बीज उपचार (Seed Treatment)

बीज की गुणवत्ता बनाए रखना कई पर्यावरणीय कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें से कुछ नमी (moisture), तापमान (temperature), आर्द्रता (humidity) और भंडारण की स्थिति (storage conditions) हैं। भले ही इन कारकों का ठीक से ध्यान रखा जाए, फिर भी कुछ बीज जनित रोगों (seedborne diseases) या कीड़ों और अन्य कीटों (pests) द्वारा बीज की गुणवत्ता कम या नष्ट हो सकती है। अनुसंधान (Research) से पता चला है कि बीज को इन कीटों से बचाने और बीज की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक या अधिक कीटनाशकों (pesticides) के साथ बीज का उपचार करना सबसे किफायती और कुशल तरीका है। चूंकि कीटनाशक जहरीले होते हैं, इसलिए उन्हें लगाते समय और उपचार के बाद बीजों को संभालने में अतिरिक्त देखभाल और सुरक्षा सावधानियां (safety precautions) बरतनी चाहिए।

उपचारित बीज की परिभाषा (Definition of treated seed)

"उपचारित (treated)" शब्द का अर्थ है "बीज पर कीटनाशक (pesticide) का प्रयोग करना या बीज को ऐसी प्रक्रिया के अधीन करना जो बीज या पौधे (seedlings) पर हमला करने वाले रोग पैदा करने वाले जीवों, कीड़ों या अन्य कीटों को कम करने, नियंत्रित करने या दूर भगाने के लिए डिज़ाइन की गई हो।"

बीज उपचार के प्रकार (Types of Seed Treatment)

A. बुवाई से पहले बीज उपचार (Pre sowing seed treatments)

यह वह उपचार है जो बुवाई (sowing) से पहले बीजों को दिया जाता है ताकि अंकुरण (germination) और ओज क्षमता (vigour potential) में सुधार हो सके और साथ ही बीज का स्वास्थ्य (health) भी बना रहे।

बुवाई से पहले बीज उपचार में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. अंकुरण और ओज क्षमता में सुधार के लिए रासायनिक उपचार (Chemical treatments)।
  2. कीटनाशक (Insecticidal) और कवकनाशी (fungicidal) उपचार।
  3. विशेष उपचार (Special treatments)।

I. अंकुरण और ओज क्षमता में सुधार के लिए रासायनिक उपचार (Chemical treatments to improve germination and vigour potential)

बीजों को पोषक तत्वों (nutrients), विटामिन (vitamins) और सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) आदि के साथ भिगोना / उपचार करना।

II. कीटनाशक और कवकनाशी उपचार (Insecticidal and Fungicidal treatments)

बीज स्वास्थ्य (Seed health): यह गुणवत्ता वाले बीज का एक महत्वपूर्ण गुण है। यद्यपि एक बीज लॉट (seed lot) जो अंकुरण, ओज और शुद्धता (purity) के उच्च मानकों को पूरा करता है, यदि वह बीज जनित रोगजनकों (seed borne pathogens) और कीटों (insect pests) से दूषित (contaminated) है, तो यह किसानों के लिए बेकार हो सकता है क्योंकि इसके परिणामस्वरूप गंभीर उपज हानि या पूरे क्षेत्र में फसल का नुकसान हो सकता है।

कीटनाशक और कवकनाशी उपचार के लाभ (Benefits of the insecticidal and fungicidal treatments):

  1. पौधों की बीमारियों (plant diseases) के प्रसार (spread) को रोकता है।
  2. यह बीज को बीज सड़न (seed rot) और पौध अंगमारी (seedling blights) से बचाता है।
  3. यह बीज अंकुरण (seed germination) में सुधार करता है।
  4. यह भंडारण कीड़ों (storage insects) से सुरक्षा प्रदान करता है।
  5. यह मिट्टी के कीड़ों (soil insects) को नियंत्रित करता है।

बीज वायरस (viruses), बैक्टीरिया (bacteria), कवक (fungi), नेमाटोड (nematodes) और कीड़ों (insects) से प्रभावित हो सकता है। बीज के कीट और रोग जिनका बीज शिकार होता है (उदा., अनाज के घुन (grain weevils), Tricoderma spp., और भंडारण रोगजनक (storage pathogens) जैसे Aspergillus flavus) को बीज-जनित रोगों से अलग किया जाना चाहिए जिनमें बीज कीट और रोगजनक प्रसार का वाहक (vehicle) होता है (उदा., अनाज का बंट (bunt of cereals), Tilletia spp.)।

बीज उपचार कवकनाशी (Seed Treatment Fungicides)

कवकनाशी (Fungicides) को रोपण (planting) से पहले बीज पर लगाया जाता है ताकि कई बीज और मिट्टी-जनित (soil-borne) पौधों के रोगजनकों (plant pathogens) के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान की जा सके। रासायनिक (कवकनाशी) उपचार विभिन्न बीज सड़न (seed rots) और पौध अंगमारी से बचाता है जो भंडारण के दौरान या रोपण के बाद होते हैं। यह आमतौर पर "सभी का इलाज (cure-all)" नहीं है और पौधों के आत्मनिर्भर (self-sufficient) होने के बाद पूरे बढ़ते मौसम (growing season) में बीमारी से सुरक्षा प्रदान नहीं करेगा। (इसका अपवाद बीज कीटाणुशोधन (seed disinfection) द्वारा अनावृत कंड (loose smut) का नियंत्रण होगा)।

उपचार की प्रकृति और उद्देश्य के आधार पर, कवकनाशी बीज उपचार को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। ये श्रेणियां हैं:

  1. बीज कीटाणुशोधन: कीटाणुशोधन एक रोगजनक (pathogen) का उन्मूलन (elimination) है जो बीज की जीवित कोशिकाओं में प्रवेश कर गया है, इसे संक्रमित कर चुका है और स्थापित हो गया है - उदाहरण के लिए, जौ (barley) और गेहूं (wheat) का अनावृत कंड।
  2. बीज विसंक्रमण (Seed disinfestations): विसंक्रमण बीजाणुओं (spores) और बीज की सतह पर पाए जाने वाले रोगजनक जीवों के अन्य रूपों का नियंत्रण है।
  3. बीज सुरक्षा (Seed protection): बीज सुरक्षा मिट्टी में रोगजनक जीवों से बीज और युवा पौध (young seedling) की रक्षा के लिए रासायनिक उपचार है।

बीज उपचार सामग्री (Seed treatment materials) को आमतौर पर बीज पर चार रूपों में से एक में लगाया जाता है: धूल (dust); घोल (slurry - पानी में वेटेबल पाउडर का मिश्रण); तरल पदार्थ (liquids); और प्लांटर-बॉक्स फॉर्मूलेशन (planter-box formulations)।

रचना (composition) के आधार पर, बीज उपचार कवकनाशी कार्बनिक (organic) या अकार्बनिक (inorganic), धात्विक (metallic) या गैर-धात्विक (non-metallic), और, हाल तक, मर्क्यूरियल (mercurial) या गैर-मर्क्यूरियल (non-mercurial) हो सकते हैं। वाष्पशील मर्क्यूरियल (volatile mercurials) को रद्द करने से पहले, बीज के उपचार के लिए कवकनाशी को आमतौर पर वाष्पशील (volatile) और गैर-वाष्पशील (non-volatile) के रूप में वर्गीकृत किया गया था। वाष्पशील मर्क्यूरियल के उन्मूलन के साथ, बीज पर उपयोग के लिए अब अनुमोदित अधिकांश कवकनाशी को गैर-वाष्पशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस प्रकार की सामग्री का उपयोग करते समय, प्रभावी नियंत्रण प्राप्त करने के लिए बीज का पूर्ण कवरेज (complete coverage) आवश्यक है।

कुछ सिस्टमिक्स (systemics), कीटनाशकों का एक नया वर्ग, अब बीज उपचार सामग्री के रूप में उपयोग किया जा सकता है। ऐसी सामग्री होने की वांछनीयता जो बीज या पौधे के अंदर जाएगी और कीट को नियंत्रित करेगी, को लंबे समय से मान्यता प्राप्त है। ऐसी सामग्रियों को "सिस्टमिक (systemic)" कहा जाता है। जब निर्माता की सिफारिश (लेबल देखें) के अनुसार उपयोग किया जाता है, तो एक सिस्टमिक परपोषी पौधे (host plant) के माध्यम से चलता है और परपोषी के चयापचय प्रणाली (metabolic system) को प्रभावित किए बिना कुछ कवक और कीड़ों के विकास को नियंत्रित या धीमा (retards) करता है।

बीज उपचार कीटनाशक (Seed Treatment Insecticides)

भंडारण के दौरान बीज को कीड़ों से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने या कम करने के लिए अक्सर बीज पर कीटनाशक (Insecticides) लगाए जाते हैं, और, कुछ हद तक, मिट्टी में वायरवर्म (wireworms) और बीज मकई मैगट (seed corn maggots) जैसे कीड़ों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए।

संयोजन (Combinations)

चूंकि कुछ कीटनाशक कीटों के नियंत्रण में चयनात्मक (selective) होते हैं, कई बार ट्रेक्टर टैंक (treater tank) में दो या दो से अधिक यौगिकों (compounds) को मिलाया जाता है, या नियंत्रण के स्पेक्ट्रम (spectrum of control) को देने के लिए एक अतिरिक्त टैंक का उपयोग किया जा सकता है।

कीटनाशकों के निर्माता (manufacturers) अब बीज प्रोसेसर (seed processors) के लिए संयोजन उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन क्या किसी प्रोसेसर को दो या दो से अधिक कीटनाशकों को मिलाना चाहिए, सामग्रियों की अनुकूलता (compatibility) निर्धारित की जानी चाहिए, क्योंकि सामग्रियों के कुछ संयोजन बीज अंकुरण को गंभीर रूप से कम कर सकते हैं। इसके अलावा, दो या दो से अधिक कीटनाशकों को लगाते समय, यहां तक कि अलग-अलग समय पर भी, आवेदन का क्रम (sequence of application) बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। चाहे बीज पर एक ही कीटनाशक या संयोजन लगाया जाना हो, लेबल पढ़ें और निर्माता के निर्देशों का ध्यानपूर्वक पालन करें।

कवकनाशी / कीटनाशकों का निरूपण (Formulation of fungicides /insecticides)

कवकनाशी / कीटनाशक धूल (dusts), वेटेबल पाउडर (wettable powders) और तरल पदार्थ के रूप में उपलब्ध हैं।

  1. धूल: यह आमतौर पर 200-250 ग्राम / क्विंटल बीज की दर से लगाया जाता है। मुख्य नुकसान यह है कि बीज उपचार के दौरान और संभालने के बाद धूल भरी स्थिति (dusty condition) बनी रहेगी।
  2. घोल (Slurry): इस प्रकार का कवकनाशी बीज पर पानी के निलंबन (water suspension) जैसे साबुन के साथ लगाया जाता है जिसे विशेष स्लरी ट्रेक्टर (slurry treater) का उपयोग करके बीज के साथ मिलाया जा सकता है।
  3. तरल पदार्थ: तरल घोल के उपयोग को "क्विक वेट (quick wet)" विधि कहते हैं। यहां बीज पर एक वाष्पशील कवकनाशी लगाया जाता है और यह उनके साथ अच्छी तरह से मिल जाता है।
    उदाहरण के लिए: इस विधि द्वारा पैनोजेन (panogen), मर्क्यूरान (mercuran) आदि जैसे रसायनों को लगाया जा सकता है।

