13. व्यक्तित्व (PERSONALITY)

व्यक्तित्व की अवधारणा (Concept of Personality)

व्यक्तित्व (Personality) किसी व्यक्ति का कुल गुण (total quality) है। व्यक्तित्व शब्द लैटिन शब्द पर्सोना (persona) से आया है जिसका अर्थ है रंगमंच (theater) में खिलाड़ियों (players) द्वारा पहना जाने वाला मुखौटा (mask)। व्यक्तित्व में अवलोकन योग्य व्यवहार (observable behaviour) शामिल होता है। इसे किसी व्यक्ति के अपने पर्यावरण (environment) के लिए विशिष्ट (typical) या सुसंगत समायोजन (consistent adjustment) के रूप में परिभाषित किया गया है। व्यक्तित्व के तत्वों को व्यक्तित्व के लक्षण (traits) कहा जाता है, यह वे लक्षण हैं जो एक व्यक्ति को उसके व्यवहार (behaviour) में दूसरे व्यक्ति से अलग (different) बनाते हैं। शर्मीलापन (Shyness) और सामाजिकता (sociability) किसी व्यक्ति के विभिन्न लक्षण (different traits) और विशेषता (characteristic) हैं। वे सभी विशेषताएँ (characteristics) जो एक व्यक्ति के पास होती हैं, वे उसकी शक्तियाँ (powers), ज़रूरतें (needs), क्षमताएँ (abilities), चाहतें (wants), आदतें (habits), उसका लक्ष्य (goal) और आकांक्षाएँ (aspirations) हैं। वस्तुओं (objects) और व्यक्तियों (persons) के प्रति उनके व्यवहार के पैटर्न (patterns of behaviour) उनके व्यक्तित्व (personality) को जारी रखते हैं।

चूंकि एक व्यक्ति लक्षणों (traits) के रूप में विशेषताओं का एक बंडल (bundle of characteristics) है, हम व्यक्तित्व को लक्षणों के एक एकीकृत पैटर्न (integrated pattern of traits) के रूप में परिभाषित (define) कर सकते हैं। वर्थ (worth) के अनुसार, किसी का व्यक्तित्व उच्च काया (high physique), वृत्ति (instincts) और बुद्धिमत्ता (intelligence) से बना होता है।

  1. भौतिक स्व (Material self): (उसका शरीर, कपड़े, पारिवारिक संपत्ति आदि)
  2. सामाजिक स्व (Social self): (उसका घर, क्लब, कार्यालय, चर्च आदि)
  3. आध्यात्मिक स्व (Spiritual self): (तर्क करने (argue) और चेतना (consciousness), नैतिक संवेदनाओं (moral sensitivities) में भेदभाव (discriminate) करने की उनकी क्षमता)।

मेडुगली (Medougali) के अनुसार व्यक्तित्व में उसके (a) स्वभाव (disposition), (b) मिजाज (temper), (c) स्वभाव (temperament) और (d) चरित्र (character) शामिल हैं।

व्यक्तित्व की परिभाषा (Definition of personality)

व्यक्तित्व वह है जो व्यक्ति को प्रभावी (effective) बनाता है, या दूसरों पर प्रभाव (influence over others) देता है। मनोविज्ञान की भाषा में यह किसी का सामाजिक प्रोत्साहन मूल्य (social stimulus value) है। (मे, एम.ए. - May, M.A.)

एक मनुष्य का व्यक्तित्व उसके संगठित व्यवहार (organized behaviour) की कुल तस्वीर (total picture) है, विशेष रूप से इसे साथी पुरुषों (fellow men) के साथ एक सुसंगत तरीके (consistent way) से विशेषता (characterized) दी जा सकती है। (दाशिएल, जे.एफ. - Dashiell, J.F.)

हमारा व्यक्तित्व (personality) उस चीज का परिणाम (result) है जो हम शुरू करते हैं और जिसके माध्यम से हम रहते हैं। यह समग्र रूप से एक 'प्रतिक्रिया द्रव्यमान' ('reaction mass') है। (वाटसन, जे.बी. - Watson, J.B.)

व्यक्तित्व उन मनोवैज्ञानिक प्रणालियों (psychological systems) के व्यक्ति के भीतर गतिशील संगठन (dynamic organization) है जो उसके पर्यावरण (environment) में उसके अद्वितीय समायोजन (unique adjustments) को निर्धारित (determine) करते हैं। (ऑलपोर्ट, जी.डब्ल्यू. - Allport, G.W.)

