जैव प्रौद्योगिकी की अवधारणाएँ (Concepts of Biotechnology)
"जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology)" शब्द पहली बार 1919 में कार्ल एरेकी (Karl Ereky) द्वारा गढ़ा गया था, जिसका अर्थ है कि जीवित जीवों (living organisms) की सहायता से कच्चे माल (raw materials) से उत्पाद (products) तैयार किए जाते हैं।
जैव प्रौद्योगिकी नई नहीं है। मनुष्य सहस्राब्दियों (millennia) से समस्याओं को हल करने और अपने जीवन के तरीके को बेहतर बनाने के लिए जीवित चीजों में संशोधन (manipulating) कर रहा है। प्रारंभिक कृषि (Early agriculture) मुख्य रूप से खाद्य उत्पादन पर केंद्रित थी। पौधों और जानवरों का चयनात्मक प्रजनन (selectively bred) किया जाता था और सूक्ष्मजीवों (microorganisms) का उपयोग पेय पदार्थ, पनीर और ब्रेड जैसी खाद्य सामग्री बनाने के लिए किया जाता था। अठारहवीं सदी के अंत और उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में टीकाकरण (vaccinations), फलीदार फसलों (leguminous crops) वाली फसल चक्रण (crop rotation) और जानवरों द्वारा खींची जाने वाली मशीनरी का आगमन हुआ। उन्नीसवीं सदी का अंत जीव विज्ञान (biology) के लिए एक मील का पत्थर था। सूक्ष्मजीवों की खोज की गई, आनुवंशिकी (genetics) पर मेंडेल (Mendel) का काम पूरा हुआ और कोच (Koch), पाश्चर (Pasteur) और लिस्टर (Lister) द्वारा किण्वन (fermentation) और अन्य सूक्ष्मजीवी प्रक्रियाओं की जांच के लिए संस्थान स्थापित किए गए।
बीसवीं सदी की शुरुआत में जैव प्रौद्योगिकी ने उद्योग और कृषि को एक साथ लाना शुरू किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, किण्वन प्रक्रियाएं (fermentation processes) विकसित की गईं जिनसे तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल उद्योग (automobile industry) के लिए स्टार्च (starch) और पेंट सॉल्वैंट्स (paint solvents) से एसीटोन (acetone) का उत्पादन किया गया। 1930 के दशक में काम आयात या पेट्रोकेमिकल्स के बजाय उद्योग की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त कृषि उत्पादों का उपयोग करने की दिशा में तैयार किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के आगमन के साथ पेनिसिलिन (penicillin) का निर्माण शुरू हुआ। जैव प्रौद्योगिकी का फोकस फार्मास्युटिकल्स (pharmaceuticals) की ओर स्थानांतरित हो गया। "शीत युद्ध (cold war)" के वर्षों में जैविक युद्ध (biological warfare) की तैयारी के साथ-साथ एंटीबायोटिक्स (antibiotics) और किण्वन प्रक्रियाओं के लिए सूक्ष्मजीवों के साथ काम का बोलबाला था (गुडमैन, 1987)।
जैव प्रौद्योगिकी का वर्तमान में कृषि, बायोरेमेडिएशन (bioremediation), खाद्य प्रसंस्करण (food processing) और ऊर्जा उत्पादन (energy production) सहित कई क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है। DNA फिंगरप्रिंटिंग (DNA fingerprinting) फोरेंसिक (forensics) में एक आम बात बन गई है। इंसुलिन (insulin) और अन्य दवाओं का उत्पादन वैक्टर (vectors) की क्लोनिंग (cloning) के माध्यम से पूरा किया जाता है जो अब चुने हुए जीन (gene) को ले जाते हैं। इम्युनोएसे (Immunoassays) का उपयोग न केवल दवा के स्तर (drug level) और गर्भावस्था परीक्षण (pregnancy testing) के लिए चिकित्सा में किया जाता है, बल्कि किसानों द्वारा फसलों और पशु उत्पादों पर कीटनाशकों (pesticides), शाकनाशियों (herbicides) और विषाक्त पदार्थों (toxins) के असुरक्षित स्तर का पता लगाने में सहायता के लिए भी किया जाता है। ये एसे (assays) भूजल (ground water), तलछट (sediment) और मिट्टी में औद्योगिक रसायनों के लिए तेजी से क्षेत्र परीक्षण भी प्रदान करते हैं। कृषि में, आनुवंशिक इंजीनियरिंग (genetic engineering) का उपयोग ऐसे पौधों को तैयार करने के लिए किया जा रहा है जो कीड़ों, खरपतवारों और पौधों की बीमारियों के प्रतिरोधी हों。
परिभाषा (Definition)
जैव प्रौद्योगिकी- बायो (Bio) का अर्थ है जीवन और प्रौद्योगिकी (technology) का अर्थ है व्यावहारिक उपयोग के लिए ज्ञान का अनुप्रयोग, यानी किसी उत्पाद को बनाने या सुधारने के लिए जीवित जीवों का उपयोग।
