यह सोयाबीन और कपास की तरह दोहरे उद्देश्य (dual purpose) वाली फसल है। इसे 'पुरानी दुनिया का रेशा' ('Old world fibre') कहा जाता है। हाल ही में भारत में इसका उपयोग मुख्य रूप से तिलहन (oilseed) के लिए किया जाता है।
अलसी का रेशा या सन (Linseed fibre or FLAX) कपड़े में काता (spun to cloth) जाने वाला पहला वनस्पति रेशा (vegetable fibres) है।
बीज में तेल (Oil in seed) का उपयोग बाद में ही किया गया।
जब रेशे के लिए उगाया जाता है तो इसे फाइबर फ्लैक्स (Fibre flax) कहा जाता है।
जब तेल के लिए पहचाना गया तो:
तेल सन (Oil flax) या
बीज सन (Seed flax) या
अलसी (Linseed)
लिनोला (Linola) - (खाद्य अलसी - Edible linseed)
अलसी का महत्व (Importance of Linseed)
मुख्य रूप से फाइबर के लिए (primarily considered for fibre) - फ्लैक्स (FLAX)।
भारत में मुख्य रूप से तिलहन के लिए (primarily for oil seed)।
पूरे पौधे का उपयोग (Entire plant has usage) होता है।
तेल (Oil):
औद्योगिक उद्देश्य (industrial purpose) के लिए 80%।
सीधी खपत (direct consumption) के लिए बहुत छोटे पैमाने (small scale) पर।
लिनोलेनिक एसिड (Linolenic acid - 66%) से भरपूर:
बिल्कुल सही सुखाने वाला तेल (Perfect drying oil), पेंट और वार्निश उद्योग (paint & varnish industry) में इस्तेमाल होता है।
लिथोग्राफिक स्याही (lithographic inks) और साबुन (soaps) के निर्माण और राजमार्गों (high ways) की कोटिंग (coating) के लिए उपयोग किया जाता है।
हाइड्रोजनीकरण (hydrogenation) के बाद, लोंगो के लिए विकल्प (substitute for tallow) (जानवरों से कठोर वसा - hard fat from animals)।
खली (Oil cake): दुधारू पशु (milch animal) और खाद (manure) के रूप में अच्छा है।
तना (Stem): अच्छी गुणवत्ता वाला रेशा (good quality fibre - लिनन) पैदा करता है जिसमें ताकत और स्थायित्व (strength and durability) होता है।
रेशे चमकदार (lustrous) होते हैं और ऊन, रेशम, सूती (wool, silk, cotton) के साथ अच्छी तरह से मिश्रित (blend well) होते हैं।
रक्षा उद्देश्यों (defense purposes) के लिए मजबूत कैनवास (Strong canvas), सूटिंग (suiting), शर्टिंग (shirting) और विभिन्न अपरिहार्य उत्पाद (indispensable products)।
उच्च गुणवत्ता वाले कागज (high quality paper) के लिए वुडी पदार्थ (Woody matter)।
मांग बढ़ रही है (Demand is increasing), परिणामस्वरूप आयात चल रहा है (import is going on)।
भारत में अलसी के लिए समस्याएं और संभावनाएं (Problems and prospects for linseed in India)
फाइबर के रूप में (As fibre) आज भी गुंजाइश (scope) है, लेकिन किसानों की पसंद तिलहन (oilseed) के लिए है।
तिलहन के रूप में उद्योग (industry) के लिए भी इसका महत्व कम हो रहा है क्योंकि:
पेंट उद्योग सिंथेटिक और पेट्रोलियम आधारित विकल्पों (synthetic and petroleum based alternatives) पर भरोसा कर रहे हैं।
क्षेत्र का विस्तार (Expansion of area) केवल ठंडे क्षेत्रों (cooler regions) तक सीमित है।
