शाब्दिक अर्थ है बीजों को बिखेरना (scattering the seeds)। कई फसलों के लिए प्रसारण किया जाता है। प्रसारण का उपयोग ज्यादातर छोटे आकार से लेकर मध्यम आकार की फसलों (small sized to medium sized crops) के लिए किया जाता है। भारत में अपनाई जाने वाली बुवाई की यह सबसे बड़ी विधि (largest method of sowing) है क्योंकि यह सबसे आसान और सस्ता (easiest and cheapest) है और इसके लिए न्यूनतम मजदूरों (minimum labours) की आवश्यकता होती है। इकाई क्षेत्र (unit area) में इष्टतम पौधों की आबादी (optimum plant population) रखने के लिए कुछ नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
बीजों को एक संकरी पट्टी (narrow strip) में प्रसारित किया जाता है और बुवाई पट्टी-दर-पट्टी (strip by strip) पूरी की जाती है। अच्छी और समान आबादी (uniform population) सुनिश्चित करने के लिए, दोनों दिशाओं में प्रसारण करना बेहतर है। इसे क्रिस-क्रॉस बुवाई (criss-cross sowing) कहा जाता है। यदि बीज बहुत छोटा है, तो इसे भारी बनाने और आसानी से संभालने (easy handling) के लिए इसे रेत (sand) के साथ मिलाया जाता है। कुछ मामलों में बुवाई करने वाला व्यक्ति एक समान फैलाव के लिए बीजों को टोकरी (basket) पर पीटता (beating) है। प्रसारण के बाद, बीजों को धीरे से ढका (covered gently) जाता है, या तो एक देश के हल (country plough) का उपयोग करके बहुत उथली जुताई (shallow ploughing) के साथ या कुछ लकड़ी के तख्तों (wooden planks - बोर्ड / लेवलर) का उपयोग सतह को कवर करने के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में पेड़ की टहनियों (tree twigs) या झाड़ी की शाखाओं (shrub branches) का उपयोग किया जाता है। यदि बीज बड़े हैं, तो लेवलर (levelers) बीजों को इकट्ठा करते हैं और दूसरी तरफ छोड़ देते हैं। कंघी हैरो (Comb harrow) सबसे अच्छा इस्तेमाल किया जाने वाला है।
नुकसान (Disadvantages)पंक्ति बुवाई (Line sowing): वांछित गहराई (desired depth) पर एक छेद के माध्यम से एक बीज डालना और छेद को ढंकना। सादे सतह (plain surface) और लकीरें और खांचे (ridges and furrows) या बेड और चैनलों (beds and channels) पर डिबलिंग। इस प्रकार की बुवाई उपयुक्त मिट्टी की स्थिति में ही की जाती है। चावल - परती - कपास (Rice – fallow – cotton) को सादे सतह (plain surface) पर डिबल किया जाता है। बीजों को ऊपर से 2/3 (2/3rd from top) या नीचे से 1/3 (1/3rd at bottom) पर डिबल किया जाता है। बुवाई से पहले खांचे (furrows) खोले जाते हैं और उर्वरक (fertilizers) लगाए जाते हैं जिसके ऊपर बीज बोए जाते हैं। बीजों का उर्वरकों (fertilizers) के साथ संपर्क नहीं होता है। यह व्यापक दूरी वाली फसलों (wider spaced crops) और मध्यम से बड़े आकार के बीजों (medium to large sized seeds) के लिए किया जाता है, उदा. ज्वार (sorghum), मक्का (maize), सूरजमुखी (sunflower), कपास को लकीरें और खांचे (ridges and furrows) पर डिबल किया जाता है। दोनों बेड और चैनल और लकीरें और खांचे लाइन बुवाई (line sowing) के अंतर्गत आते हैं। मिट्टी चढ़ाते समय (earthing up), पौधा रिज के बीच (middle of the ridge) में रहता है। जड़ प्रणाली (root system) के उचित लंगर (proper anchorage) के लिए मिट्टी चढ़ाना (Earthing up) आवश्यक है।
