मूंगफली (Groundnut)
अराचिस हाइपोगिया (Arachis hypogaea)
उत्पत्ति (Origin)
- दक्षिण अमेरिका (South America)
- ब्राज़ील (Brazil) को कई जंगली प्रजातियों (wild spp) का केंद्र माना जाता है।
- नई दुनिया की फसल के मूल निवासी (Native of new world crop)।
- मेसो-अमेरिका और दक्षिण अमेरिका (Meso-America & South America) में बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।
- पेरू (Peru) से बचे हुए पेरीकार्प ऊतक (Remnant pericarp tissue) 3900-3750 साल पहले के हैं।
अराचिस हाइपोगिया (Arachis hypogaea) (मूंगफली) शब्द दो ग्रीक शब्दों (two Greek words) से लिया गया है, एराचिस (Arachis) का अर्थ है फली (legume) और हाइपोगिया (hypogaea) का अर्थ है जमीन के नीचे (below ground) (मिट्टी में फली के निर्माण का जिक्र - referring to the formation of pods in the soil)। मूंगफली (Groundnut) कहीं भी जंगली अवस्था (wild state) में नहीं पाई गई है और इसलिए इसकी उत्पत्ति (origin) काफी अटकलों (speculations) और यहां तक कि विवाद का विषय रही है। इसकी उत्पत्ति के बारे में दो विचारधाराएं (two school of thoughts) हैं - एक इस दृष्टिकोण का समर्थन करती है कि मूंगफली की उत्पत्ति अफ्रीका (Africa) में हुई थी और दूसरी इसकी उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका के ब्राजील (Brazil in South America) में होने का पता लगाती है। कुछ साहित्य (literatures) के अनुसार यह स्पष्ट है कि सोलहवीं सदी (sixteenth) की शुरुआत से अफ्रीका के पश्चिमी तट (west cost of Africa) पर स्वाभाविक रूप से उन्होंने इसे ब्राजील से अफ्रीका (Brazil into Africa) में पेश किया। डी गंडोले (De Gandolle - 1825) ने कहा कि इसकी उत्पत्ति ब्राजील (दक्षिण अमेरिका) में हुई है। भारत (India) में इसके प्रवेश को जेसुइट फादर्स (मिशनरियों - Jesuit Fathers / Missionaries) के माध्यम से माना जाता है, जिन्होंने भारत में अपनी पहली लैंडिंग (first landing) के तुरंत बाद यानी 16वीं शताब्दी (16th century) के पूर्वार्ध (first half) में वास्को डी गामा (Vasco De Gama) का अनुसरण किया था।
वितरण (Distribution)
- उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (tropics and subtropical zones) में।
- भारत, चीन, सूडान, नाइजीरिया, सेनेगल, ज़ैरे, यूएसए (India, China, Sudan, Nigeria, Senegal, Zaire, USA)।
- भारत में (In India): गुजरात (Gujarat), एपी (AP), टीएन (TN), कर्नाटक (Karnataka), महाराष्ट्र (Maharastra)।
भारत में प्रसार (Spread in India)
- 19वीं सदी की शुरुआत (early 19th century) से व्यावसायिक खेती (Commercial cultivation)।
- तमिलनाडु (Tamil Nadu) के दक्षिण आरकोट (South Arcot) में 1840 में सबसे बड़ा क्षेत्र (Largest area)।
- फिलीपींस या चीन या जावा (Philippines or China or Java) के माध्यम से नई दुनिया, दक्षिण अमेरिका (New World, South America) से प्रवेश का संभावित मार्ग।
- मूंगफली के तेल का उत्पादन (Ground nut oil production) 1840 से ही हो रहा था।