जैव प्रौद्योगिकी शब्द के लिए अन्य परिभाषाएँ (Other definitions for the term Biotechnology):
- समस्याओं को हल करने या उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए जीवित जीवों का उपयोग।
- समस्याओं को हल करने या उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए कोशिकाओं (cells) और जैविक अणुओं (biological molecules) का उपयोग। जैविक अणुओं में DNA (DNA), RNA (RNA) और प्रोटीन (proteins) शामिल हैं।
- जीवित जीवों या उनके उत्पादों का व्यावसायिक अनुप्रयोग, जिसमें उनके DNA अणुओं में जानबूझकर संशोधन शामिल है।
- किसी जीवित कोशिका को पूर्वानुमानित (predictable) और नियंत्रणीय (controllable) तरीके से विशिष्ट कार्य करने के लिए बनाना।
जैव प्रौद्योगिकी को "जानूस-फेस्ड (Janus-faced)" के रूप में वर्णित किया गया है। इसका अर्थ है कि इसके दो पहलू हैं। एक ओर, तकनीकें DNA में संशोधन करने की अनुमति देती हैं ताकि जीन (genes) को एक जीव से दूसरे जीव में ले जाया जा सके। दूसरी ओर, इसमें अपेक्षाकृत नई प्रौद्योगिकियां (new technologies) शामिल हैं जिनके परिणामों का परीक्षण नहीं किया गया है और इनसे सावधानी के साथ निपटा जाना चाहिए।
जैव प्रौद्योगिकी विकास के चरण (Stages of biotechnology development)
- प्राचीन जैव प्रौद्योगिकी (Ancient biotechnology) - 8000-4000 ईसा पूर्व (B.C): प्रारंभिक इतिहास भोजन और आश्रय से संबंधित है; इसमें पशुपालन (domestication) शामिल है।
- शास्त्रीय जैव प्रौद्योगिकी (Classical biotechnology) - 2000 ईसा पूर्व; 1800-1900 ईस्वी (AD): प्राचीन जैव प्रौद्योगिकी पर निर्मित; किण्वन ने खाद्य उत्पादन और चिकित्सा को बढ़ावा दिया।
- 1900-1953: आनुवंशिकी
- 1953 - 1976: DNA अनुसंधान (DNA research), विज्ञान में विस्फोट (science explodes)
- आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी (Modern biotechnology) - 1977 से आगे: जीव में आनुवंशिक जानकारी में संशोधन; जेनेटिक इंजीनियरिंग।
जैव प्रौद्योगिकी विभिन्न तकनीकों का एक संग्रह है जो हमें कृषि में फसल की उपज (crop yield) और भोजन की गुणवत्ता (food quality) में सुधार करने और उद्योगों में उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला (broader array) का उत्पादन करने में सक्षम बनाती है।
विभिन्न प्रौद्योगिकियाँ और उनके उपयोग (Various technologies and their uses)
- जेनेटिक इंजीनियरिंग (रिकॉम्बिनेंट DNA) तकनीक (Genetic Engineering / Recombinant DNA Technology): DNA में संशोधन करने के लिए सेलुलर एंजाइमों (cellular enzymes) का उपयोग; असंबद्ध जीवों के बीच DNA स्थानांतरित करना (Transferring DNA between unrelated organisms)।
- प्रोटीन इंजीनियरिंग तकनीक (Protein Engineering Technology): उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीन में सुधार करना या नए प्रोटीन (novel proteins) बनाना।
- एंटीसेंस या RNAआई तकनीक (Antisense or RNAi Technology): कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना (Block) या कम करना (decrease)।
- सेल और ऊतक संवर्धन तकनीक (Cell and Tissue Culture Technology): एक संपूर्ण जीव का उत्पादन करने के लिए या नए उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रयोगशाला की स्थितियों (laboratory conditions) में कोशिकाओं/ऊतकों (cells/tissues) को विकसित करना।
- जैव सूचना विज्ञान तकनीक (Bioinformatics Technology): जैविक डेटा का कम्प्यूटेशनल विश्लेषण (Computational analysis), उदा., अनुक्रम विश्लेषण (sequence analysis), मैक्रोमोलेक्यूलर संरचनाएं (macromolecular structures), हाई-थ्रूपुट प्रोफाइलिंग डेटा विश्लेषण (high-throughput profiling data analysis)।
- फंक्शनल जीनोमिक्स (द -ओमिक्स) (Functional Genomics / the -omics): सभी जीनों और उनके उत्पादों के जैविक कार्य (biological function) को निर्धारित करने के लिए जीनोम-व्यापी (genome-wide), उच्च-थ्रूपुट दृष्टिकोण (high-throughput approaches) का उपयोग।
हाई-थ्रूपुट प्रौद्योगिकियाँ (High-throughput technologies / the -omics)