विश्व परिदृश्य - अलसी - 1999-2000 (मिलियन हेक्टेयर और मिलियन टन) (World Scenario – Linseed)
देश (Country)
क्षेत्रफल (Area)
उत्पादन (Production)
उत्पादकता (Productivity)
भारत (India)
0.80
0.28
0.34
कनाडा (Canada)
0.79
1.05
1.32
चीन (China)
0.57
0.20
1.30
यूक्रेन (Ukraine)
0.21
0.30
1.41
यूके (UK)
0.21
0.30
1.41
जर्मनी (Germany)
0.20
0.34
1.69
यूएसए (USA)
0.16
0.20
0.39
रूस (Russia)
0.11
0.03
0.25
अर्जेंटीना (Argentina)
0.10
0.09
0.84
विश्व (World)
3.48
2.98
0.86
भारतीय परिदृश्य - अलसी - 1999 -2000 (मिलियन हेक्टेयर और मिलियन टन) (Indian Scenario – Linseed)
राज्य (State)
क्षेत्रफल (Area)
उत्पादन (Production)
उत्पादकता (Productivity)
एमपी (MP)
0.40
0.13
0.34
यूपी (UP)
0.13
0.06
0.47
महाराष्ट्र (Maharastra)
0.13
0.04
0.30
बिहार (Bihar)
0.06
0.03
0.57
भारत (India)
0.80
0.28
0.34
भारत में अलसी की खेती असम, एचपी, जेएंडके, कर्नाटक, एओ, नागालैंड, उड़ीसा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी की जाती है।
उत्पत्ति (Origin)
कोई स्पष्ट केंद्र (clear centre) नहीं।
इथियोपिया (Ethiopia) से हो सकता है।
फारस की खाड़ी (Persian gulf): कैस्पियन सागर और काला सागर (Caspian sea and Black sea)।
भारत में परिचय की संभावनाएं (Possibilities of introduction to India):
मध्य एशिया से आर्यों द्वारा (By Aryans from Central Asia)।
यूरोप के स्रोतों (Europe sources) से।
आर्यन सामग्री अन्य प्रजातियों के साथ पार हो गई (crossed with other species)।
दक्षिण में प्रायद्वीपीय अलसी (Peninsular linseed) और उत्तर में गंगा की अलसी (Gangetic linseed) की स्वतंत्र उत्पत्ति (Independent origin)।
पौधा (The plant)
वार्षिक जड़ी बूटी (Annual herb)।
मूसला जड़ प्रणाली (Tap root system):
गंगा समूह (Gangetic group) - द्वितीयक जड़ों (secondary roots) के साथ उथला (shallow)।
फाइबर किस्में (Fibre varieties) पतली, लंबी बढ़ती, कम टिलरिंग (less tillering) वाली होती हैं।
तिलहन (Oil seed) बौने, अत्यधिक टिलरिंग (highly tillering) और शाखित (branched) होते हैं।
पत्तियां (Leaves): आकर्षक (Attractive), रैखिक से भालाकार (Linear to lanceolate)। चिकनी, किनारे पूरी तरह से, कुंद शीर्ष (blunt apex) तक पतला। विभिन्न आकार और मोटाई के साथ हरे (Green) से नीले हरे (bluish green)।
पुष्पक्रम (Inflorescence): एकल फूल (single flower) के साथ कोरिम्बोज़ (Carymbose)। पंखुड़ियाँ (Petals) 5, अलग-अलग रंग। अंडाशय (Ovary) 5 कोशिका वाला होता है, प्रत्येक लोक्यूल (locule) को झूठे सेप्टम (false septum) द्वारा दो में विभाजित किया जाता है, इस प्रकार 10 कमरे वाला कैप्सूल (10 roomed capsule) बनता है, जिसमें से प्रत्येक में एक बीजांड (ovule) होता है।
फल (fruit) 5-10 मिमी व्यास का कैप्सूल (capsule) है। परिपक्व कैप्सूल (Mature capsule) ख़राब (dehiscent) है।
बीज (Seeds):
अंडाकार (Oval), चिकना (smooth), चमकदार (shiny) और नुकीला (pointed)।