- आज इसे सबसे बड़ी फसल (largest crop) के रूप में उगाया और खाया (cultivated and consumed) जाता है।
विश्व - क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता (मिलियन हेक्टेयर और मिलियन टन) (World - Area, production and productivity - million hectares and million tonnes)
| देश (Country) |
क्षेत्रफल (Area) |
उत्पादन (Production) |
उत्पादकता (Productivity) |
| भारत (India) | 8.50 | 8.40 | 0.99 |
| चीन (China) | 3.62 | 9.72 | 2.69 |
| नाइजीरिया (Nigeria) | 1.48 | 1.20 | 1.15 |
| सूडान (Sudan) | 1.09 | 0.81 | 0.74 |
| सेनेगल (Senegal) | 0.89 | 0.68 | 0.76 |
| ज़ैरे (Ziare) | 0.66 | 0.55 | 0.83 |
| यूएसए (USA) | 0.65 | 1.94 | 3.00 |
| विश्व (World) | 22.89 | 31.59 | 1.38 |
विश्व का तिलहन परिदृश्य (Oilseed scenario of the world)
- 80 के दशक के मध्य तक (Until mid 80's): सोयाबीन (Soybean) > बिनौला तेल (Cotton seed oil) > मूंगफली (groundnut)
- आज (Today): सोयाबीन (Soybean) > बिनौला तेल (Cotton seed oil) > रेपसीड तेल (rapeseed oil) > मूंगफली (peanut) > सूरजमुखी (sunflower)
भारत में मूंगफली का क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता (मिलियन हेक्टेयर और मिलियन टन) (Ground nut area, production and productivity in India - Million ha & Million t)
| राज्य (State) |
क्षेत्रफल (Area) |
उत्पादन (Production) |
उत्पादकता (Productivity) |
| गुजरात (Gujarat) | 1.99 | 2.38 | 1.20 |
| एपी (AP) | 2.17 | 1.77 | 0.82 |
| टीएन (TN) | 1.15 | 1.84 | 1.60 |
| कर्नाटक (Karnataka) | 1.21 | 0.95 | 0.79 |
| महाराष्ट्र (Maharastra) | 0.60 | 0.63 | 1.04 |
| अखिल भारतीय (All India) | 8.50 | 8.40 | 0.99 |
वर्गीकरण (Classification)
- गुच्छा (Bunch)
- अर्ध प्रसार (Semi spreading) और
- फैला हुआ (Spreading)
- वर्जीनिया (Virginia), स्पेनिश (Spanish) और वालेंसिया (Valencia) भी।
- सभी क्रॉसिंग उद्देश्य (crossing purpose) के लिए अनुकूल हैं।
जलवायु (Climate)
- जलवायु की एक विस्तृत श्रृंखला (wide range of climate) के अनुकूल।
- हालाँकि पौधा प्रभावित (plant gets affected) होता है जब:
- प्रारंभिक वृद्धि और फूल आने (early growth & flowering) के दौरान कम प्रकाश तीव्रता (Low light intensity)।
- फूल आने के समय (at flowering) बादल छाए (Cloudy weather) रहें।
- 25-30°C की तापमान सीमा (temp range)।
- < 20°C और > 35°C होने पर वृद्धि धीमी (growth gets retarded) हो जाती है।
- एक बार स्थापित होने के बाद (Once established):
- यह सूखे को सहन (tolerate drought) कर सकता है।
- यदि ठीक से जल निकासी (drained properly) हो तो एक सप्ताह तक बाढ़ (flood) भी सहन कर सकता है।
- 500-1000 मिमी की वर्षा (rainfall) उचित है, लेकिन 300-400 मिमी के अच्छे वितरण (well distribution) के साथ अच्छी फसल (good crop) पैदा कर सकती है।
मिट्टी (Soil)
- अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी (Well drained soil) बहुत आदर्श है।
- हल्के रंग की (Light colored) ढीली (loose), भुरभुरी (friable), रेतीली दोमट (sandy loam)।
- अच्छी तरह से आपूर्ति किए गए कैल्शियम (calcium) और जैविक पदार्थ (organic matter) की मध्यम मात्रा वाली मिट्टी।
- मिट्टी (clay) की तुलना में रेतीली दोमट (Sandy loam) अधिक उपयुक्त है।
- चूंकि पेग (peg) का प्रवेश आसान और व्यवहार्य (easy and viable) है।
- मिट्टी का पीएच 6.0 से 6.5 (soil pH of 6.0 to 6.5) (5 से 7 तक - ranges 5 to 7)।
- खारी मिट्टी (Saline soils) कम उपयुक्त होती है।
- चूंकि इसमें नमक सहनशीलता कम (low salt tolerance) होती है।
विकास के चरण (Growth stages)
वानस्पतिक (Vegetative)
- VE – मिट्टी के पास बीजपत्र का उभरना (Emergence of cotyledons near the soil)
- V0 – बीजपत्र चपटे और खुले (Cotyledons are flat and open) होते हैं
- V1 - पहला टेट्रा पर्णपाती पत्ता (First tetra foliate leaf one)
प्रजनन (Reproductive)
- R1 – ब्लूम वन (Bloom one)
- R2 – पेग वन (Peg one)
- R3 – फली एक (Pod one)
- R4 - पूरी फली एक (Full pod one)
- R5 – बीज की शुरुआत एक (Beginning seed one)
- R6 – पूर्ण बीज एक (Full seed one)
- R7 – परिपक्वता की शुरुआत (Beginning maturity one)
- R8 – फसल की परिपक्वता (Harvest maturity)
- R9 – अधिक परिपक्व फली (Over matured pod)
बढ़ते मौसम (Growing seasons)
भारत में चार मौसमों (four seasons) में उगाया जाता है:
- खरीफ (Kharif): 85% वर्षा आधारित (Rainfed), जून का दूसरा पखवाड़ा (Second fortnight of June)।
- रबी (Rabi): जहां सर्दी बहुत हल्की होती है (winter is very mild) - आमतौर पर चावल की परती (rice fallows) में (सितंबर-दिसंबर - Sep-Dec)।
- ग्रीष्मकालीन (Summer): दिसंबर का दूसरा पखवाड़ा - फरवरी का पहला सप्ताह (II FN Dec- I Week Feb)।
- वसंत (Spring): फरवरी का पहला पखवाड़ा - मार्च का पहला सप्ताह (I FN Feb – I Week Mar)।
तमिलनाडु में (In Tamil Nadu):
- वर्षा आधारित (Rainfed):
- अप्रैल-मई (Apr-May) - पोलाची (Pollachi), थेनी (Theni), तेनकासी (Tenkasi)।
- जून-जुलाई (Jun-Jul) - उत्तर पूर्वी क्षेत्र (NEZ)।
- जुलाई-अगस्त (Jul-Aug) - अधिकांश जिले (Most dts)।
- अक्टूबर (Oct) - उत्तर पूर्वी क्षेत्र और कन्याकुमारी (NEZ & Kanyakumari)।
- सिंचित (Irrigated):
- ग्रीष्मकालीन (Summer) - सभी जिले (All districts)।
- दिसंबर-जनवरी (Dec-Jan) - सभी जिले (All dts)।
- फरवरी-मार्च (Feb-Mar) - नया डेल्टा (New delta)।
तमिलनाडु में किस्में (Varieties in Tamil Nadu)
- TMV 2 – कॉस्मोपॉलिटन – गुच्छा (cosmopolitan – bunch) (360g)
- TMV 7 – गुच्छा (Bunch) (360g)
- TMV 10 – अर्ध फैलाव (semi spreading) (540g)
- JL 24 – गुच्छा - वर्षा आधारित/सिंचित (Bunch - rainfed / irrigated) (460g)
- VRI 2 – स्पैनिश गुच्छा (Spanish bunch) (500g)
- VRI 3 – गुच्छा (Bunch) (350g)
- VRI 4 – गुच्छा (Bunch) (408g)
- CO 1, 2, BSR 1 – गुच्छा (Bunch)
बीज और बीज उपचार (Seeds and seed treatments)
