प्राचीन और मध्ययुगीन काल में बागवानी - आर्बोरी बागवानी - बाग (GARDENING IN ANCIENT AND MEDIEVAL PERIOD – ARBORI HORTICULTURE - ORCHARDS)

मनुष्य प्रकृति से अविभाज्य (inseparable) है। प्रागैतिहासिक काल (prehistoric times) से ही भारतीय लोगों का प्रकृति, विशेषकर पौधों और फूलों के साथ घनिष्ठ संबंध (close relationship) रहा है। युगों-युगों से भारत में वृक्ष पूजा (tree worship) की परंपरा और आस्था रही है। भारतीय पौराणिक कथाओं (Indian mythology), इतिहास, कला और सामाजिक-धार्मिक संस्कृति (socio-religious culture) में पेड़ों और फूलों को पवित्र (sanctified) किया गया है। सिंधु घाटी (Indus Valley) में प्रागैतिहासिक और आदि-ऐतिहासिक (proto-historic) मनुष्य के मन में पेड़ों के प्रति बहुत श्रद्धा थी और वे ताम्रपाषाण काल (chalcolithic period) में उनकी पूजा करते थे। मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro) और हड़प्पा (Harappa) में वृक्ष की उसके प्राकृतिक रूप में पूजा की जाती थी और वृक्ष की आत्मा (tree spirit) को मानवीय गुणों (human attributes) के रूप में देखा जाता था। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा काल (2500-1750 ईसा पूर्व) के पुरातात्विक साक्ष्यों (archeological evidences) के रूप में कई मुहरों (seals), सीलिंग, मिट्टी के बर्तनों (potteries), पॉटशेर्ड (potsherds) और कुछ रॉक पेंटिंग (rock paintings) में पेड़ों के दिव्य चरित्र (divine character) को दर्शाया गया है। सिंधु घाटी के प्राचीन लोगों द्वारा कुछ पेड़ों, जैसे पीपल (pipal) या अश्वत्थ (asvattha - Ficus religosa), नीम (neem - Azadirachta indica), कत्था (katha) या खदिर (khadira - Acacia catechu) और झंड (jhand) या शमी (sami - Prosopis cineraria) को पवित्र माना जाता था। सिंधु घाटी सभ्यता में, यह माना जाता था कि पेड़ देवी-देवताओं के प्रतीक (symbolic) थे, जो उनमें निवास करते थे (वृक्ष देवता - vriksha devata या वृक्ष देवी - vriksha devi)। प्राचीन भारत में पेड़ों को वृक्ष ज्ञान (ब्रह्म टार्न - brahma tarn), जीवन का वृक्ष (उइवान टार्न - Uivan tarn) और औषधीय वृक्ष (रोगु टार्न - rogu tarn) के रूप में दिव्य (divine) और आध्यात्मिक (spiritual) माना जाता था।

मौर्य काल (Mauryan period)

चौथी से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्यों (Mauryas) के उदय (rise) के बाद, वेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद, सूत्र, स्मृति, महाकाव्य, पुराण, बौद्ध ग्रंथ (जातक - Jataka) और जैन साहित्य (सूत्र - Sutras) जैसे वैदिक और उत्तर-वैदिक दोनों तरह के विशाल धर्मनिरपेक्ष साहित्य (secular literature) और ग्रंथ सामने आए हैं। उपनिषदों के ऋषियों ने ब्रह्मांड में जड़ें जमाए हुए ब्रह्मांडीय वृक्ष (Cosmic Tree) का वर्णन किया है, जो अंतिम है, जिसकी शाखाएं अंतरिक्ष (space), वायु (wind), अग्नि (fire), जल (water) और पृथ्वी (earth) हैं। ब्रह्मांडीय वृक्ष विश्व माता (World Mother) है, प्रकृति की देवी (Goddess of nature) है, जो सभी जीवन का पोषण (nourishes) करती है। कल्पवृक्ष (Kalpavrksa - इच्छा पूरी करने वाला पेड़) और कल्पलता (kalpalata - इच्छा पूरी करने वाली लता) पौराणिक पेड़ (mythological tree) और लता (creeper) हैं, जिनका उल्लेख वैदिक साहित्य में नहीं है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में लोक पंथ (folk cult) का हिस्सा रहे हैं। कल्पवृक्ष का उल्लेख रामायण, महाभारत, जातक, दिव्यावदान और जैन सूत्रों में मिलता है। ब्राह्मणवादी धर्म में, वट (vata - Ficus benghalensis) की पहचान शिव (Shiva) के साथ, अश्वत्थ (asvattha - Ficus religiosa) की विष्णु (Vishnu) के साथ, कमल (lotus) की सूर्य (Surya) के साथ और नौ पेड़ों की नौ पत्तियों (नवपत्रिका - navapatrika) की दुर्गा (Durga) के नौ अलग-अलग पहलुओं के साथ की गई थी।