इसलिए, इसे किसी व्यक्ति के अपने पर्यावरण के प्रति विशिष्ट (typical) या सुसंगत समायोजन (consistent adjustments) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह किसी व्यक्ति की संरचना (structure), व्यवहार के तरीके (modes of behaviour), रुचियों (interests), दृष्टिकोण (attitudes), क्षमताओं (capacities) और योग्यता (aptitudes) का सबसे विशिष्ट एकीकरण (characteristic integration) है।

व्यक्तित्व के लक्षण (Personality Traits)

इसे व्यक्तित्व का आयाम (dimension of personality) माना जा सकता है। उदाहरण के लिए, प्रभुत्व-समर्पण (dominance-submission) एक ऐसा लक्षण (trait) है जिसे कोई व्यक्ति किसी भी हद (any degree) तक दिखा सकता है। एक विशेषता (trait) मानव व्यवहार का वर्णन (description) है। किसी व्यक्ति के लक्षण उसके व्यक्तित्व का वर्णन करते हैं। किसी के लक्षण और उनके पैटर्न (patterned) के तरीके उसे दूसरे व्यक्ति से अलग बनाते हैं। परिभाषित लक्षणों (defining traits) की पहचान करने में, मनोविज्ञान ने व्यक्तित्व की विशिष्ट (specific) और वस्तुनिष्ठ समझ (objective understanding) की दिशा में काफी प्रगति (considerable progress) की है। व्यक्तित्व अद्वितीय (unique) है। यह विशिष्टता (uniqueness) विभिन्न व्यक्तियों के लक्षणों में अंतर (difference) और लक्षणों के गतिशील संगठन (dynamic organization) का परिणाम है। कुछ लक्षण आरोही (ascendant), हंसमुख-उदास (cheerful-gloomy), मैत्रीपूर्ण शत्रुतापूर्ण (friendly hostile) आदि हैं।

कैटील (Cateel) ने दो प्रकार के लक्षण दिए हैं (a) सतह के लक्षण (surface traits) और किसी के व्यवहार के गुण जो सीधे कार्रवाई में देखने योग्य (observable) हैं और (b) स्रोत लक्षण (source traits) - गहरे स्तर (deeper level) पर गुण।

व्यक्तित्व प्रकार (Personality types)

युंग (Jung) ने व्यक्तित्व में यह अंतर्मुखता - बहिर्मुखता (introversion - extraversion) प्रकार दिया है। अंतर्मुखी (Introverts) स्थितियों पर नकारात्मक प्रतिक्रिया (react negatively) देंगे; समाज से हटेंगे (withdraw), भीतर की ओर (inwardly), चयनात्मक (selective)। अंतर्मुखी वस्तुनिष्ठ दुनिया (objective world) में सक्रिय भागीदारी (active participation) से हट जाता है और वह विचार (thought) और फंतासी (fantasy) की अपनी आंतरिक दुनिया (inner world) में रुचि (interested) रखता है। वह दूसरों के साथ स्वतंत्र रूप (freely) से नहीं घूमेगा। वह अपनी भावनाओं (feelings) और आंतरिक इच्छाओं (inner desires) को व्यक्त (express out) नहीं करेगा। वह आलोचना के प्रति संवेदनशील (sensitive to criticism) है, अपनी विफलताओं (failures) को बढ़ाता है और आत्म-आलोचना (self-criticism) में लगा रहता है।

बहिर्मुखी (Extroverts) अंतर्मुखी के विपरीत (opposite) होते हैं। बहिर्मुखी सकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया (react positively) करते हैं और बाहर की ओर अभिव्यंजक (outwardly expressive) होते हैं। माना जाता है कि एक बहिर्मुखी मोटी चमड़ी (thick skinned) वाला होता है और अपनी भावनात्मक अभिव्यक्ति (emotional expression) में आलोचना (criticism) के प्रति अपेक्षाकृत संवेदनशील (relatively sensitive) होता है, तर्क (argument) में अवैयक्तिक (impersonal) होता है, न तो विफलता (failure) से गहराई से प्रभावित (deeply affected) होता है और न ही आत्म-आलोचना (self-criticism) के आत्म विश्लेषण (self analysis) में बहुत अधिक व्यस्त (occupied) होता है।

शेल्डन का वर्गीकरण (प्रकार) (Sheldon’s classification - types)

शेल्डन (Sheldon) लोगों को 3 प्रकारों (3 types) में वर्गीकृत (classifies) करता है। (1) एंडोमॉर्फी (Endomorphy) (2) मेसोमॉर्फी (Mesomorphy) और (3) एक्टोमॉर्फी (Ectomorphy)।