लकीरें और खांचे के लाभ (Advantages of ridges and furrows)हल के पीछे बुवाई (पंक्ति बुवाई - line sowing) मैन्युअल रूप से (manually) या यांत्रिक (mechanical) साधनों से की जाती है। हल (plough) द्वारा खोले गए खांचे (furrows) में बीज (Seeds) गिराए जाते हैं और अगला खांचा खुलने पर इसे बंद (closed) या ढक (covered) दिया जाता है। बीज समान दूरी (uniform distance) पर बोए जाते हैं। मैनुअल विधि एक श्रमसाध्य (laborious) और समय लेने वाली (time consuming) प्रक्रिया है। अरहर (redgram), लोबिया (cowpea) और मूंगफली (groundnut) जैसे बीज देश के हल (country plough) के पीछे बोए जाते हैं। प्रमुख बोई गई फसल मूंगफली है। बीज यांत्रिक (mechanical) साधनों द्वारा 'गोरस' ('Gorus') - सीड ड्रिल (seed drill) द्वारा बोए जाते हैं। सीड ड्रिल में एक हल का हिस्सा (plough share) और हॉपर (hopper) होता है। बीज हॉपर (hopper) पर रखे जाते हैं। विभिन्न प्रकार के सीड ड्रिल (seed drill) उपलब्ध हैं, उदा. सरल गोरू (Goru) - गुंटाकास (Guntakas)।
लाभ (Advantages) - i) बीजों को लोहे के तख्तों (iron planks) से ढकी वांछित गहराई (desired depth) पर रखा जाता है, ii) बहुत छोटे, बहुत बड़े बीजों को छोड़कर अधिकांश बीज बोए जा सकते हैं, उदा. मक्का, ज्वार, बाजरा, सूरजमुखी, आदि।
| क्र.सं. (Sl. No.) | पंक्ति बुवाई (Line sowing) | यादृच्छिक बुवाई (Random sowing) |
|---|---|---|
| 1. | महंगा (Costlier) | सस्ता (Cheaper) |
| 2. | काफी समय लगता है (Takes considerable time) | सबसे तेज और समय की बचत (Quickest and time saving) |
| 3. | निश्चित बीज दर (Fixed seed rate) | उच्च बीज दर (Higher seed rate) |
| 4. | मशीनीकरण (Mechanization) संभव है, उदा. निराई, कटाई | संभव नहीं (Not possible) |
| 5. | संसाधनों का समान उपयोग (भूमि, जल, प्रकाश, पोषक तत्व, आदि - Uniform utilization of resources) | संसाधन उपयोग असमान है (Resource utilization ununiform) |
ड्रिलिंग (Drilling) मिट्टी से ढकी एक निश्चित गहराई (definite depth) में बीज गिराने और संकुचित (compacted) करने की प्रथा है। इस विधि में बीजों को मिट्टी में डालने के लिए बुवाई के औजारों (sowing implements) का उपयोग किया जाता है। पशु चालित गोरस (animal drawn gorrus) और बिजली से चलने वाले (seed drills) दोनों उपकरण उपलब्ध हैं। बीजों को पंक्तियों (rows) में लगातार या नियमित अंतराल (regular intervals) पर ड्रिल (drilled) किया जाता है। इस विधि में, बुवाई की गहराई (depth of sowing) बनाए रखी जा सकती है और साथ ही उर्वरक (fertilizer) भी डाला जा सकता है। अंतर-फसलों (inter crops) की बुवाई करना भी संभव है। इसमें अधिक समय, ऊर्जा और लागत (time, energy and cost) लगती है, लेकिन प्रति इकाई क्षेत्र (per unit area) में समान आबादी (uniform population) बनी रहती है। बीजों को समान गहराई (uniform depth) पर रखा जाता है, ढका जाता है और संकुचित (compacted) किया जाता है।
