबंधन तकनीकों का अर्थशास्त्र (economics) कुछ महत्वपूर्ण विचार हैं जो IWM दृष्टिकोण के सफल उपयोग को निर्धारित करते हैं।

IWM क्यों आवश्यक है (Why IWM)?

  1. खरपतवार नियंत्रण की एक विधि एक स्थिति में प्रभावी और किफायती (economical) हो सकती है और दूसरी स्थिति में ऐसा नहीं हो सकती है।
  2. खरपतवार वनस्पतियों (weed flora) की विस्तृत श्रृंखला को नियंत्रित करने में कोई भी एक शाकनाशी (herbicide) प्रभावी नहीं है।
  3. एक ही शाकनाशी के लगातार उपयोग से बची हुई खरपतवार वनस्पतियों में प्रतिरोध (resistance) पैदा होता है या वनस्पतियों में बदलाव (shift) होता है।
  4. केवल एक ही अभ्यास के निरंतर उपयोग से कुछ अवांछनीय (undesirable) प्रभाव हो सकते हैं। उदाहरण: चावल - गेहूं फसल प्रणाली - Phalaris minor
  5. खरपतवार नियंत्रण की केवल एक विधि से किसी विशेष खरपतवार की आबादी (population) में वृद्धि हो सकती है।
  6. शाकनाशी का अंधाधुंध उपयोग और पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव।

अवधारणा (Concept)

FAO परिभाषा (FAO Definition)

यह एक ऐसी विधि है जिसमें हानिकारक जीवों को आर्थिक क्षति (economic damage) के दहलीज स्तर (threshold level) से नीचे रखने के लिए सभी आर्थिक, पारिस्थितिक और विष विज्ञान (toxicologically) रूप से उचित विधियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्राकृतिक सीमित कारकों (natural limiting factors) के सचेत उपयोग को प्राथमिकता दी जाती है।

IWM लागत प्रभावी (cost-effective) खरपतवार नियंत्रण प्रदान करने के लिए प्रत्यक्ष (direct) और अप्रत्यक्ष (indirect) नियंत्रण विधियों का तर्कसंगत (rational) उपयोग है। ऐसा दृष्टिकोण कृषि विज्ञान (agronomic), अर्थशास्त्र और पारिस्थितिक दृष्टिकोण से सबसे आकर्षक विकल्प है।

आमतौर पर सुझाए गए अप्रत्यक्ष (indirect) तरीकों में भूमि की तैयारी (land preparation), जल प्रबंधन, पौधों के बीच की दूरी (plant spacing), बीज दर (seed rate), किस्म (cultivar) का उपयोग और उर्वरक का उपयोग (fertilizer application) शामिल हैं। प्रत्यक्ष (direct) विधियों में खरपतवार नियंत्रण के मानवीय (manual), कृषि, यांत्रिक और रासायनिक तरीके शामिल हैं।

किसी भी IWM कार्यक्रम में आवश्यक कारक अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष विधियों की संख्या है जिन्हें किसी दी गई स्थिति में आर्थिक रूप से जोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए, जुताई (ploughing) और हैरोइंग (harrowing) की बढ़ी हुई आवृत्ति प्रत्यक्ष खरपतवार नियंत्रण की आवश्यकता को समाप्त नहीं करती है। इसलिए, बुवाई से पहले (pre-planting) कम हैरोइंग का उपयोग करना और उन्हें प्रत्यक्ष खरपतवार नियंत्रण विधियों के साथ जोड़ना अधिक लागत प्रभावी है।

ऐसे प्रायोगिक साक्ष्य (experimental evidence) हैं जो बताते हैं कि यदि विभिन्न खरपतवार नियंत्रण प्रथाओं को अलग-अलग लागू करने के बजाय संयोजन (combination) में उपयोग किया जाए तो बेहतर खरपतवार नियंत्रण प्राप्त होता है।

एक अच्छे IWM में होना चाहिए (Good IWM should be)

  1. स्थानीय किसानों के नवाचारों (innovations) और व्यावहारिक अनुभवों को शामिल करने के लिए पर्याप्त लचीला (flexible)।
  2. पूरे खेत के लिए विकसित किया जाना चाहिए न कि केवल एक या दो खेतों के लिए और इसलिए इसे सिंचाई नहरों (irrigation channels), सड़कों के किनारे और खेत के अन्य गैर-फसल वाले परिवेशों (non-crop surroundings) तक बढ़ाया जाना चाहिए जहां से अधिकांश खरपतवार फसल के खेतों में अपना रास्ता खोज लेते हैं।
  3. आर्थिक रूप से व्यवहार्य (economically viable) और व्यावहारिक रूप से संभव (practically feasible)।

IWM के लाभ (Advantages of IWM)

रिजका में कस्कुटा का IWM (IWM of Cuscuta in Lucerne)

  1. कस्कुटा (डॉडर - dodder) के इतिहास वाले खेतों में, गैर-संवेदनशील (non-susceptible) फसलों के साथ फसल चक्र अपनाएं। ऐसे खेतों में तीन साल में केवल एक बार रिजका (lucerne) उगाएं।
  2. जानवरों और मशीनरी को डॉडर प्रभावित खेतों से नए खेतों में न ले जाएं।
  3. रिजका के घनी आबादी वाले संक्रमित क्षेत्रों का पैराक्वाट (paraquat) जैसे गैर-अवशिष्ट (non-residue) शाकनाशी से उपचार करें।
  4. जानवरों को कस्कुटा संक्रमित फसल न खिलाएं।
  5. डॉडर से संक्रमित फसल से रिजका के बीज एकत्र न करें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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