इसके अलावा शेल्डन ने लोगों को उनके स्वभाव (temperaments) के अनुसार 3 प्रकारों में वर्गीकृत किया है। वे हैं (1) विसरोटोनिया (Viscerotonia), (2) सोमाटोटोनिया (Somatotonia) और (3) सेरेब्रोटोनिया (Cerebrotonia)।

S.No शरीर के प्रकार (Body types) स्वभाव के प्रकार (Temperamental types)
1 एंडोमॉर्फी (Endomorphy)
बड़ा विसरा (Large Viscera)
नरम शरीर की आकृति (Soft body contours)
विसरोटोनिया (Viscerotonia)
आराम के स्नेह का प्यार (Love of comfort affection)
सामाजिकता (Sociability)
2 मेसोमॉर्फी (Mesomorphy)
भारी मांसपेशियों का विकास (Heavy muscular development)
महत्वाकांक्षी कठोर शरीर आकृति (Ambitious Hard body contours)
सोमाटोटोनिया (Somatotonia)
जोरदार (Vigorous), आत्म-मुखर (self-assertive)
3 एक्टोमॉर्फी (Ectomorphy)
लंबे (Long), पतले बाधित (slender inhilated)
चरम (Extremities), खराब मांसपेशियों का विकास (poor muscular development)
सेरेब्रोटोनिया (Cerebrotonia)
संयमित (Restrained)
सामाजिक वापसी विचारशील (Social withdrawal thoughtful)

व्यक्तित्व का मापन (Measurement of personality)

व्यक्तित्व (personality) का मापन (measurement) मानदंड (criterial) और व्यावहारिक (practical) दोनों उद्देश्यों (purposes) को पूरा करता है। जब एक व्यक्ति जिसे कार्मिक समायोजन (personnel adjustment) में कठिनाइयाँ (difficulties) होती हैं, मनोचिकित्सक (psychiatrist) की मदद के लिए आता है, तो उसके व्यक्तित्व (personality) का आकलन (assess) करना मूल्यवान (valuable) है। व्यक्तित्व को मापने के लिए हमें व्यक्तित्व के लक्षणों (trails of personality) को मापना होगा। आवश्यकताओं (needs), दृष्टिकोण (attitudes), रुचियों (interests), मूल्यों (values) और अन्य व्यक्तित्व विशेषताओं (personality characteristics) को भी मापना (measure) संभव (possible) है।

व्यक्तित्व विशेषताओं को मापने के लिए निम्नलिखित विधियों (methods) का उपयोग किया गया है।

1. प्रश्नावली विधि (The questionnaire method)
इस पद्धति (method) में प्रश्नों या बयानों (list of questions or statements) की एक सूची तैयार (preparation) करना शामिल है। प्रत्येक भावना (feeling), दृष्टिकोण (attitude), आदत (habit) या व्यवहार के तरीके (mode of behaviour) के कुछ पहलू (aspect) से संबंधित है जो व्यक्तित्व विशेषता (personality characteristic) से संबंधित है जिसे मापने का इरादा (intended) है। उत्तरदाता (respondent) को प्रत्येक कथन के अपने समझौते (agreement) या असहमति (disagreement), स्वीकृति (acceptance) या अस्वीकृति (rejection), पुष्टि (affirmation) या इनकार (denial) को इंगित (indicate) करने की आवश्यकता होती है। प्रश्नों का निर्माण (constructed) इस तरह से किया जाता है कि कुछ की पुष्टि (affirmation) और अन्य का इनकार (denial) मापे जाने वाले लक्षण (trait) की उपस्थिति (presence) को व्यक्त (express) करता है। प्रत्येक प्रश्न के बाद 'हाँ' ('Yes'), 'नहीं' ('No'), 'असत्य' ('Untrue'), 'संदिग्ध' ('Doubtful') या अन्य समान प्रतिक्रियाएँ (similar responses) आती हैं। यहां उत्तरदाता (respondent) एक प्रतिक्रिया को रेखांकित (under line) करता है जो उसके चरित्र (character) को दर्शाता है।

उदाहरण (Example):

  1. सामाजिक समारोहों (social gatherings) में, मैं ध्यान का केंद्र (centre of attention) बनना पसंद करता हूं।
  2. एक बैठक में, मैं पीछे की सीट (back seat) पर कब्जा (occupy) करना पसंद करता हूं।
  3. जब आपको कोई महत्वपूर्ण निर्णय (important decision) लेना होता है, तो क्या आप चाहते हैं कि कोई और (some one else) आपके लिए निर्णय ले।

