रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन (Breeding for Disease Resistance)
रोग (Disease) पौधे में एक जीव (organism) द्वारा उत्पन्न होने वाली असामान्य स्थिति (abnormal condition) है।
- परपोषी (Host): रोग से प्रभावित पौधा (Plant affected by disease)।
- रोगजनक (Pathogen): रोग उत्पन्न करने वाला जीव (Organism that produces the disease)।
रोग के कारण होने वाली क्षति (Damage due to disease):
- कुल बायोमास (Biomass) कम हो जाता है जिससे उपज की हानि (yield loss) होती है।
- अवरुद्ध विकास (Stunted growth)।
- बाँझपन (Sterility)।
रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन की आवश्यकता (Need for disease resistance breeding):
- उपज की हानि को रोकने के लिए।
- उच्च लागत में कमी (High cost reduction)।
- पर्यावरण प्रदूषण (environmental pollution) की रोकथाम।
रोग प्रतिक्रिया के प्रकार (Kinds of disease reaction):
- संवेदनशील प्रतिक्रिया (Susceptible reaction): रोग की प्रतिक्रिया अत्यधिक होती है, यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो उपज का कुल नुकसान (total yield loss) हो सकता है।
- प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune reaction): परपोषी रोग के लक्षण (symptoms) नहीं दिखाता है।
- प्रतिरोधी प्रतिक्रिया (Resistance reaction): संक्रमण (Infection) और स्थापना होती है, लेकिन परपोषी में रोगजनक की वृद्धि प्रतिबंधित (restricted) होती है।
- सहिष्णुता (Tolerance): परपोषी पर रोगजनक उसी तरह से हमला करता है जैसे कि संवेदनशील किस्म (susceptible variety) पर, लेकिन उपज का नुकसान नहीं हो सकता है।
लंबवत और क्षैतिज प्रतिरोध (Vertical and horizontal resistance):
ये शब्द वान डेर प्लैंक (Van der plank) द्वारा प्रस्तुत किए गए थे।
लंबवत प्रतिरोध (Vertical resistance):
इसे प्रजाति विशिष्ट (race specific), पैथोटाइप विशिष्ट (pathotype specific) या विशिष्ट प्रतिरोध (specific resistance) के रूप में भी जाना जाता है।
लंबवत प्रतिरोध आमतौर पर प्रमुख जीन (major genes) द्वारा निर्धारित होता है और पैथोटाइपिक विशिष्टता (pathotypic specificity) द्वारा इसकी विशेषता होती है। पैथोटाइप विशिष्टता यह दर्शाती है कि लंबवत प्रतिरोध के लिए जीन (gene) ले जाने वाले परपोषी पर केवल उसी पैथोटाइप (pathotype) द्वारा हमला किया जाता है जो प्रतिरोधी जीन के प्रति उग्र (virulent) होता है, अन्य सभी पैथोटाइपों के प्रति परपोषी प्रतिरोधी होगा।
केवल दो प्रकार की रोग प्रतिक्रिया देखी जा सकती है अर्थात प्रतिरक्षा (immune) या संवेदनशील (susceptible) प्रतिक्रिया। जब उग्र पैथोटाइप (virulent pathotype) लगातार होने लगता है, तब महामारियां (epidemics) हो सकती हैं।
लंबवत प्रतिरोध लंबे समय तक चलने वाला (long lasting) नहीं होता है।
क्षैतिज प्रतिरोध (Horizontal resistance):
यह प्रजाति गैर-विशिष्ट (race non specific), पैथोटाइप गैर-विशिष्ट (pathotype non specific) या सामान्य प्रतिरोध (general resistance) है।
क्षैतिज प्रतिरोध पॉलीजीन (polygenes) द्वारा नियंत्रित होता है, अर्थात छोटे प्रभाव (small effects) वाले कई जीन, और यह पैथोटाइप गैर-विशिष्ट (pathotype non-specific) होता है।
क्षैतिज प्रतिरोध लक्षणों के विकास को नहीं रोकता है, बल्कि यह आबादी (population) में रोग के प्रसार की दर को धीमा (slows down) कर देता है।
लंबवत प्रतिरोध (VR) की तुलना में क्षैतिज प्रतिरोध (HR) अधिक स्थिर (stable) है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता का तंत्र (Mechanism of disease resistance):
- यांत्रिक (Mechanical): परपोषी की कुछ यांत्रिक या शारीरिक विशेषताएँ (anatomical features) संक्रमण को रोक सकती हैं। उदाहरण: गेहूं और जौ की बंद फूलने की आदत (Closed flowering habit) अंडाशय (ovary) को संक्रमित करने वाले कवक (fungi) के बीजाणुओं (spores) द्वारा संक्रमण को रोकती है।