ऋग्वेद (Rigveda - 3700-2000 ईसा पूर्व), रामायण (Ramayana - 1200-1000 ईसा पूर्व), महाभारत (Mahabharata) के साथ-साथ शूद्रक (Shudraka - 100 ईसा पूर्व), कालिदास (Kalidasa - लगभग 57 ईसा पूर्व), अश्वघोष (Ashvaghosha - 100 ईस्वी), वात्स्यायन (Vatsyayana - 300-400 ईस्वी) और सारंगधर (Sarangdhara - 1300 ईस्वी) के अन्य साहित्य में पेड़ों का ज्वलंत वर्णन (vivid descriptions) है। बागवानी की कला (art of gardening) और बगीचों के प्रकार (kinds of gardens) का वर्णन क्रमशः सारंगधर और वात्स्यायन ने किया था।

रामायण में अशोकवन (Ashokavana) या पंचवटी (Panchavati) का उल्लेख है, जिसमें सीता (Sita) को बंदी बनाकर रखा गया था। इस बगीचे में अशोक के पेड़ों (Ashoka trees - Saraca asoca) की प्रधानता (predominant) थी। पंचवटी में पांच पेड़ लगाए गए थे, पूर्व दिशा में अश्वत्थ (asvattha - Ficus religiosa), उत्तर में बिल्व (bilva - Aegle marmelos), पश्चिम में बरगद (banyan - Ficus benghalensis), दक्षिण में आंवला (amla - Emblica officinalis) और दक्षिण-पूर्व में अशोक (ashoka - Saraca asoca)। इंद्रप्रस्थ (Indraprastha) शहर में उद्यानों और पार्कों और कृत्रिम झीलों (artificial lakes) के लेआउट का वर्णन महाभारत के सभा-पर्व (Sabha-Parva) में दिया गया है। रामायण में कई पेड़ों, जैसे सारका असोका (Saraca asoca), टर्मिनलिया अर्जुन (Terminalia arjuna), मेसुआ फेरिया (Mesua ferrea), फिकस बेन्घालेंसिस (Ficus benghalensis), एफ. रेलिगोसा (F. religosa), मिशेलिया चंपका (Michelia champaka), ब्यूटिया मोनोस्पर्मा (Butea monosperma) और कैसिया फिस्टुला (Cassia fistula) का उल्लेख किया गया है। इनमें से लगभग सभी का वर्णन महाभारत में भी किया गया है। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध (Lord Buddha) का जन्म एक बगीचे में पीपल के पेड़ के नीचे हुआ था। बोधि वृक्ष (bodhi tree), जिसके नीचे बुद्ध ने निर्वाण (nirvana) प्राप्त किया, बौद्धों के लिए पवित्र है। बौद्ध ग्रंथों में उल्लिखित पेड़ों और पौधों में अश्वत्थ (Ficus religiosa), बरगद (Ficus benghalensis), उडुम्बरा (udumbara - Ficus glomerata), पाटलि (patali - Bignonia suaveolens), साल (sala - Shorea robusta) और सिरीसा (sirisa - Acacia sarisa) शामिल हैं। सड़क के किनारे एवेन्यू पेड़ों (margeshuvriksha) का रोपण (planting) राजा अशोक (233 ईसा पूर्व) का एक महत्वपूर्ण योगदान था।

वैदिक काल (Vedic times)

