संकर धान बीज उत्पादन (Hybrid Rice Seed Production)
धान (Rice) में संकर ओज (Hybrid vigour) की पहली रिपोर्ट जोन्स (Jones) (1926) द्वारा दी गई थी। इससे कोशिकाद्रव्यी नर बंध्यता (cytoplasmic male sterility) का उपयोग करके संकर धान (hybrid rice) के उत्पादन के संबंध में अटकलें (speculation) शुरू हुईं। अधिकांश जैपोनिका (japonica) धान में सामान्य कोशिकाद्रव्य (normal cytoplasm) होता है, लेकिन बंध्य कोशिकाद्रव्य (sterile cytoplasm) और उर्वरता पुन:स्थापक प्रणाली (fertility restoring system) वाली इंडिका किस्मों (indica varieties) की पहचान की गई है। लेकिन संकर धान बीज उत्पादन को आर्थिक रूप से जीवनक्षम (economically feasible) बनाने के लिए पर-परागण (cross pollination) द्वारा पर्याप्त बीज सेट (seed set) प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भारत में "संकर धान प्रौद्योगिकी का विकास और उपयोग (Development and use of hybrid rice technology in India)" नामक UNDP/FAO परियोजना के कार्यान्वयन के बाद - भारत में संकर धान उत्पादन एक सफलता की कहानी (success story) बन गया है।
संकर धान के बीज (Hybrid rice seeds) (कोशिकाद्रव्यी आनुवंशिक नर बंध्यता - cytoplasmic genic male sterility) तीन लाइन प्रणाली (three line system) का उपयोग करके उत्पादित किए गए थे। दो जीन Rf1 और Rf2 उर्वरता पुन:स्थापन (fertility restoration) के लिए जीन हैं।
संकर धान उत्पादन की प्रक्रिया में कृषि विज्ञान की दृष्टि से उन्नत (agronomically improved) कोशिकाद्रव्यी नर बंध्य लाइन (A), अनुरक्षक लाइन (maintainer line - B) और उर्वरता पुन:स्थापक लाइन (fertility restorer line - R) की निरंतर आपूर्ति शामिल है। अनुरक्षक और पुन:स्थापक लाइनों को स्व-परागण (selfing) द्वारा बनाए रखा जाता है, जबकि CMS लाइन और \(F_1\) बीज क्षेत्र में पर-परागण को बढ़ाने के प्रयासों के साथ उत्पादित किए जाते हैं। F और S क्रमशः उर्वर (fertile) और बंध्य (sterile) कोशिकाद्रव्य को संदर्भित करते हैं। Rf और rf क्रमशः उर्वरता पुन:स्थापक (fertility restoring) और गैर-पुन:स्थापक (non restoring) जीन हैं।
मुख्य खेत में A और R लाइनों का पंक्ति अनुपात और दूरी (Row ratio and spacing of A and R lines in the main field)
नर : मादा अनुपात (Male : Female ratio) = 2 : 8
R पंक्तियों के बीच की दूरी = 30 सेमी
R और A पंक्तियों के बीच की दूरी = 20 सेमी
A पंक्तियों के बीच की दूरी = 15 सेमी
पौधे से पौधे की दूरी = 15 सेमी
संकर धान बीज उत्पादन की तकनीक (Technique of hybrid rice seed production)
एक सफल संकर धान उत्पादन के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए:
- खेत का चुनाव (Choice of field): उपजाऊ मिट्टी (Fertile soil), संरक्षित सिंचाई और जल निकासी प्रणाली (drainage system), पर्याप्त धूप (sufficient sunshine)। कोई गंभीर बीमारी और कीट समस्या नहीं होनी चाहिए।
- पृथक्करण (Isolation): संकर बीज की शुद्धता सुनिश्चित करने और अवांछित पराग (unwanted pollen) द्वारा परागण से बचने के लिए पृथक्करण आवश्यक है।
- a) स्थान पृथक्करण (Space isolation): 100 मीटर की दूरी के दायरे में पराग जनक (pollen parent) को छोड़कर कोई अन्य धान की किस्म नहीं उगाई जानी चाहिए।
- b) समय पृथक्करण (Time isolation): 20 दिनों से अधिक का समय पृथक्करण अपनाया जाता है (MS लाइन की तुलना में 100 मीटर के दायरे में किसी अन्य किस्म के बाली निकलने की अवस्था (heading stage) 20 दिन पहले या बाद में होनी चाहिए)।
- c) अवरोध पृथक्करण (Barrier isolators): भौगोलिक विशेषताएं (Topographic features) जैसे लकड़ी का ढेर, 30 मीटर की दूरी तक ऊँची फसलें / 2 मीटर ऊंचाई से ऊपर (प्लास्टिक शीट की) कृत्रिम बाधाएं।
- बाली निकलने और फूल आने का अनुकूल समय (Optimum time for heading and flowering)
सामान्य रूप से फूल आने के लिए अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ (climatic conditions) हैं:
- (i) औसत तापमान (Mean temperature) 24-28°C
- (ii) सापेक्ष आर्द्रता (Relative humidity) 70-80%
- (iii) दिन और रात के तापमान में अंतर 8-10°C
- (iv) पर्याप्त धूप
- (v) पर्याप्त हवा (Sufficient breeze)
- फूल आने का सिंक्रनाइज़ेशन (Synchronization of flowering)
