ग्रामीण (Rural): यह वह क्षेत्र है, जहाँ लोग प्राथमिक उद्योग (primary industry) में इस अर्थ में लगे हुए हैं कि वे प्रकृति के सहयोग से पहली बार सीधे चीजों का उत्पादन करते हैं, जैसा कि श्रीवास्तव (Srivastava, 1961) द्वारा कहा गया है।
एक समाज या समुदाय को कम जनसंख्या घनत्व (lower population density), कम सामाजिक भेदभाव (less social differentiation), कम सामाजिक और स्थानिक गतिशीलता (less social and spatial mobility), सामाजिक परिवर्तन (social change) की धीमी दर आदि के मानदंडों के आधार पर ग्रामीण के रूप में वर्गीकृत (classified) किया जा सकता है। कृषि (Agriculture) ग्रामीण क्षेत्र का प्रमुख व्यवसाय होगा।
विकास (Development): यह वृद्धि (growth), विकास (evolution), प्रलोभन के चरण (stage of inducement) या प्रगति (progress) को संदर्भित करता है।
यह प्रगति या वृद्धि क्रमिक (gradual) है और इसके अनुक्रमिक चरण (sequential phases) थे। हमेशा बढ़ती हुई भिन्नता (differentiation) होती है। यह अधिक दक्षता (greater efficiency) और जटिल (complex) स्थितियों की दिशा में समग्र आंदोलन को भी संदर्भित करता है।
ग्रामीण विकास (Rural Development - RD): एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य सामूहिक प्रक्रिया (collective process) के माध्यम से शहरीकृत (urbanized) क्षेत्रों के बाहर रहने वाले लोगों की भलाई और आत्म-साक्षात्कार (self-realisation) में सुधार करना है।
अग्रवाल (Agarwal, 1989) के अनुसार ग्रामीण विकास एक रणनीति (strategy) है जिसे ग्रामीण गरीबों के आर्थिक और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ग्रामीण विकास एक गतिशील प्रक्रिया (dynamic process) है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित है। इनमें कृषि विकास, आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा (infrastructure) खड़ा करना, उचित मजदूरी और साथ ही भूमिहीनों (landless) के लिए आवास और घर की जगह, ग्राम नियोजन (village planning), सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और कार्यात्मक साक्षरता (functional literacy), संचार (communication) आदि शामिल हैं।
ग्रामीण विकास एक राष्ट्रीय आवश्यकता है और निम्नलिखित कारणों से भारत में इसका काफी महत्व है: