2. समाजशास्त्र और ग्रामीण समाजशास्त्र (SOCIOLOGY AND RURAL SOCIOLOGY)

समाजशास्त्र (Sociology)

शाब्दिक रूप से (Literally) समाजशास्त्र का अर्थ साहचर्य (companionship) की प्रक्रियाओं (processes) का अध्ययन है और इसे सामाजिक सदस्यता (social membership) के आधार पर अध्ययन के रूप में परिभाषित (defined) किया जा सकता है। कोई भी परिभाषा पूरी तरह से संतोषजनक (satisfactory) नहीं हो सकती क्योंकि परिप्रेक्ष्य (perspective) की विविधता (diversity) आधुनिक अनुशासन (modern discipline) की विशेषता (characteristic) है। हालांकि, विभिन्न लेखकों के अनुसार समाजशास्त्र की परिभाषा बेहतर और व्यापक समझ (comprehensive understanding) के लिए नीचे दी गई है।

  1. समाजशास्त्र मनुष्य (human beings) के समूह संबंधों (group relations) का अध्ययन है। इस प्रकार यह लोगों के समूहों के भीतर और उनके बीच परस्पर क्रिया (interaction) का अध्ययन करता है - चितंबर (Chitamber)।
  2. समाजशास्त्र को इसके व्यापक अर्थ (broadest sense) में जीवित प्राणियों (living beings) के जुड़ाव (association) से उत्पन्न होने वाली अंतःक्रियाओं (interactions) का अध्ययन कहा जा सकता है - गिलिन और गिलिन (Gillin and Gillin)।
  3. समाजशास्त्र वह विज्ञान (science) है जो सामाजिक मनुष्य (social man) की व्याख्यात्मक समझ (interpretive understanding) का प्रयास करता है - मैक्स वेबर (Max Weber)।

समाजशास्त्र सामाजिक संरचना (social structure) के भीतर सामंजस्य (cohesion) और व्यवस्था (order) के सिद्धांतों (principles), उन तरीकों जिनसे यह पर्यावरण (environment) के भीतर जड़ें (roots) जमाता है और बढ़ता है, बदलती संरचना (changing structure) और बदलते पर्यावरण का गतिमान संतुलन (moving equilibrium), निरंतर परिवर्तन (incessant change) के मुख्य रुझानों (main trends), उन ताकतों (forces) जो किसी भी समय इसकी दिशा (directions) निर्धारित (determine) करती हैं, सद्भाव (harmonies) और संघर्ष (conflicts), संरचना के भीतर समायोजन (adjustments) और कुसमायोजन (mal adjustments) को खोजने (discover) का प्रयास करता है क्योंकि वे मानवीय इच्छाओं (human desires) के प्रकाश में प्रकट (revealed) होते हैं और इस प्रकार सामाजिक मनुष्य (social man) की रचनात्मक गतिविधियों (creative activities) में उद्देश्यों (ends) के लिए साधनों (means) का व्यावहारिक अनुप्रयोग (practical application) करते हैं।

ग्रामीण समाजशास्त्र (Rural Sociology)

ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण समाज (rural society) का विज्ञान (science) है। सामान्य रूप से ग्रामीण समाज की संरचना और विकास के नियम (laws) किसी विशेष समाज (particular society) को नियंत्रित (governing) करने वाले विशेष नियमों को खोजने में हमारी सहायता कर सकते हैं।

ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण परिवेश (rural setting) में समाजशास्त्रीय जीवन (sociological life) का अध्ययन है ताकि उनकी स्थितियों (conditions) और प्रवृत्तियों (tendencies) का पता लगाया जा सके और प्रगति के सिद्धांतों (principles of progress) को तैयार (formulate) किया जा सके। - ए.आर. देसाई (A.R. Desai)

ग्रामीण समाजशास्त्र में ग्रामीण स्थितियों (rural situations) में मानवीय संबंधों (human relationships) का अध्ययन शामिल है।

ग्रामीण समाजशास्त्र का दायरा (Scope of Rural Sociology)

