मक्का के रोग (Diseases of Maize)

1. डाउनी फफूंदी (Downy mildew) / क्रेजी टॉप (Crazy top)

लक्षण (Symptoms)

सबसे प्रमुख लक्षण पत्तियों पर पीली धारियों (chlorotic streaks) का विकसित होना है। पोरियों (internodes) के छोटे होने के कारण पौधे बौने (stunted) और झाड़ीदार (bushy) दिखाई देते हैं। पत्ती की निचली सतह पर सफेद डाउनी (रोएंदार) वृद्धि दिखाई देती है। डाउनी वृद्धि नर फूलों (tassel) के हरे बिना खुले सहपत्रों (bracts) पर भी होती है। नर फूलों में छोटी से बड़ी पत्तियां दिखाई देती हैं। नर फूल के डंठल और भुट्टों (cobs) पर कक्षीय कलिकाओं (auxillary buds) का अत्यधिक बढ़ना आम बात है (इसे क्रेजी टॉप कहते हैं)।

लक्षण 1

लक्षण 2

लक्षण 3
चित्र: डाउनी फफूंदी के लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

यह कवक (fungus) पत्तियों की दोनों सतहों पर सफेद डाउनी वृद्धि के रूप में बढ़ता है, जिसमें स्पोरेंजियोफोर (sporangiophores) और स्पोरेंजिया (sporangia) शामिल होते हैं। स्पोरेंजियोफोर काफी छोटे और मोटे होते हैं, जो कई नुकीले स्टेरिंगमेटा (sterigmata) में शाखित होते हैं, जिन पर पारदर्शी, आयताकार या अंडाकार स्पोरेंजिया (कोनिडिया) लगे होते हैं। स्पोरेंजिया सीधे अंकुरित होकर पौधों को संक्रमित करते हैं। बाद की अवस्थाओं में, ऊस्पोर (oospores) बनते हैं जो गोलाकार, मोटी दीवार वाले और गहरे भूरे रंग के होते हैं।

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable Conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

संक्रमण का प्राथमिक स्रोत (primary source of infection) मिट्टी में मौजूद ऊस्पोर और संक्रमित मक्के के बीजों में मौजूद सुप्त मायसेलियम (dormant mycelium) हैं। द्वितीयक फैलाव (secondary spread) हवा से उड़ने वाले कोनिडिया (airborne conidia) के माध्यम से होता है। रोगजनक प्रजातियों के आधार पर, रोग के इनोक्यूलम (inoculum) का प्रारंभिक स्रोत मिट्टी में सर्दियों तक बचे रहने वाले ऊस्पोर या संक्रमित फसल के मलबे और आस-पास के संक्रमित पौधों में उत्पन्न कोनिडिया हो सकते हैं। डाउनी फफूंदी पैदा करने वाली कुछ प्रजातियां बीज-जनित (seed-borne) भी हो सकती हैं, हालांकि यह मुख्य रूप से उन बीजों तक सीमित है जो ताजे होते हैं और जिनमें नमी की मात्रा अधिक होती है।

बढ़ने के मौसम (growing season) की शुरुआत में, 20°C से ऊपर मिट्टी के तापमान पर, मिट्टी में मौजूद ऊस्पोर संवेदनशील मक्का के पौधों की जड़ों से निकलने वाले स्राव (root exudates) के प्रभाव में अंकुरित होते हैं। जर्म ट्यूब (germ tube) मक्का के पौधों के भूमिगत हिस्सों को संक्रमित करती है, जिससे प्रणालीगत संक्रमण (systemic infection) के लक्षण दिखाई देते हैं, जिनमें व्यापक पीलापन (chlorosis) और रुकी हुई वृद्धि शामिल हैं। यदि रोगजनक बीज-जनित है, तो पूरे पौधे लक्षण दिखाते हैं। ऊस्पोर प्रकृति में 10 साल तक जीवित रह सकते हैं।