सुरक्षा (Safety)

ऐसे रसायनों का उपयोग करने की एक सामान्य प्रवृत्ति (general tendency) है जो उपयोगकर्ता और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं। बहुत जहरीले पदार्थ, जैसे कार्बनिक मर्क्यूरियल (organic mercurials - सेरेसन और अन्य) और बहुत ही लगातार रहने वाले कवकनाशी (persistant fungicides), जैसे हेक्साक्लोरोबेंजीन (Hexachlorobenzene - HCB), को नए रसायनों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अतीत में, इन रसायनों ने विषाक्तता (poisoning) के गंभीर मामले पैदा किए हैं, कुछ के परिणामस्वरूप मृत्यु हो गई है। अधिकांश यदि सभी नहीं, इसलिए हुआ क्योंकि उपचारित बीज का उपयोग रोपण के बजाय मानव उपभोग (human consumption) या पशुओं को खिलाने (livestock feeding) के लिए किया गया था। नए, कम जहरीले रसायनों के साथ भी, निम्नलिखित सुरक्षा सावधानियां बरतनी चाहिए:

III. विशेष उपचार

i) बीज को कठोर करने का उपचार (Seed hardening treatment)

बीजों को 2 उद्देश्यों के लिए कठोर (hardened) किया जा सकता है: i) सूखा सहिष्णुता (Drought tolerance) ii) ठंड सहिष्णुता (Cold tolerance)।

उपचार मुख्य रूप से प्रारंभिक सूखे (initial drought) और ठंड को सहन करने के लिए बीजों पर लगाया जाता है। ठंड सहिष्णुता उपचार अंकुरित बीजों (germinated seeds) को दिया जाता है, ऐसे उपचार केवल समशीतोष्ण फसल (temperate crop) और पेड़ के बीजों को दिए जाते हैं।

बीज को कठोर करते समय ध्यान रखने योग्य सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं:

उपचार की प्रभावशीलता बीज को कठोर करने की प्रक्रिया के संचालन पर निर्भर करती है। घोल की मात्रा कभी भी बीजों की मात्रा से अधिक नहीं होनी चाहिए। जोड़ा गया सारा घोल बीजों द्वारा सोख लिया जाना चाहिए (imbibed)। कोई बचा हुआ घोल नहीं होना चाहिए क्योंकि यह लीचिंग प्रभाव (leaching effect) का कारण बनता है। एक बार जब बीज पानी सोख लेते हैं, तो अंकुरण प्रक्रिया (germination process) होती है। भिगोने की अवधि के अंत में बीजों को वापस उसकी मूल नमी (original moisture content) में सुखाया जाना चाहिए। जब इन बीजों को बोया जाता है तो अंकुरण पहले पूरा हो जाएगा जबकि गैर-कठोर बीजों (non hardened seeds) में अंकुरण प्रक्रिया में अधिक समय लगता है।

प्रयुक्त रसायन (Chemicals used): CaCl2, KCl, KH2PO4

ii) बीज सुदृढ़ीकरण (Seed fortification)

मुख्य उद्देश्य बीजों को पोषक तत्वों की आपूर्ति करना है। मुख्य उद्देश्य प्रतिकूल मिट्टी की प्रतिक्रियाओं (unfavourable soil reactions) को दूर करने के लिए उच्च ओज (high vigour) प्राप्त करना है। उदाहरण के लिए: MnSO4 @ 0.5 से 1% के साथ बीज सुदृढ़ीकरण बीजों की ऑक्सीकरण-कमी क्षमता (oxidation-reduction potential) में सुधार करेगा, जो अंततः उच्च अंकुरण (higher germination) की ओर ले जाता है।

iii) नम रेत कंडीशनिंग (Moist sand conditioning)

यह एक आवश्यकता आधारित उपचार (need based treatment) है, एकाग्रता (concentration) को 2-4% तक बढ़ाया जा सकता है। घोल की मात्रा 1:1 के अनुपात में होनी चाहिए या पानी की थोड़ी अधिक मात्रा का उपयोग किया जा सकता है। प्रोटीनयुक्त बीजों (Protinaceous seeds) को पानी में नहीं भिगोना चाहिए (उदा. सोयाबीन, आदि)। इन बीजों के लिए, बीजों को 5 से 10% नमी सामग्री (MC) पर नम रेत (moist sand) के साथ मिलाएं। इसे निर्दिष्ट अवधि (specified period of time) के लिए रखा जाना चाहिए। इस विधि को नम रेत जलयोजन (moist sand hydration) कहते हैं।

iv) बीज पैलेटिंग (Seed pelleting)

यहाँ पोषक तत्वों को बीजों पर लेपित (coated) किया जाता है। इस तकनीक को वन वृक्ष के बीजों (forest tree seeds) में बहुत अपनाया जाता है।

महत्व (Importance):

प्रयुक्त सामग्री (Materials used): पोषक तत्व, चिपकने वाला (adhesive), भराव सामग्री (filler material)।

अक्रिय सामग्री (Inert materials): चूना (Lime), CaCO3, चाक पाउडर (Chalk powder)।

संयंत्र उत्पाद (Plant products): नीम (Neem), नोची (Notchi), अराप्पु (Arappu)। अराप्पु (Albizia amara) अच्छा पाया जाता है, इसमें सैपोनिन (saponin) नामक एक पदार्थ (विकास प्रवर्तक - growth promoter) होता है जो क्रिया में GA के समान होता है।

v) बीज जलसेक (Seed infusion)