- ट्रांसक्रिप्टोमिक्स (Transcriptomics): (उदा. माइक्रोएरे एक्सप्रेशन प्रोफाइलिंग - microarray expression profiling)
- प्रोटिओमिक्स (Proteomics): (उदा. प्रोटीन की संरचनाएं/संशोधन/अंतःक्रियाएं - structures/modifications/interactions of proteins)
प्रोटीन कोशिका के भीतर अनंत कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। एक कोशिका में प्रोटीन के संपूर्ण सेट को उसका प्रोटिओम (proteome) कहा जा सकता है और प्रोटीन संरचना और कार्य का अध्ययन तथा कोशिका में प्रत्येक प्रोटीन क्या कर रहा है, इसे प्रोटिओमिक्स कहते हैं। प्रोटिओम अत्यधिक गतिशील (dynamic) है और यह विभिन्न पर्यावरणीय उत्तेजनाओं (environmental stimuli) के जवाब में समय-समय पर बदलता रहता है। प्रोटिओमिक्स का लक्ष्य यह समझना है कि प्रोटीन की संरचना और कार्य उन्हें वह करने की अनुमति कैसे देते हैं जो वे करते हैं, वे किसके साथ अंतःक्रिया करते हैं और वे जीवन प्रक्रियाओं में कैसे योगदान करते हैं।
- मेटाबॉलोमिक्स (Metabolomics): (उदा. मेटाबोलाइट प्रोफाइलिंग - metabolite profiling, रासायनिक फ़िंगरप्रिंटिंग - chemical fingerprinting, फ्लक्स विश्लेषण - flux analysis)
मेटाबॉलोमिक्स सबसे नए 'ओमिक्स (omics)' विज्ञानों में से एक है। मेटाबोलोम (metabolome) एक नमूने में कम आणविक भार वाले यौगिकों (low molecular weight compounds) के संपूर्ण सेट को संदर्भित करता है। ये यौगिक एंजाइमेटिक प्रतिक्रियाओं (enzymatic reactions) के सब्सट्रेट (substrates) और उप-उत्पाद (by products) हैं और सेल के फेनोटाइप (phenotype) पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इस प्रकार, मेटाबॉलोमिक्स का लक्ष्य विशिष्ट पर्यावरणीय परिस्थितियों में एक निश्चित समय पर इन यौगिकों के नमूने की प्रोफ़ाइल का निर्धारण करना है।
- ट्रांसजीनोमिक्स (Transgenomics): (उदा. नॉक-आउट - knock-out, नॉक-इन - knock-in, जीन टैगिंग - gene tagging, म्यूटोजेनेसिस - mutagenesis)
- ट्रांसलेशनल जीनोमिक्स (Translational genomics)
जैव प्रौद्योगिकी और जीनोमिक्स के अनुप्रयोग (Applications of biotechnology & genomics)
- पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी (Environmental biotechnology)
- A. पर्यावरण निगरानी (Environmental monitoring): जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से पर्यावरणीय समस्याओं का निदान (Diagnosis)।
- B. अपशिष्ट प्रबंधन (Waste management):
- बायोरेमेडिएशन: कार्बनिक अणुओं (organic molecules) या पर्यावरण प्रदूषकों (environmental pollutants) को तोड़ने के लिए रोगाणुओं (microbes) का उपयोग।
- फाइटोरेमेडिएशन (Phyto remediation): पर्यावरण से प्रदूषकों (जैसे भारी धातु - heavy metals) को हटाने के लिए पौधों का उपयोग।
- C. प्रदूषण निवारण (Pollution prevention):
- नवीकरणीय संसाधन (Renewable resources)
- बायोडिग्रेडेबल उत्पाद (Biodegradable products)
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत (Alternative energy sources)
- चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी (Medical biotechnology)
- A. डायग्नोस्टिक्स (Diagnostics)
- B. थेरेप्यूटिक्स (Therapeutics)
- C. टीके (Vaccines)
- D. चिकित्सा अनुसंधान उपकरण (Medical research tools)
- E. मानव जीनोम अनुसंधान (Human Genome Research)
- कृषि जैव प्रौद्योगिकी (Agricultural biotechnology)
- A. पशु जैव प्रौद्योगिकी (Animal Biotechnology)
- B. फसल जैव प्रौद्योगिकी (Crop Biotechnology)
- C. बागवानी जैव प्रौद्योगिकी (Horticultural Biotechnology)
- D. वृक्ष जैव प्रौद्योगिकी (Tree Biotechnology)
- E. खाद्य प्रसंस्करण
- विकासवादी और पारिस्थितिक जीनोमिक्स (Evolutionary and ecological genomics)
- पारिस्थितिक लक्षणों (ecological traits) और विकासवादी विविधीकरण (evolutionary diversification) से जुड़े जीन ढूँढना।
- सामान्य लक्ष्य: स्वास्थ्य (health), उत्पादकता (productivity)
पादप जैव प्रौद्योगिकी / कृषि जैव प्रौद्योगिकी (Plant biotechnology / Agricultural biotechnology)