बीज का रंग शुद्ध पीले, भूरे रंग (brownish tinge) के साथ पीलापन, हल्के भूरे, गहरे भूरे रंग में भिन्न होता है।
हल्का पीला (Pale yellow) - खाद्य (edible) (लिनोला - Linola, लिनोलिक अधिक है - Linoleic is higher)।
भूरा (Brown) - औद्योगिक उद्देश्य (industrial purpose)।
जलवायु (Climate)
वानस्पतिक (vegetative) अवस्था के दौरान मध्यम से ठंडे तापमान (moderate to cool temp) की आवश्यकता होती है।
परिपक्वता (maturity) के दौरान शुष्क मौसम (Dry weather)।
तिलहन के लिए फसल (Crop for oil seed): मध्यम ठंडी जलवायु (Moderate cool climate)।
फाइबर के लिए फसल (Crop for fibre): ठंडी और नम जलवायु (Cool and moist climate)।
पाले के प्रति संवेदनशील (Susceptible to frost)।
सूखे के प्रति काफी प्रतिरोधी (Fairly resistant to drought)।
अच्छी तरह से वितरित वर्षा (Well distributed rainfall), लेकिन भारी बारिश (heavy rains) नहीं।
शुष्क क्षेत्रों (dry regions) में सिंचित (irrigated) के रूप में भी उगाया जाता है।
मिट्टी (Soils)
रेतीली और खराब जल निकासी वाली मिट्टी (sandy and poorly drained soils) को छोड़कर विभिन्न प्रकार की मिट्टी।
अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ (Well drained fertile), मध्यम भारी मिट्टी, सिल्टी दोमट (silty loam), मिट्टी दोमट (clay loam) और सिल्टी मिट्टी (silty clay) सबसे अच्छी होती हैं।
मिट्टी पीएच 5.0 से 7.0।
एसिड रेंज (Acid range) 6.0 अधिक उपयुक्त है।
लवणीय (saline) अवस्था में तेल की मात्रा कम (decreases) हो जाती है लेकिन आयोडीन बढ़ (increases) जाता है।
प्रबंधन (Management)
खेत की तैयारी (Field preparation)
क्यारियाँ और चैनल (Beds and channel)।
खड़ी फसल (standing crop) में धान की परती (rice fallow) के लिए।
किस्में (Varieties)
'चावल परती' ('Rice fallow') के लिए - R 552
'वर्षा आधारित' ('Rainfed') के लिए - किरण (Kiran), शीतल (Sheetal)
सिंचित (Irrigated) के लिए - जवाहर 23 (Jawahar 23)
असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और पंजाब की वर्षा आधारित और सिंचित दोनों स्थिति के लिए: शुभ्रा (Shubra), हिमालिनि (Himalini)
मौसम (Season)
अक्टूबर - 15 नवंबर (Oct - Nov 15th)।
अक्टूबर का मध्य (Middle of October) सबसे उपयुक्त है।
बीज दर (Seed rate)
25-50 किलो राज्यों (States), किस्मों (Varieties) और तरीकों (Methods) के कारण भिन्न होता है।
प्रबंधन पिछले चावल (previous rice) से शुरू होता है।
चावल को लगाए गए पोषक तत्व (Nutrients applied to rice)।
तमिलनाडु के चावल परती दाल (rice fallow pulse of Tamil Nadu) की तरह लेवलिंग (Leveling), खरपतवार प्रबंधन (weed management) और जल प्रबंधन (water management)।
जल प्रबंधन (Water Management)
सिंचाई के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया (Responds well to irrigation) देता है।
>90% वर्षा आधारित (rainfed) है फिर भी एक या दो सिंचाई उपज (yield) को बढ़ाएगी।
35 और 75 DAS पर दो सिंचाई।
हल्की मिट्टी (light soils) में 3-4 सिंचाई।
