परखनली निषेचन
पादप प्रजनक (Plant breeder) का कार्य निम्नलिखित में से किसी भी स्थिति के कारण कठिन हो सकता है: पराग (Pollen) वर्तिकाग्र (Stigma) पर अंकुरित (Germinate) होने में विफल रहता है, वर्तिका (Style) में पराग नलिका (Pollen tube) की वृद्धि आंशिक रूप से या पूरी तरह से रुक जाती है, कोई निषेचन (Fertilization) नहीं होता है, निषेचित अंड कोशिका (Fertilized egg cell) इन विवो (In vivo) में विकसित नहीं होती है और नष्ट (Abort) हो जाती है, या अंडाशय (Ovaries) का विगलन (Abscission) स्थायी रूप से होता है। यदि स्व-परागण (Self pollination) या पर-परागण (Cross pollination) के बाद कोई निषेचन नहीं होता है, तो इसे स्व-असंगति (Self incompatibility) या पर-असंगति (Cross incompatibility) कहा जाता है। कुछ मामलों में, पादप प्रजनक को निषेचन कराने के लिए विशेष प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ता है, उदाहरण के लिए बीजांड निषेचन (Ovule fertilization) (यहाँ पराग को कृत्रिम रूप से बीजांड (Ovules) के संपर्क में लाया जाता है)।
1962 तक इन विट्रो (In vitro) में निषेचन कराने का विचार नहीं आया था, जब यह इन विवो में संभव नहीं था। इस तथ्य के बावजूद कि इस क्षेत्र में बहुत कम शोध (Research) किया गया था, परखनली निषेचन के कुछ दिलचस्प उदाहरण पाए गए।
यदि असंगति (Incompatibility) वर्तिकाग्र पर या वर्तिका में मौजूद है, तो इन विट्रो निषेचन (In vitro fertilization) का विशेष महत्व है।
इन विट्रो निषेचन तीन अलग-अलग तरीकों से हो सकता है:
- वर्तिकाग्र निषेचन (Stigma fertilization): इस विधि में एक विपुंसित फूल (Emasculated flower) को अत्यधिक निर्जलित (Sterilized) किया जाता है और फिर इन विट्रो में अलग (Isolate) किया जाता है। फिर एक पके हुए परागकोश (Ripe anther) (जिसे बाहरी रूप से निर्जलित किया गया है) से पराग को वर्तिकाग्र पर रखा जाता है। यह विधि, जो इन विवो निषेचन के समान है, का उपयोग किया जा सकता है, यदि उदाहरण के लिए, अंडाशय समय से पहले पौधे से गिर जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संतति (Progeny) की कमी होती है। वर्तिकाग्र निषेचन का उपयोग करके सफलता प्राप्त की गई है: Nicotiana rustica, N. tabacum, Petunia violacea, Antirrhinum majus, Pisum sativum, Lathyrus odoratus, Zea mays और Glycine प्रजातियों के साथ।
- बीजांडासन निषेचन (Placental fertilization): एक बरकरार फूल (Intact flower) को बाहरी रूप से निर्जलित किया जाता है और अनिषेचित बीजांडों (Unfertilized ovules) के साथ बीजांडासन कर्तोतक (Placenta explants) को एक स्टीरियोमाइक्रोस्कोप (Stereomicroscope) के नीचे विच्छेदित (Dissect) किया जाता है और एक पोषक माध्यम (Nutrient medium) पर टीका (Inoculate) लगाया जाता है। उसी समय परागकोश (Anthers) जो अभी भी बंद हैं और एक ऐसे चरण में हैं जहाँ वे इन विवो में खुलने ही वाले होंगे, उन्हें बाहरी रूप से निर्जलित किया जाता है। परागकोशों को बाँझ परिस्थितियों (Sterile conditions) में खोला जाता है और परागकणों (Pollen grains) को बीजांडों के पास रखा जाता है। इसके बाद, यह निर्धारित करने के लिए समय की आवश्यकता होती है कि क्या परागकण अंकुरित होते हैं, क्या वे भ्रूणकोष (Embryo sac) में प्रवेश करते हैं और क्या निषेचन होता है। बीजांडासन निषेचन Caryophyllaceae, Gossypium और Zea mays के सदस्यों के साथ किया जाता है।
- बीजांडासन (Placenta) के बिना एक पृथक बीजांड (Isolated ovule) का निषेचन: यह विधि समय से 2 के समान है कि बीजांड इन विट्रो में अलग हो गया है। इस विधि से बहुत कम सफलता मिली है क्योंकि इन विट्रो निषेचित बीजांडों में भ्रूण निर्माण (Embryo formation) को प्रेरित करना (Induce) अत्यंत कठिन है।