किसी जीव से आनुवंशिक जानकारी (genetic information) को निकालकर, प्रयोगशाला में उसमें संशोधन करके और फिर उसे पौधे में स्थानांतरित करके इसके कुछ गुणों (characteristics) को बदलने के लिए एक आनुवंशिक रूप से संशोधित पौधा (genetically modified plant) तैयार करने की एक प्रक्रिया है। संक्षेप में यह मानव जाति के लाभ के लिए पौधों में संशोधन (manipulation) है।
पौधों में मुख्य रूप से दो प्रमुख उद्देश्यों के लिए संशोधन किया जाता है:
- फसल सुधार (Crop improvement)
- शाकनाशी सहिष्णुता (Herbicide tolerance) (उपयोग में)
- कीट प्रतिरोध (Pest resistance) (उपयोग में)
- सूखा सहिष्णुता (Drought tolerance)
- नाइट्रोजन फिक्सिंग क्षमता (Nitrogen fixing ability)
- अम्लता (Acidity) और लवणता (Salinity) सहिष्णुता
- फसलों का पोषण मूल्य (Nutritional value of crops)
- भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार
- वनस्पति तेलों (vegetable oils) में संतृप्त फैटी एसिड (saturated fatty acids) की सांद्रता को कम करके स्वस्थ खाना पकाने वाले तेल (Healthier cooking oils)
- कार्यात्मक खाद्य पदार्थ (Functional foods): जैविक रूप से सक्रिय घटकों (biologically active components) के महत्वपूर्ण स्तर वाले खाद्य पदार्थ जो स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
पादप जैव प्रौद्योगिकी में लागू विभिन्न तकनीकों में शामिल हैं (Various technologies applied in plant biotechnology includes):
- जेनेटिक इंजीनियरिंग/ रिकॉम्बिनेंट DNA तकनीक (Genetic engineering/ recombinant DNA technology)
- ऊतक संवर्धन (Tissue culture)
- आणविक प्रजनन - एमएएस (Molecular breeding – MAS)
पारंपरिक पादप प्रजनन (Traditional plant breeding) में विभिन्न गुणों (traits) वाली नई किस्में (varieties) पैदा करने के लिए समान पौधों का क्रॉस-ब्रीडिंग (cross-breeding) शामिल है। लेकिन वांछित परिणाम प्राप्त करने में कई पीढ़ियां (generations) लग जाती हैं। विभिन्न जैव तकनीकी उपकरणों (biotechnological tools) का उपयोग करके, फसल सुधार तेजी से प्राप्त किया जा सकता है और यह असंबंधित प्रजातियों (unrelated species) से जीन स्थानांतरित करने की भी सुविधा प्रदान करता है।
जेनेटिक इंजीनियरिंग
जीन में संशोधन को जेनेटिक इंजीनियरिंग या रिकॉम्बिनेंट DNA तकनीक (recombinant DNA technology) कहा जाता है। यह एक जीव से जीन को निकालता है और या तो:
- उन्हें किसी अन्य में स्थानांतरित (Transfers) करता है
- उन्हें एक अलग संयोजन (different combination) के साथ मूल में वापस रखता है
जेनेटिक इंजीनियरिंग में उपयोग की जाने वाली विभिन्न जीन स्थानांतरण (gene transfer) तकनीकों में शामिल हैं:
- एग्रोबैक्टीरियम (Agrobacterium) मध्यस्थता जीन स्थानांतरण: मूल जीव के DNA से वांछित गुण (trait) को अलग किया जाता है, एग्रोबैक्टीरियम में डाला जाता है, लक्षित पौधे को संक्रमित (infected) किया जाता है। जो कोशिकाएं DNA को स्वीकार करती हैं उन्हें नए गुण (new trait) वाले पौधों के रूप में विकसित किया जाता है।
- जीन गन (Gene gun): DNA जो वांछित विशेषता के लिए कोड करता है उसे टंगस्टन (tungsten) के छोटे कणों पर लेपित (coated) किया जाता है और पादप कोशिकाओं (plant cells) के एक समूह में दागा (fired) जाता है। जो कोशिकाएं DNA को स्वीकार करती हैं वे वांछित विशेषता वाले पौधों में विकसित हो जाती हैं।
ऊतक संवर्धन
ऊतक संवर्धन कोशिकाओं, परागकोषों (anthers), पराग कणों (pollen grains), या अन्य ऊतकों (tissues) में संशोधन करता है; ताकि वे प्रयोगशाला की स्थितियों में विस्तारित अवधि तक जीवित रहें या संपूर्ण, जीवित, बढ़ते जीव (living, growing organisms) बन जाएं; आनुवंशिक रूप से इंजीनियर की गई कोशिकाओं को ऊतक संवर्धन के माध्यम से आनुवंशिक रूप से इंजीनियर किए गए जीवों में परिवर्तित किया जा सकता है।
मार्कर असिस्टेड सिलेक्शन (Marker Assisted Selection)