वैदिक काल में जिन पेड़ों और पौधों का उल्लेख किया गया है, वे सोम (soma - Sarcostemma acidum), पीपल/अश्वान्हा (pipal/asvanha - Ficus religiosa), शमी (sami - Prosopis ceneraria), बरगद (banyan - Ficus benghalensis), उडुम्बरा (udumbara - Ficus glome rata), बिल्व (bilva - Agele marmelos); खदिर (khadira - Acacia catechu), नीम (neem - Azadirachta indica), पलाश/प्लप्क्सा (palasa/plpksa - Butea monosperma), तुलसी (tulsi - Ocimum sanctum) और कमल (lotus - Nelumbo nucifera) थे। वैदिक और उत्तर-वैदिक काल के अन्य पेड़ों और पौधों में सेलमलिलसिल्क सूती पेड़ (salmalilsilk cotton tree - Bombax ceiba), नारियल (coconut - Cocos nucifera), रुद्राक्ष (rudraksha - Elacocarpus sphaericus), स्नुही (snuhi - Euphorbia neriifolia), माधवी लता (madhavi lata - Hiptage madablota), अमल्का (amalka - Emblica officinalis; समानार्थी। Phyllanthus emblica), आम, अमरा (mango, amra - Mangifera indica), केला, प्लांटैन / कदली या रंभा (banana, plantain / kadali or rambha - Musa paradisiacal), बेर / वदारी (ber / vadari - Zizyphus mauritina), साल/शाल (sala/shal - Shorea robusta), अशोक (asoka - Saraca asoca), कदंब (kadamba - Anthocephalus cadamba), बाहिरा (bahira - Terminalia belli rica), अर्जुन (arjuna - Terminalia arjuna), नागवल्ली (nagavalli), तंबुला (tambula) या पान (paan - Piper betle), नलका (nalaka - Arundo donax), जीवक (jivaka - Putranjiva roxburghii), मंदार (mandara - Erythrina variegata), तिली/तिला (tili/tila - Sesamum indicum), अमरफल (amarphal - Monstera deliciosa), फिकस कृष्णाई (Ficus krishnae), गडुची (gaduchi - Cocculus cordifolius), केतकी (ketaki - Pandanus odoratissimus), इमली/टिंत्रिनी (imli/tintrini - Tamarindus indica), पारिजात (parijata - Nycanthes arbortristis) और टिंडुकु (tinduku - Diospyros peregrina) शामिल हैं।

वृक्ष पूजा और पेड़ और पर्यावरण (Tree worship and trees and environment)

सिंधु घाटी, मौर्य काल के पत्थरों (Mauryan ring stones), और भरहुत, बोधगया, सांची, अमरावती और नागार्जुनकोंडा में स्तूपों के प्रवेश द्वारों और रेलिंगों (gateways and railings), मौर्य राहत मूर्तियों (Mauryan relief sculptures), विशेष रूप से अशोक स्तंभ की राजधानियों (Ashokan Pillar Capitals) और अशोक की रामपुरा बैल राजधानी (Rampura Bull Capital) में वृक्ष रूपांकनों (Tree motifs) को पाया गया है। मथुरा की पुरानी मूर्तियां और वास्तुकला (Old sculptures and architecture - कनिष्क काल, 78-101 ईस्वी) और अजंता भित्तिचित्र (Ajanta frescoes - 100-600 ईस्वी) भी प्राचीन भारत में पौधों और फूलों के महत्व (importance) की गवाही (testimony) देते हैं। भारतीय कला में ब्राह्मणवादी और बौद्ध देवी-देवताओं और जैन तीर्थंकरों (Jain Tirthankaras) के साथ पेड़ों का संबंध पहली शताब्दी ईस्वी से 1200 ईस्वी तक का है। पूर्व-मौर्य स्थल (pre-Mauryan site) सुघ (Sugh), तक्षशिला (Taxila), मित्र राजाओं के दौरान अयोध्या (Ayodhya during Mitra Kings), कौशाम्बी (Kausambi) और मथुरा (Mathura) और आंध्र वंश (Andhra dynasty) और पांड्य क्षेत्र (Pandyan territory) में पाए गए प्राचीन सिक्कों (ancient coins) में भी पेड़ों और फूलों को चित्रित (delineated) किया गया है। प्राचीन संस्कृत और अन्य साहित्य और ग्रंथ, पौराणिक महाकाव्य (mythological epics) और किंवदंतियां (legends), पेंटिंग (paintings), गुफा भित्ति चित्र और भित्ति चित्र (cave murals and frescoes), मूर्तियां (sculptures), वास्तुकला (architecture), लोककथाएं (folklores) और आदिवासी कला और शिल्प (tribal arts and crafts) जंगलों और बगीचों में उगने वाले पौधों और पेड़ों और फूलों के प्रकार के प्रमाण (evidences) प्रदान करते हैं। पौधों के जीवन का विज्ञान, (वृक्षायुर्वेद - Vrikshayurveda) और आर्बोरी-बागवानी (arbori-horticulture), और जंगलों और बगीचों की उपयोगिता (usefulness) प्राचीन भारत में सर्वविदित (well-known) थी। भोजन, औषधि, आश्रय (shelter), छाया (shadow) और ईंधन (fuel) के लिए पेड़ों और पौधों के उपयोगितावादी गुण (utilitarian qualities), और प्रजनन क्षमता (fertility) के साथ पेड़ों का संबंध भी प्राचीन भारतीयों को ज्ञात था। वे प्रकृति में पेड़ों और जैव विविधता (biodiversity) के संरक्षण (conservation) और पर्यावरण में पारिस्थितिक संतुलन (ecological balance) से चिंतित (concerned) थे। पेड़ों को देवी-देवताओं के साथ पहचानने (identifying) की उनकी अवधारणा (concept), और उपयोगी पेड़ों के विनाश के खिलाफ धमकियां (threats) और सजा (punishments) ने पेड़ों और वनस्पतियों को बचाने में मदद की, जो हमारे प्राचीन लोगों का एक उल्लेखनीय योगदान (remarkable contribution) है।