सुस्ती (Dormancy)
- बीज सुस्ती (seed dormancy) के लिए किस्में अलग-अलग (Varieties differ) होती हैं।
- यह वर्जीनिया प्रकार (Virginia types) में आम है।
- यदि कटाई में देरी (harvest delayed) हो तो सुस्ती दूर हो सकती है।
- आम तौर पर यह भंडारण (storage) के दौरान दूर हो सकता है।
गुठली (kernel) का चयन महत्वपूर्ण है:
- स्वस्थ परिपक्व मोटे बीज (Sound matured bold seeds)।
- सिकुड़े हुए (shriveled), टूटे हुए (broken), रोग से प्रभावित (disease affected) बीजों को फेंक दें।
- हाथ से छिले (Hand decorticated) बीज को प्राथमिकता दी जाती है।
- जैव उर्वरकों (bio-fertilizers) - राइजोबियल संस्कृतियों (Rhizobial cultures) के साथ उपचार करें।
- बुवाई से पहले (Before sowing) ट्राइकोडर्मा विरिड (Trichoderma viride) @ 4 ग्राम/किलोग्राम (4g /kg)।
बीज प्रबंधन (Seed management)
- चयनित बीजों (Selected seeds) को 6 घंटे के लिए 0.5% CaCl2 घोल (solution) में मात्रा के हिसाब से 50% भिगोया (soaked) जाता है।
- बीजों को नम गनी बैग (moist gunny bag) में फैलाएं और 20-24 घंटे तक नम गनी बैग से ढक दें।
- रेडिकल (radicle) की व्यवहार्य अभिव्यक्ति (viable expression) वाले बीजों को अकेले चुना जाता है और बुवाई की नमी (sowing moisture) के लिए छाया में सुखाया (shade dried) जाता है।
- अव्यवहार्य बीजों (Unviable seeds) को छोड़ दिया जाता है।
- अंकुरण 95% तक सुनिश्चित (Germination is ensured by 95%) किया जाता है।
बीज दर (Seed rate)
- वर्षा आधारित के लिए 140 किग्रा (140 kg for rainfed)।
- सिंचित के लिए 125 किग्रा (125 kg for irrigated)।
- यदि मोटे बीज (bold seeded) हैं तो 10% बढ़ाएँ (Increase by 10%) (जैसे JL 24, CO 2 और TMV 10)।
रिक्ति (Spacing)
- 30 सेमी x 10 सेमी (30 cm x 10 cm)।
- जहां भी रिंग मोज़ेक (ring mosaic) प्रचलित हो वहां 15 सेमी x 15 सेमी।
खेत की तैयारी (Field preparation)
- महीन जुताई (Fine tilth) प्राप्त की जानी चाहिए।
- कठोर पैन वाली मिट्टी (hard pan) के लिए छेनी (Chiseling)।
- मिट्टी की सतह के पपड़ी (crusting) के लिए संशोधन (Amendments)।
- एफवाईएम / खाद (FYM / compost) के साथ 2 टन/हेक्टेयर (2t /ha) चूना (Lime)।
- फार्म बेड और चैनल (Farm beds and channels): 10 से 20 वर्ग मीटर (10 to 20 m-2)।
बुवाई (Sowing)
- वर्षा आधारित (Rainfed):
- सीड ड्रिल (seed drill) या गोर्रू (gorru) का प्रयोग करें।
- देशी हल (country plough) के पीछे भी बोया जा सकता है।
- मानसून पूर्व बुवाई (Pre-monsoon sowing) भी एक तरीका है।
- सिंचित (Irrigated):
- पर्याप्त मिट्टी की नमी (adequate soil moisture) के साथ 4 सेमी गहराई पर डिबलिंग (Dibbling at 4cm depth)।
- देशी हल (country plough) के पीछे भी बोया जा सकता है।
- यदि सूखी मिट्टी (dry soil) में बोया जाए तो बुवाई के बाद सिंचाई (Irrigation may be after sowing) हो सकती है।
पोषक तत्व प्रबंधन (Nutrient management)
- वर्षा आधारित (Rainfed): 10 : 10: 45 किग्रा N, P2O5, K2O / हेक्टेयर।
