अध्याय 10: दूध की परिभाषा, स्वच्छ दूध उत्पादन, दूध निकालने के तरीके और मिलावट
दूध:
दूध जानवरों की स्तन ग्रंथियों का लैक्टियल स्राव है। यह आमतौर पर गाय या भैंस से बछड़ा देने के कम से कम 72 घंटे बाद की अवधि के दौरान या दूध के कोलोस्ट्रम मुक्त होने तक प्राप्त किया जाता है। दूध एक सफेद अपारदर्शी तरल पदार्थ है जिसमें वसा एक पायस के रूप में मौजूद होती है, प्रोटीन और कुछ खनिज पदार्थ कोलाइडल निलंबन में होते हैं, और लैक्टोज के साथ कुछ खनिज और घुलनशील प्रोटीन वास्तविक घोल में होते हैं।
दूध की संरचना:
- दूध = वसा + गैर-वसा ठोस (Solids-non-fat)
- वसा: कुल वसा + संबंधित पदार्थ
- गैर-वसा ठोस (Solids-not-fat):
- लैक्टोज
- नाइट्रोजनयुक्त: प्रोटीन और गैर-प्रोटीन नाइट्रोजन
- खनिज पदार्थ: K, Na, Ca, Mg के फॉस्फेट, साइट्रेट और क्लोराइड; Cu, I, Fe, क्पुटकियम, कोबाल्ट, मैंगनीज, जिंक के अंश
- अन्य घटक: घुलित गैसें, बैक्टीरिया, विटामिन
विभिन्न स्तनधारियों के दूध की औसत संरचना (Average composition of milk of different mammals - %):
| प्रजाति |
पानी |
वसा |
प्रोटीन |
कुल ठोस |
SNF |
लैक्टोज |
राख |
| इंसान | 87.43 | 3.75 | 1.63 | 12.57 | 8.82 | 6.98 | 0.21 |
| गाय | 86.61 | 4.14 | 3.58 | 13.19 | 9.25 | 4.96 | 0.71 |
| भैंस | 82.76 | 7.38 | 3.60 | 17.24 | 9.86 | 5.48 | 0.78 |
| बकरी | 87.00 | 4.25 | 3.52 | 13.00 | 7.75 | 4.27 | 0.86 |
| भेड़ | 80.71 | 7.90 | 5.23 | 19.29 | 11.39 | 4.81 | 0.90 |
| ऊंट | 87.61 | 5.38 | 2.98 | 12.39 | 7.01 | 3.26 | 0.70 |
स्वच्छ दूध उत्पादन:
खेत स्तर पर दूध की गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए स्राव-पूर्व और स्राव-पश्चात (pre-and post-secretory) दोनों प्रबंधनों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। दूध में स्राव-पश्चात परिवर्तन (post-secretory changes) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दूध एक बार स्रावित होने के बाद खेत में ही विभिन्न सूक्ष्मजीवों का लक्ष्य बन जाता है। इसलिए, दूध के संरक्षण, दूध के घटकों की सुरक्षा, उच्च तापमान और प्राकृतिक आपदा से बचाव के संबंध में उचित देखभाल की जानी चाहिए। हाथ और मशीन से दूध निकालने दोनों में सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।
ग्रामीण दूध संग्रह:
भारत में, दूध उत्पादन कृषि की एक सहायक गतिविधि है। इसलिए, पश्चिमी मॉडल जैसे बल्क ट्रांसपोर्टेशन भारतीय परिस्थितियों में पूरी तरह लागू नहीं होते हैं। ग्रामीण संग्रह के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण विकसित किया गया है जिसमें रूट प्लानिंग और संग्रह/चिलिंग केंद्रों की स्थापना शामिल है जहाँ दूध को 4°C तक ठंडा किया जा सके।
मिलावट और उनका पता लगाना:
मिलावट (Adulteration): मात्रा बढ़ाने और अतिरिक्त लाभ कमाने के लिए दूध की गुणवत्ता को कम करने के लिए कानूनी रूप से निषिद्ध पदार्थों को मिलाना।