मार्कर-सहायक आनुवंशिक विश्लेषण (Marker-aided genetic analysis) जीन, क्यूटीएल (QTLs - मात्रात्मक विशेषता लोकी / quantitative trait loci) और अन्य आणविक मार्करों (molecular markers) की पहचान करने और उन्हें जीवों के कार्यों से जोड़ने, यानी जीन की पहचान (gene identification) करने के लिए DNA अनुक्रमों (DNA sequences) का अध्ययन करता है। मार्कर-सहायक चयन पीढ़ियों की एक श्रृंखला के माध्यम से पहले पहचाने गए DNA अंशों (DNA fragments) की पहचान (identification) और वंशानुक्रम ट्रेसिंग (inheritance tracing) है।
कृषि (पौधों) में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग (Applications of biotechnology in agriculture - plants)
- फसल सुधार
- कीटों (pest) और बीमारियों (Diseases) के प्रति अंतर्निहित प्रतिरोध (built in resistance) वाले पौधे।
- पर्यावरणीय परिस्थितियों (environmental conditions) के प्रति अंतर्निहित सहिष्णुता (built in tolerance) वाले पौधे।
- बेहतर रंग और गुणवत्ता (Improved color and quality)
- फार्मास्यूटिकल्स
- पौधे जो खाद्य टीके (edible vaccines) पैदा करते हैं
- भोजन (Food)
- बेहतर स्वाद और पोषण (Improved taste and nutrition)
- बेहतर हैंडलिंग गुण (Improved handling qualities)
- औद्योगिक (Industrial)
- प्लास्टिक, ईंधन (fuels) और अन्य उत्पाद बनाने वाले पौधे
- पर्यावरण की सफाई (environmental cleanup) के लिए पौधे
- अन्य (Other)
- प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों और कीड़ों से बने कीटनाशक
कृषि (जानवरों) में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग (Applications of biotechnology in agriculture - animals)
- भोजन
- दूध उत्पादन में वृद्धि (Increased milk production)
- सूअर के मांस में कम वसा (leaner meat in pork)
- फार्म में पाली जाने वाली मछली में वृद्धि हार्मोन (growth hormones) जिसके परिणामस्वरूप मछली बाजार के लिए जल्दी तैयार हो जाती है।
- फार्मास्यूटिकल्स
- इंसुलिन और टीकों सहित दवाओं (drugs) के लिए मानव प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए इंजीनियर किए गए जानवर।
- प्रजनन (Breeding)
- रोग सहिष्णुता (Disease tolerance)
- वांछित स्टॉक (desired stock) की सटीक प्रतियां (Exact copies)
- बढ़ी हुई पैदावार (Increased yields)
- स्वास्थ्य
- लाभकारी उद्देश्यों के लिए फ़ीड (feed) में पेश किए गए सूक्ष्मजीव
- बीमारी और गर्भावस्था का पता लगाने (pregnancy detection) के लिए निदान
- मनुष्यों में प्रत्यारोपण (transplantation) के लिए उपयुक्त अंग (organs) बनाने के लिए इंजीनियर किए गए जानवर।
जैव प्रौद्योगिकी का इतिहास (History of biotechnology)
- 1797: पहला टीकाकरण (First vaccination)। एडवर्ड जेनर (Edward Jenner) ने काउपाक्स (cowpox) के घाव से मवाद (pus) निकाला, इसे एक लड़के की बांह पर एक चीरे (incision) में डाल दिया।
- 1830: प्रोटीन की खोज की गई।
- 1833: पहले एंजाइम (enzyme) की खोज की गई और उसे अलग (isolated) किया गया।
- 1865: ग्रेगोर मेंडल (Gregor Mendel) ने अपने बगीचे में फूलों का अध्ययन करके वंशानुक्रम के नियमों (laws of inheritance) की खोज की। आनुवंशिकी का विज्ञान शुरू हुआ।
- 1915: फेजेज (Phages) — ऐसे वायरस (viruses) जो केवल बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं — की खोज की गई।
- 1927: हरमन मुलर (Herman Muller) ने पता लगाया कि विकिरण (radiation) से गुणसूत्रों (chromosomes) में दोष उत्पन्न होता है।
- 1944: ओसवाल्ड एवरी (Oswald Avery), कॉलिन मैकलियोड (Colin MacLeod) और मैक्लिन मैककार्टी (Maclyn McCarty) द्वारा यह साबित किया गया कि DNA आनुवंशिक जानकारी ले जाता है।
- 1953: जेम्स वॉटसन (James Watson) और फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) ने DNA की द्वि-कुंडलिनी संरचना (double helical structure) का वर्णन किया। उन्होंने मौरिस विल्किंस (Maurice Wilkins) के साथ 1962 का चिकित्सा या फिजियोलॉजी (Medicine or Physiology) का नोबेल पुरस्कार साझा किया।
- 1955: इंसुलिन के अमीनो एसिड अनुक्रम (amino acid sequence) की खोज फ्रेडरिक सेंगर (Frederick Sanger) ने की थी।
- 1958: पहली बार परखनली (test tube) में DNA बनाया गया। सिकल सेल रोग (Sickle cell disease) को एक अमीनो एसिड में बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाला दिखाया गया।