एक बार जब कवक मेजबान ऊतकों (host tissue) में बस जाता है, तो स्टोमेटा से स्पोरेंजियोफोर (कोनिडीयोफोर) निकलते हैं और स्पोरेंजिया (कोनिडिया) उत्पन्न करते हैं, जो हवा और बारिश की बूंदों के छींटों द्वारा फैलकर द्वितीयक संक्रमण (secondary infection) शुरू करते हैं। स्पोरेंजिया हमेशा रात में पैदा होते हैं। वे नाजुक होते हैं और कुछ सौ मीटर से अधिक दूर नहीं फैल सकते और कुछ घंटों से अधिक जीवित नहीं रहते।

स्पोरेंजिया का अंकुरण पत्ती की सतह पर मुक्त पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। रोग के प्रारंभिक लक्षण (पीले धब्बे और धारियां जो शिराओं के समानांतर लंबी होती हैं) 3 दिनों में दिखाई देते हैं। बढ़ते मौसम के दौरान कोनिडिया प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होते हैं। जैसे-जैसे फसल बुढ़ापे (senescence) की ओर बढ़ती है, ऊस्पोर बड़ी संख्या में उत्पन्न होते हैं।

प्रबंधन (Management)


2. लीफ ब्लाइट (Leaf blight) - Helminthosporium maydis (Syn: H. turcicum)

लक्षण (Symptoms)

यह कवक (fungus) फसल को प्रारंभिक अवस्था में प्रभावित करता है। पत्तियों पर छोटे पीले, गोल से अंडाकार धब्बे दिखाई देते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे बड़े अण्डाकार (elliptical) धब्बों में बदल जाते हैं और इनका केंद्र भूरा (straw to grayish brown) तथा किनारे गहरे भूरे (dark brown margins) रंग के होते हैं। धब्बे आपस में मिलकर झुलसे हुए (blighted) लक्षण उत्पन्न करते हैं। सतह जैतून के हरे रंग के मखमली कोनिडिया और कोनिडीयोफोर के समूह से ढक जाती है।

रोगजनक (Pathogen)

कोनिडीयोफोर (Conidiophores) समूहों में, मुड़े हुए (geniculate), मध्यम गहरे भूरे रंग के, सिरे के पास हल्के रंग के और चिकने होते हैं। कोनिडिया स्पष्ट रूप से घुमावदार (curved), तर्कुरूप (fusiform), हल्के से मध्यम गहरे सुनहरे भूरे रंग के होते हैं, जिनमें 5-11 पट्ट (septa) होते हैं।

लीफ ब्लाइट के लक्षण
चित्र: लीफ ब्लाइट के लक्षण

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable Conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

यह एक बीज-जनित (seed-borne) कवक है। यह ज्वार, गेहूं, जौ, जई और गन्ने को भी संक्रमित करता है। इस कवक के बीजाणु मूंग, उड़द, लोबिया, वरगु, सूडान घास, जॉनसन घास और टियोसिंट के बीजों के साथ भी जुड़े पाए जाते हैं।

प्रबंधन (Management)


3. रतुआ (Rust) - Puccinia sorghi

लक्षण (Symptoms)

पत्तियों की दोनों सतहों पर गोल से अंडाकार, लंबे, दालचीनी-भूरे रंग के पाउडर जैसे पस्ट्यूल (pustules) बिखरे होते हैं। जैसे-जैसे पौधा परिपक्व होता है, लाल यूरेडोस्पोर (uredospores) के स्थान पर काले टेलियोस्पोर (teliospores) के आ जाने के कारण पस्ट्यूल भूरे से काले रंग के हो जाते हैं।

रतुआ के लक्षण 1

रतुआ के लक्षण 2
चित्र: रतुआ (Rust) के लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