मुगल काल (Mughal period)

बाबर (Babur) से शुरू होने वाले मुगल शासकों द्वारा भारत में बागवानी के पुनर्जागरण (renaissance) के साथ, वे फारस (Persia) और मध्य एशिया (Central Asia) से कई पौधों की प्रजातियां लाए, जहां शाकाहारी (herbaceous) और बल्बनुमा फूल (bulbous flowers) पहले से ही खेती में थे। इनमें से कई का उल्लेख आत्मकथाओं (autobiographies) और उन दिनों लिखी गई अन्य पुस्तकों में किया गया है। इसके अलावा, मुगल चित्रों (Mughal paintings) में भी हमें कई फूलों के चित्र मिलते हैं। इनका उपयोग उन चित्रों की सीमाओं (borders) को चित्रित करने के लिए भी किया गया है। 'बाग-ए-वफ़ा' (Bagh-I- Wafa) पुस्तक में। बाबर ने भारत में बागवानी (gardening) का विवरण (description) प्रस्तुत किया है।

16वीं और 17वीं शताब्दी ईस्वी के दौरान, मुगल उद्यान (Mughal gardens) आगरा, दिल्ली, पिंजौर (शिमला के पास), श्रीनगर, कश्मीर और कुछ अन्य स्थानों पर विकसित किए गए थे। सबसे महत्वपूर्ण मुगल उद्यान ताज महल गार्डन (Taj Mahal Garden), आगरा; शालीमार और निशात गार्डन (Shalimar and Nishat Gardens), श्रीनगर; पिंजौर गार्डन, पिंजौर और हुमायूं के मकबरे (Hamayun’s tomb), दिल्ली का बगीचा हैं। 1526 के आसपास बाबर द्वारा बुसोरा (Bussorah) के बंदरगाह के माध्यम से हमारे देश में गुलाब (rose) पेश किया गया था। जहाँगीर (Jehangir) और नूरजहाँ (Nurjehan) गुलाब के प्रबल प्रेमी (ardent lovers) थे और उन्होंने बगीचों में गुलाब उगाने को प्रोत्साहित (encouraged) किया। मुगल शासक, जहांगीर द्वारा 1619 में फारस से कश्मीर में पेश किए गए सबसे महत्वपूर्ण पौधे, जब उन्होंने श्रीनगर में प्रसिद्ध शालीमार बाग की स्थापना की थी, तो राजसी चिनार का पेड़ (majestic Chinar tree - Platanus orientalis), सरू (cypress - Cupresus sempervirens) और वीपिंग विलो (weeping willow - Salix babylonica), और गुलाब, डैफोडिल (daffodil), आईरिस (iris), लिली (lilies), ट्यूलिप (tulip) और कार्नेशन (carnation) जैसे फूल थे।

यूरोपीय काल (European period)

