मानव संस्कृति का विकास और कृषि की शुरुआत (Development of Human Culture and Beginning of Agriculture)
मानव संस्कृति का विकास (Development of human culture)
ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी पर मनुष्य का विकास लगभग 15 लाख वर्ष पहले हुआ था। इस मनुष्य का विकास बंदर (monkey) से हुआ जिसने अपने पैरों पर सीधे खड़े होकर चलना शुरू किया। ऐसे मनुष्य को होमो इरेक्टस (Homo erectus) (या) जावा मानव (Java man) कहा गया है। बाद में जावा मानव क्रो-मैग्नन (Cro-Magnon) में और क्रो-मैग्नन आधुनिक मानव (modern man) में परिवर्तित हो गया। आधुनिक मानव को प्राणि विज्ञान (zoologically) की दृष्टि से होमो सेपियंस (Homo sapiens) (होमो - निरंतर, सेपियंस - सीखने की आदत) के रूप में जाना जाता है। शुरुआत में ऐसा मनुष्य अपना जीवन जंगली तरीके से बिता रहा था, लेकिन 8700-7700 ईसा पूर्व (BC) की अवधि के दौरान, उन्होंने भेड़ (sheep) और बकरी (goat) को पालना शुरू कर दिया, हालांकि पहला पालतू जानवर कुत्ता था, जिसका उपयोग शिकार (hunting) के लिए किया जाता था।
कृषि और सभ्यता (civilization) का इतिहास साथ-साथ चलता है क्योंकि खाद्य उत्पादन (food production) ने आदिमानव (primitive man) के लिए चयनित क्षेत्रों में बसना संभव बना दिया, जिससे समाज का निर्माण हुआ और सभ्यता की शुरुआत हुई। सभ्यता और कृषि का विकास कई चरणों से होकर गुजरा था। पुरातत्वविदों (Archeologists) ने शुरुआत में इन चरणों को पाषाण युग (stone age), कांस्य (Bronze) और लौह युग (Iron age) के रूप में वर्गीकृत किया था। बाद में विद्वानों ने पाषाण युग को पुरापाषाण काल (Paleolithic period - पुराना पाषाण युग), नवपाषाण युग (Neolithic age - नया पाषाण युग) और मध्यपाषाण युग (Mesolithic age - मध्य पाषाण युग) में विभाजित कर दिया।
तीनों युगों में से प्रत्येक में, विशिष्ट सुधार देखे गए। मनुष्य ने दिन-प्रतिदिन के जीवन में मदद करने के लिए पत्थरों, हड्डियों (bones), लकड़ियों आदि से उपकरण (tools) बनाए और उनमें सुधार किया। उन्होंने खाद्य फसलें उगाना और गाय, भेड़, बकरी, कुत्ता आदि जैसे जानवरों को पालतू बनाना (domesticated) शुरू किया।
पुरापाषाण युग (Paleolithic age - पुराना पाषाण युग)
यह काल भोजन इकट्ठा करने वालों (food gatherers) और शिकारियों (hunters) की विशेषता है। पाषाण युग के मनुष्य ने पत्थर के औजार (stone tools) और कच्चे चॉपर (crude choppers) बनाना शुरू कर दिया था।
मध्यपाषाण काल (Mesolithic period)
पुरापाषाण काल के अंत और नवपाषाण काल की शुरुआत के बीच के संक्रमण काल (transitional period) को मध्यपाषाण (Mesolithic) कहा जाता है। यह लगभग 10000 ईसा पूर्व शुरू हुआ और कृषि के उदय के साथ समाप्त हुआ। इस काल की विशेषता माइक्रोलिथ (microliths) नामक छोटे पत्थर के उपकरण (tiny stone implements) हैं। लोग भोजन इकट्ठा करने वाले और शिकारी के रूप में रहते थे। कुत्ते को पालतू बनाना (domestication of the dog) मध्यपाषाण शिकारी की प्रमुख उपलब्धि (major achievement) थी。
नवपाषाण कृषि क्रांति (Neolithic Agricultural Revolution) (7500 ईसा पूर्व - 6500 ईसा पूर्व)
नवपाषाण क्रांति ने खाद्य उत्पादन (food production) की तकनीकों में एक बड़ा बदलाव लाया जिसने मनुष्य को अपने पर्यावरण (environment) पर नियंत्रण दिया और उसे जंगली जामुन और जड़ों को इकट्ठा करने और शिकार करने के अनिश्चित अस्तित्व (precarious existence) से बचाया। पहली बार, वह बसे हुए गांवों (settled villages) में रहता था और भूख से सुरक्षा के अलावा उसके पास सोचने और विचार करने (contemplate) के लिए खाली समय था।