यूरेडोस्पोर गोलाकार या अण्डाकार (elliptical), बारीक कांटेदार (echinulate), और पीले-भूरे रंग के होते हैं, जिनमें 4 जर्मपोर (germpores) होते हैं। टेलियोस्पोर भूरे-काले या गहरे भूरे रंग के, आयताकार से अण्डाकार, और सिरे पर गोल या चपटे होते हैं। ये दो-कोशिका वाले (two-celled) होते हैं और सेप्टम (septum) के पास हल्के सिकुड़े हुए होते हैं, तथा बीजाणु की दीवार सिरे पर मोटी होती है।

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable Conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

इनोक्यूलम का प्राथमिक स्रोत वैकल्पिक मेजबानों (alternate hosts) जैसे Oxalis corniculata और Euchlaena mexicana पर जीवित रहने वाले यूरेडोस्पोर हैं।

प्रबंधन (Management)


4. हेड स्मट (Head smut) - Sphacelotheca reiliana

लक्षण (Symptoms)

हेड स्मट के लक्षण 1

हेड स्मट के लक्षण 2
चित्र: हेड स्मट के लक्षण

लक्षण आमतौर पर भुट्टे (cob) और नर फूलों (tassel) पर देखे जाते हैं। बड़े स्मट सोरी (smut sori) नर फूल और बालियों का स्थान ले लेते हैं। कभी-कभी नर फूल आंशिक या पूरी तरह से स्मट सोरस (smut sorus) में बदल जाता है। स्मट से प्रभावित पौधे बौने रह जाते हैं, कम उपज देते हैं और बाकी पौधों की तुलना में अधिक हरे रहते हैं।

रोगजनक (Pathogen)

स्मट बीजाणु (Smut spores) बड़ी संख्या में उत्पन्न होते हैं, जो लाल-भूरे से काले रंग के, मोटी दीवार वाले, बारीक कांटेदार (spined) और गोलाकार (spherical) होते हैं।

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable Conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

स्मट बीजाणु दो साल तक जीवित रहते हैं। यह कवक बाहरी रूप से बीज-जनित (externally seedborne) और मिट्टी-जनित (soil-borne) होता है। संक्रमण का मुख्य स्रोत मिट्टी में मौजूद क्लैमाइडोस्पोर (chlamydospores) हैं।

प्रबंधन (Management)


5. चारकोल रॉट (Charcoal rot) - Macrophomina phaseolina (Rhizoctonia bataticola)

लक्षण (Symptoms)

प्रभावित पौधों में मुरझाने (wilting) के लक्षण दिखाई देते हैं। संक्रमित पौधों के तने (stalk) को भूरी धारियों (grayish streak) से पहचाना जा सकता है। तने का भीतरी भाग (pith) छिन्न-भिन्न (shredded) हो जाता है और संवहनी बंडलों (vascular bundles) पर भूरे-काले रंग के छोटे स्केलेरोटिया (sclerotia) विकसित हो जाते हैं। तने के अंदरूनी हिस्से के टूटने से अक्सर तना क्राउन (crown) क्षेत्र से टूट जाता है। संक्रमित पौधे का क्राउन क्षेत्र गहरे रंग का हो जाता है। जड़ों की छाल (root bark) का फटना और जड़ प्रणाली (root system) का विघटन आम विशेषताएं हैं।

चारकोल रॉट 1

चारकोल रॉट 2

चारकोल रॉट 3

चारकोल रॉट 4
चित्र: चारकोल रॉट के लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

कवक बड़ी संख्या में स्केलेरोटिया (sclerotia) पैदा करता है जो गोल और काले रंग के होते हैं। कभी-कभी यह तनों या डंठलों पर पिक्नीडिया (pycnidia) पैदा करता है।

अनुकूल परिस्थितियां (Favourable Conditions)

रोग चक्र (Disease cycle)

