अध्याय 29: ब्रायलर की देखभाल और प्रबंधन
ब्रायलर प्रबंधन:
ब्रायलर को किसी भी लिंग (नर या मादा) के कोमल मांस वाले चिकन कहलाता है। यह अपने 35 से 40 ग्राम के शुरुआती वजन से बढ़कर 6 सप्ताह की आयु में लगभग 4 किलो चारा खाकर 2 किलो या उससे अधिक का हो जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मांस उत्पादन होता है।
इनकी ब्रूडिंग और प्रबंधन काफी हद तक लेयर ब्रूडिंग के समान ही होता है।
स्थान की आवश्यकताएं:
| आयु (सप्ताह) |
फर्श की जगह |
फीडर स्पेस |
वाटर स्पेस |
| 0 - 4 सप्ताह |
½ वर्ग फीट / पक्षी |
3 |
2 |
| 4 - 8 सप्ताह |
1 वर्ग फीट / पक्षी |
6 |
4 |
भोजन:
ब्रायलर मुर्गियों को मुख्य रूप से दो प्रकार का चारा दिया जाता है:
- ब्रायलर स्टार्टर: यह 0 से 3 सप्ताह की आयु तक दिया जाता है। इसमें 23% क्रूड प्रोटीन (CP) और 2900 kcal/kg ऊर्जा (E) होती है।
- ब्रायलर फिनिशर: यह 4 से 6 सप्ताह की आयु (बाजार जाने तक) दिया जाता है। इसमें 20% क्रूड प्रोटीन (CP) और 3000 kcal/kg ऊर्जा (E) होती है।
टीकाकरण:
- मारेक्स वैक्सीन (Marek's Vaccine): यह एक दिन के चूजे को दी जाती है।
- आर.डी.वी.एफ. (R.D.V.F. - रानीखेत रोग का टीका): यह 5वें से 7वें दिन के बीच दिया जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रबंधन:
- पानी के साथ लीवर उत्तेजक और विटामिन का उपयोग करने से चारा उपयोग बेहतर होता है और शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है।
- ब्रायलर फार्मिंग की सफलता का आकलन निम्नलिखित मापदंडों की निगरानी करके किया जाता है:
- मृत्यु दर और जीने की क्षमता
- बाजार वजन
- चारा रूपांतरण दक्षता (Feed conversion efficiency - FCR)
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अंतिम अद्यतन (Last Updated): 3 सितंबर 2026
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