भारत में नवपाषाण संस्कृति की मुख्य विशेषताएं (The main features of Neolithic culture in India)
- नवपाषाण संस्कृति भारत में आर्थिक और तकनीकी विकास (economic and technological development) के एक चरण को दर्शाती है।
- झाड़ियों को साफ करने के लिए पॉलिश की गई पत्थर की कुल्हाड़ियों (polished stone axes) का उपयोग।
- खाद्यान्न (food grains) के भंडारण के लिए हाथ से बने मिट्टी के बर्तन (Hand made pottery)।
- कपड़ा (textile), बुनाई (weaving) और टोकरी बनाने (basketry) का आविष्कार किया।
- भारत के पूर्वी हिस्सों में चावल, केला अनुक्रम (banana sequence) और रतालू (yams) की खेती।
- दक्षिण भारत में बाजरा (millets) और दलहन (pulses) की खेती।
- रेशम (silk) की खोज।
ताम्रपाषाण संस्कृति (Chalcolithic culture - कांस्य युग) (3000-1700 ईसा पूर्व)
ताम्रपाषाण (Chalcolithic) शब्द उन समुदायों पर लागू होता है जो तांबे (copper) और कांस्य (bronze) के साथ पत्थर के उपकरणों (stone implements) का उपयोग करते हैं। अधिक उन्नत (advanced) समुदायों में, तांबे और कांस्य के उपकरणों का अनुपात (proportion) पत्थरों की तुलना में अधिक है। ताम्रपाषाण क्रांति (chalcolithic revolution) चौथी सहस्राब्दी ईसा पूर्व (fourth millennium B.C.) में मेसोपोटामिया (Mesopotamia) में शुरू हुई। इस क्षेत्र से यह मिस्र (Egypt) और सिंधु घाटी (Indus valley) में फैल गई।
महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं (The significant features are):
- हल (plough) का आविष्कार।
- कृषि पहाड़ी क्षेत्र (hilly area) से निचली नदी घाटी (lower river valley) में स्थानांतरित हो गई।
- सिंचाई के लिए बाढ़ के पानी (Flood water) को संग्रहीत किया गया और नहरें (canals) खोदी गईं।
- इस अवधि में सिंचित खेती (Irrigated farming) शुरू हुई।
- नुकली छड़ी (pointed stick) से डिबलिंग (dibbling) करके बीज बोना।
- नहर की सिंचाई के कारण लवणता (Salinity) की समस्या और जलभराव (water logging) देखा गया।
भारत में कृषि की शुरुआत: पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्य (Beginning of Agriculture in India: Archeological and historical facts)
12000 से 9500 साल पहले
- श शिकारी और भोजन इकट्ठा करने वाले चरण (Hunters and food-gathers stage) मौजूद थे।
- श पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पत्थर के उपकरण (माइक्रोलिथ - microliths) देखे गए थे।
- श इराक में कुत्ते को पालतू बनाया (Domestication of dog) गया।
- श सबसे पुरानी कृषि वानस्पतिक प्रसार (vegetative propagation) (जैसे, केले, गन्ना, रतालू, साबूदाना, ताड़ और अदरक) द्वारा थी।
9500 से 7500 साल पहले
- श गेहूं और जौ, बकरी, भेड़, सुअर और मवेशियों के जंगली पूर्वज (Wild ancestors) पाए गए।
7500 से 5000 साल पहले
- श महत्वपूर्ण विशेषताएं हल (plough) का आविष्कार, सिंचित खेती (irrigated farming), पहिये (wheel) का उपयोग और धातु विज्ञान (metallurgy) और मिस्र में, बीज डिबलिंग (seed dibbling) थीं।
5000 से 4000 साल पहले
- श हड़प्पा संस्कृति (Harappan culture) की विशेषता गेहूं, जौ और कपास की खेती; हल कृषि और सूखे (drought) के लिए बैल (bullocks) है।