ऑर्गेनिक सॉल्वैंट्स (organic solvents) जैसे एसीटोन (acetone) और डाइक्लोरोमीथेन (dichlormethane) के साथ पोषक तत्वों और विकास को बढ़ावा देने वाले पदार्थों (growth promoting substances) का जलसेक (Infusion)।

ऑर्गेनिक सॉल्वैंट्स, धीरे-धीरे बीज में रसायनों को बढ़ाते हैं। इस विधि में बीज की मूल नमी सामग्री को वापस लाने के लिए बीज सामग्री को सुखाने की कोई आवश्यकता नहीं है। कार्बनिक रसायन वाष्पीकृत (evaporative) प्रकृति के होते हैं, जलसेक समाप्त होने के बाद, हमें बीजों को 5 से 10 मिनट के लिए शुष्क अवस्था में रखना होता है, इस समय के दौरान ऑर्गेनिक सॉल्वैंट्स वाष्पित (evaporate) हो जाएंगे और हम बुवाई कर सकते हैं। बीज जलसेक का उपयोग बीज प्रसुप्ति (seed dormancy) को तोड़ने के लिए भी किया जा सकता है।

vi) ऑस्मोटिक प्राइमिंग (Osmotic priming)

यह बहुत महंगा है लेकिन यह एक आवश्यक प्रक्रिया है, विशेष रूप से बड़े बीज वाले फलियों (large seeded legumes) जैसे मटर (peas), बीन्स (beans) आदि के लिए। इनमें उच्च प्रोटीन सामग्री (high protein content) और बड़ा भ्रूण (large embryo) होता है और ये भिगोने की चोट (soaking injury) के प्रति संवेदनशील होते हैं। उच्च प्रोटीन बीज हीड्रोस्कोपिक (hygroscopic) और हाइड्रोफिलिक (hydrophilic) होते हैं।

ऑस्मोटिक प्राइमिंग और कुछ नहीं बल्कि बीजों को बहुत धीरे-धीरे पानी सोखने (imbibe) के लिए प्रेरित करना है। प्रयुक्त ऑस्मोटिक समाधान (Osmotic solutions) PEG (पॉली एथिलीन ग्लाइकोल) हैं। मैनिटोल (Mannitol) अत्यधिक विषैला होता है। PEG अक्रिय (inert) है और बीज में पानी को बहुत धीरे-धीरे बढ़ाएगा। ऑस्मोटिक प्राइमिंग के माध्यम से प्रीकंडीशनिंग (preconditioning) करके, बीजों को ऊर्जावान (invigourated) किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप समान (uniform), शीघ्र और उच्च क्षेत्र उद्भव (field emergence) और उच्च अंकुर शक्ति (seedling vigour) होती है।

vii) द्रव ड्रिलिंग (Fluid drilling)

यह विशेष रूप से अंकुरित बीजों की यांत्रिक बुवाई (mechanical sowing) के लिए विकसित एक तकनीक है। बीजों को ग्वार जेल (guar gel) नामक एक जेली सामग्री (jelly material) के साथ लेपित किया जाता है। यह बुवाई के दौरान अंकुरित बीजों को नुकसान से बचाने के लिए बफर क्रिया (buffer action) करने के लिए है।

viii) जीवनक्षम बीजों का पृथक्करण (Separation of viable seeds)

यह विशेष रूप से मूंगफली (groundnut) के लिए एक नई अवधारणा (new concept) है। वांछित बीज अंकुरण (desired seed germination) और पौधों की आबादी (plant population) प्राप्त करने के लिए यह एक अच्छी विधि है। मूंगफली के मामले में वास्तविक जनसंख्या आवश्यकता (actual population requirement) 30 पौधे / m2 है। मूंगफली में वास्तविक बीज गुणन दर (actual seed multiplication rate) 1:8 है। लगभग 30-40% मृत बीज (dead seeds) होते हैं और यदि ऐसे मृत बीजों को समाप्त कर दिया जाता है, तो हम खेत में आवश्यक पौधों की आबादी को बनाए रखने में सक्षम होंगे। यह इस तकनीक को विकसित करने का आधार है।

यह 2 तरीकों से किया जा सकता है:

  1. मूलांकुर उद्भव (radicle emergence) के आधार पर मैन्युअल पृथक्करण (Manual separation) (मूंगफली)
  2. IDS (इन्क्यूबेशन - सुखाने और पृथक्करण - Incubation - Drying and Separation) विधि।

B. भंडारण पूर्व उपचार (Pre storage treatments)

कटाई-ताजे बीज (harvest-fresh seed) के भंडारण पूर्व उपचार (Prestorage treatments) मुख्य रूप से भंडारण के दौरान बिगड़ने वाली जीर्णता (deteriorate senescence) से सुरक्षा के लिए होते हैं। बीज भंडारण जो फिर से कीट और रोगज़नक़ हमले से खतरे में है, उसे निर्धारित पूर्व-भंडारण बीज उपचार (prescribed prestorage seed treatments) द्वारा भी नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. हलोजनन (Halogenation)
  2. एंटीऑक्सीडेंट उपचार (Antioxidant treatment)
  3. बीज स्वच्छता (Seed sanitation)