बाद में, मुख्य रूप से अंग्रेजों (Englishmen) और पुर्तगालियों (Portuguese) ने कई प्रजातियां पेश कीं। मिशनरियों (Missionaries) और पुजारियों (priests), सिविल सेवकों (civil servants) और व्यक्तिगत शौकिया (individual amateur), बागवानों ने ज्यादातर इन्हें लाया। विदेशी पौधों (exotic plants) की एक संख्या को पेश करने वाले महत्वपूर्ण मिशनरियों में से एक डॉ फ़र्मिंगर (Dr Firminger) थे, जो एक अंग्रेज थे, जिन्होंने बागवानी (gardening) पर एक पुस्तक लिखी थी, जिसमें 1863 में फूलों की विभिन्न प्रजातियों का विवरण दिया गया था। 'फ़र्मिंगर्स मैनुअल ऑफ़ गार्डनिंग इन इंडिया' (Firminger’s Manual of Gardening in India) नामक पुस्तक आज भी सजावटी फूलों (ornamental flowering) वाले पौधों पर एक आधिकारिक संदर्भ पुस्तक (authoritative reference book) है।

18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान ब्रिटिश शासकों द्वारा सरकारी वनस्पति उद्यान (Government Botanic Gardens) की स्थापना के साथ, जैसे लालबाग वनस्पति उद्यान, बैंगलोर (Lalbagh Botanical Garden, Bangalore - 1760); सरकारी वनस्पति उद्यान, सहारनपुर (1779); भारतीय वनस्पति उद्यान, शिबपुर, कलकत्ता (1787); लॉयड बॉटैनिक गार्डन, दार्जिलिंग (1878); और सरकारी वनस्पति उद्यान, ओटाकामुंड (1884), इन उद्यानों में कई आर्थिक पौधों (economic plants) के साथ-साथ सजावटी (ornamentals) पौधे भी लगाए गए।

उस अवधि के उल्लेखनीय परिचयों में 1795 में जमैका से महोगनी (mahogany - Swietenia mahogany) और जायंट अमेज़ॅन लिली (Giant Amazon lily), विक्टोरिया रेजिया (Victoria regia), सिबपुर गार्डन में, लालबाग बॉटनिकल गार्डन, बैंगलोर में 1857 में ग्रेविलिया रोबस्टा (Grevillea robusta) और अरुकेरिया एक्सेलसा (Araucaria exceLsa) और 1859 में एमहर्स्टिया नोबिलिस (Amherstia nobiLis) शामिल हैं। भारत के कुछ महत्वपूर्ण और दुर्लभ फूल एगापेटेस ऑरिकुलाटा (Agapetes auriculata), कोरीडालिस गोवानियाना (Corydalis govaniana), डेंड्रोबियम क्राइसेंथम (Dendrobium chrysanthum), डी. नोबाइल (D. nobile), जेरेनियम वालिचियानम (Geranium wallichianum), कैथरीनिया एम्पला (Katherinea ampla), मेकॉनोप्सिस एक्यूलेट (Meconopsis aculeate), नोथोलिरियन थॉमसोनियानम (Notholirion thomsonianum), नेपेंथेस खासियाना (Nepenthes khasiana), रोडोडेंड्रोन मैकाबियानम (Rhododendron macabeanum), आर. हॉजसोनी (R. hodgsonii), और आर. थॉमसोनी (R. thomsonii) हैं।

देशी भारतीय सजावटी पौधे (Native Indian Ornamental Plants)

पेड़ (Trees): एल्बिज़िया लेबेक, एल्सटोनिया स्कोलारिस, एंथोसेफालस कड़म्बा, अज़ादिरच्टा इंडिका, बौहिनिया वेरिगाटा, बॉम्बैक्स मालाबारिकम, ब्यूटिया मोनोस्पर्मा, कैसिया फिस्टुला, सी. नोडोसा, सी. सियामिया, एरीथ्रियाना इंडिका किस्म. पारसेली, ई. वेरिगाटा किस्म. ओरिएंटलिस, फिकस रिलिजिओसा, एफ. बेंघालेंसिस, एफ. बेंजामिना, एफ. इलास्टिका, एफ. इन्फेक्टोरिया, एफ. रेटुसा, लेगरस्ट्रोइमिया स्पेसिओसा, मिशेलिया चंपका, मिलेटिया ओवलिफोलिया, मिलिंगटोनिया हॉर्टेंसिस, मिम्पुसोप्स एलेंगी, पॉलियाल्थिया लोंगिफोलिया, पोंगामिया पिन्नाटा, टेरोस्पर्मम एसेरिफोलियम, पुत्रंजीवा रॉक्सबर्गी, रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम, सारका असोका, टेकोमेला अंडुलाटा, टर्मिनलिया अर्जुन, थेस्पेसिया पॉपुलनिया। (Albizzia lebbeck, Alstonia scholaris, Anthocephalus cadamba, Azadirachta indica, Bauhinia variegata, Bombax malabaricum, Butea monosperma, Cassia fistula, C. nodosa, C. siamea, Erythriana indica var. parcellii, E. Variegata var. orientalis, Ficus religiosa, F. benghalensis, F. benjamina, F. elastica, F. infectoria, F. retusa, Lagerstroemia speciosa, Michelia champaka, Milletia ovalifolia, Millingtonia hortensis, Mimpusops elengi, Polyalthia longifolia, Pongamia pinnata, Pterospermum acerifolium, Putranjiva roxburghii, Rhododendron arboreum, Saraca asoca, Tecomella undulata, Terminalia arjuna, Thespesia populnea.)