इन विट्रो निषेचन का उपयोग निम्नलिखित मामलों में किया जा सकता है:
- बीजांडासन परागण (Placental pollination) कभी-कभी संभव होता है जब पौधे इन विवो में पूरी तरह से स्व-असंगत (Self incompatible) होते हैं। उदाहरण के लिए Petunia axilaris, Petunia संकर (Hybrids)।
- पर-निषेचन (Cross fertilization) इन विट्रो में संभव हो सकता है भले ही यह इन विवो में असंभव हो। Nicotiana tabacum से पराग के साथ Nicotiana alata के बीजांडों के परखनली निषेचन के बाद संकर पौधे (Hybrid plants)। अंतरावंशीय संकरण (Intergeneric crosses) भी इन विट्रो में प्राप्त किया जा सकता है, जैसा कि Caryophyllaceae के विभिन्न सदस्यों के साथ देखा गया है; इस परिवार के लिए यह दिखाया गया है कि परागकण इन विवो में वर्तिकाग्र की तुलना में इन विट्रो में बीजांडासन निषेचन के साथ बेहतर अंकुरित होते हैं।
- अनिषेकजनन (Parthenogenesis) द्वारा अगुणितों (Haploids) का उत्पादन।
- फूल या अंडाशय (Ovary) का विगलन कभी-कभी अपरिहार्य होता है। ऐसे मामले में वर्तिकाग्र निषेचन प्रभावी हो सकता है।
- निषेचन के शरीर विज्ञान (Physiology) का अध्ययन करने के लिए।
सामान्य तौर पर इन विट्रो में निषेचन के लिए आवश्यक शर्तों के बारे में बहुत कम जानकारी है। हालाँकि, यह निश्चित प्रतीत होता है कि:
- परागकणों और बीजांडों को सही शारीरिक (Physiological) और रूपात्मक (Morphological) अवस्था में होना चाहिए।
- पोषक माध्यम का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आश्चर्यजनक नहीं है कि यह चुनाव बहुत कठिन प्रक्रियाएँ एक के बाद एक होनी चाहिए: परागकणों का अंकुरण (Germination), निषेचन और भ्रूण (Embryo) का बीज (Seed) में विकास। भ्रूण की वृद्धि को प्रेरित करने के लिए अक्सर यौगिकों (Compounds) के एक जटिल मिश्रण (Complex mixture) का उपयोग किया जाता है।
- वर्तिकाग्र निषेचन के साथ उपयोग के लिए फूलों को निर्जलित (Sterilizing) करते समय, यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि वर्तिकाग्र बहुत लंबे समय तक स्टरलाइज़िंग एजेंट (Sterilizing agent) के संपर्क में न हो या वर्तिकाग्र पर मौजूद स्राव (Exudates) घुल जाएँगे।
- वर्तिकाग्र निषेचन के साथ फूल से बाह्यदल (Sepals) को न हटाना बेहतर है, क्योंकि वे अंडाशय के विकास को प्रोत्साहित करते हैं।
- बीजांडासन निषेचन की विफलता के बावजूद वर्तिकाग्र निषेचन अभी भी संभव हो सकता है।
- तापमान (Temperature) एक निर्णायक कारक हो सकता है।
प्रश्न (Questions)
1. इन विट्रो निषेचन किसके माध्यम से हो सकता है …………
- a) वर्तिकाग्र निषेचन
- b) बीजांडासन निषेचन
- c) बीजांडासन के बिना एक पृथक बीजांड का निषेचन (Fertilization of an isolated ovule without a placenta)
- d) उपरोक्त सभी (All the above)
2. वर्तिकाग्र निषेचन किसमें सफल होता है …………
- a) Nicotiana rustica
- b) Zea mays
- c) Pisum sativum
- d) उपरोक्त सभी
3. बीजांडासन निषेचन किसमें सफल होता है …………
- a) Caryophyllaceae
- b) Zea mays
- c) Gossypium
- d) उपरोक्त सभी
4. इन विट्रो निषेचन के लिए आवश्यक शर्तों में शामिल हैं …………
- a) पराग और बीजांड (Ovule) की शारीरिक स्थिति (Physiological state)
- b) पराग और बीजांड की रूपात्मक स्थिति (Morphological state)
- c) पोषक माध्यम
- d) उपरोक्त सभी
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अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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