1758 - सिस्टेमा नेचुरे लिनिअस (Systema Naturae Linnaeus) का 10वां संस्करण केवल 12 भारतीय कीड़ों के साथ जो सबसे पहला रिकॉर्ड था।
1779 - डॉ. जे.जी. कोएनिग - चिकित्सा अधिकारी ने वैज्ञानिक आधार पर भारतीय कीड़ों पर काम शुरू किया। उन्होंने तंजावुर जिले के दीमकों का एक विशेष खाता भी प्रकाशित किया।
1782 - डॉ. केर ने लाख कीट के खाते पर प्रकाशित किया।
1785 - कलकत्ता में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की शुरुआत हुई और सोसाइटी के प्रकाशनों में कई पेपर प्रकाशित हुए।
1790 - रोक्सबर्ग (वनस्पतिशास्त्री / Botanist) ने लाख कीट का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया।
1791 - डॉ. जे. एंडरसन ने कोचीनियल स्केल कीड़े पर एक मोनोग्राफ जारी किया।
1800 - बुकानन (यात्री / Traveller) ने भारत में लाख की खेती और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में रेशम उत्पादन पर लिखा। डेनोवन ने "कीड़ों का प्राकृतिक इतिहास" प्रकाशित किया जो एशिया के कीड़ों पर पहला योगदान था और 1842 में वेस्ट वुड द्वारा संशोधित किया गया था।
1875 - कलकत्ता में भारतीय संग्रहालय की स्थापना।
1883 - बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की शुरुआत हुई। इन दो संगठनों की नींव के बाद भारत में वैज्ञानिक अध्ययनों पर अधिक ध्यान दिया गया। भारतीय कीड़ों के कई योगदान बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री के जर्नल में प्रकाशित हुए थे।
1892 - हैम्पसन ने भारत के महीनों पर चार खंड जारी किए।
1893 - रोथनी ने भारतीय चींटियों पर प्रकाशित किया (भारत में जैविक कीट नियंत्रण का सबसे पहला रिकॉर्ड / earliest record of biological pest control in India) अर्थात स्थिर वस्तुओं पर सफेद चींटियों के हमले को लाल चींटियों द्वारा मुक्त रखा गया था।
भारत सरकार ने फॉना ऑफ ब्रिटिश इंडिया श्रृंखला का प्रकाशन शुरू किया।
1897 - बिंघम ने "हाइमनोप्टेरा" ("Hymenoptera") (चींटियां, मधुमक्खियां और ततैया / Ants, bees and wasps) पर खंड जारी किए। इसके बाद कीड़ों के अन्य समूहों जैसे कि कोलियोप्टेरा (भृंग / beetles), हेमिप्टेरा (कीड़े / bugs), ओडोनाटा (ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई / dragonfly and damselfly), आदि पर खंड प्रकाशित हुए।
1889 - भारतीय संग्रहालय, कलकत्ता ने पांच खंडों में इंडियन म्यूजियम नोट्स प्रकाशित किए।
1903 - जिसने भारत में आर्थिक कीट विज्ञान और व्यावहारिक कीट विज्ञान में बहुत योगदान दिया। 19वीं सदी व्यावहारिक कीट विज्ञान के क्षेत्र में प्रमुख प्रगति और विस्तार का प्रतीक है।
1901 - (लियोनेल डी नाइसविले / Lionel de Nicevelle) भारत सरकार के पहले कीटविज्ञानी की नियुक्ति।
1905 - पूसा (बिहार) में इंपीरियल कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना। बाद में इस संस्थान को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के रूप में नई दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया।
1906 - "भारतीय कीट कीट" और "भारतीय कीट जीवन" (“Indian Insect Pests” & “Indian Insect Life”) प्रोफेसर मैक्सवेल द्वारा पुस्तकें। लेफ्रॉय, प्रमुख, कीट विज्ञान प्रभाग, आईएआरआई, नई दिल्ली। बाद में राज्य सरकारों ने भी कीट विज्ञान संबंधी काम हाथ में लिया। मद्रास, पंजाब और उत्तर प्रदेश ने क्रमशः 1912, 1919 और 1922 में अपने पहले सरकारी कीटविज्ञानियों की नियुक्ति की।
1914 - टी.बी. फ्लेचर, मद्रास राज्य के पहले सरकारी कीटविज्ञानी, ने अपनी पुस्तक "कुछ दक्षिण भारतीय कीड़े" ("Some South Indian Insects") प्रकाशित की।
1916 - भारतीय संग्रहालय के प्राकृतिक इतिहास अनुभाग का गठन भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के रूप में किया गया था।
1921 - कपास के कीटों (pests of cotton) पर जांच करने के लिए भारतीय केंद्रीय कपास समिति।
1925 - भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान।
1940 - डॉ. टी.वी. रामकृष्ण अय्यर ने "हैंडबुक ऑफ इकोनॉमिक एंटोमोलॉजी" ("Handbook of Economic Entomology") पुस्तक प्रकाशित की, जिसने कृषि के छात्रों और कृषि वैज्ञानिकों की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा किया।
1968 - डॉ. एम.एस. मणि की "सामान्य कीट विज्ञान" (Dr. M.S. Mani's "General Entomology")।
1969 - डॉ. एच.एस. प्रुथी की "कृषि कीट विज्ञान की पाठ्यपुस्तक" (Dr. H.S. Pruthi's "Textbook of Agricultural Entomology")। डॉ. प्रधान की "फसलों के कीट कीट" (Dr. Pradhan's "Insect Pests of Crops")।
1946 - भारत सरकार ने "पौधा संरक्षण निदेशालय" ("Directorate of plant protection") शुरू किया।
1960 - वाई.आर. राव द्वारा "भारत में रेगिस्तानी टिड्डी" मोनोग्राफ ("The Desert Locust in India" monograph by Y.R. Rao)।
1969 - डॉ. टी.एन. अनंतकृष्णन द्वारा "भारतीय थिसानोप्टेरा पर मोनोग्राफ" ("The monograph on Indian Thysanoptera" by Dr. T.N. Ananthakrishnan)।
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