अध्याय 22: सूअर पालन - विदेशी मूल की सामान्य नस्लें, नामकरण और आवास
सूअर पालन के लाभ (Advantages of Swine / Pig Industry):
- उच्च प्रसार: एक बार में 6-12 बच्चे प्रति लिटर पैदा होते हैं।
- FCR (चारा रूपांतरण अनुपात (FCR)): बहुत अच्छा होता है (1:2.5 - 1:3)।
- छोटा पीढ़ी अंतराल और तेजी से विकास (10 किलोग्राम / माह वजन बढ़ता है)।
- प्रति इकाई वजन पर मांस की अधिक मात्रा (उच्च मांस प्राप्ति प्रतिशत: 70-75%) और अधिक ऊर्जा।
- यह मिश्रित खेती प्रणाली के लिए आसानी से अनुकूलित हो जाता है और अवशिष्ट चारा / बचा हुआ चारा, बगीचे और रसोई के कचरे पर सफलतापूर्वक पाला जा सकता है।
- शीघ्र परिपक्वता: 9-10 महीने, यौवन: 5-8 महीने।
नामकरण:
| प्रजाति | Sus scrofa vittatus, Sus scrofa indicus |
| समूह | स्टॉक / ड्रोव (Stock / Drove) |
| नवजात | पिगलेट (सबसे कमजोर पैदा हुआ बच्चा - Runt) |
| युवा नर | बोअरलिंग |
| युवा मादा | गिल्ट |
| वयस्क नर | बोअर |
| वयस्क मादा | सोव |
| बधिया किया हुआ नर | स्टैग / हॉग (Stag / Hog) |
| प्रसव | फैरोइंग |
| ध्वनि | ग्रन्टिंग |
विदेशी नस्लें:
- लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर: यूके (UK) की नस्ल। रंग सफेद, लंबा शरीर। वयस्क वजन: नर 300-400 किलो, मादा 230-320 किलो।
- मिडिल व्हाइट यॉर्कशायर: यूके की नस्ल। छोटे और बड़े यॉर्कशायर के संकरण से विकसित। देसी सूअरों को अपग्रेड करने के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। वयस्क वजन: नर 250-350 किलो।
- लैंड्रेस: डेनमार्क की बेकन नस्ल। काले धब्बे के साथ सफेद, लंबा थूथन। बहुत कुशल चारा कनवर्टर। वयस्क वजन: नर 270-360 किलो।
सूअर का पोषण:
सूअर एकगर्भीय (Monogastric - एक पेट वाले) और सर्वाहारी होते हैं। इन्हें कम फाइबर (5-6% से अधिक नहीं) और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन (मुख्यतः पशु स्रोत) की आवश्यकता होती है।
- पिगलेट एनीमिया (Piglet Anaemia / Thumps): सघन प्रणाली के तहत पाले गए पिगलेट्स जो मिट्टी/रेत नहीं खोद पाते, उन्हें दूध से पर्याप्त लोहा (Fe) और तांबा (Cu) नहीं मिल पाता। इससे एनीमिया होता है और श्वसन कष्ट होती है। रोकथाम: गर्दन में आयरन डेक्सट्रॉन का इंजेक्शन, क्रीप राशन में 1% FeSO4, या सूअर के थन पर FeSO4 का लेप लगाना।
सूअर आवास (Pig sty / Housing of Pigs):
- यह मानव आवास और डेयरी प्लांट से दूर होना चाहिए।
- फर्श: मजबूत सीमेंट का फर्श होना चाहिए ताकि वे उसे थूथन से खोद न सकें।
- फैरोइंग पेन: यह मादा के ब्याने का कमरा है। इसमें बच्चों को कुचलने से बचाने के लिए गार्ड रेल्स, बच्चों के लिए क्रीप एरिया, और पहले सप्ताह गर्मी प्रदान करने के लिए ब्रूडर (Brooder) (30-32°C) की व्यवस्था होती है।
- वैलोज़: वाष्पीकरण द्वारा शरीर की गर्मी को कम करने के लिए पानी के टैंक (10' x 6' x 15") होते हैं, क्योंकि सूअर में पसीने की ग्रंथियां सीमित होती हैं।
ब्याने के दौरान प्रबंधन:
- यह अवधि बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें 20-30% मृत्यु दर हो सकती है।
- अपेक्षित ब्याने की तारीख से एक सप्ताह पहले गर्भवती मादा को फैरोइंग पेन में स्थानांतरित कर देना चाहिए।
- फर्श पर 4 इंच कटी हुई पुआल डालें। बिना कटी पुआल न डालें वरना बच्चे उसमें उलझ सकते हैं।
- जन्म 2-4 घंटे में होता है और 2 घंटे के भीतर प्लेसेंटा निकल जाता है।
- प्रसव के बाद बच्चों की नाभि को 1 इंच छोड़कर काट देना चाहिए और आयोडीन लगाना चाहिए। सुई जैसे दांतों (needle/wolf teeth) को काट देना चाहिए।
सूअर के रोग (Swine Diseases):
- वायरल:
- स्वाइन फीवर (Swine fever / Hog Cholera): यह सभी उम्र को प्रभावित करता है। त्वचा, पेट और जांघ पर लाल/बैंगनी धब्बे, तेज बुखार, दस्त और उल्टी इसके लक्षण हैं।
- अन्य: शीप पॉक्स, FMD, स्वाइन इन्फ्लूएंजा।
- बैक्टीरियल:
- स्वाइन एरिसिपेलस: तेज बुखार और शरीर पर लाल 'हीरे' के आकार का मलिनकिरण (discoloration)।
- अन्य: एंथ्रेक्स, ब्रूसेलोसिस, टीबी।
🔄 Updated Version 2.0
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 3 सितंबर 2026
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