समस्याग्रस्त मिट्टी के लिए जल प्रबंधन (WATER MANAGEMENT FOR PROBLEM SOILS)

जब चट्टानें और खनिज अपक्षय प्रक्रिया (weathering process) से गुजरते हैं तो बड़ी मात्रा में घुलनशील लवण (soluble salts) बनते हैं। आर्द्र क्षेत्रों (humid regions) में ये लवण भूजल (ground water) और समुद्र में बह जाते हैं। लेकिन शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों (arid and semi arid regions) में वे मिट्टी में जमा (accumulate) हो जाते हैं। अत्यधिक सिंचाई (Excessive irrigation) और खराब जल प्रबंधन (poor water management) जल भराव (water logging) और नमक संचय (salt accumulation) के दो मुख्य कारण हैं। मिट्टी में लवणों का संचय (accumulation of salts) प्रतिकूल मिट्टी जल-वायु संबंध (unfavourable soil water-air relationship) की ओर ले जाता है और फसल उत्पादन (crop production) को प्रभावित करता है।

नमकीन मिट्टी (लवणता या क्षारीयता - salinity or alkalinity) के विकास (development) के मुख्य कारण (main causes) निम्नलिखित हैं:

1. शुष्क जलवायु (Arid climate)

पृथ्वी की सतह (earth surface) का लगभग 25% भाग शुष्क (arid) है जिसमें नमक का संचय (salt accumulation) एक आम समस्या (common problem) है। भारत (India) में लगभग 25 मिलियन हेक्टेयर (25 million hectare) अलग-अलग डिग्री के क्षरण (different degree of degradation) के साथ नमक से प्रभावित (salt affected) है।

2. उच्च उपमृदा जल स्तर (High subsoil water table)

जब जल स्तर (water table) केशिका सीमा (capillary range) के भीतर होता है, तो घुलनशील लवण (soluble salts) युक्त पानी सतह (surface) पर उगता है। जब पानी वाष्पित (evaporates) हो जाता है तो लवण पपड़ी (encrustation) के रूप में जमा हो जाते हैं। यह अनुमान (estimated) लगाया गया है कि पंजाब (Punjab) में पानी का स्तर बढ़ने (raising water table) के कारण सालाना लगभग 50,000 एकड़ (50,000 acres) खारा (saline) हो जाता है।

3. खराब जल निकासी (Poor drainage)

खराब जल निकासी (poor drainage) के कारण पानी का संचय जल भराव की स्थिति (water logging condition) की ओर ले जाता है जिससे नमक का संचय (salt accumulation) होता है।

4. सिंचाई जल की गुणवत्ता (Quality of irrigation water)

सोडियम कार्बोनेट (sodium carbonate) और बाइकार्बोनेट (bicarbonates) के साथ घुलनशील लवणों (soluble salts) की अनुमेय मात्रा (permissible quantities) से अधिक युक्त सिंचाई का पानी (Irrigation water) मिट्टी को नमकीन (salty) बनाता है।

5. समुद्र के पानी से जलप्लावन (Inundation with sea water)

तटीय क्षेत्र (coastal area) में, उच्च ज्वार (high tides) के दौरान समुद्र के पानी (sea water) द्वारा भूमि के आवधिक जलप्लावन (periodical inundation) से मिट्टी नमकीन (salty) हो जाती है। इसके अलावा गहरे बोरवेल (deep bore wells) भी खारी मिट्टी (saline soils) का कारण हैं।

6. मूल चट्टान खनिजों की प्रकृति (Nature of parent rock minerals)

मूल रॉक खनिजों (parent rock minerals) की खारी प्रकृति (saline nature) नमक संचय (salt accumulation) की ओर ले जाती है।

7. नहरों से रिसाव (Seepage form canals)

निरंतर रिसाव (continuous seepage) से नमक का संचय (salt accumulation) होता है।

समस्याग्रस्त मृदाओं का वर्गीकरण (Classification of problem soils)

मिट्टी की समस्याओं (soil problems) को इसमें भी विभाजित किया जा सकता है:

  1. रासायनिक (Chemical)
  2. शारीरिक / भौतिक (Physical)

मृदा रासायनिक समस्या (Soil Chemical Problem)

नमक प्रभावित मिट्टी (salt affected soils) को उनके ESP, pH और EC के आधार पर निम्नानुसार (as follows) वर्गीकृत (classified) किया जा सकता है:

मिट्टी का प्रकार (Soil Type) ESP (%) EC mhos/cm pH
खारा (Saline) < 15 > 4 < 8.5
खारा क्षार (Saline alkali) > 15 > 4 > 8.5
क्षार/सोडिक (Alkali/sodic) > 15 < 4 > 8.5

खारी मिट्टी का सुधार (Reclamation of Saline soil)

अच्छी गुणवत्ता वाले पानी (good quality of water) के साथ लीचिंग या निस्तब्धता (Leaching or flushing) बशर्ते (provided) जल भराव (water logged) की स्थिति न हो, अर्थात पानी को बाहर निकालने (flush water) के लिए अच्छी जल निकासी व्यवस्था (good drainage system) होनी चाहिए।

क्षारीय मिट्टी का सुधार (Reclamation of Alkali soil)

निम्नलिखित संशोधनों (following amendments) को जोड़कर विनिमेय सोडियम (exchangeable sodium) को घुलनशील लवणों (soluble salts) में परिवर्तित (converting) करके:

  1. कैल्शियम क्लोराइड (Calcium chloride)
  2. कैल्शियम सल्फेट (जिप्सम) (Calcium sulphate - Gypsum)
  3. सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric acid)
  4. फेरस सल्फेट (Ferrous sulphate)
  5. एल्युमिनियम सल्फेट (Aluminum sulphate)

खारी क्षारीय मिट्टी का सुधार (Reclamation of Saline alkali soil)

इन मृदाओं (soils) का सुधार (reclamation) क्षारीय मृदाओं (alkali soils) के समान है। पहला कदम (First step) विनिमेय सोडियम (exchangeable sodium) को हटाना है और फिर अतिरिक्त लवण (excess salts) और सोडियम को बाहर निकालना (leached out) है।

आमतौर पर नमक प्रभावित मिट्टी (salt affected soils) को समस्याग्रस्त मिट्टी (problem soils) के रूप में संदर्भित (referred) किया जाता है जैसा कि ऊपर (above) बताया गया है। इसके अलावा, पीएच मान (pH value) के आधार पर इसे अम्लीय मिट्टी (acid soils) के रूप में भी समूहीकृत (grouped) किया जा सकता है जहां पीएच मान 7 से कम (less than 7) होता है।

मिट्टी की रासायनिक समस्याओं के लिए प्रबंधन प्रथाएं (Management practices for chemical problems of soil)

खारी और क्षारीय मिट्टी (saline and alkali soils) का सुधार (Reclamation) तब तक पूरा नहीं होता (not complete) जब तक कि मिट्टी की उर्वरता (soil fertility) और मिट्टी की संरचना (structure of the soil) को बहाल (restore) करने के लिए उचित उपचारात्मक उपाय (proper remedial measures) नहीं किए जाते हैं। वहाँ समस्याओं को दूर करने के लिए (to overcome there problems) निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रबंधन प्रथाएँ (important management practices) हैं।

मिट्टी की भौतिक समस्याएं (Soil physical problems)

बहुत खुरदरी, बहुत चिकनी बनावट (Very coarse, very clayey texture), उथली गहराई (shallow depth) और मिट्टी की सतह में पपड़ी (encrustation in soil surface) संभावित शारीरिक समस्याएं (possible physical problems) हैं। बहुत अधिक जल प्रतिधारण (very high water retention) के साथ चिकनी मिट्टी (clayey soils) में बहुत बार सिंचाई (Too frequent irrigation) करने से खराब जल निकासी (poor drainage), जल भराव (water logging) और फसल को नुकसान (crop damage) होता है। उच्च Fe और Al हाइड्रॉक्साइड (high Fe and Al hydroxides) और कम कार्बनिक पदार्थ (low organic matter) के साथ लाल लेटराइट मिट्टी (red latritic soils) में अतिरिक्त सिंचाई (Excess irrigation) या भारी बारिश (heavy rain) मिट्टी की सतह को सख्त (hardening of soil surface) कर देती है। इससे खराब अंकुरण (poor germination), अंकुरण का प्रतिबंध (restriction of shoot) और विकास (development) और मिट्टी प्रोफ़ाइल (soil profile) में पानी का धीमा प्रवेश (slow entry of water) होता है।

मिट्टी की भौतिक समस्या के लिए जल प्रबंधन प्रथाएं (Water management practices for physical problem of soil)

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