नर्सरी (nursery) में, छोटे पौधों (young seedlings) को कम समय में और छोटे क्षेत्र में अधिक प्रभावी ढंग से संरक्षित (protected) किया जाता है। प्रबंधन (Management) आवश्यक है।
लाभ (Advantages)आयु (Age) - कुल अवधि (total duration) का 1/4 नर्सरी बेड (nursery beds) पर होता है। यदि कुल अवधि 16 सप्ताह है, तो चार सप्ताह की अवधि (1 महीना) नर्सरी बेड के अंतर्गत आती है। नर्सरी की आयु (Nursery age) बहुत कठोर नहीं है, उदा. अंगूठे का नियम (thumb rule) - 3 महीने की फसल - नर्सरी की अवधि 3 सप्ताह, न्यूनतम 4 महीने - 4 सप्ताह न्यूनतम अवधि; 5 महीने - 5 सप्ताह। नर्सरी अवधि (nursery period) के बाद, अंकुरों (seedlings) को बाहर निकाला जाता है और प्रत्यारोपित (transplanted) किया जाता है। यह मुख्य खेत (main field) में पूरी तरह से खेत की तैयारी (thorough field preparation) या इष्टतम जुताई (optimum tilth) के बाद किया जाता है। अंकुरों को पंक्तियों (lines) में या यादृच्छिक (random) में डिबल (dibbled) किया जाता है। नर्सरी के बाद भी करीब दूरी वाली फसलें (Closer spaced crops) ज्यादातर यादृच्छिक विधि (random method) से उगाई जाती हैं, उदा. चावल, रागी (ragi)। सब्जियों के लिए, प्रत्यारोपण (transplanting) के दौरान वांछित रिक्ति (desired spacing) की आवश्यकता होती है। प्रत्यारोपण का झटका (Transplanting shock) रोपाई के बाद की अवधि है, जब अंकुर (seedlings) कोई वृद्धि नहीं दिखाते हैं। यह मुख्य रूप से जड़ (root) और मिट्टी (soil) के बीच के वातावरण (environment) में बदलाव के कारण होता है। नए लगाए गए पौधों (seedlings) को नए वातावरण के साथ तालमेल बिठाना (adjust) चाहिए। यह मौसम (season), फसल (crop), किस्म (variety) आदि के आधार पर 5 - 7 दिनों की अवधि के लिए होता है। उच्च तापमान (higher temperature) पर - निर्जलीकरण (dehydration) - पत्तियाँ सूख जाती हैं (leaves dry out)। क्षेत्र: आम तौर पर नर्सरी के लिए कुल क्षेत्र का 1/10वां हिस्सा (1/10th) आवश्यक होता है।
फसली खेत (cropped field) में प्रति इकाई क्षेत्र (per unit area) पौधों की संख्या पौधों की आबादी (plant population) है।
इष्टतम पौधों की आबादी (Optimum plant population)प्राकृतिक संसाधनों (natural resources) का कुशलतापूर्वक (efficiently) उपयोग करने के लिए किसी क्षेत्र में विभिन्न पंक्तियों (rows) और स्तंभों (columns) में पौधों की व्यवस्था (arrangement) को फसल ज्यामिति (crop geometry) कहा जाता है। अन्यथा यह एक पौधे (single plant) द्वारा घेरा गया क्षेत्र है उदा. चावल - 20 सेमी x 15 सेमी। प्रकाश (light), पानी (water), पोषक तत्व (nutrient) और स्थान (space) जैसे संसाधनों का उपयोग करने के लिए यह बहुत आवश्यक है। फसल उत्पादन (crop production) के लिए विभिन्न ज्यामितीय (geometries) उपलब्ध हैं।
पौधों की आबादी / फसल ज्यामिति का महत्व (Importance of plant population / crop geometry)| फसल (Crop) | अवधि / प्रकार (Duration / Type) | रिक्ति (Spacing) | पौधों की आबादी (Plants/ha) |