C. मध्य भंडारण उपचार (Mid storage treatments)

भंडारण में बीज जीर्णता (senescence) के दौरान कोशिका झिल्ली (cell membranes) में नुकसान जमा करते हैं। मध्य भंडारण बीज उपचार (Mid storage seed treatments) उम्र प्रेरित नुकसान (age induced damages) को कम करने और बीज की शक्ति (seed vigour) को कुछ हद तक बहाल करने में सक्षम हैं, इसके अलावा, संग्रहीत बीजों की बीज जीवनक्षमता (seed viability) और उत्पादकता (productivity) में भी सुधार होता है।

i) जलयोजन – निर्जलीकरण (Hydration – Dehydration)

यह कम और मध्यम ओज (medium vigour) वाले बीजों को पानी में या बिना रसायनों (chemicals) के साथ आमतौर पर छोटी अवधि (short durations) के लिए भिगोने की प्रक्रिया है ताकि बीज की नमी (seed moisture content) को 25-30% तक बढ़ाया जा सके और बीजों को सूखे भंडारण (dry storage) के लिए सुरक्षित सीमा तक वापस सुखाया जा सके।

जलयोजन – निर्जलीकरण उपचार (The hydration – dehydration treatments):

  1. केवल संग्रहीत बीजों (stored seeds) को दिया जाना चाहिए।
  2. कम और मध्यम ओज वाले गैर-फलीदार बीजों (non-leguminous seeds) में प्रभावी है।
  3. नमी संतुलन (moisture equilibration) और नम रेत कंडीशनिंग उपचार जिनमें बीज द्वारा धीमी और प्रगतिशील तरीके (slow and progressive manner) से नमी ग्रहण की जाती है, अपेक्षाकृत उच्च-ओज वाले बीजों (high-vigour seeds) और दालों और फलीदार सब्जी फसलों (leguminous vegetable crops) के बीजों के लिए अनुशंसित हैं।
  4. फलीदार बीजों (leguminous seeds) को सीधे भिगोने से बचना चाहिए।
  5. उस बीज को अंकुरण योग्य (germinable) नहीं बनाएगा, जो पहले ही जीवनक्षमता (viability) खो चुका है।

H-D उपचार के प्रकार (Types of H-D treatments)

गीले उपचार (wet treatments) में भिगोना-सुखाना (soaking-drying), डुबोना-सुखाना (dipping-drying), छिड़काव-सुखाना (spraying-drying), चरणबद्ध जलयोजन-सुखाना (stepwise hydration-drying), नमी संतुलन-सुखाना (moisture equilibration-drying), नमी संतुलन भिगोना-सुखाना (moisture equilibration soaking-drying), नम और कंडीशनिंग-सुखाना (moist and conditioning-drying) आदि शामिल हैं। उपचार का चुनाव बीज की विशेषताओं (characteristics of seed) और बीजों की प्रारंभिक ओज स्थिति (initial vigour status) पर निर्भर करता है।

भिगोना – सुखाना (Soaking – Drying (S-D)):
संग्रहीत बीज को पानी या रसायनों के घोल में डुबाने (cover) के लिए पर्याप्त मात्रा में भिगोया जाता है और सामग्री के आधार पर 2-6 घंटे के लिए कमरे के तापमान (room temperature) पर कभी-कभी हिलाते (occasional stirring) हुए रखा जाता है। भिगोए हुए बीज को बाहर निकाला जाता है और कुछ समय के लिए छाया में सतह को सुखाने (surface drying) के बाद, मूल नमी की मात्रा में वापस सुखाया जाता है। रसायनों के तनु घोल (Dilute solution) जैसे सोडियम या पोटेशियम फॉस्फेट (sodium or potassium phosphate - डि और मोनो बेसिक), सोडियम क्लोराइड (sodium chloride), p-हाइड्रॉक्सी बेंजोइक एसिड (p-hydroxy benzoic acid), p-अमीनो बेंजोइक एसिड (p-amino benzoic acid), ऑक्सालिक एसिड (oxalic acid), पोटेशियम आयोडाइड (potassium Iodide) आदि का भी 10-4 से 10-3 M सांद्रता (concentrations) पर उपयोग किया जा सकता है। भिगोने वाले पानी (soak water) में कवकनाशी और कीटनाशक योगों (insecticidal formulations) को भी शामिल किया जा सकता है।

डुबोना – सुखाना (Dipping – Drying (D-D)):
बीजों को केवल 2-5 मिनट के लिए पानी या उपर्युक्त रसायनों (aforesaid chemicals) के घोल में डुबोया जाता है और गीले बीज को तुरंत निकाल लिया जाता है और सामग्री के आधार पर सतह के पानी (surface water) के अवशोषण (absorption) के लिए 2-6 घंटे के लिए ढककर (covered) रखा जाता है, इसके बाद S-D में वापस सुखाया जाता है। यह उपचार चावल, गेहूं, जूट, गर्मी और सर्दियों की सब्जियों (summer and winter vegetables) के अधिकांश उच्च और उच्च-मध्यम ओज वाले बीजों (high and high-medium vigour seeds) में प्रभावी है।

छिड़काव – सुखाना (Spraying – Drying):
बीजों को एक पतली परत (thin layer) में फैलाया जाता है और फिर दो समान किश्तों (two equal installments) में (पहले छिड़काव के बाद बीज की परत को पलट कर) उन पर पानी की मात्रा (बीज के वजन का लगभग 1/5 से 1/4) का छिड़काव किया जाता है और फिर सुखाने (drying back) से पहले 2-4 घंटे के लिए पॉलीथीन शीट द्वारा कवर करके रखा जाता है। यह उपचार अपनी प्रभावकारिता (efficacy) और उपयुक्तता (suitability) में D-D के समान है।

नमी संतुलन – सुखाना (Moisture equilibration – drying (ME – D)):
यहाँ, बीजों को एक बंद नमी संतृप्त कक्ष (closed moisture saturated chamber) में एक ऊंचे मंच (raised platform) पर रखी ट्रे (trays) पर पतली परतों में रखा जाता है, जो आंतरिक रूप से नम ब्लोटर (moist blotters) के साथ पंक्तिबद्ध (lined) होता है, जो कमरे के तापमान पर लगभग 100% RH देता है। 24-48 घंटों के बाद, सामग्री और परिवेश के तापमान (ambient temperature) के आधार पर, बीज को सामान्य तरीके से सुखाया जाता है। भिगोने की चोट के प्रति संवेदनशील बीजों के लिए यह उपचार, जो नमी की मात्रा (moisture content) में धीमी और प्रगतिशील (slow and progressive) वृद्धि देता है, बहुत प्रभावी है। ME-D, हालांकि, बड़े पैमाने पर अभ्यास (practice) करना मुश्किल है और कम ओज वाले गैर-फलीदार बीजों (low vigour non leguminous seeds) के लिए इसकी वकालत (advocated) नहीं की जाती है क्योंकि उपचार के संभावित उम्र बढ़ने के प्रभाव (aging effect) के कारण विशेष रूप से जब लंबे समय (prolonged periods) तक दिया जाता है।

नम रेत कंडीशनिंग – सुखाना (Moist sand conditioning – drying (MSC-D)):
यह उपचार नमी संतुलन उपचार (moisture equilibration treatment) के समान है लेकिन अभ्यास करना आसान है। धीमी और प्रगतिशील नमी ग्रहण (slow and progressive moisture uptake) के लिए, बीज को पूरी तरह से पहले से नम की गई रेत (pre-moistened sand) के साथ मिलाया जाता है, जिसमें बीज की तुलना में 3 गुना वायु शुष्क रेत (air dry sand) का उपयोग किया जाता है। पहले से धुली और सूखी महीन दाने वाली इमारत ग्रेड रेत (fine grain building grade sand) में पानी या रसायनों के घोल की आवश्यक मात्रा जोड़कर रेत की नमी को 5-10 तक समायोजित (adjusted) किया जाता है। पानी के अतिरिक्त (addition) को इस तरह समायोजित किया जाना चाहिए कि अंकुरण प्रक्रिया शुरू किए बिना आवश्यक जलयोजन प्रभाव (hydration effect) प्राप्त हो सके। सूखे बीज को पहले से नम की गई रेत के साथ मिलाने के बाद, मिश्रण को सामग्री और रेत की नमी (sand moisture content) के आधार पर 16-36 घंटे के लिए कमरे के तापमान पर रखा जाता है। बीज रेत से नमी सोख लेता है और ऊष्मायन (incubation) के बाद हाइड्रेटेड बीज (hydrated seed) को छान कर (sieving) रेत से अलग किया जाता है और मूल वजन (original weight) में वापस सुखाया जाता है।

कार्रवाई का तरीका (Mode of Action): जलयोजन (hydration) का मुख्य उद्देश्य शुष्क भंडारण के लिए सुरक्षित सीमा तक वापस सुखाने से पहले बीज की नमी को 25-30% (गीला वजन आधार - wet weight basis) तक बढ़ाना है। जलयोजन - निर्जलीकरण (hydration - dehydration) उपचार मुक्त कण प्रतिक्रियाओं (free radical reactions) और लिपोप्रोटीन कोशिका झिल्ली (lipoprotein cell membranes) के परिणामस्वरूप पेरोक्सीडेटिव क्षति (peroxidative damage) को नियंत्रित करके ओज (vigour) में सुधार कर सकता है।

बीज उपचार उपकरण (SEED TREATING EQUIPMENT)

वाणिज्यिक बीज उपचारक (Commercial seed treaters) बीज के दिए गए वजन में कीटनाशकों की सटीक मापी गई मात्रा (accurately measured quantities) को लागू करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। मूल रूप से, बाजार में तीन प्रकार के वाणिज्यिक बीज उपचारक हैं: धूल उपचारक (dust treaters), घोल उपचारक (slurry treaters), और प्रत्यक्ष उपचारक (direct treaters) - पैनोजेन और मिस्ट-ओ-मैटिक (Mist-O-Matic) उपचारक प्रत्यक्ष उपचारक के उदाहरण हैं।

1. धूल उपचारक (Dust Treater - Gustafson XL Dry Powder Seed Treater)

बीज के प्रवाह को नियंत्रित करना (Controlling the Flow of Seed):
बीज की मात्रा जो तौलने वाले पैन (weigh pan) (जो उपचारक के शीर्ष पर फ़ीड हॉपर (feed hopper) के ठीक नीचे है) में बहती है, उसे हॉपर के किनारे पर हैंड व्हील (hand wheel) के माध्यम से फ़ीड हॉपर के गेट को खोलने या बंद करने से नियंत्रित किया जाता है। हॉपर पर पैमाना (scale) दिखाता है कि गेट कितने खुले हैं (इंच में)। गेट्स को किसी भी संख्या में इंच तक खुला होना चाहिए, ताकि तौलने वाले पैन को आवश्यक पाउंड प्रति डंप (pounds per dump) से भरा जा सके, क्योंकि यह किसी भी दिशा में झुकता (tilts) है। डंप प्रति पाउंड की संख्या को काउंटरवेट आर्म (counterweight arm) पर काउंटरवेट (counterweight) को ऊपर या नीचे सही ढंग से सेट करके समायोजित किया जाता है।