- 1971: किसी जीन का पहला पूर्ण संश्लेषण (complete synthesis) होता है। प्रतिबंध एंजाइमों (restriction enzymes) की खोज जो आनुवंशिक सामग्री को बहुत विशेष रूप से काटते और जोड़ते (cut and splice) हैं। यह जीन क्लोनिंग (gene cloning) का रास्ता खोलता है।
- 1973: स्टेनली कोहेन (Stanley Cohen) और हर्बर्ट बोयर (Herbert Boyer) ने प्रतिबंध एंजाइमों का उपयोग करके DNA को काटने और चिपकाने (cut and paste) की जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीकों को परिपूर्ण (perfect) किया।
- 1975: जॉर्जेस कोहलर (Georges Kohler) और सीजर मिलस्टीन (Cesar Milstein) मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (monoclonal antibodies) — अत्यधिक विशिष्ट, शुद्ध एंटीबॉडी जो केवल एक एंटीजन (antigen) को पहचानने वाली कोशिकाओं के केवल एक क्लोन से प्राप्त होते हैं, का उत्पादन करने की तकनीक विकसित करते हैं। उन्होंने नील्स जेर्न (Neils Jerne) के साथ 1984 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार साझा किया।
- 1981: अन्य जानवरों से चूहों में जीन स्थानांतरित (transferring genes) करके पहले ट्रांसजेनिक जानवर (transgenic animals) तैयार किए जाते हैं।
- 1983: पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (polymerase chain reaction - PCR) तकनीक, जो जीन और जीन टुकड़ों (gene fragments) की असीमित प्रतियां बनाती है, की कल्पना की गई। लेनोइर, एनसी में पैदा हुए कैरी मुलिस (Kary Mullis) ने इस खोज के लिए रसायन विज्ञान (Chemistry) में 1993 का नोबेल पुरस्कार जीता।
- 1986: मानव उपयोग के लिए स्वीकृत पहला रीकॉम्बिनेंट टीका (recombinant vaccine): हेपेटाइटिस बी (hepatitis B)। पहली कैंसर विरोधी दवा (anti-cancer drug) बायोटेक के माध्यम से तैयार की गई: इंटरफेरॉन (interferon)।
- 1987: आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पौधे (genetically modified food plant) के क्षेत्र परीक्षण (field tests) के लिए पहली स्वीकृति: वायरस प्रतिरोधी टमाटर (virus-resistant tomatoes)।
- 1994: आनुवंशिक रूप से संशोधित टमाटर (Genetically modified tomatoes) अमेरिका में पहली बार बेचे गए।
- 1990: मानव जीनोम परियोजना (Human Genome Project) — मानव जीनोम में सभी जीनों को मैप करने का एक अंतर्राष्ट्रीय प्रयास — शुरू किया गया।
- 2002: मानव जीनोम का मसौदा संस्करण (draft version) प्रकाशित हुआ।
- 1997: वैज्ञानिकों ने एक वयस्क कोशिका (adult cell) से क्लोन किए गए पहले जानवर डॉली (Dolly) के जन्म की सूचना दी।
- 1998: मानव भ्रूण स्टेम सेल लाइनें (Human embryonic stem cell lines) स्थापित की गईं। वे कई लोगों को आशा प्रदान करते हैं क्योंकि वे रोगग्रस्त या निष्क्रिय कोशिकाओं (diseased or dysfunctional cells) को बदलने में सक्षम हो सकते हैं।
- 2003: SARS (गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम - severe acute respiratory syndrome) वायरस को इसकी खोज के तीन सप्ताह बाद अनुक्रमित (sequenced) किया गया।
- 2004: पहला क्लोन पालतू जानवर — एक बिल्ली का बच्चा — उसके मालिक को दिया गया। उसे कॉपीकैट (CopyCat) (या संक्षेप में Cc) कहा जाता है।
- 2006: मानव पेपिलोमावायरस (human papillomavirus - HPV) के खिलाफ एक रीकॉम्बिनेंट वैक्सीन को एफडीए (FDA) की मंजूरी मिली। वायरस जननांग मौसा (genital warts) का कारण बनता है और सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) का कारण बन सकता है।
स्रोत (Source):
http://www.woodrow.org/teachers/bi/1993/intro.html
http://www.biotechno.netfirms.com/Biotechnology.htm
http://en.wikipedia.org/wiki/Genetic_engineering
http://en.wikipedia.org/wiki/Marker_assisted_selection
प्रश्न (Questions)
- "जैव प्रौद्योगिकी" शब्द पहली बार …………… में गढ़ा गया था।
- 1919
- 1916
- 1991
- 1961
- "जैव प्रौद्योगिकी" शब्द पहली बार ……………. द्वारा गढ़ा गया था।
- न्यूबर्ग (Neuberg)
- लिपमैन (Lipmann)
- फ्रेडरिक सेंगर
- कार्ल एरेकी
- जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है जिनमें …………………….. शामिल हैं
- कृषि (Agriculture)
