फसल उत्पादन में खाद और उर्वरकों की भूमिका - एफयूई बढ़ाने के लिए कृषि संबंधी हस्तक्षेप - अंतर-खेती - थिनिंग - गैप फिलिंग और अन्य अंतर-सांस्कृतिक संचालन (Role of manures and fertilizers in crop production – agronomic interventions for enhancing FUE - Inter cultivation - Thinning - Gap filling and other intercultural operations)

खाद (MANURES)

खाद (Manures) पौधे और जानवरों के अपशिष्ट (plant and animal wastes) हैं जिनका उपयोग पौधों के पोषक तत्वों के स्रोत (source of plant nutrients) के रूप में किया जाता है। वे अपने अपघटन (decomposition) के बाद पोषक तत्वों (nutrients) को छोड़ते हैं। खाद को भारी जैविक खाद (bulky organic manures) और केंद्रित जैविक खाद (concentrated organic manures) में बांटा जा सकता है।

  1. भारी जैविक खाद (Bulky organic manures) - फार्म यार्ड खाद (Farm Yard Manure - FYM), जैविक कचरे (organic waste) से खाद, रात की मिट्टी (night soil), कीचड़ (sludge), सीवेज (sewage), हरी खाद (green manures)।
  2. केंद्रित जैविक खाद (Concentrated organic manures) - खली (oilcakes - खाद्य, अखाद्य), रक्त भोजन (blood meal), मछली का भोजन (fishmeal) और हड्डी का भोजन (bone meal)।

उर्वरक (FERTILIZERS)

उर्वरक (Fertilizers) औद्योगिक रूप से निर्मित रसायन (industrially manufactured chemical) हैं जिनमें पौधों के पोषक तत्व (plant nutrients) होते हैं। जैविक खाद (organic manures) की तुलना में उर्वरकों में पोषक तत्वों की मात्रा (Nutrient content) अधिक होती है और पोषक तत्व लगभग तुरंत निकल जाते हैं। उर्वरकों के तीन समूह (three groups) हैं;

खाद और उर्वरकों की भूमिका (ROLE OF MANURES AND FERTILIZERS)

  1. जैविक खाद (Organic manures) रेतीली मिट्टी (sandy soil) को बांधती है और इसकी जल धारण क्षमता (water holding capacity) में सुधार करती है।
  2. जैविक खाद (Organic manures) चिकनी मिट्टी (clayey soil) को खोलती है और बेहतर जड़ वृद्धि (better root growth) के लिए वातन (aeration) में मदद करती है।
  3. जैविक खाद (Organic manures) पौधों के पोषक तत्वों को छोटे प्रतिशत में जोड़ती है और सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) को भी जोड़ती है, जो पौधों के विकास के लिए आवश्यक (essential) हैं।
  4. खाद माइक्रोबियल गतिविधि (microbial activity) को बढ़ाती है जो पौधों के पोषक तत्वों को उपलब्ध रूप (available form) में छोड़ने में मदद करती है।
  5. पोषक तत्वों के धीमी गति से निकलने (slow release of nutrients) के कारण बुवाई (sowing) या रोपण (planting) से पहले जैविक खाद (Organic manures) को शामिल (incorporated) किया जाना चाहिए।
  6. उर्वरक (Fertilizers) फसल उत्पादन (crop production) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे फसलों को बड़ी मात्रा में आवश्यक पोषक तत्वों (essential nutrient) की आपूर्ति करते हैं।
  7. उर्वरकों (Fertilizers) को ऐसे रूपों में निर्मित किया जाता है जिनका पौधों द्वारा सीधे या तेजी से परिवर्तन (rapid transformation) के बाद आसानी से उपयोग किया जाता है।
  8. मिट्टी परीक्षण (soil testing) द्वारा निर्धारित आवश्यकता (requirement) के अनुरूप उर्वरकों की खुराक (Fertilizers dose) को समायोजित (adjusted) किया जा सकता है।
  9. उर्वरकों के उचित मिश्रण (appropriate mixing) द्वारा फसल की आवश्यकता (crop requirement) के आधार पर पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग (Balanced application) संभव है।
  10. फसल की आवश्यकता के आधार पर उर्वरकों को सीधे उर्वरकों (straight fertilizers - एकल पोषक तत्व प्रदान करना) या जटिल और मिश्रित उर्वरकों (complex and mixed fertilizers - दो या दो से अधिक पोषक तत्वों की आपूर्ति) के रूप में लगाया जाता है।