पाउडर का अनुप्रयोग (Powder Application):
यह सुनिश्चित करने के लिए कि बीज प्रवाह (seed flow) में पाउडर की सही मात्रा लागू की जा रही है, एक प्रारंभिक परीक्षण (preliminary test) किया जाना चाहिए जिसमें बीजों की दी गई संख्या (जैसे 100 पाउंड) फीडर के माध्यम से चलाई जाती है।

इस रन के दौरान, वाइब्रेटर (vibrator) से निकलने वाले पाउडर को पकड़ने के लिए फीडर के साथ दिए गए मापने वाले कप (measuring cup) का उपयोग किया जाना चाहिए। बीज की दी गई मात्रा को चलाने के बाद, यह निर्धारित करने के लिए पाउडर का वजन किया जाना चाहिए कि उस बीज की मात्रा पर कितना लागू किया जा रहा है। वाइब्रेटर की गति (vibrator speed) को तदनुसार समायोजित किया जा सकता है। फिर एक दूसरा या अधिक परीक्षण तब तक चलाया जाना चाहिए जब तक कि सही कवरेज (correct coverage) के लिए वाइब्रेटर गति की उचित सेटिंग निर्धारित न हो जाए।

अनुमानित सेटिंग (Approximate Setting)

डंप की संख्या (No. Dumps) पाउडर स्केल खोलना (Powder Scale Opening) सिंट्रॉन सेटिंग (Syntron Setting) उत्पादित औंस/100 पाउंड (Oz. Produced/100 lbs.)
25 1/2 60 2
25 3/4 60 5
25 3/4 70 6
25 3/4 80 7
25 1 60 10

काउंटरवेट आर्म पर नंबर 4 प्रति डंप पांच पाउंड (five pounds per dump) देता है।

2. घोल बीज उपचारक (Slurry Seed Treater)

घोल उपचार (slurry treatment) सिद्धांत में पानी में वेटेबल पाउडर उपचार सामग्री (wettable powder treatment material) का निलंबन (suspension) शामिल है। घोल के रूप में लागू उपचार सामग्री को घोल कप (slurry cup) और बीज डंप पैन (seed dump pan) से बने एक सरल तंत्र (simple mechanism) के माध्यम से सटीक रूप से मापा (metered) जाता है। कप बीज के प्रत्येक डंप के साथ एक मिश्रण कक्ष (mixing chamber) में घोल की एक दी गई मात्रा पेश करता है जहां उन्हें मिलाया (blended) जाता है।

जबकि घोल उपचारक का संचालन अपेक्षाकृत सरल है, विभिन्न संचालन प्रक्रियाओं (operation procedures) को अच्छी तरह से समझा जाना चाहिए।

  1. मीटरिंग सिद्धांत (metering principle) प्रत्यक्ष (direct), रेडी-मिक्स (ready-mix) या पूरी तरह से स्वचालित उपचारक (fully automatic treaters) में समान है- यानी, बीज के दिए गए वजन के लिए घोल की एक निश्चित मात्रा की शुरूआत।
  2. दिए गए डंप वजन (dump weight) को प्राप्त करने के लिए, घोल उपचारक एक बीज गेट (seed gate) से लैस होते हैं जो डंप पैन (dump pan) में बीज के प्रवाह को नियंत्रित करता है। उचित बीज गेट सेटिंग के साथ, एक दिए गए (कैन) के लिए एक निरंतर डंप वजन (constant dump weight) प्राप्त किया जा सकता है।
  3. लागू उपचार सामग्री की मात्रा को घोल की एकाग्रता (slurry concentration) और घोल कप या बाल्टी (bucket) के आकार द्वारा समायोजित किया जाता है। जैसे-जैसे डंप पैन भरता है, एक बिंदु आता है जहां यह काउंटर वजन (counter weight) को संतुलित (over-balances) करता है और मिश्रण कक्ष में डंप करता है। यह बीज के प्रवाह को प्राप्त करने के लिए वैकल्पिक वजन पैन (alternate weighing pan) को स्थिति में लाता है और मिश्रण कक्ष में एक कप घोल जोड़ने के लिए एक तंत्र को सक्रिय (activates) करता है। इस प्रकार, बीज के प्रत्येक डंप के साथ एक कप घोल जोड़ा जाता है।
  4. मिश्रण कक्ष एक बरमा प्रकार (auger type) आंदोलनकारी (agitator) के साथ सुसज्जित है जो बीज को मिलाता है और कक्ष के बैगिंग छोर (bagging end) तक ले जाता है। बरमा की गति (speed of the auger) महत्वपूर्ण है, क्योंकि धीमी गति (slow speeds) पर अधिक समान वितरण (uniform distribution) प्राप्त होता है।

घोल टैंक (Slurry tanks) की क्षमता 15 से 35 गैलन होती है, जो उपचारक के आकार (size of the treater) पर निर्भर करती है। वे आंदोलनकारियों (agitators) से लैस होते हैं जो टैंक में घोल को मिलाते हैं और संचालन के दौरान इसे निलंबित (suspended) रखते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि उपचार से पहले पाउडर को पानी में अच्छी तरह से निलंबित (thoroughly suspended) कर दिया जाए। यदि उपचारक किसी भी अवधि के लिए निष्क्रिय (idle) रहा है, तो घोल कप के तल में तलछट (sediment) को साफ किया जाना चाहिए।

उचित आकार के घोल कप का उपयोग किया जाना चाहिए। अधिकांश मशीनों में अब 15 cc, 23 cc, और 46 cc मात्रा के लिए बंदरगाहों (ports) और रबर प्लग (rubber plugs) वाले कप हैं। कुछ उपयोगकर्ता एक सहायक टैंक (auxiliary tank) में घोल मिलाना पसंद करते हैं और फिर आवश्यकतानुसार घोल कक्ष (slurry chamber) में स्थानांतरित (transfer) करते हैं.