फूल आने के बाद (after flowering) सूखा पड़ने से बीज की उपज (seed yield) कम हो जाती है।
तने के बढ़ाव (stem elongation) पर नमी का तनाव (Moisture stress) बीज की उपज को लाभ पहुंचाता है।
सिंचाई की अधिक (>4) संख्या (more number of irrigations) के साथ:
WUE घटता (decreases) है।
तेल की मात्रा कम (Oil content decreases) होती है।
खरपतवार प्रबंधन (Weed Management)
फसल-खरपतवार प्रतिस्पर्धा (Crop-weed competition) 20-45 DAS है।
15 DAS पर निराई और वातन (Hoeing and aerating)।
शाकनाशी (Herbicides):
PPI - फ्लुक्लोरैलिन (Fluchloralin) @ 1.0 किलो।
PE - मेथाबेंज़थिओज़ुरन (Methabenzthiozuran) @ 1 किलो।
कस्कुटा (Cuscuta) अलसी के लिए एक खतरा (menace) है:
गैर-मेजबान अनाज (non-host cereals) के साथ फसल चक्र (Crop rotation)।
शाकनाशी (Herbicides): प्रोनोमाइड (Pronomide) @ 1.5 किलो 2-3 सप्ताह के चरण में उद्भव के बाद। फ्लुक्लोरैलिन (Fluchloralin) का PPI ही संक्रमण (infestation) को कम करने के लिए पर्याप्त है।
परिपक्वता और कटाई (Maturity and Harvest)
परिपक्वता (Maturity): जब तना वुडी (Woody) हो जाता है, कैप्सूल कठोर (hard) हो जाते हैं, पत्तियां सूख जाती हैं (Leaves dry), कैप्सूल भूरे (brown) हो जाते हैं और बीज चमकदार (shiny) हो जाते हैं।
फसल (Harvest): पूरे पौधे को दरांती (Sickle the entire plant) से काट लें।
थ्रेसिंग और फसल के बाद का प्रसंस्करण (Threshing & Post harvest processing)
कटी हुई फसल (Cut crop) को खेत में 3-4 दिनों तक सुखाया जाता है।
बीज (seed) के लिए द्वितीयक और तृतीयक शाखाओं (secondary and tertiary branches) वाले पौधों को कैप्सूल के साथ अलग किया जाना है।
बीजों के लिए थ्रेसिंग (threshing) के बाद डंठल (stalk) को फाइबर (fibre) के लिए संसाधित किया जाता है।
रेटिंग (Retting)
यह फाइबर निष्कर्षण (fibre extraction) की एक प्रक्रिया है।
रेटिंग के प्रकार (Kinds of retting): गर्म पानी, ठंडा पानी, बर्फ, ओस रेटिंग (Hot water, cold water, snow, dew retting)।
तापमान रेटिंग की अवधि और गुणवत्ता (duration of retting and quality) तय करता है।
बहते ठंडे पानी (running cold water) की तुलना में खड़ा गर्म पानी (Standing warm water) अधिक उपयुक्त है।
ठंडे देशों (cold countries) में डबल रेटिंग (Double retting) चलन में है।
रेटिंग अवधि (Retting period) 4-6 दिन है।
रेटिंग के बाद बहते पानी (running water) में साफ करके, सुखाकर (dried) और स्कचिंग (scutching) के लिए तैयार किया जाता है।
लकड़ी के हिस्सों (woody parts) से मूल्यवान फाइबर (valuable fibers - उदाहरण के लिए फ्लैक्स) को पीटकर (beating) अलग करना।
भारत के वर्षा आधारित क्षेत्रों (Rainfed areas) में पानी की उपलब्धता समस्या है इसलिए वे फाइबर फ्लैक्स (fibre flax) का विकल्प नहीं चुन रहे हैं।
तेल की गुणवत्ता और फाइबर (Oil quality and Fibre)