आमतौर पर (Usually) एक व्यक्तित्व परीक्षण (personality test) में 30-50 आइटम (items) होते हैं। इस प्रश्नावली विधि (questionnaire method) को व्यक्तित्व का वस्तुनिष्ठ परीक्षण (objective test of personality) भी कहा जाता है। इस पद्धति में उत्तरदाता (respondent) को सच्चा (truthful) और बहुत स्पष्ट (frank) होना चाहिए।

2. प्रक्षेपी परीक्षण (Projective Tests)
प्रक्षेपी परीक्षणों (Projective tests) को इसलिए नाम दिया गया है क्योंकि वे व्यक्ति को परीक्षण की स्थिति (test situation) में खुद को रखने या उसमें व्यक्ति (person) के साथ पहचान (identify) करने के लिए प्रेरित (induce) करते हैं और उनके बारे में बताकर, अपने स्वयं के उद्देश्यों (motives), दृष्टिकोणों (attitudes), आशंकाओं (apprehensions) और आकांक्षाओं (aspirations) को प्रकट (reveal) करते हैं।

प्रक्षेपी परीक्षण (projective test) का उपयोग प्रक्षेपण के तंत्र (mechanism of projection) पर आधारित (based) है। प्रक्षेपी परीक्षण व्यक्तित्व को मापने का एक उपकरण (device) है जिसे परीक्षण करने वाला व्यक्ति (person tested) इस तरह नहीं पहचानता (recognize) है। वह परीक्षण (test) में सहज प्रतिक्रिया (spontaneous responses) करता है। परीक्षण एक अत्यधिक अस्पष्ट स्थिति (highly ambiguous situation) प्रस्तुत करता है जिसे परीक्षणों (tests) को देखने (perceive) और वर्णन (describe) करने की आवश्यकता होती है। स्थिति की कोई निश्चित विशेषता (definite characteristics) नहीं होती है और अलग-अलग व्यक्ति इसे अलग-अलग तरीकों से देखते (perceive) हैं। अस्पष्ट स्थिति (ambiguous situation) को देखने में, प्रत्येक व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं (needs), दृष्टिकोणों (attitudes), आदतों (habits), रुचियों (interests) और भावनाओं (feelings) और व्यवहार पैटर्न (behaviour patterns) को दर्शाता (reflects) है। प्रक्षेपी पद्धति (projective method) को प्रक्षेपी कहा जाता है क्योंकि स्थिति को देखने और वर्णन (describing) करने में, व्यक्ति अपने व्यक्तित्व विशेषताओं (personality characteristics) को बाहर लाता है।

दो प्रसिद्ध प्रक्षेपी परीक्षण (well known projective tests) हैं (1) रोर्शाक इंकब्लॉट टेस्ट (Rorschach Inkblot Test) और (2) विषयगत आशंका परीक्षण (Thematic apperception Test)।