- सिंचित (Irrigated): 17 : 34 : 54 किग्रा N, P2O5, K2O / हेक्टेयर।
- सल्फर कीचड़ (Sulphur sludge) 60 किग्रा / हेक्टेयर।
- मूंगफली को जिप्सम (Gypsum to groundnut):
- 40-45 DAS पर सभी गैर-चूनेदार मिट्टी (non calcareous soils) के लिए 400 किग्रा।
- बगल में लगाएं और सिंचाई करें (Apply by the side and irrigate)।
सिंचाई प्रबंधन (Irrigation management)
- ASM के 25% कमी पर सिंचाई (Irrigation at 25% depletion of ASM)।
- IW/CPE अनुपात (ratio):
- 0.5 से 40 DAS तक
- 0.75 बाद में (later)
- कुल पानी की आवश्यकता (Total water requirement) 400-600 मिमी।
- बुवाई या बुवाई पूर्व सिंचाई (Sowing or pre-sowing irrigation)।
- बुवाई के 20 दिन बाद (20 days after sowing)।
- फूल आने पर (At flowering) 2 सिंचाई।
- पेगिंग (pegging) पर एक या दो।
- फली के विकास (pod development) में 2-3।
खरपतवार प्रबंधन (Weed management)
- खरपतवार (weeds) निकालने के लिए मिट्टी को हिलाने से हवा भी लगती है (aerates)।
- पेग (peg) बनने के लिए वातन (Aeration) अधिक आवश्यक है।
- फ्लुक्लोरैलिन (Fluchloralin) 2 लीटर: बुवाई से पहले (pre-sowing incorporation) शामिल करना या स्प्रे के रूप में पूर्व-उद्भव आवेदन (Pre emergence application as spray)।
- मेटालाक्लोर (Metalachlor) 1 किग्रा: पूर्व-उद्भव और हाथ से निराई (Pre-emergence and hand weeding)।
- यदि कोई शाकनाशी (herbicide) लागू नहीं किया गया है तो 20 और 40 DAS पर दो बार हाथ से निराई (hand weeding)।
पेग का निर्माण (Peg formation)
- गुच्छे (bunch) में विकसित होने वाले पेग (pegs) की संख्या अधिक होती है।
- दैनिक न्यूनतम तापमान (Daily min temp) सकारात्मक रूप से सहसंबद्ध (positively correlated) है।
- लेकिन अधिकतम तापमान (maximum temp) नकारात्मक (negative)।
- उच्च प्रकाश तीव्रता (High light intensity) पेगिंग को प्रभावित करती है।
- यदि मिट्टी की नमी मुरझाने (wilting) तक जाती है:
- पेग बनने की प्रक्रिया (Process of peg formation) रुक जाती है।
- बने हुए पेग सूख सकते हैं (dry)।
- जल्दी बने फूल बाद में पेग बनने से रोक (inhibit) सकते हैं।
- प्रो-भ्रूण (pro-embryo) द्वारा उत्पादित ऑक्ज़िन (Auxin) और जीए (GA) विकास को बढ़ावा (promotes growth) देते हैं।
- पेग की लंबाई जेनेरिक (generic) है।
- पेग की मजबूती प्रबंधन के लिए एक चिंता का विषय (concern for management) है।
कटाई एवं प्रसंस्करण (Harvesting & Processing)
परिपक्वता (Maturity)
- पत्तियों का पीला पड़ना (Yellowing of foliage)।
- पत्तियों पर धब्बे (Spotting of leaves)।
- पत्तियों का गिरना (Dropping of leaves)।
- फलियों का कठोर और कड़ा होना (Hardening and toughness of pods)।
- फली के अंदर गहरे टैनिन का रंग बदलना (Dark tannin discoloration inside the pods)।
- बिना झुर्री वाली गुठली (Unwrinkled kernels) और टेस्टा का रंग (coloration of testa)।
कटाई एवं प्रसंस्करण (Harvesting & Processing)
- कटाई में देरी (Delay in harvest) से 5-15% की कमी होती है।
- गुच्छा प्रकार (Bunch type) आमतौर पर 100-105 दिनों में परिपक्व हो जाता है।
- फैलाव (Spreading) 130-150 दिन।
- गुच्छे (bunch) में उखाड़ना (Uprooting) एक तरीका है। ब्लेड हैरो (Blade harrows), ट्रैक्टर चालित डिगर (tractor drawn diggers)।
- फैलने वाले प्रकारों (spreading types) में खुदाई (digging) द्वारा।
भंडारण (Storage):
- फली वाले पौधे को दो दिनों तक सुखाया जाता है (dried for two days)।
- फली (Pods) को अलग कर 2-3 दिन खुली धूप (open sun) में सुखाया जाता है।
- फलियों के उचित रूप से सूखने (Proper drying) का निर्णय इस आधार पर किया जा सकता है:
- हिलाने पर फली से खड़खड़ाहट (rattling sound) की आवाज आनी चाहिए।
- जब गुठली (kernel) को अंगूठे और तर्जनी (thumb and index finger) के बीच दबाया जाता है तो इसे 2 बीजपत्रों (cotyledons) में विभाजित होना चाहिए।
- जब गुठली (kernel) की सतह को जोर से रगड़ा जाता है तो टेस्टा (testa) का एक हिस्सा उतर जाना चाहिए।
फसल प्रणाली (Cropping systems)
- पंक्ति अंतरफसल (Row Intercropping): मूंगफली (Peanut) + ज्वार (sorghum) / रागी (ragi) / लाल चना (redgram) / मिर्च (chilli) / कपास (cotton), सूरजमुखी (sunflower) / अरंडी (castor) आदि अलग-अलग अनुपात (proportions) में।
- अधिकतर दालों के साथ मिश्रित फसल (Mostly mixed crop with pulses)।
- मूंगफली - गेहूं (Groundnut – wheat)।
- चावल - मूंगफली (Rice - groundnut)।
- चावल - चावल - मूंगफली (Rice – rice - groundnut)।
आर्थिक उपयोग (Economic uses)
- खाद्य तेल (Edible oil - 50% oil)।
- हौल्म्स (Haulms) मवेशियों के लिए स्वादिष्ट चारा (palatable fodder) है। हे (hay) या साइलेज (silage) के रूप में हो सकता है।
- मूंगफली की गुठली (kernels) में उच्च प्रोटीन होता है:
- मांस (meat) से 1.3% गुना अधिक।
- अंडे (egg) से 2.5 गुना अधिक।
- फलों (fruits) से 8 गुना ज्यादा।
- अनेक औद्योगिक उपयोग (Numerous industrial uses):
- वनस्पति तेल तैयार करना (Preparation veg oil - वनस्पति)।
- साबुन (soap) के लिए कम गुणवत्ता वाला तेल।
- सौंदर्य प्रसाधन (beauty aids), शेविंग क्रीम (shaving cream), कोल्ड क्रीम (cold cream) के लिए।
- चिकित्सा सहायता के लिए (For medical aids) - प्लास्टर (plasters), मलहम (ointments)।
- लॉन्ड्री स्टार्च (laundry starch) और कागज (paper), चिपचिपा टेप (gummed tapes) और प्लास्टिक (plastics) के निर्माण के लिए केक पाउडर (Cake powder)।
- सक्रिय कार्बन (Activated carbon)।
- खली (Oil cake) - अच्छी जैविक खाद (organic manure) और पशु चारा (cattle feed)।
- केक का आटा (Cake flour) बेकर्स (bakers), कन्फेक्शनरों (confectioners), कैंडी बनाने वालों (candy makers) और आइसक्रीम निर्माताओं (ice cream manufactures) के लिए आसानी से गेहूं और अन्य के साथ मिल जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल
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