प्रत्यक्ष उपचारक

प्रत्यक्ष उपचारक सबसे हालिया विकास (recent development) हैं और इसमें पैनोजेन और मिस्ट-ओ-मैटिक उपचारक शामिल हैं। ये दोनों शुरू में बिना पतले किए तरल उपचार (undiluted liquid treatment) को लागू करने के लिए डिज़ाइन किए गए थे। गेहूं के प्रति 10 पाउंड सामग्री के 23 cc लगाने के बजाय, जैसा कि घोल उपचारक में होता है, वे "गेहूं" के प्रति बुशल (bushel) में 14 से 21 cc (1/2 से 3/4 औंस) लगाते हैं। सामग्री की यह छोटी मात्रा केवल तरल सामग्री के साथ उपयुक्त है जो कुछ हद तक वाष्पशील होती है और प्रभावी कार्रवाई (effective action) के लिए पूर्ण, समान कवरेज (uniform coverage) की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रत्यक्ष उपचारक के लिए बाद के संशोधनों (modifications) में दोहरे टैंक (dual tanks) शामिल हैं जो एक साथ एक कवकनाशी (fungicide) और एक कीटनाशक (insecticide) को जोड़ने की अनुमति देते हैं, और घोल (slurries) के अनुप्रयोग के लिए अनुकूलन (adaptations) करते हैं। दोनों प्रकार के प्रत्यक्ष उपचारक में उपयोग किया जाने वाला मीटरिंग उपकरण (metering device) घोल उपचारक के समान है, क्योंकि यह एक उपचार कप (treatment cup) और बीज डंप (seed dump) के तुल्यकालन (synchronization) के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। अन्यथा, दोनों प्रत्यक्ष उपचारक घोल उपचारक से और एक-दूसरे से निश्चित रूप से भिन्न हैं। बीज डंप के वजन को समायोजित करने के लिए इन दोनों प्रत्यक्ष उपचारकों में एक समायोज्य डंप पैन काउंटर वजन (adjustable dump pan counter weight) होता है। यह घोल उपचारक के साथ व्यावहारिक (practical) नहीं है।

3. पैनोजेन बीज उपचारक (Panogen Seed treater)

पैनोजेन उपचारक (Panogen treater) का संचालन अपेक्षाकृत सरल है। एक छोटा उपचार कप, बीज डंप पैन से सीधे रॉकर आर्म (rocker arm) से काम करता है और एक छोटे जलाशय (small reservoir) से बाहर, बीज पैन के प्रत्येक डंप के साथ उपचार का एक कप मापता (meters) है। कवकनाशी एक ट्यूब के माध्यम से घूमने वाले ड्रम (revolving drum) बीज मिश्रण कक्ष (seed mixing chamber) के सिर तक बहता है। यह डंपिंग पैन से बीज के साथ बहता है और घूमने वाले ड्रम से गुजरने वाले बीज की रगड़ क्रिया (rubbing action) द्वारा बीज पर वितरित (distributed) किया जाता है।

वांछित उपचार दर (desired treating rate) उपचार कप के आकार और बीज डंप वजन (seed dump weight) को समायोजित करके प्राप्त की जाती है। उपचार कप के आकार को औंस में उपचार दर द्वारा निर्दिष्ट (designated) किया जाता है, वास्तविक आकार (actual size) से नहीं- उदाहरण के लिए, 3/4 औंस कप प्रति बुशल में 3/4 औंस (22.5 cc) उपचार लागू करता है, जिसमें प्रति बुशल छह डंप होते हैं। इस कप का वास्तविक आकार लगभग 3.75cc है।

4. मिस्ट-ओ-मैटिक बीज उपचारक (Mist-O-Matic Seed Treater):

"मिस्ट-ओ-मैटिक" उपचारक बीज पर सीधे धुंध (mist) के रूप में उपचार लागू करता है। उपचार कप और बीज डंप का मीटरिंग ऑपरेशन (metering operation) "पैनोजेन" उपचारक के समान है। कप के आकार उनके द्वारा वास्तव में वितरित किए जाने वाले cc's की संख्या द्वारा निर्दिष्ट किए जाते हैं- उदाहरण के लिए, 2½, 5, 10, 20 और 40। उपचारक एक बड़े उपचार टैंक (treatment tank), एक पंप (pump) और एक वापसी (return) से लैस है जो छोटे जलाशय में स्तर बनाए रखता है जिससे उपचार कप खिलाए जाते हैं।

मीटरिंग के बाद, उपचार सामग्री बीज-फैलाने वाले शंकु (seed-spreading cone) के नीचे लगे तेजी से घूमने वाले (rapidly revolving), बांसुरीदार डिस्क (fluted disc) में प्रवाहित होती है। डिस्क उपचार समाधान (treatment solution) की बूंदों (droplets) को एक महीन धुंध (fine mist) में तोड़ देती है और बीज को उपचार कक्ष (treating chamber) के माध्यम से शंकु के ऊपर गिरने के लिए बाहर की ओर स्प्रे (sprays) करती है। बीज डंप के ठीक नीचे दो समायोज्य मंदक (adjustable retarders) होते हैं जो बीज डंप के बीच शंकु (cone) पर बीज का निरंतर प्रवाह (continuous flow) देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि घूमने वाली डिस्क (revolving disc) से सामग्री की निरंतर धुंध (continuous misting) होती है। वांछित उपचार दर उपचार कप के आकार (treatment cup size) के चयन और बीज डंप वजन के उचित समायोजन (proper adjustment) के माध्यम से प्राप्त की जाती है।

🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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