अनाज (Cereals)

चावल (Rice)

वैज्ञानिक नाम: Oryza sativa (\(2n=24\))

चावल सबसे पुरानी खेती की जाने वाली फसलों में से एक है। चावल की दो खेती की जाने वाली प्रजातियां (cultivated species) हैं:

खेती की जाने वाली एशियाई चावल (cultivated Asian rice) की तीन नस्लें (races) हैं:

खेती वाले चावल की उत्पत्ति (Origin of cultivated rice)

चावल की उत्पत्ति के संबंध में विचारों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है:

i. बहु-उत्पत्ति

यह कई प्रजातियों (several species) से उत्पन्न हुआ है। इस सिद्धांत के अनुसार, खेती किए जाने वाले चावल के दो रूप - एशियाई चावल (O. sativa) और अफ्रीकी चावल (O. glaberrima) अपने-अपने क्षेत्रों में कई प्रजातियों से स्वतंत्र रूप से विकसित (evolved independently) हुए हैं।

Common ancestor South & South East Asia Tropical Africa Perennial O.rufipogon O.longistaminata Annual O.nivara Weedy annual O.barthii O.spontanea O.sativa O.Staffii O.glaberrima indica japonica javanica

ii. एकल-उत्पत्ति

इस सिद्धांत के अनुसार एशियाई चावल और अफ्रीकी चावल दोनों एक ही समान मूल पौधे (common parent) (O. perennis) से उत्पन्न हुए हैं। यह विचार सबसे अधिक स्वीकृत है क्योंकि एशियाई चावल और अफ्रीकी चावल ग्लूम प्यूबसेंस (glume pubescence), लिग्यूल का आकार (ligule size) और पेरिकार्प के रंग (colour of pericarp - जो अफ्रीकी चावल में लाल होता है) को छोड़कर एक जैसे हैं।

O.perennis ├── O.glaberrima └── O.sativa

बहु-उत्पत्ति सिद्धांत के अनुसार वर्तमान समय की चावल की किस्में (varieties) कई प्रजातियों से उत्पन्न हुई हैं। वहीं एकल-उत्पत्ति सिद्धांत के अनुसार एक ही प्रजाति ने खेती की जाने वाली चावल की सभी किस्मों को जन्म दिया है, जैसे:

ज्यादातर आधुनिक चावल वैज्ञानिक (rice workers) मानते हैं कि खेती किए जाने वाले चावल की उत्पत्ति एकल (monophyletic) है। दक्षिण-पूर्व उष्णकटिबंधीय एशिया (South East tropical Asia) में Oryza perennis से एशियाई चावल और अफ्रीका में नाइजर नदी (Niger River) की ऊपरी घाटी में अफ्रीकी चावल की उत्पत्ति हुई।

ओरिज़ा (Oryza) वंश में प्रजातियाँ (Species in the genus oryza)

नवीनतम दृष्टिकोण के अनुसार ओरिज़ा (oryza) वंश (genus) में 20 जंगली प्रजातियाँ (wild species) शामिल हैं। इनमें से दो खेती की जाने वाली डिप्लॉयड (cultivated diploids) हैं, जो O. sativa और O. glaberrima हैं और बाकी जंगली प्रजातियाँ हैं जिनमें डिप्लॉयड (diploid) और टेट्राप्लॉयड (tetraploid) दोनों रूप शामिल हैं।

वानस्पतिक नाम (Botanical name) गुणसूत्र संख्या (Chromosome No.) जीनोम (Genome) उत्पत्ति (Origin)
O. sativa24AAएशिया (Asia)
O. nivara24AAएशिया
O. meridionalis24-ऑस्ट्रेलिया (Australia)
O. longistaminata24AAअफ्रीका (Africa)
O. rufipogan24AAएशिया
O. glumaepatula24-अमेरिका (America)
O. grandiglumis48CCDDअमेरिका
O. glaberrima24AAअफ्रीका
O. barthii24AAअफ्रीका
O. australiensis24EEऑस्ट्रेलिया
O. latifolia48CCDDअमेरिका
O. alata48CCDDअमेरिका
O. eichingeri24 / 48CC / BBCCअफ्रीका
O. minuta48BBCCएशिया
O. punctata48BBCCएशिया
O. officinalis24CCएशिया
O. granulata24-एशिया
O. meyeriane24-एशिया
O. ridleyi48-एशिया (Asian)
O. longiglumis48-न्यू गिनी (New Guinea)
O. brachantha24FFअफ्रीका
O. schlechter--न्यू गिनी