झाड़ियां (Shrubs): बार्लेरिया क्रिस्टाटा, बुडलिया एशियाटिका, डेडालाकैंथस नर्वोसस, डोम्बेया स्पेक्टाबिलिस, होल्म्सकिओल्डिया सेंगुइनिया, चमेली सांबक, जे. ग्रैंडिफ्लोरम, जे. ह्यूमइल, जे. ऑफिसिनेल, निक्टैन्थेस आर्बोर्ट्रिस्टिस, रसेलिया जंकिया, स्पर्माडिक्टियन सुवेओलेंस। (Barleria cristata, Buddleia asiatica, Daedalacanthus nervosus, Dombeya spectabilis, Holmskioldia sanguinea, Jasminum sambac, J. grandiflorum, J. humile, J. officinale, Nyctanthes arbortristis, Russellia juncea, Spermadictyon suaveolens.)

पर्वतारोही/लतर (Climbers): क्लेमाटिस पैनिकुलता, क्लिटोरिया टर्नाटिया, फिकस रेपेंस, हिप्टेज बेन्घालेंसिस, जैस्मीनम ग्रैंडिफ्लोरम, जे. ह्यूमइल, जे. ऑफिसिनेल, पोराना पैनिकुलता, थुनबर्गिया ग्रैंडिफ्लोरम। (Clematis paniculata, Clitoria ternatea, Ficus repens, Hiptage benghalensis, Jasminum grandiflorum, J. humile, J. officinale, Porana paniculata, Thunbergia grandiflorum.)

मौसमी फूल (Seasonal Flowers): ऐमारैंथस एसपीपी।, सेलोसिया, गोम्फ्रेना, लेडीज लेस (पिम्पिनेला मोनोइका), टोरेनिया। (Amaranthus spp., Celosia, Gomphrena, Lady’s lace - Pimpinella monoica, Torenia.)

बल्बनुमा फूल (Bulbous Flowers): एलियम गिगेंटियम, कैन्ना, ग्लोरियोसा सुपरबा, आईरिस एसपीपी।, ट्यूलिप एसपीपी।, ऑर्किड (एराइड्स, एनोक्टोचिलस, एराक्निस, अरुंडिना, कैलेंथे, कोएलोगिन, सिंबिडियम, डेंड्रोबियम, पैफियोपेडिलम)। (Allium giganteum, Canna, Gloriosa superba, Iris spp., Tulip spp., Orchids - Aerides, Anoectochilus, Arachnis, Arundina, Calanthe, Coelogyne, Cymbidium, Dendrobium, Paphiopedilum.)

अन्य पौधे (Other Plants): कमल (नेलुम्बो न्यूसीफेरा - Nelumbo nucifera), निम्फिया एसपीपी। (एन. प्यूब्सेंस, एन. रूब्रा, एन. स्टेलाटा - Nymphaea spp., N. pubescens, N. rubra, N. stellata)

इनडोर पत्तेदार पौधे (Indoor Foliage Plants): एग्लोनिमा, एस्प्लेनियम निडस, बेगोनिया रेक्स, कोलियस ब्लुमेई, पिलिया कैडियरी, पेर्टिस क्रेटिका किस्म। क्रिस्पेट। (Aglaonema, Asplenium nidus, Begonia rex, Coleus blumei, Pilea cadieri, Pteris cretica var. crispate.)

इनडोर फूल वाले पौधे (Indoor Flowering Plants): क्रॉसेंड्रा इन्फंडिबुलीफोर्मिस, गाइनुरा औरेंटीका, कलानचोए ब्लॉसफेल्डियाना। (Crossandra infundibuliformis, Gynura aurantiiaca, Kalanchoe blossfeldiana.)

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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