- श सिंधु घाटी (Indus valley) में पहिए वाली गाड़ियों (Wheeled carts) का आमतौर पर उपयोग किया जाता था।
- श हड़प्पावासियों ने न केवल कपास (cotton) उगाई बल्कि ओटाई (ginning) / कताई (spinning) / बुनाई (weaving) के तरीके भी ईजाद किए।
4000 से 2000 साल पहले
- श उत्तरी अर्काट (North Arcot) में, हड्डी / पत्थर के औजार पाए गए।
- श नेवासा (महाराष्ट्र) में, तांबे और पॉलिश किए गए पत्थर की कुल्हाड़ियों का उपयोग किया गया था। इस स्थान पर रेशम (silk) की उपस्थिति का पहला प्रमाण मिला।
- श नर्मदा नदी (नेमार, मध्य प्रदेश) पर नवदाटोली में, फसल के डंठल काटने के लिए पत्थर के दांतों वाली दरांती (sickles) का इस्तेमाल किया गया था। उगाई जाने वाली फसलें गेहूं, अलसी (linseed), मसूर, उड़द (काला चना), मूंग और खेसारी थीं।
- श पूर्वी भारत में चावल, केले और गन्ने की खेती की जाती थी।
2000-1500 साल पहले
- श टैंक सिंचाई (Tank irrigation) विकसित की गई और व्यापक रूप से इसका अभ्यास किया गया।
- श यूनानियों (Greek) और रोमनों (Romans) का दक्षिण भारत के साथ व्यापार था; रोमनों द्वारा काली मिर्च (pepper), कपड़ा और चंदन (sandal wood) का आयात किया जाता था।
- श चोल राजा करिकाल (190 ईस्वी) ने चेर (Cheras) और पांड्यों (Pandyas) को हराया, श्रीलंका पर आक्रमण किया, 12000 पुरुषों को पकड़ लिया और बाढ़ से भूमि की रक्षा के लिए कावेरी के किनारे 160 किमी लंबा तटबंध (embankment) बनाने के लिए उन्हें गुलामों (slaves) के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कई सिंचाई टैंक (irrigation tanks) बनाए हैं और जंगलों को साफ करके कृषि को बढ़ावा दिया है।
1500-1000 साल पहले
हर्षवर्धन का कन्नौज साम्राज्य (606-647 ईस्वी)
- श गेहूं, चावल और बाजरा जैसे अनाज (Cereals) और फल बड़े पैमाने पर उगाए जाते थे। 60 दिन की किस्म और चावल की सुगंधित किस्मों का उल्लेख है।
- श अदरक, सरसों (mustard), खरबूजे, कद्दू, प्याज और लहसुन का भी उल्लेख है।
- श थानेसर (हरियाणा) में फारसी पहिये (Persian wheel) का इस्तेमाल किया गया था।
दक्षिण भारत के राज्य (The kingdoms of South India)
- श राज्य चालुक्य (बादामी), राष्ट्रकूट (लातूर), पल्लव (कांची), पांड्य, होयसल (हेलेबिड), और काकतीय (वारंगल) के थे।
- श चोलों (Cholas) ने 10वीं शताब्दी ईस्वी में दक्षिण भारतीय में एक गौरवशाली चरण की शुरुआत की।
- श कृषि के लिए नई सिंचाई प्रणालियां विकसित की गईं- 9वीं शताब्दी में आंध्र में चेन टैंक (chain tanks); और 6.4 किमी कावेरीपक्कम बंड (Kaveripak bund)।
- श चोलों ने चीन, म्यांमार और कंबोडिया के साथ संबंध बनाए रखे।
- श टैंक पर्यवेक्षण समिति (Tank supervision committee - Eri-variyam) ने एक गांव के रखरखाव की देखभाल की और जल आपूर्ति को विनियमित किया।
1000-700 साल पहले
- श 711-712 ईस्वी के दौरान सिंध (Sind) पर अरबों (Arab) की विजय हुई; मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध के हिंदू राजा दाहिर को हराया। अरब बागवानी (gardening) के विशेषज्ञ थे।
- श 1290-1320 ईस्वी (खिलजियों का शासन): अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) ने भारत के एक बड़े हिस्से की कृषि समृद्धि को नष्ट कर दिया। वह किसानों को गरीब रखने में विश्वास करते थे।
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