अध्याय 21: भेड़ और बकरी की सामान्य बीमारियां - शीप पॉक्स, खुरपका-मुंहपका, ब्लू टंग, एंटरोटॉक्सिमिया और परजीवी
1. ब्लू टंग:
- यह एक वायरल बीमारी (Viral Disease) है।
- यह संक्रामक है लेकिन गैर-छूत रोग है।
- यह क्यूलिकोइड्स मिजेज (Culicoides midges - एक प्रकार का मच्छर/कीड़ा) द्वारा संचरित होता है।
- वायरस: ओर्बिवायरस - रियोविरिडे परिवार।
- भेड़ मुख्य रूप से प्रभावित होती हैं - भीड़भाड़, एडिमा और रक्तस्राव, बुखार, लंगड़ापन।
- लक्षण: यह बुक्कल म्यूकोसा (Buccal Mucosa) और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट की श्लेष्मा झिल्ली को प्रभावित करता है। खुर, थन आदि के संवेदनशील हिस्से का उपकला छूट जाना। इसमें कोई पुटिका नहीं बनती। मुंह में रक्तस्राव और एडिमा होता है।
- नियंत्रण: बारिश के मौसम से पहले एक जीवित, क्षीण बहुसंयोजी वैक्सीन दें। रोग की रोकथाम में वेक्टर (मच्छर/कीड़े) का नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण है।
2. शीप पॉक्स (Sheep pox / भेड़ चेचक):
- यह पॉक्स वायरस के कारण होने वाली एक वायरल बीमारी है।
- लक्षण: यह एक संक्रामक रोग (Contagious Disease) है जिससे भारी नुकसान होता है। तेज बुखार, सुस्ती, झुंड से अलग-थलग होना, प्राकृतिक छिद्रों (आंखों और नथुने) से स्राव, पलकों में सूजन। त्वचा, कान, सिर, जांघों के अंदर, अंडकोश, पूंछ के निचले हिस्से पर 'पॉक्स' के दाने या फुंसियां। मेमनों में निमोनिया अधिक आम है जिससे मृत्यु हो सकती है।
- उपचार: कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, नर्सिंग महत्वपूर्ण है। त्वचा के घावों पर सल्फानिलैमाइड और नीम का तेल लगाया जाता है। माध्यमिक जीवाणु संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबायोटिक थेरेपी दी जाती है।
- नियंत्रण: शीप पॉक्स वैक्सीन और टिश्यू कल्चर वैक्सीन का प्रशासन।
3. एंटरोटॉक्सिमिया (Enterotoxaemia / फड़किया रोग):
- यह एक बैक्टीरियल रोग (Bacterial Disease) है - क्लोस्ट्रीडियम परफ्रिंजेंस प्रकार D (Clostridium perfringens type D) और Cl. वेल्ची प्रकार 'D' के कारण होता है।
- लक्षण: युवा स्टॉक में मृत्यु तुरंत होती है, मृत्यु से पहले मेमनों में ऐंठन होती है। वयस्क जानवर शुरू में शांत (calm and Quiet) होते हैं, उनके मुंह में झाग आता है, जबड़े चबाते हैं, आंखें घुमाते हैं, और ऐंठन होती है।
- मेमनों में 3-8 सप्ताह में यह "पल्पी किडनी रोग" का कारण बनता है।
- उपचार: सल्फाडिमिडाइन 33 1/3% + एंटीबायोटिक थेरेपी (टेट्रासाइक्लिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन + पेनिसिलिन)।
- नियंत्रण: मृत जानवरों का उचित निपटान। टीकाकरण: मेमनों को 2 सप्ताह की उम्र में, भेड़ों को सालाना, और गर्भवती भेड़ों को ब्याने से पहले।
4. खुरपका और मुंहपका रोग (Foot and Mouth Disease - FMD):
यह एक अति संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके विस्तृत लक्षण और उपचार के लिए मवेशी रोगों (Cattle disease) के नोट्स देखें (अध्याय 15)।
5. एक्टो (बाहरी) और एंडो (आंतरिक) परजीवी:
बाहरी परजीवी:
- ब्लू बॉटल फ्लाई / ब्लैक ब्लो फ्लाई (Blue bottle fly / Black Blow fly): ये खुले घाव के गंदे क्षेत्र में अंडे देते हैं।
- जूं और टिक: ये ऊन को नुकसान पहुंचाते हैं। जानवर कमजोर हो जाता है, उसमें खून की कमी हो जाती है और विकास रुक जाता है।
- माइट्स: ये शीप स्कैब का कारण बनते हैं, जिससे जानवर में बेचैनी होती है और ऊन झड़ने लगता है।
- उपचार: मैलाथियान 0.5%, सुमिथियोन 0.1%, सेवियन 0.8% का उपयोग करें। डिप (Dip - नहलाना): लाइम सल्फर 0.4% W/V।
आंतरिक परजीवी:
- फैसिओलायसिस (Fascioliasis - लिवर फ्लूक): इससे जानवर की स्थिति खराब हो जाती है।
- राउंड वर्म: यह एनीमिया (Anemia - खून की कमी) का कारण बनता है।
- टेप वर्म: इसके कारण बोतलबंद जबड़ा और फूला हुआ पेट होता है।
- लक्षण: बहुत अधिक पीला, गहरा और पानी जैसा मल (Profuse yellow dark watery faeces - दस्त)।
- उपचार: जानवरों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा देनी चाहिए।
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अंतिम अद्यतन (Last Updated): 3 सितंबर 2026
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