भारत में प्रत्येक गाँव लगभग एक स्वतंत्र (independent) आत्मनिर्भर (self sufficient) सामाजिक और आर्थिक जीवन (social and economic existence) जीता था। यह भारत की अनूठी (unique) कृषि सामाजिक-आर्थिक संरचना (agrarian socio-economic structure) थी। ब्रिटिश काल (British period) में विदेशी शासकों (foreign rulers) द्वारा इस आत्मनिर्भरता को बाधित (disrupted) किया गया था। सामाजिक जीवन में संयुक्त परिवार प्रणाली (joint family systems), जाति (caste), ग्राम पंचायत (village panchayat) को धीरे-धीरे ब्रिटिश कानूनों (British laws) (जैसे - राजस्व (revenue), न्यायिक (judicial), कार्यकारी (executive) आदि) द्वारा प्रतिस्थापित (replaced) किया गया था। आधुनिक संचार (modern communication) और परिवहन (transport) की शुरुआत (Introduction) ने उपरोक्त प्रक्रिया (process) को तेज (accelerated) कर दिया। गाँव के जीवन के हर पहलू (Every aspect), सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक (cultural) ने एक स्थिर परिवर्तन (steady transformation) का अनुभव किया। इस प्रकार परिवर्तनों ने कृषि अर्थव्यवस्था (agrarian economy) को एक गंभीर संकट (acute crisis) में डाल दिया। ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण समाज और ग्रामीण जीवन से संबंधित विभिन्न समस्याओं (various problems) का अध्ययन करता है। ग्रामीण समाजशास्त्र के अध्ययन के दायरे (scope) में आने वाली समस्याएं (problems) हैं:

  1. ग्रामीण सामाजिक जीवन (Rural social life): जैसा कि नाम से ही पता चलता है, ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण सामाजिक जीवन का वैज्ञानिक अध्ययन (scientific study) है। यह ग्रामीण जीवन के ग्रामीण समाज के सभी पहलुओं (all its aspects) का अध्ययन करता है। वास्तव में यह मूल बात (basic thing) ग्रामीण समाजशास्त्र की विषय वस्तु (subject matter) या दायरा (scope) है।
  2. ग्रामीण सामाजिक संगठन (Rural social organizations): ग्रामीण समाज का अध्ययन करते समय, ग्रामीण समाजशास्त्र विभिन्न ग्रामीण सामाजिक संगठनों जैसे रेड क्रॉस सोसाइटी (Red Cross Society), सहकारी आंदोलन (Co-operative movement) आदि की सभी समस्याओं का अध्ययन करता है।
  3. ग्रामीण सामाजिक संस्थाएं (Rural social institutions): ग्रामीण समाजशास्त्र का कोई भी अध्ययन तब तक पूरा नहीं होगा जब तक कि परिवार (family), पड़ोस (neighbourhood), विवाह (marriage), जाति (caste), धर्म (religion), आर्थिक और शैक्षणिक संस्थानों (economic and educational institutions) जैसी ग्रामीण सामाजिक संस्थाओं (rural social institutions) का अध्ययन न किया जाए।
  4. ग्रामीण सामाजिक प्रक्रिया (Rural Social process): ग्रामीण समाज में, सहयोग (co-operation), प्रतिस्पर्धा (competition) आदि जैसी विभिन्न प्रक्रियाएं (different process) चलती रहेंगी। ग्रामीण समाज का अध्ययन तब तक पूरा नहीं होगा जब तक कि इन सभी सामाजिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक तरीके (scientific manner) से पूरी तरह और उचित रूप से अध्ययन नहीं किया जाता है।
  5. ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था में सामाजिक नियंत्रण और सामाजिक परिवर्तन (Social control and social change in rural social setup): ग्रामीण परिवेश (rural environment) और ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था (rural social set up) की जटिलताओं (complexities) का अध्ययन करते समय, सामाजिक नियंत्रण (social control) और सामाजिक परिवर्तन (social change) के कारकों (factors) का ठीक से अध्ययन किया जाना चाहिए। उनका अध्ययन ग्रामीण समाजशास्त्र के अंतर्गत किया जा सकता है। शहरी जीवन (urban life) ग्रामीण जीवन को प्रभावित (influences) करता है। वास्तव में यह सामाजिक परिवर्तन के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार (responsible) है। सामाजिक नियंत्रण और सामाजिक परिवर्तन के कारक (Factors) ग्रामीण समाजशास्त्र के अध्ययन के दायरे (scope) का हिस्सा (part) बनते हैं।
  6. ग्रामीण योजना और पुनर्निर्माण (Rural planning and reconstruction): ग्रामीण समाज को पुनर्निर्माण (reconstruction) की आवश्यकता है। इसे योजनाबद्ध तरीके (planned manner) से किया जाना है। ग्रामीण समाजशास्त्र के वैज्ञानिक अध्ययन द्वारा उचित मार्गदर्शन (Proper guidance) प्रदान किया जाता है ताकि उन संस्थानों (institutions) को मार्गदर्शन (guidance) प्रदान किया जा सके जो ग्रामीण समाज के पुनर्निर्माण (rural reconstructions) और योजना (planning) के कार्य में लगे हुए हैं। इसलिए ग्रामीण नियोजन और पुनर्निर्माण ग्रामीण समाजशास्त्र के अध्ययन का एक विषय वस्तु (subject matter) बनाते हैं।
  7. ग्रामीण समाज में धर्म और संस्कृति (Religion and culture in rural society): ग्रामीण समाज में धर्म (religion) महत्वपूर्ण भूमिका (important role) निभाता है। ग्रामीण समाज में सांस्कृतिक अंतर (Cultural difference) विशिष्ट (typical) है। ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था (rural social setup) में धर्म और संस्कृति के सभी पहलुओं का अध्ययन करता है।
  8. ग्रामीण समस्याएं और ग्रामीण समुदाय (Rural problems and rural community): ग्रामीण समस्याओं (Rural problems) को एक अलग कोण (isolated angle) से नहीं बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण (comprehensive point of view) से देखा जाना चाहिए। ग्रामीण समुदाय (rural community) की समस्याएं समग्र रूप से (as a whole) समाज की समस्याओं का एक हिस्सा (part) हैं और उन्हें इसी संदर्भ (context) में देखा जाना चाहिए।
  9. ग्रामीण और शहरी समाज के बीच अंतर (Difference between rural and urban society): ग्रामीण समाज का अध्ययन तब तक पूरा नहीं होगा जब तक कि ग्रामीण समाज (rural society) और शहरी समाज (urban society) के बीच मौजूद अंतर (difference) का उचित और वैज्ञानिक तरीके (scientific manner) से अध्ययन नहीं किया जाता है।