तेल की गुणवत्ता (Oil quality): पतले छिलके (hull thickness) पर निर्भर करता है। पीले बीजों (Yellow seeds) में पतला छिलका और अधिक तेल होता है। गुणवत्ता में सुधार के लिए पिगमेंट को परिष्कृत करना (Refining the pigments) आवश्यक है।
रेशा (Fibre): बड़ी ताकत, महीनता और स्थायित्व (Great strength, fineness & durability)। कपास और जूट (cotton and jute) की तुलना में कम खिंचाव वाला, अधिक टिकाऊ और पर्यावरणीय उतार-चढ़ाव के प्रति बेहतर प्रतिरोधी (less stretchy, more durable and better resistant to environmental fluctuations)।
दोहरे उद्देश्य वाली अलसी (Double Purpose Linseed)
रेशे और तेल (fibre and oil) के लिए फायदेमंद है।
इस उद्देश्य के लिए आवश्यक किस्में (Varieties needed for this purpose) अलग-अलग प्रतिक्रिया (differential response) दिखा सकती हैं।
लंबी बढ़ती अवधि (long growing period) वाले समशीतोष्ण क्षेत्र (temperate region) में, N की नियंत्रित आपूर्ति (controlled supply of N) आवश्यकता पूरी कर सकती है।
फाइबर के निष्कर्षण के लिए रेटिंग (retting) के लिए ठंडी जलवायु (cooler climate) की आवश्यकता होती है। यह हमारे देश में एक बड़ी सीमा (major limitation) है।
हाल ही में सूखी स्कचिंग मशीन (dry scutching machine) के विकास का आविष्कार तिलहन के तनों से भी फाइबर पैदा करने के लिए वरदान (boon) हो सकता है।
फसल प्रणाली (Cropping systems)
शुद्ध फसल के रूप में (As pure crop):
खेती उन क्षेत्रों तक सीमित है जहाँ कोई अन्य फसल संभव नहीं है (no other crop is possible)।
स्थिति के तहत उत्पादकता बहुत कम (very low) है और कीटों और बीमारियों के प्रकोप (pests and disease outbreak) के अधीन है।
कम लिनोलेनिक एसिड (Low linolenic acid) म्यूटेंट (mutants)।
लिनोलिक एसिड (linoleic acid) का उच्च स्तर, 65 - 76% होता है।
लिनोलेनिक एसिड में कमी से तेल की ऑक्सीडेटिव स्थिरता (oxidative stability) बहुत बढ़ जाती है।
यह फैटी एसिड (fatty acid) में सूरजमुखी के बराबर खाद्य PUFA तेल (edible PUFA oil) बन जाता है।
बीज का रंग (colour of the seed) भी बदल गया है, खाद्य अलसी (edible linseed) हल्के पीले रंग (pale yellow colour) की हो गई है जिससे इसे भूरे रंग की अखाद्य अलसी (non-edible linseed) से अलग किया जा सकता है।
खाद्य अलसी (edible linseed) का विकास CSIRO (राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन, ऑस्ट्रेलिया) और विन्निपेग, कनाडा (UGG Ltd) के यूनाइटेड ग्रेन ग्रोअर्स लिमिटेड (United Grain Growers Ltd) के बीच एक संयुक्त उद्यम (joint venture) है।
इस फसल का नाम लिनोला (Linola) रखा गया है। लिनोला CSIRO का पंजीकृत ट्रेडमार्क (registered trademark) है।
लिनोला की विशेषता - इसकी तेल की गुणवत्ता (oil quality)।
ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा (Australia & Canada) में खेती की जाती है।
60-130 हजार हेक्टेयर = (0.06 से 0.13 मिलियन हेक्टेयर)।
लिनोला (Linola) की तस्वीर
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।
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