a) रोर्शाक परीक्षण (Rorschach test):
रोर्शाक परीक्षण हरमन रोर्शाक (Hermann Rorschach) द्वारा शुरू (introduced) किया गया था। इसलिए उनके नाम पर परीक्षण (test) बुलाया गया था। यह सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल (widely used) किया जाने वाला परीक्षण है। इसे पहली बार 1921 में एक स्विस मनोचिकित्सक (Swiss psychiatrist) हरमन रोर्शाक द्वारा वर्णित (described) किया गया था।
रोर्शाक परीक्षण में 10 कार्ड (cards) होते हैं, जिनमें से प्रत्येक पर एक स्याही का धब्बा (inkblot) होता है। कुछ धब्बे (blots) रंगीन (coloured) होते हैं और कुछ काले और सफेद (black and white) रंग में होते हैं। ये कार्ड नियमित क्रम (regular serial order) में प्रस्तुत (presented) किए जाते हैं। स्याही का धब्बा (inkblot) किसी विषय का प्रतिनिधित्व (represent) नहीं करता है। यह अस्पष्ट (ambiguous) या असंरचित आकृति (unstructured figure) है। धब्बे (blot) की अस्पष्टता के परिणामस्वरूप इसके द्वारा उत्पन्न प्रतिक्रियाओं की विशाल विविधता (great variety of responses) होती है। ऐसा स्याही का धब्बा (inkblot) विषय (subject) के सामने (before) रखा जाता है। उसे यह वर्णन (describe) करने के लिए कहा जाता है कि वह क्या देखता है। उसे यह भी कहने की आवश्यकता है कि वह किस हिस्से (portion) में देखता है और वह उस वस्तु को क्या देखता है जिसका वह वर्णन (describes) करता है। उसकी प्रतिक्रियाएं (responses) नोट की जाती हैं और विभिन्न श्रेणियों (different categories) के तहत वर्गीकृत (classified) की जाती हैं।
ये प्रतिक्रियाएं व्यक्ति-दर-व्यक्ति (person to person) भिन्न (differ) होती हैं। कुछ पूरे आंकड़े (whole figure) पर प्रतिक्रिया (respond) देते हैं, कुछ आंकड़े के हिस्सों (parts of the figure) पर। कुछ आकार (shape) बनाने के लिए प्रतिक्रिया करते हैं, कुछ रंग (colour) या रंगीन (coloured) या काले धब्बे (black patches) के बीच सफेद स्थान (white space) पर। कुछ चलती हुई (moving) और अन्य स्थिर उद्देश्यों (stationary objectives) को देखते हैं। कुछ मानव आकृतियों (human figures) या मानव शरीर (human body) के अंगों को देखते हैं। अन्य जानवरों (animals) को देखते हैं। एक विषय (subject) द्वारा 10 कार्ड (cards) के लिए की गई प्रतिक्रियाओं का वर्गीकरण (Classification) दर्शाता है कि कुछ प्रकार (certain types) और श्रेणियां (categories) लगातार (consistently) बनाई जाती हैं। इन प्रतिक्रियाओं (responses) को उत्तरदाता (respondent) की व्यक्तित्व विशेषताओं (personality characteristics) का संकेत (indicating) देने के रूप में व्याख्या (interpreted) किया जाता है।

b) विषयगत आशंका परीक्षण (Thematic apperception test - TAT):
यह TAT व्यापक रूप से इस्तेमाल (widely used) किया जाने वाला प्रक्षेपी परीक्षण (projective Test) भी है। यह TAT पहली बार मरे (Murray) द्वारा दिया गया था।
इस परीक्षण (test) में 20 चित्र (pictures) होते हैं। प्रत्येक चित्र (picture) में बहुत अस्पष्ट स्थितियों (ambiguous situations) में एक या एक से अधिक (one or more) व्यक्ति (persons) होते हैं। उदाहरण के लिए, एक तस्वीर में एक बहुत बूढ़ी महिला (old woman) एक युवा महिला (young woman) के पीछे (behind) खड़ी है जो बहुत गंभीर (serious) दिख रही है। विषय (subject) को प्रत्येक चित्र (picture) पर एक कहानी (story) लिखने के लिए कहा जाता है। अध्ययन (study) का एक विषय (theme) होना चाहिए। यह कहना चाहिए कि क्या हो रहा है, और परिणाम (outcome or result) क्या होने वाला है।
एक कहानी लिखने (writing a story) में, विषय से कहानी में एक चरित्र (character) के साथ ईमानदारी (unconscientiously) से खुद को पहचानने (identify) की उम्मीद (expected) की जाती है। कहानी इस प्रकार उसकी अपनी जरूरतों (needs) और कुंठाओं (frustrations), भावनाओं (feelings) और दृष्टिकोणों (attitudes), स्वयं के (self) और दूसरों के (others) विचारों, वास्तविक (real) या काल्पनिक (imaginary) और इसी तरह को व्यक्त (express out) करती है। एक ही कहानी (single story) से विषय की विशेषताओं के बारे में कोई सुराग (clue) नहीं मिल सकता है। जब कोई एक ही (same) या समान पात्रों (similar characters) की पुनरावृत्ति (recurrence) पाता है, समान भावनाओं और दृष्टिकोण (similar feelings and attitudes) को व्यक्त करता है, समान आशाओं (hopes) और आशंकाओं (fears) का मनोरंजन (entertaining) करता है आदि, तो किसी को यह सोचने के लिए प्रेरित (led to think) किया जा सकता है कि कहानियां (stories) व्यक्ति की अपनी विशेषताओं (own characteristics) को प्रकट (reveal) करती हैं।

3. व्यक्तित्व रेटिंग (Personality rating)
इस पद्धति (method) में एक व्यक्ति (one person) दूसरे व्यक्ति (another person) की विशेषता (characteristic) का न्याय (judges) या मूल्यांकन (rates) करता है। जो व्यक्ति (person) न्याय करता है वह दर निर्धारित करने वाला (rater) होता है और जिस व्यक्ति का न्याय (judged) किया जाता है वह दर (rate) होता है। रेटिंग का आधार (basis of the rating) विभिन्न संबंधित स्थितियों (variety of related situations) में दरों के व्यवहार के अपने अवलोकन (observation) से तैयार किए गए दर-निर्धारक (rater's) के सामान्य प्रभाव (general impression) है। उदाहरण के लिए, एक कक्षा शिक्षक (class teacher) को अपने विद्यार्थियों (pupils) की ऐसी व्यक्तित्व विशेषताओं (personality characteristics) का न्याय करने (judge) के लिए कहा जा सकता है जैसे कि सुव्यवस्था (orderliness), समय की पाबंदी (punctuality), परिश्रम (industriousness), सहकारिता (co-operativeness) आदि। शिक्षक को एक तथाकथित (so called) रेटिंग पैमाने (rating scale) पर प्रत्येक छात्र (pupil) की स्थिति (position) का पता लगाकर प्रत्येक विशेषता (trait) पर अपनी रेटिंग व्यक्त (express) करने के लिए कहा जा सकता है।

रेटिंग पैमाने का उदाहरण (Example of a rating scale): समय की पाबंदी (Punctuality)

5 4 3 2 1
हमेशा समय पर
(Always in time)
आमतौर पर समयनिष्ठ
(Generally punctual)
कभी-कभी समयनिष्ठ
(Sometimes punctual)
आमतौर पर असामयिक
(Generally unpunctual)
समय पर कभी नहीं
(Never in time)

यदि शिक्षक (teacher) को लगता है कि छात्र (student) अत्यधिक समयनिष्ठ (highly punctual) है, तो वह उसे पैमाने के बाएँ छोर (left end of the scale) पर रखेगा और उसे 5 का स्कोर (score) देगा।

4. स्थितिजन्य परीक्षण (Situational test)
इस स्थितिजन्य परीक्षण (situational test) में, किसी व्यक्ति (person) को ऐसी स्थिति में कार्य (act) करने की आवश्यकता होती है जिसे विशेष रूप से परीक्षण के उद्देश्य (purpose of testing) से व्यवस्थित (arranged) किया जाता है। परीक्षक (tester) परीक्षण (testee) के व्यवहार को देखता (observes) है जब वह स्थिति (situation) में अभिनय (acting) कर रहा होता है। आम तौर पर (Generally) परीक्षण एक समूह (group) में किया जाता है। उदाहरण के लिए, 10 छात्रों (10 students) की एक पार्टी (party) निकाली जाती है और पहाड़ी के तल (foot of hill) पर शिविर (camps) लगाए जाते हैं। छात्रों को कुछ नकद (cash) दिया जाता है। उन्हें अपना दोपहर का भोजन (lunch) तैयार (preparing) करने की योजना बनाने (plan) और व्यवस्था (arrange) करने के लिए कहा जाता है। इसमें वे चर्चा (discuss) करेंगे और दोपहर के भोजन (lunch) की रिपोर्ट करने की योजना बनाएंगे। उनके साथ आने वाला शिक्षक (teacher) प्रत्येक के व्यवहार को देखता (observes) है और उनके व्यक्तित्व चरित्र (personality character) के संबंध में निष्कर्ष (conclusion) पर आता है।

5. साक्षात्कार (Interview)
साक्षात्कार (Interview) व्यक्तित्व का आकलन (assess personality) करने के तरीकों (methods) में से एक है। साक्षात्कार एक आमने-सामने की स्थिति (face to face situation) है जिसमें साक्षात्कारकर्ता (interviewee) स्वतंत्र (free) और स्पष्ट प्रतिक्रियाएं (frank responses) देता है। साक्षात्कारकर्ता (interviewer) को साक्षात्कारकर्ता का पूरा विश्वास (complete confidence) जीतना चाहिए। उसे साक्षात्कारकर्ता (interviewee) के साथ सौहार्द (cordiality), गर्मजोशी (warmth) और जवाबदेही (responsiveness) का संबंध स्थापित (establish) करना चाहिए। इस तरह के संबंध (relation) को 'तालमेल' ('rapport') कहा गया है, बिना तालमेल के कोई भी मनोवैज्ञानिक साक्षात्कार (psychological interview) सफल नहीं (no ... can be success) हो सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यह फाइल अभी केवल सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए यहाँ उपलब्ध कराई गई है। बहुत जल्द हम इसे डाउनलोड करने के लिए PDF फॉर्मेट में अपडेट करेंगे।

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