- पानी मिलाना: फ्रीजिंग पॉइंट का परीक्षण करके या लैक्टोमीटर से पता लगाया जाता है।
- न्यूट्रलाइज़र: अल्कोहल की उपस्थिति में दूध के जमाव में अंतर देखकर या रोसैलिक एसिड टेस्ट से पता लगाया जाता है।
- स्टार्च: आयोडीन समाधान मिलाने पर नीला रंग आता है।
- जिलेटिन: पिक्रिक एसिड के साथ पीला अवक्षेप।
- गन्ने की चीनी: रिसोर्सिनोल और हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ उबालने पर लाल रंग।
- यूरिया: p-dimethyl amino benzaldehyde के साथ पीला रंग।
- फॉर्मेलिन: सल्फ्यूरिक एसिड और फेरिक क्लोराइड के साथ बैंगनी अंगूठी।
- वनस्पति वसा: गैस क्पुटकैटोग्राफी, रिफ्रेक्टिव इंडेक्स, या वनस्पति में तिल के तेल के लिए बौडोइन टेस्ट।
दूध के परिरक्षक:
नमूनों के परीक्षण के लिए परिरक्षक आवश्यक हैं: (1) मर्क्यूरिक क्लोराइड (Mercuric chloride - जहरीला, लाल गोली), (2) फॉर्मेलिन (Formalin - 40% फॉर्मलाडेहाइड घोल), और (3) पोटेशियम डाइक्पुटकेट (Potassium dichromate - गोली के रूप में)।
दूध निकालने के सिद्धांत (PRINCIPLES OF MILKING):
यह एक श्रमसाध्य प्रक्रिया है जिसमें हार्मोनल रिफ्लेक्स शामिल है। इसे 5-8 मिनट के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। दूध निकालने के 3 सिद्धांत हैं:
- प्राकृतिक तकनीक (Natural Technique - calf suckling): बछड़े का चूसना। इसमें सक्रिय चरण (Active Phase - वैक्यूम निर्माण) और आराम का चरण शामिल है। बछड़े द्वारा 535 mm Hg का दबाव लागू किया जाता है, जो दूध निकालने का सबसे तेज़ और सुरक्षित तरीका है।
- मैनुअल तकनीक (Manual Technique - hand milking): हाथ से दूध निकालना।
- फिस्टिंग: पूरे थन को मुट्ठी में पकड़ना। यह सबसे अच्छा तरीका है।
- नकलिंग: अंगूठे को थन के खिलाफ मोड़ना। यह थन के लिए हानिकारक है और इससे बचना चाहिए।
- स्ट्रिपिंग: छोटे थनों के लिए या अंत में बचा हुआ दूध पूरी तरह से निकालने के लिए अंगूठे और उंगली से खींचना।
- यांत्रिक तकनीक (Mechanical Technique - machine milking): मशीन से दूध निकालना।
- गुण: आसान, कम कौशल की आवश्यकता, उच्च गुणवत्ता, बीमारियों का कम फैलाव, समय की बचत।
- दोष: लागत अधिक, बिजली आवश्यक।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- स्ट्रिप कप (STRIP CUP): थन की शारीरिक स्थिति का आकलन (asses the physiological status) करने और बीमारी (जैसे मैस्टाइटिस) का पता लगाने के लिए दूध की पहली कुछ बूंदों की जाँच।
- दूध निकालते समय सूखी विधि का उपयोग करना चाहिए। गीला दूध निकालना (Wet milking - हाथ या थन को गीला करना) अस्वच्छ है और थनों में दरारें पैदा कर सकता है।
- दूध निकालने के दौरान जानवर को उत्तेजित करने से बचें, क्योंकि एड्रेनालाईन का स्राव दूध उतरने की प्रक्रिया को रोक सकता है।


🔄 Updated Version 2.0
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 3 सितंबर 2026
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