- बायोरेमेडिएशन
- खाद्य प्रसंस्करण
- उपरोक्त सभी (All the above)
- कृषि में, जेनेटिक इंजीनियरिंग का उपयोग ऐसे पौधे तैयार करने के लिए किया जा रहा है जो ………………. के प्रतिरोधी हों
- कीड़े (insects)
- खरपतवार (weeds)
- पौधों की बीमारियाँ (plant diseases)
- उपरोक्त सभी
- इम्युनोएसे का उपयोग ……………… के लिए किया जाता है
- दवा स्तर परीक्षण (drug level testing)
- फसलों और पशु उत्पादों में कीटनाशकों, शाकनाशियों और विषाक्त पदार्थों के असुरक्षित स्तर का पता लगाना (detection of unsafe levels of pesticides, herbicides and toxins on crops and in animal products)
- a और b दोनों
- उपरोक्त में से कोई नहीं (None of the above)
- जेनेटिक इंजीनियरिंग है ………..
- DNA में संशोधन करने के लिए सेलुलर एंजाइमों का उपयोग
- उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीनों में सुधार करना / नए प्रोटीन बनाना
- कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना या कम करना
- संपूर्ण जीव का उत्पादन करने के लिए या नए उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रयोगशाला की स्थितियों में कोशिकाओं/ऊतकों (cells/tissues) को विकसित करना
- प्रोटीन इंजीनियरिंग (Protein engineering) है ………..
- DNA में संशोधन करने के लिए सेलुलर एंजाइमों का उपयोग
- उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीनों में सुधार करना / नए प्रोटीन बनाना
- कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना या कम करना
- संपूर्ण जीव का उत्पादन करने के लिए या नए उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रयोगशाला की स्थितियों में कोशिकाओं/ऊतकों (cells/tissues) को विकसित करना
- एंटीसेंस या RNAआई (Antisense or RNAi) तकनीक है ………..
- DNA में संशोधन करने के लिए सेलुलर एंजाइमों का उपयोग
- उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीनों में सुधार करना / नए प्रोटीन बनाना
- कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना या कम करना
- संपूर्ण जीव का उत्पादन करने के लिए या नए उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रयोगशाला की स्थितियों में कोशिकाओं/ऊतकों (cells/tissues) को विकसित करना
- सेल और ऊतक संवर्धन (Cell and tissue culture) तकनीक है ………..
- DNA में संशोधन करने के लिए सेलुलर एंजाइमों का उपयोग
- उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीनों में सुधार करना / नए प्रोटीन बनाना
- कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना या कम करना
- संपूर्ण जीव का उत्पादन करने के लिए या नए उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रयोगशाला की स्थितियों में कोशिकाओं/ऊतकों (cells/tissues) को विकसित करना
- जैव सूचना विज्ञान (Bioinformatics) तकनीक है …………..
- DNA में संशोधन करने के लिए सेलुलर एंजाइमों का उपयोग
- उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीनों में सुधार करना / नए प्रोटीन बनाना
- कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना या कम करना
- जैविक डेटा का कम्प्यूटेशनल विश्लेषण (Computational analysis of biological data)
- फंक्शनल जीनोमिक्स (Functional Genomics) है …………..
- सभी जीनों और उनके उत्पादों के जैविक कार्य को निर्धारित करने के लिए हाई-थ्रूपुट दृष्टिकोण
- उपयोगी उत्पाद बनाने के लिए मौजूदा प्रोटीनों में सुधार करना / नए प्रोटीन बनाना
- कुछ प्रोटीनों के उत्पादन को रोकना या कम करना
- जैविक डेटा का कम्प्यूटेशनल विश्लेषण
- ट्रांसलेशनल जीनोमिक्स में शामिल है(हैं)……………
- केवल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स (Transcriptomics alone)
- केवल प्रोटिओमिक्स (Proteomics alone)
- मेटाबॉलोमिक्स और ट्रांसजीनोमिक्स
- उपरोक्त सभी
- मेटाबॉलोमिक्स में शामिल है(हैं) …………
- मेटाबोलाइट प्रोफाइलिंग (Metabolite profiling)
- रासायनिक फ़िंगरप्रिंटिंग (Chemical fingerprinting)
- फ्लक्स विश्लेषण (Flux analysis)
- उपरोक्त सभी
- पादप जैव प्रौद्योगिकी (plant biotechnology) में लागू विभिन्न तकनीकों में शामिल हैं ……………….