FUE (उर्वरक उपयोग दक्षता) बढ़ाने के लिए कृषि संबंधी हस्तक्षेप (AGRONOMIC INTERVENTIONS FOR ENHANCING FUE)

उर्वरक उपयोग दक्षता (Fertilizer use efficiency - FUE) में सुधार के लिए कृषि संबंधी उपाय (agronomic measures) निम्नलिखित हैं।

  1. सर्वोत्तम उर्वरक स्रोत का उपयोग करना (Using best fertilizer source)
  2. पर्याप्त दर और नैदानिक तकनीकों का उपयोग करना (Using adequate rate & diagnostic techniques)
  3. संतुलित निषेचन का उपयोग (Usage of balanced fertilization)
  4. एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated nutrient management)
  5. अवशिष्ट पोषक तत्वों का उपयोग (Utilization of residual nutrients)

1. सर्वोत्तम उर्वरक स्रोत का उपयोग करना (Using best fertilizer source):

बेहतर फसल उत्पादन के लिए उर्वरक के सर्वोत्तम स्रोत (best source of fertilizer) की पहचान पूर्व-शर्त (pre-requisite) है। उर्वरक का स्रोत फसल और किस्म (crop and variety), जलवायु और मिट्टी की स्थिति (climatic and soil condition), उर्वरक की उपलब्धता (availability of fertilizer) आदि पर निर्भर करता है।

2. पर्याप्त दर और नैदानिक तकनीकों का उपयोग करना (Using adequate rate & diagnostic techniques):

उर्वरक की सिफारिश (fertilizer recommendation) पर्याप्त मात्रा (adequate quantity) में होनी चाहिए ताकि विकास के किसी भी बिंदु पर फसल की मांग (demand of crop) को पूरा किया जा सके। निम्नलिखित में से किसी भी तरीके से इसकी आवश्यकता का निदान (diagnosing) करके उर्वरक की आपूर्ति (fertilizer supply) की जाती है।

3. संतुलित निषेचन (Balanced fertilization)

संतुलित निषेचन (Balanced fertilization) में सभी आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति (adequate supply), आवेदन की उचित विधि (proper method of application), आवेदन का सही समय (right time of application) और पोषक तत्व अंतर्संबंध (nutrient interrelationships) शामिल हैं।

a. सभी आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति (Adequate supply of all essential nutrients): प्राथमिक पोषक तत्वों (primary nutrients - NPK) पर अधिक सांद्रता (concentration) और प्रयोग के कारण, मिट्टी में द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों (secondary and micro-nutrients) की कमी के लक्षण (deficiency symptoms) विकसित हो गए। इसलिए, फसलों में अधिक उपज प्राप्त करने के लिए अनदेखे तत्वों (ignored elements) को NPK के साथ जोड़ा जाना चाहिए (शायद कम मात्रा में - minor quantity)। प्रायोगिक परिणामों (Experimental results) से पता चला है कि लगभग 20-25 किलो सूक्ष्म पोषक तत्वों (micro-nutrient) का उपयोग या दो पर्ण स्प्रे (foliar sprays) फसलों की उपज को 20% तक बढ़ा देता है।

