अध्याय 32: पोल्ट्री रोगों का वर्गीकरण - कारण जीव, लक्षण, रोकथाम (वायरल रोग)
रोग और उनका नियंत्रण (Disease and their control):
रोग को स्वास्थ्य की सामान्य स्थिति से विचलन (deviation) के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें शरीर के कार्य बिगड़ना, उत्पादन में कमी, मृत्यु दर (mortality) और रुग्णता (morbidity) शामिल हैं।
सामान्य नियंत्रण उपाय (General Control measures):
- चूजे हमेशा प्रतिष्ठित कंपनियों से खरीदें।
- टीकाकरण (vaccination) कार्यक्रम का सख्ती से पालन करें और दवा की समय-सारणी का पालन करें।
- मुर्गी घर को सूखा, ठंडा और अच्छी तरह से हवादार (well ventilated) रखें। इसे चूहों और मक्खियों से मुक्त रखें।
- लिट्टर, फीडर और वाटरर की स्वच्छता बनाए रखें।
- मृत पक्षियों और कचरे का निपटान दफन (burial) या भस्मीकरण (incineration) द्वारा करें।
- विभिन्न आयु वर्ग के पक्षियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित करें (All-in-all-out system)।
- आगंतुकों (visitors) की जांच करें और कीटाणुनाशक (sanitizers) के साथ फुट बाथ का उपयोग करें।
टीकाकरण (Vaccination):
"इलाज से बेहतर रोकथाम है" (Prevention is better than Cure)। कई वायरल बीमारियों का इलाज नहीं किया जा सकता है, उन्हें केवल निवारक टीकाकरण द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है।
टीकाकरण के मार्ग (Routes of administration):
- पीने के पानी के माध्यम से (Drinking Water): समय और श्रम बचाने वाला तरीका। वैक्सीन को ठंडे पानी में दूध पाउडर (4 ग्राम/लीटर) के साथ मिलाकर तुरंत उपयोग किया जाता है (उदा: RDV Lasota)।
- आंख या नाक में बूंद (Intra ocular / Intra nasal): वैक्सीन को सामान्य सलाइन (Saline) में मिलाया जाता है और एक बूंद नथुने या आंख में डाली जाती है (उदा: RDVF)।
- स्प्रे वैक्सीन (Spray Vaccine): हैचरी में चूजों के बक्से में धुंध (mist) का छिड़काव किया जाता है।
- विंग वेब पंक्चर (Wing Web puncture): फाउल पॉक्स (Fowl pox) वैक्सीन को कांटेदार सुई से विंग वेब (पंख की झिल्ली) के माध्यम से दिया जाता है।
- फेदर फॉलिकल (Feather Follicle Method): जांघ के अंदरूनी हिस्से से पंख उखाड़कर कांच की छड़ की मदद से वैक्सीन (कबूतर पॉक्स) लगाई जाती है।
- त्वचा के नीचे (Subcutaneous injection): रानीखेत (RDVK) वैक्सीन त्वचा की दो परतों के बीच दी जाती है।
टीकाकरण अनुसूची (Vaccination Schedule):
| आयु |
वैक्सीन का नाम |
मार्ग (Route) |
| पहला दिन | मारेक्स रोग वैक्सीन (Marek's Disease) | चमड़े के नीचे (Subcutaneous) - हैचरी में |
| 7वां दिन | रानीखेत (RDVF / Lasota) | आंख या नाक में बूंद (0.2 ml) |
| 14-16 दिन (दूसरा सप्ताह) | संक्रामक बर्सा रोग (IBD) | आंख में बूंद |
| 21-24 दिन (तीसरा सप्ताह) | संक्रामक ब्रोंकाइटिस (Infectious Bronchitis) | आंख में बूंद |
| 30-35 दिन | रानीखेत (Lasota) | आंख में बूंद |
| 42-45 दिन | संक्रामक बर्सा रोग (IBD) | आंख में बूंद |
| 56-70 दिन (8-10 सप्ताह) | रानीखेत "K" (Mesogenic) | चमड़े के नीचे (Subcutaneous) |
| 84-91 दिन (12-13 सप्ताह) | फाउल पॉक्स (Fowl Pox) | विंग वेब पंक्चर |
| 91-98 दिन (13-14 सप्ताह) | संक्रामक ब्रोंकाइटिस (Infectious Bronchitis) | पीने के पानी के माध्यम से |
| 126-133 दिन | रानीखेत "K" (Mesogenic) | चमड़े के नीचे (Subcutaneous) |
| उत्पादन के बाद (हर 8 सप्ताह) | रानीखेत "Lasota" | पीने के पानी के माध्यम से |
अन्य प्रबंधन प्रक्रियाएं:
- चोंच काटना (Debeaking): पंख नोचने और नरभक्षण (cannibalism) को रोकने के लिए ऊपरी चोंच का 1/3 हिस्सा काटा जाता है (10-14 दिन और फिर 14-16 सप्ताह में)। इसे हमेशा इलेक्ट्रोकॉटरी (electrocautery) से काटना चाहिए, चाकू से कभी नहीं।
- कृमिनाशक (Deworming): पाचन तंत्र से कीड़ों को हटाने की प्रक्रिया। इसके लक्षण हैं- सुस्ती, कमजोरी, खूनी दस्त, और अंडा उत्पादन में कमी। लेयर में हर 45 दिन पर डीवर्मिंग की जाती है।
- जूएं मारना (Delicing): रक्त चूसने वाले बाहरी परजीवियों (ticks, mites) को हटाने के लिए पक्षियों को सुमैथियन या मैलाथियान (sumathion / malathion) के घोल में डुबोया (dipping) जाता है।
वायरल रोग (Viral Diseases):
1. रानीखेत रोग (Ranikhet Disease / New Castle Disease):
- कारण: पैरा मिक्सो विरिडे (Para myxo viridae) वायरस। भारत में बारिश का मौसम इसके फैलने के लिए बहुत अनुकूल है।
- लक्षण: बिना लक्षणों के अचानक मृत्यु, अवसाद, बंद आंखें, लटके हुए पंख, हरा या पीला दस्त। कभी-कभी गर्दन का फड़कना या पक्षाघात (paralysis) हो जाता है। नरम खोल वाले अंडे दिए जाते हैं और सांस लेने में तकलीफ होती है।
- रोकथाम: पहले दिन या हैच के 5 दिनों के भीतर 'F' स्ट्रेन या लसोटा (Lasota) वैक्सीन। 8-10 सप्ताह की आयु में RDVK स्ट्रेन। लेयर में हर 2 महीने में बूस्टर।
2. संक्रामक बर्सा रोग (Infectious Bursal Disease - IBD / Gumboro disease):
- कारण: IBD वायरस। यह अत्यधिक संक्रामक है।
- लक्षण: बर्सा प्रभावित होता है जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर (Immuno suppression) हो जाती है। आमतौर पर 2-6 सप्ताह के चूजे प्रभावित होते हैं। सफेद दस्त, वेंट पेस्टिंग (vent pasting), अस्थिर चाल और झटके आना।
- रोकथाम: दूसरे और तीसरे सप्ताह में IBD टीकाकरण (Vaccination)।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल
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