- अतिसंवेदनशीलता (Hypersensitivity): संक्रमण के तुरंत बाद, संक्रमण बिंदु (point of infection) के आसपास की कई परपोषी कोशिकाएँ (host cells) मर जाती हैं। इससे रोगजनक की भी मृत्यु हो जाती है। पौधे के शरीर में मौजूद फाइटोएलेक्सिन (Phytoalexins) अतिसंवेदनशीलता प्रतिक्रिया (hypersensitivity reaction) के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- प्रतिजीविता (Antibiosis): कुछ विषैले पदार्थों (toxic substance) की उपस्थिति। यह कीट प्रतिरोध (insect resistance) के लिए अधिक उपयुक्त है। उदाहरण: कपास में गोसीपोल की मात्रा (Gossypol content)।
- पोषण संबंधी कारक (Nutritional factors): वृद्धि और बीजाणु निर्माण (spore formation) में कमी परपोषी के पोषण संबंधी कारकों के कारण हो सकती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता की आनुवंशिकी (Genetics of disease resistance):
- ओलिगोजेनिक प्रतिरोध (Oligogenic resistance): प्रतिरोध एक या कुछ प्रमुख जीनों द्वारा नियंत्रित होता है और प्रतिरोध आमतौर पर प्रमुख (dominant) होता है। प्रमुख जीनों की क्रिया (action) संशोधक (modifiers) द्वारा बदली जा सकती है।
जीन के लिए जीन संबंध (Gene for gene relationship):
फ्लोर (Flor, 1956) ने अलसी के रस्ट (linseed rust) में अपने काम के आधार पर यह प्रस्ताव दिया। इसके अनुसार, परपोषी में मौजूद प्रत्येक प्रतिरोधी जीन (resistance gene) के लिए, रोगजनक में उग्रता (virulence) के लिए एक जीन होता है। संवेदनशील प्रतिक्रिया तब होगी जब रोगजनक उग्रता जीन (virulence gene) के साथ सभी प्रतिरोधी जीनों का मिलान करने में सक्षम हो।
| परपोषी |
रोगजनक |
प्रतिक्रिया (Reaction) |
| R1, R2, R3, R4 |
V1, V2, V3, V4 |
संवेदनशील |
| R1, R2, R3, R4 |
V2, V4 |
प्रतिरोधी (Resistance) |
- बहुजीनी वंशागति (Polygenic inheritance): जीन योगात्मक (additive) और गैर-योगात्मक (non - additive) दोनों प्रभाव दिखाते हैं और इसमें बड़े पर्यावरणीय प्रभाव (environmental effects) होते हैं।
- कोशिकाद्रव्यी वंशागति (Cytoplasmic inheritance):
- टी साइटोप्लाज्म (T cytoplasm) - मक्का (Maize)
- टिफ्ट 23A साइटोप्लाज्म (Tift 23A cytoplasm) - कंबु (Cumbu) (रोग के प्रति संवेदनशील - Susceptible to disease)
- हेल्मिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium) के प्रति प्रतिरोधी मक्का का सी और एम साइटोप्लाज्म (C and M cytoplasm)।
- कंबु में डाउनी मिल्ड्यू (downy mildew) के प्रति प्रतिरोधी एल 111A और 732 A साइटोप्लाज्म (L 111A and 732 A cytoplasm)।
रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रजनन के तरीके (Methods of disease resistance breeding):
- पौधा पुरःस्थापन (Plant introduction): अन्य स्थानों से प्रतिरोधी किस्मों (Resistant varieties) को खेती के लिए सीधे पेश किया जा सकता है। उदाहरण: आईआर 20 चावल (IR 20 rice) ब्लास्ट (blast) के प्रति प्रतिरोधी।
- चयन (Selection): यह स्थानीय देशी किस्मों (local land races) या पेश की गई किस्मों (introduced cultivars) से हो सकता है। उदाहरण: सीओ 4 गोबी अनाइकोम्बन (Co 4 Gobi Anaikomban) ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोधी। एनसीएसी 17090 मूंगफली (NCAC 17090 ground nut) लीफ स्पॉट (leaf spot) के खिलाफ प्रतिरोधी।
- संकरण और चयन (Hybridisation and Selection):
- अंतर-किस्मीय (Intervarietal): Co37 चावल (Rice) ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोधी।
- अंतर-विशिष्ट (Inter specific): तिल (Sesamum) में पाउडर फफूंदी (Powdery mildew) प्रतिरोध।
- अंतर-जैनेरिक (Inter generic): लाल चना (red gram) में जड़ सड़न (root rot) के लिए एटीलोसिया (Atylosia)।
जीन क्रिया (gene action) के आधार पर चयन प्रक्रिया (selection procedure) भिन्न हो सकती है। यदि प्रतिरोध पॉलीजीन द्वारा नियंत्रित होता है, तो वंशावली विधि (pedigree method) का पालन किया जाना चाहिए।
यदि प्रतिरोध प्रमुख जीनों द्वारा नियंत्रित होता है जो अन्य अवांछनीय लक्षणों (undesirable characters) से जुड़े होते हैं, तो हमें प्रजनन की बैक क्रॉस विधि (back cross method) का उपयोग करना होगा। यहां फिर से, प्रमुख जीन (dominant gene) के लिए बैक क्रॉस विधि अप्रभावी जीन (recessive gene) द्वारा नियंत्रित लक्षणों से भिन्न होती है.
- उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation breeding): Co2 मूंगफली लेट लीफ स्पॉट रोग (late leaf spot disease) के प्रति सहिष्णु (tolerant)।
- पॉलीप्लॉइडी प्रजनन (Polyploidy breeding): लीफ स्पॉट के खिलाफ प्रतिरोध के लिए निकोटियाना संकरण (Nicotiana crosses)।
- ऊतक संवर्धन विधि (Tissue culture method): टेस्ट ट्यूब (test tubes) में प्रतिरोधी प्रतिक्रिया की आसानी से जांच (screened) की जा सकती है और प्रतिरोधी लाइनों (resistant lines) को बड़े पैमाने पर गुणा (mass multiplied) किया जा सकता है। उदाहरण: केला (Banana), इलायची (Cardomum)।
रोग प्रतिरोध के लिए स्क्रीनिंग तकनीकें (Screening techniques for disease resistance):
रोग फैलने के तरीके (mode of spread of disease) के आधार पर स्क्रीनिंग तकनीक (screening technique) भिन्न हो सकती है। स्क्रीनिंग स्क्रीन या ग्लास हाउस स्तर (screen or glass house level) और क्षेत्र स्तर (field level) दोनों पर की जा सकती है। विभिन्न स्क्रीनिंग तकनीकें इस प्रकार हैं:
- मृदा जनित रोग (Soil borne diseases): विल्ट (Wilt), रूट रोट मिट्टी में पैदा होने वाले कवक (soil borne fungi) द्वारा निर्मित होते हैं। इस मामले में बीमार भूखंड तकनीक (sick plot technique) का पालन किया जाता है। संवेदनशील किस्मों (Susceptible varieties) को उगाया जा सकता है और संक्रमित पौधों को संक्रमण के लिए इष्टतम स्थिति (optimum condition) बनाए रखने के लिए उसी स्थान पर जोता (ploughed insitu) जा सकता है।
- वायु जनित रोग (Air borne diseases): उदाहरण: रस्ट (Rust), स्मट (Smut), फफूंदी (mildews), झुलसा (blights)।
मूंगफली के रस्ट (ground nut rust) के लिए, संक्रामक पंक्तियों (infestor rows) को सीमा पंक्तियों (border rows) के रूप में 15 दिन पहले बोया जा सकता है और बीमारी संवेदनशील संक्रामक पंक्तियों (susceptible infestor rows) को संक्रमित कर देगी। 15 दिनों के बाद परीक्षण की जाने वाली किस्मों को बोया जाना है। प्रभावित पत्तियों से बीजाणु निलंबन (spore suspension) का छिड़काव (Spraying) भी भार (load) बढ़ा देगा।
- बीज जनित रोग (Seed borne disease): स्मट, बंट (bunt) आदि। निर्वात स्थिति (vaccum condition) के तहत रोगजनक के घोल में बीजों को भिगोकर कृत्रिम टीकाकरण (Artificial inoculation) किया जा सकता है।
- कीट संचरित रोग (Insect transmitted diseases): उदाहरण: वायरस रोग (virus diseases), लाल चना स्टेरिलिटी मोज़ेक वायरस (Red gram sterility mosaic virus)। सैप संचारित (Sap transmitted)। यहां स्टेपलिंग तकनीक (stapling technique) का उपयोग किया जाता है। प्रभावित पौधों की पत्तियों को परीक्षण की जाने वाली प्रविष्टियों (entries) के साथ स्टेपल किया जा सकता है। संवेदनशील पत्ती में खाने वाले कीट वायरस (virus) को परीक्षण प्रविष्टियों (test entries) में संचारित कर देंगे।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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