b. उचित विधि (Proper method): N और K को ब्रॉडकास्टिंग (broadcasting) और बैंड प्लेसमेंट (band placement) के रूप में लगाया जा सकता है। तटस्थ और क्षारीय मिट्टी (neutral & alkaline soils) में बैंड प्लेसमेंट के रूप में लगाने के लिए पानी में घुलनशील P उर्वरकों (Water soluble P fertilizers) को प्राथमिकता दी जाती है। साइट्रेट घुलनशील P उर्वरकों (Citrate soluble P fertilizers) को अम्लीय मिट्टी (acidic soils) में प्रसारण विधि (broadcast method) के रूप में लागू किया जाता है। S उर्वरकों के सल्फेट रूपों (Sulphate forms) को ब्रॉडकास्टिंग (broadcasting) या बैंड प्लेसमेंट (band placement) के रूप में लागू किया जाता है, जबकि एलीमेंटल S और पाइराइट (elemental S and pyrite) को ब्रॉडकास्टिंग विधि के रूप में लागू किया जाता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) को पर्ण स्प्रे (foliar sprays) के रूप में मामूली मात्रा में लगाया जाता है और पानी में घुलनशील उर्वरकों (water soluble fertilizers) को फर्टिगेशन (fertigation) में लागू किया जाता है।

c. सही समय (Right time): (फसल के शरीर क्रिया विज्ञान के अनुसार - according to physiology of crop)

d. पोषक तत्वों के अंतर्संबंध (Nutrient interrelationships): मिट्टी में लगाते समय उर्वरकों की विरोधी प्रकृति (Antagonistic nature of fertilizers) पर विचार किया जाना चाहिए। अतिरिक्त मात्रा में उर्वरक का प्रयोग (fertilizer application in excess), फसलों की उपज और गुणवत्ता (yield and quality) के नुकसान का कारण बनता है। उदा. अत्यधिक 120 किलोग्राम P ha-1 के प्रयोग से असंतुलन (imbalance) पैदा हुआ और 80 किलोग्राम P ha-1 की तुलना में सोयाबीन (soybean) में बीज और तेल की पैदावार कम हो गई।

4. एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated nutrient management)

फसल की मांग (crop demand) को पूरा करने के लिए अकार्बनिक उर्वरकों (inorganic fertilizers) के साथ जैविक खाद (Organic manures), फसल अवशेष (crop residues), हरी खाद (green manures), जैव उर्वरक (bio-fertilizers) आदि को सही तरीके से (right manner) मिलाया जाना चाहिए। अकार्बनिक उर्वरकों (inorganic fertilizers) के उपयोग को कम करने के लिए सभी संभव और उपलब्ध जैविक स्रोतों (organic sources) का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाना है।

5. अवशिष्ट पोषक तत्वों का उपयोग (Utilization of residual nutrients)

फसल अवशेषों (crop residues) का कुशल तरीके से उपयोग करने की कुछ रणनीतियाँ (strategies) हैं,

अंतर खेती (INTER CULTIVATION)

फसल की बुवाई (sowing of crop) के बाद अपनाई जाने वाली खेती की प्रथाओं (Cultivation practices) को अंतर-खेती (inter-cultivation) कहा जाता है। इसे अन्यथा ऑपरेशन के बाद (after operation) कहा जाता है। खेती की तीन महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ हैं, जैसे, थिनिंग और गैप फिलिंग (Thinning and gap filling), निराई और गुड़ाई (weeding and hoeing) और मिट्टी चढ़ाना (earthing up)।

1. थिनिंग और गैप फिलिंग (Thinning and Gap filling)