इस प्रकार ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण समाज (village society) का अध्ययन करता है, इसलिए इसका दायरा (scope) बहुत व्यापक (very wide) है।

सरकारी एजेंसियां (Government agencies), वैज्ञानिक (scientists), कल्याणकारी संगठन (welfare organizations) आदि अब ग्रामीण समाज के विकास पर अपना ध्यान (attention) केंद्रित कर रहे हैं। इस प्रकार, किसी भी विकास कार्यकर्ता (development worker), वैज्ञानिक, प्रशासक (administrator) और योजनाकार (planner) के लिए ग्रामीण समाजों का अध्ययन करना आवश्यक (necessary) हो जाता है।

इसके अलावा, जिन देशों का मुख्य व्यवसाय (main occupation) कृषि है, वहां अच्छी तरह से स्थापित ग्रामीण समाजशास्त्र संकाय (rural sociology faculties) होने चाहिए। भारत को गांवों का देश (country of villages) बताया गया है। भारत में, लगभग 75 प्रतिशत आबादी (population) लगभग छह लाख (six million) गांवों में रहती है। स्वतंत्रता (independence) के बाद केंद्र (central) और राज्य सरकारें (state governments) दोनों कई ग्रामीण विकास कार्यक्रम (rural development programmes) शुरू कर रही हैं और भारत में ग्रामीण समाजशास्त्र की व्यापक गुंजाइश (wider scope) है।

ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व (Importance of Rural Sociology)