चावल की संबंधित प्रजातियाँ और चावल सुधार में उनके योगदान वाले लक्षण (Related species of rice and their contributing characters in rice improvement)

प्रजाति (Species) जीनोम उपयोगी लक्षण (Useful traits)
O. alataCCDDउच्च बायोमास उत्पादन (High biomass production)
O. australiensisEEसूखा सहिष्णुता (Drought tolerance), BPH प्रतिरोध (resistance)
O. barthiiAAसूखा बचाव (Drought avoidance), BLB प्रतिरोध
O. brachyanthaFFपीला तना छेदक (Yellow stem borer) और पत्ती लपेटक (leaf folder) प्रतिरोध
O. eichengeriCCBPH, GLH, WBPH प्रतिरोध
O. grandiglumisCCDDउच्च बायोमास उत्पादन
O. granulataअज्ञात (unknown)छाया सहिष्णुता (Shade tolerance), एरोबिक मिट्टी (aerobic soils) के लिए अनुकूलन
O. latifoliaCCDDउच्च बायोमास उत्पादन
O. longistaminataAAसूखा सहिष्णुता
O. meridionalisAAबढ़ाव की क्षमता (Elongation ability)
O. meyerianaअज्ञातछाया सहिष्णुता, एरोबिक मिट्टी के लिए अनुकूलन
O. minutaBBCCBPH, GLH, WBPH, BLB और ब्लास्ट प्रतिरोध (blast resistance)
O. nivaraAAग्रैसी स्टंट वायरस प्रतिरोध (Grassy stunt virus resistance)
O. officinalisCC, BB, CCBPH, GLH, WBPH प्रतिरोध, BPH प्रतिरोध
O. punctataBB, BBCCBPH प्रतिरोध
O. ridleyiअज्ञातछाया सहिष्णुता, तना छेदक (stemborer), ब्लास्ट और BLB प्रतिरोध
O. rufipogonAACMS का स्रोत (Source of CMS)

जंगली प्रजातियाँ: Oryza वंश में बीस मान्य प्रजातियाँ हैं, जिनमें से दो की खेती की जाती है (cultivated):

शेष 18 प्रजातियों में से नौ डिप्लॉयड हैं।

प्रजनन कार्यक्रम (breeding programme) में उपयोग की जाने वाली कुछ जंगली प्रजातियाँ हैं:

प्रजनन के उद्देश्य (BREEDING OBJECTIVES)

  1. उच्च उपज क्षमता (High yield potential)
  2. उपज की अनुकूलनशीलता और स्थिरता (Adaptability and stability of yield)
  3. जल्दी पकना (Early maturity)
  4. गिरने और झड़ने का प्रतिरोध (Resistance to lodging and shattering)
  5. ठंडे तापमान का प्रतिरोध (Resistant to cold temperature)
  6. लवणता और बेसीयता का प्रतिरोध (Resistant to salinity and alkalinity)
  7. रोगों का प्रतिरोध (Resistant to diseases)
  8. कीटों का प्रतिरोध (Resistant to pests)
  9. बेहतर अनाज की गुणवत्ता (Improved grain quality)
  10. वामनपन के जीन (dwarfing gene) के वैकल्पिक स्रोत के लिए प्रजनन
  11. सीधी बुवाई (direct seeding) के अनुकूल किस्मों का प्रजनन
  12. सूखी भूमि (dry lands) के लिए किस्मों का प्रजनन
  13. गहरे पानी की स्थिति (deep water conditions) के लिए किस्मों का प्रजनन
  14. निर्यात के लिए किस्मों का प्रजनन - सुगंधित चावल (scented rice)
  15. जंगली चावल (wild rice) को नियंत्रित करने के लिए किस्मों का प्रजनन
  16. किसी अन्य स्थानीय स्थिति (local conditions) के अनुकूल किस्मों का प्रजनन

1. उच्च उपज क्षमता

चावल की उपज एक जटिल लक्षण (complex character) है। यह कई रूपात्मक लक्षणों (morphological traits) और शारीरिक प्रक्रिया (physiological process) से प्रभावित होती है। पर्यावरण की परस्पर क्रिया (interaction of environment) के साथ मिलकर ये उपज क्षमता तय करते हैं। चावल की किस्म में उन पौधों की विशेषताओं (plant characteristics) के लिए जीनों के एक वांछनीय संयोजन (desirable combination) को इकट्ठा करना आवश्यक है, जो चावल के पौधे को उच्च उपज देने में सक्षम बनाएगा।