- जेनेटिक इंजीनियरिंग / रिकॉम्बिनेंट DNA तकनीक (Genetic engineering/ recombinant DNA technology)
- ऊतक संवर्धन
- आणविक प्रजनन - एमएएस (Molecular breeding - MAS)
- उपरोक्त सभी
- टीकाकरण (Vaccination) का पहला प्रयास …………………… द्वारा किया गया था
- ग्रेगोर मेंडल
- ओसवाल्ड एवरी
- कॉलिन मैकलियोड
- एडवर्ड जेनर
- टीकाकरण का पहला प्रयास …………………… वर्ष में किया गया था
- 1797
- 1777
- 1787
- 1767
- वंशानुक्रम के नियमों की खोज …………………… द्वारा की गई थी
- ग्रेगोर मेंडल
- ओसवाल्ड एवरी
- कॉलिन मैकलियोड
- एडवर्ड जेनर
- आनुवंशिकी का विज्ञान (science of genetics) वर्ष …………………… में पैदा हुआ था
- 1865
- 1856
- 1855
- 1846
- फेजेज संक्रमित करते हैं ……………………
- केवल बैक्टीरिया (Only bacteria)
- केवल वायरस (Only viruses)
- a और b दोनों
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- उस वैज्ञानिक का नाम बताइए जिसने खोजा था कि विकिरण गुणसूत्रों में दोष उत्पन्न करता है ……………………
- ग्रेगोर मेंडल
- ओसवाल्ड एवरी
- कॉलिन मैकलियोड
- हरमन मुलर
- DNA को आनुवंशिक जानकारी ले जाने के लिए सिद्ध किया गया है …………………… द्वारा
- ओसवाल्ड एवरी
- कॉलिन मैकलियोड
- मैक्लिन मैककार्टी
- उपरोक्त सभी
- DNA को आनुवंशिक जानकारी ले जाने के लिए वर्ष …………………… में सिद्ध किया गया है
- 1944
- 1946
- 1948
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- DNA की द्वि-कुंडलिनी संरचना का वर्णन ………………… द्वारा किया गया है
- जेम्स वॉटसन
- फ्रांसिस क्रिक
- दोनों (Both)
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- इंसुलिन के अमीनो एसिड अनुक्रम की खोज ………………… द्वारा की गई है
- जेम्स वॉटसन
- फ्रांसिस क्रिक
- फ्रेडरिक सेंगर
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- सिकल सेल रोग ……………….अमीनो एसिड में बदलाव के कारण होता है।
- एक (One)
- दो (Two)
- तीन (Three)
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- जीन का पहला पूर्ण संश्लेषण …………... में हुआ।
- 1917
- 1971
- 1791
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- प्रतिबंध एंजाइमों का उपयोग करके DNA को काटने और चिपकाने की जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक (Genetic engineering technique) ………….. द्वारा परिपूर्ण (perfected) की गई है।
- स्टेनली कोहेन
- हर्बर्ट बोयर
- दोनों
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उत्पन्न करने की तकनीक ……..... द्वारा विकसित की गई है।
- जॉर्जेस कोहलर
- सीजर मिलस्टीन
- दोनों
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- ……………… ने पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन तकनीक विकसित की।
- कैरी मुलिस
- जॉर्जेस कोहलर
- सीजर मिलस्टीन
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- मानव उपयोग के लिए स्वीकृत पहला रीकॉम्बिनेंट टीका …………... है।
- हेपेटाइटिस बी
- पोलियो (polio)
- हेपेटाइटिस सी (hepatitis C)
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- ………………. क्षेत्र परीक्षण के लिए स्वीकृत पहला आनुवंशिक रूप से संशोधित पौधा है।
- वायरस प्रतिरोधी टमाटर
- वायरस प्रतिरोधी बैंगन (virus-resistant brinjal)
- वायरस प्रतिरोधी कपास (virus-resistant cotton)
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- आनुवंशिक रूप से संशोधित टमाटर अमेरिका में पहली बार वर्ष …………... में बेचे गए।
- 1994
- 1971
- 1991
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- मानव जीनोम परियोजना ………………. में शुरू की गई है।
- 1990
- 1991
- 2000
- उपरोक्त में से कोई नहीं
- मानव जीनोम का मसौदा संस्करण …….. में प्रकाशित हुआ है।
- 1990
- 2000
- 2002
- 2004
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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