|---|---|---|---|
| चावल (Rice) | लघु अवधि (Short duration) | 15 cm x 10 cm | 6,66,666 pl/ha |
| मध्यम (Medium) | 20 cm x 10 cm | 5,00,000 pl/ha | |
| लंबी (Long) | 20 cm x 15 cm | 3,33,000 pl/ha | |
| कपास (Cotton) | मध्यम (Medium) | 60 cm x 30 cm | |
| लंबी (Long) | 75 cm x 30 cm | ||
| संकर (Hybrids) | 120 cm x 45 cm | ||
| मक्का (Maize) | किस्में (varieties) | 60 x 20 cm | |
| संकर (hybrids) | 60 x 35 cm | ||
यादृच्छिक ज्यामिति (random geometry) में परिणाम, कोई समान स्थान (equal space) नहीं रखा जाता है, संसाधनों का या तो कम उपयोग (under exploited) किया जाता है या अधिक दोहन (over exploited) किया जाता है।
2) वर्गाकार विधि या वर्गाकार ज्यामिति (Square method or square geometry)पौधों को दोनों तरफ समान दूरी (equal distances) पर बोया जाता है। ज्यादातर बारहमासी फसलें (perennial crops), वृक्ष फसलें (tree crops) खेती के वर्ग तरीके (square method of cultivation) का पालन करती हैं।
लाभ (Advantages)इसमें पंक्तियां (rows) और स्तंभ (columns) होते हैं, पंक्ति का अंतर (row spacing) पौधों के बीच की दूरी से अधिक होता है। आयताकार विधि (rectangular method) में विभिन्न प्रकार मौजूद हैं:
a) ठोस पंक्ति (Solid row): प्रत्येक पंक्ति में पौधों के बीच कोई उचित दूरी (proper spacing) नहीं होगी। इसका पालन केवल उन वार्षिक फसलों (annual crops) के लिए किया जाता है जिनमें टिलरिंग पैटर्न (tillering pattern) होता है। एक निश्चित पंक्ति व्यवस्था (definite row arrangement) है लेकिन कोई स्तंभ व्यवस्था (column arrangement) नहीं है, उदा. गेहूं (wheat)।
b) युग्मित पंक्ति व्यवस्था (Paired row arrangement): यह भी एक आयताकार व्यवस्था (rectangular arrangement) है। एक फसल को 60 सेमी x 300 मीटर (likely meant 30cm) की दूरी की आवश्यकता होती है और यदि युग्मित पंक्ति (paired row) को अपनाना है, तो अंतरफसल (intercrop) को समायोजित (accommodate) करने के लिए रिक्ति को 60 सेमी के बजाय 90 सेमी में बदल दिया जाता है। आधार जनसंख्या (base population) स्थिर रखी जाती है। (उदा: युग्मित पंक्ति रोपण में वसंत मक्का अंतर-फसल - SPRING MAIZE INTER-CROP IN PAIRED ROW PLANTING)
c) पंक्ति छोड़ें (Skip row): रोपण की एक पंक्ति छोड़ दी जाती है (skipped) और इसलिए आबादी में कमी (reduction in population) होती है। इस कमी की भरपाई अंतरफसल (intercrop) लगाकर की जाती है; वर्षा आधारित या शुष्क भूमि कृषि (rainfed or dryland agriculture) में अभ्यास किया जाता है। (उदा: बाईं ओर पारंपरिक रोपण, दाईं ओर प्लांट1 - स्किप1 की तुलना में - Conventional planting on the left, compared with plant1 – skip1 on the right)
d) रोपण की त्रिभुजाकार विधि (Triangular method of planting): नारियल (coconut), आम (mango) आदि जैसी व्यापक दूरी वाली फसलों (wide spaced crops) के लिए इसकी सिफारिश की जाती है। इस प्रणाली में प्रति इकाई क्षेत्र (per unit area) में पौधों की संख्या अधिक है।