उच्च उपज प्राप्त करने के लिए हमारे पास एक आदर्श पौधे का प्रकार (ideal plant type) होना चाहिए। आदर्श पौधे का प्रकार है:

2. उपज की अनुकूलनशीलता और स्थिरता

विभिन्न स्थानों पर व्यापक अनुकूलनशीलता (Wide adaptability) वांछित है क्योंकि चावल विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों (agroclimatic zones) में उगाया जाता है जो भिन्न-भिन्न होते हैं। IRRI की किस्मों में व्यापक अनुकूलनशीलता होती है। व्यापक अनुकूलनशीलता से जुड़ी विशेषताएँ हैं:

मौसमों में स्थिरता (Across seasons) उस निरंतरता को संदर्भित करती है जिसके साथ कोई किस्म ऐसे क्षेत्र में संतोषजनक उपज देती है जहां वर्ष के हर मौसम में जैविक (biotic) और अजैविक (abiotic) स्थितियां भिन्न हो सकती हैं। जैविक और अजैविक तनाव (stress) में स्थानीय उतार-चढ़ाव (local fluctuations) के प्रति सहिष्णुता (Tolerance) महत्वपूर्ण है.

3. जल्दी पकना

बहु-फसल (multiple cropping) लेने के लिए यह लक्षण वांछित है। यह अंतिम समय के सूखे (terminal drought) से उबरने और कीट व बीमारियों से बचने में भी सहायक है।

चावल में जल्दी पकने की इष्टतम अवधि (optimum early maturity) लगभग 105 दिन होगी। जब अवधि (duration) और भी कम हो जाती है, तो उपज भी उसी अनुरूप कम हो जाती है।

CR 666, आकाशी (Akashi), Co 41 ऐसी किस्में हैं जिनकी अवधि 100 दिन से कम है।

4. गिरने और झड़ने का प्रतिरोध

यह भी एक जटिल लक्षण है। ना गिरने वाली लाइनों (Non lodging lines) में होगा:

अनाज का झड़ना (Grain shattering) भी एक जटिल लक्षण है। जंगली चावल (Wild rices) में यह लक्षण होता है। इसलिए जंगली चावल को माता-पिता (parents) के रूप में उपयोग करते समय इसे उस वांछनीय लक्षण (desirable trait) के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए जिसे प्रेषित (transmitted) किया जाना है।

5. ठंडे तापमान का प्रतिरोध (Resistance to cold temperature)

नीलगिरि के कुंबुम घाटी (cumbum valley) और गुडालूर (Gudalur) तालुक के लिए अधिक उपयुक्त। जैपोनिका चावल (Japonica rice) की किस्में अधिक शीत-सहिष्णु (cold tolerant) होती हैं।

MDU 2 शीत-सहिष्णु है (Co 25 x IR 8)।

6. लवणता और बेसीयता का प्रतिरोध

तमिलनाडु के त्रिची (Trichy) और धर्मपुरी (Dharmapuri) जिलों के कुछ हिस्सों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।

पुरानी किस्में: SR 26 B, Gettu, Dasal.

नवीनतम किस्में: Co 43 (Dasal x IR 20), ADT 35, TRY 1, TRY 2

7. रोगों का प्रतिरोध

ब्लास्ट (Blast), हेलमिन्थोस्पोरियम (Helminthosporium), बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (bacterial leaf blight - BLB), टुंग्रो वायरस (Tungro virus) कुछ महत्वपूर्ण बीमारियां हैं। ब्लास्ट प्रतिरोधी किस्में (Blast resistant varieties):

ग्रैसी स्टंट (Grassy stunt): O. nivara.

ब्लास्ट और BLB प्रतिरोधी: O. minuta टेट्राप्लॉयड।

Co 45 - RTV, ब्लास्ट और BLB के प्रति प्रतिरोधी।

PY 3 - RTV, BLB प्रतिरोधी।

8. कीटों का प्रतिरोध

ब्राउन प्लांट हॉपर (Brown plant hopper - BPH), तना छेदक (Stem borer), राइस गॉल मिज (Rice gall midge) महत्वपूर्ण कीट हैं।

9. बेहतर अनाज की गुणवत्ता

a) अनाज का आकार, साइज़ और बनावट (Grain shape, size and texture)

चावल की किस्मों (cultivars) को अनाज के आकार, साइज़ और बनावट के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। एफएओ (FAO) के अनुसार व्यापार ग्रेड (trade grades) हैं:

लंबाई (Length):

आकार (Shape):
लंबाई / चौड़ाई अनुपात (Length / Breath ratio - L/B ratio) के आधार पर।

बनावट (Texture):
दो मुख्य प्रकार पहचाने जाते हैं:

  1. पारभासी (translucent) काचनुमा फ्रैक्चर (vitreous fracture) के साथ कठोर स्टार्चयुक्त अनाज (Hard starchy grain)।
  2. अपारदर्शी फ्रैक्चर (opaque fracture) के साथ नरम डेक्सट्रिनस अनाज (Soft dextrinous grain)। इसे चिपचिपा चावल (glutinous rice) कहते हैं।

कठोर स्टार्चयुक्त (Hard starchy) प्रकारों का मुख्य रूप से सेवन किया जाता है। वे अपनी पारभासकता (translucency), कठोरता (hardiness) और स्टार्च सामग्री के आधार पर पेट के सफेद भाग (abdominal white) की उपस्थिति या अनुपस्थिति में भिन्न होते हैं। पकने पर वे सूखे और परतदार (dry and flaky) रहते हैं। नरम डेक्सट्रिनस अनाज पकने पर चिपचिपे हो जाते हैं और थक्के (clot) बन जाते हैं और आमतौर पर विशेष व्यंजनों (पुट्टू चावल - puttu rice) के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन प्रकारों को चॉपस्टिक (chop sticks) का उपयोग करने वाले लोगों द्वारा पसंद किया जाता है।

b) सुगंध और पकाने की गुणवत्ता (Aroma and Cooking quality)

कुछ किस्में पकाने पर सुगंध (aroma) देती हैं। बासमती (Basmati) सुगंधित चावल जैसी किस्मों में पके हुए चावल में बढ़ाव (elongation) भी होता है। सुगंध भ्रूणपोष (endosperm) में मौजूद कुछ रसायनों के कारण होती है। एक अल्कलॉइड PANDAMARILACTIONE खुशबू (fragrance) का कारण है। यह अल्कलॉइड पेंडनस (Pandanus) की पत्तियों में भी मौजूद होता है।

उदाहरण (E.g.): बासमती 370 (Basmati 370), जीरगा सांबा (Zeeraga Samba), ADT41, कालाबाथ (Kalabath), सीता भोगम (Seetha bogam)।

पकाने की गुणवत्ता (cooking quality) किस्म और अनाज के प्रकार के अनुसार भिन्न होती है। लंबे दाने वाली किस्में पकाने पर सूखी और परतदार रहती हैं, जबकि मध्यम और छोटे दाने वाली किस्में चिपचिपी (sticky) और चबाने योग्य (chewy) होती हैं। किसी विशेष किस्म की पसंद उपयोग के साथ भिन्न होती है। चावल की किस्मों का मूल्यांकन करने में पकाने के परीक्षण (cooking tests) निम्नलिखित के लिए आयोजित किए जाते हैं:

c) पोषण मूल्य (Nutritive value)

भूरे चावल (brown rice) में प्रोटीन लगभग 8% होता है जबकि पॉलिश किए गए चावल (polished rice) में यह लगभग 7% होता है। प्रोटीन सामग्री की वंशानुक्रम (Inheritance) जटिल (complex) है। यह पर्यावरण और नाइट्रोजन (nitrogen) के प्रयोग पर निर्भर करता है। जब प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है तो लाइसिन सामग्री (lysine content) कम हो जाएगी।

d) गुठली का रंग (Colour of kernel)

विशिष्ट गुठली के रंग (kernel colour) की प्राथमिकता क्षेत्र-दर-क्षेत्र भिन्न होती है। कन्याकुमारी (Kanyakumari) और केरल में लाल चावल (red rice) को प्राथमिकता दी जाती है। स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर किस्मों को विकसित किया जाना चाहिए।

TKM 9 - लाल चावल, (TKM 7 x IR 8)

e) मिलिंग उपज

बिना छिलके वाले चावल के दाने को रफ राइस (Rough rice) या धान (paddy) कहा जाता है। मिलर (miller) बाहरी भूसी की परत (outer bran layer) को छीलकर इसे भूरे चावल में बदल देता है। धान का मूल्य काफी हद तक इसकी मिलिंग गुणवत्ता (milling quality) पर निर्भर करता है जो हेड राइस (head rice) और कुल चावल (total rice) द्वारा निर्धारित किया जाता है जो धान से प्राप्त होता है।