भारत के लिए ग्रामीण समाजशास्त्र किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण (more important) है। भारत मूल रूप से गांवों का देश है। स्वतंत्रता के बाद देश के पुनर्निर्माण (reconstruction) की प्रक्रिया (process) शुरू की गई और इसलिए, ग्रामीण समाजशास्त्र के महत्व (importance) को पहचाना गया (recognised)। यदि भारत को प्रगति (progress) हासिल करनी है, तो गांवों में सुधार करना होगा और इन गांवों में शिक्षा (education) का प्रसार करना होगा। यही कारण है कि सामुदायिक विकास कार्यक्रम (community development programme) में इस देश के गांवों को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास (every attempt) किया जा रहा है। यह उद्देश्य (objective) तभी प्राप्त (achieved) किया जा सकता है जब प्रशासकों (administrators) और योजनाकारों (planners) को ग्रामीण जीवन का सही ज्ञान (correct knowledge) हो और वह ज्ञान केवल ग्रामीण समाजशास्त्र द्वारा प्रदान किया जा सकता है। यही कारण था कि स्वतंत्रता के बाद भारत में इसने अधिक महत्व (greater importance) प्राप्त किया।

विस्तार शिक्षा में ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व (Importance of Rural Sociology in Extension Education)

ग्रामीण समाजशास्त्र और विस्तार (extension) के बीच अंतर्संबंध (inter relationship) जैसा कि नीचे दिया गया है, विस्तार शिक्षा (extension education) में ग्रामीण समाजशास्त्र के महत्व (importance) को इंगित (indicate) करेगा।

क्र.सं. (S.No) ग्रामीण समाजशास्त्र (Rural Sociology) विस्तार (Extension)
1. यह ग्रामीण समाज की संरचना (structure) और विकास (development) के नियमों का वैज्ञानिक अध्ययन (scientific study) है। यह वांछनीय तर्ज (desirable lines) पर ग्रामीण समाज को विकसित (develop) करने की दृष्टि से ग्रामीण लोगों के लिए अनौपचारिक शिक्षा (informal education) है।
2. यह ग्रामीण लोगों के दृष्टिकोण (attitude) और व्यवहार (behaviour) का अध्ययन करता है। यह गांव के लोगों के दृष्टिकोण और व्यवहार को संशोधित (modify) या बदलने (change) का प्रयास करता है।
3. यह ग्रामीण समाज की आवश्यकताओं (needs) और रुचियों (interests) का अध्ययन करता है। यह ग्रामीण लोगों को अपनी जरूरतों और समस्याओं (needs and problems) को खोजने में मदद करता है, और इन जरूरतों और चाहतों (wants) के आधार पर शैक्षिक कार्यक्रम (educational programmes) बनाता है।
4. यह ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण सामाजिक संबंधों (social relationship) या समूहों (groups) या आयोजकों (organizers) और नेताओं (leaders) का विश्लेषण (analyses) करता है। यह ग्रामीण विकास (rural development) के उद्देश्यों (objectives) को प्राप्त करने (achieve) के लिए आयोजकों और नेताओं का उपयोग (utilizes) करता है।
5. यह सामाजिक स्थिति (social situation) का अध्ययन करता है और ग्रामीण समाज के सामाजिक तथ्यों (social facts) को इकट्ठा (assembles) करता है। यह ग्रामीण लोगों के लिए विस्तार कार्यक्रम (extension programmes) बनाने के आधार (basis) के रूप में ऐसे सामाजिक डेटा (social data) का उपयोग करता है।
6. यह ग्रामीण समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक (cultural), राजनीतिक (political) और धार्मिक (religious) समस्याओं की पड़ताल (investigates) करता है। यह गाँव में विस्तार कार्य (extension work) पर उनके प्रभाव (impact) के संदर्भ में इन समस्याओं का भी अध्ययन करता है।

ग्रामीण समाजशास्त्र और विस्तार शिक्षा के बीच उपरोक्त अंतर्संबंध (inter-relationship) से, कोई भी समझ सकता है कि ग्रामीण समाजशास्त्र विस्तार कार्यकर्ता (extension worker) को ग्रामीण समाज की बीमारियों (ills) का सही निदान (correct diagnosis) करने और इन बीमारियों को दूर करने (overcome) के लिए सही नुस्खे (correct prescription) या कार्यक्रम (programme) विकसित करने (evolve) में मदद करेगा। इसलिए, विस्तार शिक्षा में और बदले में (in turn) किसी भी ग्रामीण विकास कार्यकर्ता (rural development worker) के लिए ग्रामीण समाजशास्त्र महत्वपूर्ण (important) है।

अस्वीकरण (Disclaimer):
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