थिनिंग और गैप फिलिंग (Thinning and gap filling) प्रक्रिया का उद्देश्य इष्टतम पौधों की आबादी (optimum plant population) को बनाए रखना है। थिनिंग (Thinning) स्वस्थ पौधों (healthy seedlings) को छोड़कर अतिरिक्त पौधों (excess plants) को हटाना है। गैप फिलिंग (Gap filling) बीजों की बुवाई करके या उन अंतरालों में पौधों की रोपाई (transplanting of seedlings) करके अंतरालों (gaps) को भरने के लिए की जाती है जहाँ पहले बोए गए बीज अंकुरित (germinated) नहीं हुए थे। यह एक साथ चलने वाली प्रक्रिया (simultaneous process) है। आमतौर पर, इनका अभ्यास बुवाई के एक सप्ताह बाद से अधिकतम 15 दिनों तक किया जाता है। शुष्क भूमि कृषि (dryland agriculture) में, गैप फिलिंग (gap filling) पहले की जाती है। बुवाई के 7 दिन बाद बीजों को डिबल (dibbled) किया जाता है। गैप फिलिंग के बाद थिनिंग (Thinning) की जाती है; ताकि सूखे (drought) से बचा जा सके। तनाव (stress) को कम करने के लिए पौधों की आबादी के एक हिस्से को हटाने की एक प्रबंधन रणनीति (management strategy) को मध्य मौसम सुधार (mid season correction) के रूप में जाना जाता है।

2. निराई और गुड़ाई (Weeding and Hoeing)

निराई (Weeding) अवांछित पौधों (unwanted plants) को हटाना है। निराई और गुड़ाई (Weeding and hoeing) एक साथ होने वाली क्रिया (simultaneous operation) है। गुड़ाई (Hoeing) छोटे हाथ के औजारों (small hand tools) द्वारा ऊपरी मिट्टी (top soil) को परेशान करना है और मिट्टी में हवा (aerating) भरने में मदद करता है।

3. मिट्टी चढ़ाना (Earthing up)

यह एक रिज (ridge) के एक तरफ से मिट्टी का विस्थापन (dislocation of soil) है और इसे फसली तरफ (cropped side) के करीब रखा जाना है। यह व्यापक दूरी वाली (wide spaced) और गहरी जड़ वाली (deep rooted) फसलों में किया जाता है। यह गन्ना (sugarcane), टैपिओका (tapioca), केला (banana) आदि में बुवाई/रोपण (sowing / planting) के लगभग 6-8 सप्ताह बाद किया जाता है।

4. अन्य अंतर खेती प्रथाएं (Other inter cultivation practices)

हैरोइंग (Harrowing): औजारों या उपकरणों (tools or implements) का उपयोग करके फसल के अंतर और अंतरा पंक्ति (inter and intra row spacing) की दूरी में सतह की मिट्टी (surface soil) को हिलाना या खुरचना (Stirring or scraping)।

रोगिंग (Roguing): एक ही फसल की अन्य किस्म (other variety of same crop) के साथ मिश्रित (admixed) किस्म के पौधों को हटाना। उदा. IR 50 चावल के खेत में, चावल की अन्य किस्में दुष्ट (rogue) हैं। शुद्धता (purity) बनाए रखने के लिए बीज उत्पादन (seed production) में इसका अभ्यास किया जाता है।

टॉपिंग (Topping): टर्मिनल कलियों (terminal buds) को हटाना। यह सहायक विकास (auxillary growth) को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है। कपास (cotton) और तंबाकू (tobacco) में अभ्यास किया जाता है।

प्रोपिंग (Propping): फसल को सहारा (support) देने को प्रोपिंग (propping) कहा जाता है। गन्ने (sugarcane) में आमतौर पर अभ्यास किया जाता है। फसल को गिरने (lodging) से बचाने के लिए ऐसा किया जाता है। आसन्न पंक्तियों (adjacent rows) से गन्ने के डंठल (Cane stalks) एक साथ लाए जाते हैं और उनके अपने कचरे (trash) और पुरानी पत्तियों (old leaves) से बांध दिए जाते हैं।

डी-ट्रैशिंग (De-trashing): गन्ने (sugarcane) की फसल से पुरानी पत्तियों (older leaves) को हटाना।

डी-सकरिंग (De-suckering): कक्षीय कलियों (axillary buds) और शाखाओं को हटाना जिन्हें फसल उत्पादन के लिए गैर आवश्यक (non essential) माना जाता है और जो पौधों के पोषक तत्वों (plant nutrients) को काफी हद तक हटा देते हैं, उन्हें सकर (suckers) कहा जाता है। उदा. तंबाकू (Tobacco)।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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