10. वामनपन के जीन के वैकल्पिक स्रोत के लिए प्रजनन

वर्तमान समय की सभी किस्में वामनपन के जीन Dee - Gee - Woo - Gen के साथ प्रजनन का परिणाम हैं। समान स्रोत (same source) का उपयोग करने में खतरा है। यदि Dee - Gee - Woo - Gen किसी नए कीट या बीमारी के प्रति संवेदनशील (susceptible) हो जाता है, तो पूरा कार्यक्रम विफल (collapse) हो जाएगा। इसलिए वामनपन के जीन के वैकल्पिक स्रोतों (alternate sources) की तलाश करना आवश्यक है। पारंपरिक (conventional) और गैर-पारंपरिक (non-conventional) प्रजनन तकनीकों के माध्यम से वैकल्पिक स्रोत की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।

11. सीधे बोई गई (direct sown) परिस्थितियों के अनुकूल किस्मों का प्रजनन

यह फिर से एक स्थान-विशिष्ट समस्या (location specific problem) है। कावेरी डेल्टा क्षेत्र (cauvery delta region) में आजकल कावेरी का पानी मिलना अनिश्चित हो गया है। पानी की आवश्यकता को कम करने के लिए चावल की सीधी बुवाई (direct sowing) की सिफारिश की जाती है। सीधी बुवाई के लिए किस्में तेजी से बढ़ने वाली और खरपतवार (weed growth) को दबाने वाली होनी चाहिए।

12. सूखी भूमि (dry land) की स्थिति के अनुकूल किस्में

रामनाड (Ramnad) और चेंगलपेट (Chengalpet) के कुछ हिस्सों में चावल को सूखी भूमि की फसल (dryland crop) के रूप में उगाया जाता है। स्थानीय देसी किस्में (Local land races) जैसे कुरुविकलयान (kurivikalayan) और पुट्टू चावल (puttu rice) उगाई जाती हैं। इन जरूरतों के अनुरूप किस्में विकसित (evolved) की जानी हैं।

13. गहरे पानी का धान (Deep water paddy)

कावेरी डेल्टा के अंतिम छोर वाले क्षेत्रों (tail end parts) में गहरे पानी वाले धान की आवश्यकता होती है। यह फिर से एक स्थान विशिष्ट समस्या है।

TNR 1 और TNR 2.

14. निर्यात (export) के अनुकूल किस्में

सुगंधित चावल बासमती 370 को अरब देशों में निर्यात (exported) किया जाता है। इस कार्यक्रम में सीमा (limitation) यह है कि सभी क्षेत्रों में उगाए जाने वाले बासमती 370 का निर्यात नहीं किया जा सकता है। आयातक देश (importing countries) केवल हिमालय श्रृंखला (Himalayan Range) की घाटियों में उगाए जाने वाले बासमती चावल को ही पसंद करते हैं। केवल उन क्षेत्रों में उगाए जाने वाले चावल ही रासायनिक परीक्षण (chemical test) में पास होते हैं। यह पर्यावरण के प्रभाव (effect of environment) के कारण होना चाहिए। देश के अन्य हिस्सों में उगाई जाने वाली निर्यात गुणवत्ता वाली सुगंधित किस्मों (export quality scented varieties) की पहचान करने के प्रयास चल रहे हैं।

15. जंगली चावल को नियंत्रित करने के लिए किस्मों का प्रजनन

यह फिर से एक स्थान विशिष्ट समस्या है। बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब राज्यों में जंगली चावल O. sativa var. fatua अक्सर समस्याएं पैदा कर रहा है। इसलिए जंगली चावलों से उन्हें अलग करने के लिए खेती किए जाने वाले चावल (cultivated rice) में मार्कर जीन (marker genes) का होना आवश्यक है। बैंगनी रंग का तना (Purple colour stem) एक मार्कर है।

16. किसी अन्य स्थानीय समस्याओं (local problems) के अनुकूल किस्मों का प्रजनन

उदाहरण (E.g.) - हल्दी की खेती (turmeric cultivation) वाले क्षेत्रों में खेती करने के लिए किस्मों की पहचान करना जहां दो हल्दी फसलों के बीच 70 दिनों की छोटी अवधि वाली चावल की किस्म (short duration rice variety) को फिट किया जा सकता है।

सत्तरी (Satari) - छोटी अवधि (70 दिन)।

🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं देते। यह फाइल अभी सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए उपलब्ध है। बहुत जल्द हम इसे PDF फॉर्मेट में भी अपडेट करेंगे।

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