इस कवक के मेजबान पौधों (host range) की विस्तृत श्रृंखला है, यह ज्वार, बाजरा, रागी और दलहन पर हमला करता है। यह संक्रमित पौधे के मलबे में 16 वर्षों से अधिक समय तक जीवित रहता है। संक्रमण का प्राथमिक स्रोत मिट्टी में मौजूद स्केलेरोटिया (soil-borne sclerotia) हैं। यह रोगजनक कई अन्य मेजबानों पर भी हमला करता है, जो इसे जीवित रखने में मदद करता है। चूंकि यह कवक एक विकल्पी परजीवी (facultative parasite) है, इसलिए यह मृत जैविक ऊतकों, विशेषकर अपने कई प्राकृतिक मेजबानों पर मृतजीवी (saprophytically) के रूप में रहकर स्केलेरोटियल बॉडीज (sclerotial bodies) बना सकता है। यह कवक मिट्टी में स्केलेरोटिया के रूप में सर्दियां बिताता है और फसल की संवेदनशील अवस्था में जड़ों के माध्यम से मेजबान को संक्रमित करता है और तने की ओर बढ़ता है।

प्रबंधन (Management)


मामूली रोग (Minor diseases)

बैक्टीरियल स्टालक रॉट (Bacterial Stalk rot) - Erwinia dissolvens

लक्षण (Symptoms)

निचली पोरियों (basal internodes) में सॉफ्ट रॉट (soft rot) विकसित हो जाता है जो पानी से भीगा हुआ (water soaked) प्रतीत होता है। इस सड़न के साथ एक हल्की मीठी किण्वन (fermenting) जैसी गंध आती है। पत्तियां कभी-कभी मुरझाने (wilting) के लक्षण दिखाती हैं और प्रभावित पौधे कुछ ही दिनों में गिर (topple down) जाते हैं। बालियां (ears) और डंठल (shank) में भी सड़न दिखाई दे सकती है। वे आगे विकसित नहीं हो पाते हैं और बालियां पौधे से नीचे लटक जाती हैं।

रोग चक्र (Disease cycle)

रोग की शुरुआत में छेदक कीट (borer insects) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह जीव मिट्टी-जनित (soil borne) है और मेजबान (host) की सतह पर घावों (wounds) और चोटों के माध्यम से प्रवेश करता है। यह जीव संक्रमित सामग्री के मलबे पर मृतजीवी (saprophytically) के रूप में जीवित रहता है और अगले मौसम में प्राथमिक इनोक्यूलम (primary inoculum) के रूप में कार्य करता है।


मोज़ेक (Mosaic) - मेज मोज़ेक पोटीवायरस (Maize mosaic potyvirus)

लक्षण (Symptoms)

लक्षण पीले धब्बों (chlorotic spots) के रूप में दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे पत्ती फलक (leaf blade) को ढकने वाली धारियों में बदल जाते हैं। पीली धारियां और धब्बे पत्ती आच्छद (leaf sheaths), तनों और भूसी (husks) पर भी विकसित हो सकते हैं। नई वृद्धि में मध्यम से गंभीर रोसेटिंग (rosetting) देखी जाती है। संक्रमण के बाद के चरणों में तने, पत्ती के फलक और नर फूलों का आकार सामान्य रहता है।

मोज़ेक के लक्षण 1

मोज़ेक के लक्षण 2
चित्र: मोज़ेक (Mosaic) के लक्षण

रोगजनक (Pathogen)

यह मेज मोज़ेक पोटीवायरस (Maize mosaic potyvirus) के कारण होता है। इसके वायरियन (virions) लचीले, 750-900nm लंबे होते हैं और इनका जीनोम ssRNA होता है।

रोग चक्र (Disease cycle)

यह प्रकृति में लीफ हॉपर वेक्टर (leaf hopper vector), Perigrimus maidis द्वारा फैलता है।


ब्राउन स्पॉट (Brown spot) - Physoderma maydis

पानी में भीगे हुए घाव (water soaked lesions), जो अंडाकार (oval) होते हैं, बाद में हल्के हरे रंग में और अंततः भूरे (brown) रंग में बदल जाते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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