चूँकि MS लाइन पर बीज का सेट पर-परागण पर निर्भर करता है, इसलिए नर और मादा जनकों की बाली निकलने की तारीख (heading date) को सिंक्रनाइज़ करना सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, पराग आपूर्ति के समय को बढ़ाने के लिए, नर जनक को आमतौर पर 5-7 दिनों के अंतराल पर दो या तीन बार बोया जाता है।
- पंक्ति अनुपात, पंक्ति की दिशा और रोपण प्रतिरूप (Row ratio, row direction and planting pattern)
पंक्ति अनुपात (Row ratio) से तात्पर्य संकर बीज उत्पादन खेत में नर जनक की पंक्तियों की संख्या और मादा जनक की पंक्तियों की संख्या के अनुपात से है। पंक्ति अनुपात का लेआउट (layout) निम्न बातों पर निर्भर करता है:
- (i) R लाइन की वृद्धि अवधि (growth duration)
- (ii) R लाइन का वृद्धि ओज (Growth vigor)
- पराग झड़ने (pollen shed) की मात्रा और
- (iv) R लाइन की पौधे की ऊंचाई।
सिद्धांतों (principles) में शामिल हैं:
- R लाइन में पर्याप्त पराग (enough pollen) होना चाहिए।
- पंक्ति की दिशा बाली निकलने की अवस्था में चलने वाली हवाओं की दिशा के लगभग लंबवत (perpendicular) होनी चाहिए ताकि पर-परागण की सुविधा मिल सके।
व्यावहारिक रूप से, 2:8 का पंक्ति अनुपात वर्तमान में इंडिका संकर बीज उत्पादन में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
आमतौर पर, R लाइन को प्रति हिल (hill) दो से तीन पौधों (seedlings) के साथ रोपा जाता है और पौधे से पौधे के बीच 15 सेमी की दूरी, एक रिस्टोरर (restorer) पंक्ति से दूसरी के बीच 30 सेमी और CMS लाइन से 20 सेमी की दूरी पर अलग किया जाता है। MS लाइन को प्रति हिल एक से दो पौधों के साथ 15x15 सेमी की दूरी के साथ रोपा जाता है।
अधिक बीज उपज प्राप्त करने के लिए एक अच्छी समष्टि संरचना (population structure) नीचे दी गई है:
- a) पौधे/हिल (Seedling/hill): A लाइन = 1-2, R लाइन = 2-3
- b) हिल्स/वर्ग मीटर (Hills/sq.m): A लाइन = 30, R लाइन = 5
- c) प्रभावी कल्ले/वर्ग मीटर (Effective tillers/sq.m): A लाइन = 300, R लाइन = 120
- बाली निकलने की तारीख की भविष्यवाणी और समायोजन (Prediction and adjustment of heading date)
भले ही दोनों जनकों के बीच बुवाई का अंतराल (seeding interval) सटीक रूप से निर्धारित किया गया हो, लेकिन तापमान में भिन्नता और खेत प्रबंधन में अंतर के कारण उनके फूल आने का सिंक्रनाइज़ेशन अभी भी प्राप्त नहीं हो सकता है। इसलिए उनकी बाली निकलने की तारीख की भविष्यवाणी करना आवश्यक है ताकि बाली (panicle) की आद्य शुरुआत (primordial initiation) की जांच करके आवश्यक समायोजन (adjustments) करने के लिए जल्द से जल्द उपाय किए जा सकें।
फूल आने की तारीख का समायोजन (Adjustment) पहले विकसित होने वाले जनक पर त्वरित रिलीज होने वाले नाइट्रोजन उर्वरक (quick releasing nitrogen fertilizer) को लागू करके किया जा सकता है और बाद में विकसित होने वाले जनक पर 2% DAP के घोल का छिड़काव किया जाना चाहिए। इस उपाय से 4 से 5 दिनों के अंतर को समायोजित किया जा सकता है।
- पत्ती काटना, जिबरेलिन का अनुप्रयोग और पूरक परागण (Leaf clipping, gibberellin application and supplementary pollination)
ये तकनीकें बाह्य-संकरण दर (outcrossing rate) को बढ़ाने के लिए बहुत प्रभावी हैं।
- a) पत्ती काटना (Leaf clipping): बालियों (panicles) से ऊंची पत्तियां पर-परागण में मुख्य बाधाएं हैं और इसलिए, उन्हें काट दिया जाना चाहिए। आम तौर पर पत्ती काटना प्रारंभिक बाली निकलने की अवस्था से 1-2 दिन पहले किया जाता है, और फ्लैग पत्तियों (flag leaves) के ब्लेड का 2/3 से अधिक भाग ऊपर से काट दिया जाता है।
- b) जिबरेलिन का अनुप्रयोग (Application of gibberellin - \(GA_3\)): \(GA_3\) धान के पौधे के शारीरिक और जैव रासायनिक चयापचय (physiological and biochemical metabolism) को समायोजित कर सकता है और युवा कोशिकाओं के बढ़ाव को उत्तेजित करके संकर बीज उत्पादन में मदद करता है। अधिकांश CMS लाइनों में, एक बाली के लगभग 20-30% स्पाइकलेट्स (spikelets) फ्लैग पत्ती के आवरण (flag leaf sheath) के अंदर होते हैं (उद्भेदन या exertion केवल 70% होता है)। \(GA_3\) फ्लैग पत्ती के आवरण से बाली के पूरी तरह से बाहर निकलने (exertion) को प्रभावित करता है। भारत में नैपसैक स्प्रेयर (knapsack sprayer) का उपयोग करके \(GA_3\) की अनुशंसित खुराक 50 ग्राम/हेक्टेयर है और अल्ट्रा लो वॉल्यूम स्प्रेयर (ultra low volume sprayer) के साथ 25 ग्राम/हेक्टेयर है।
\(GA_3\) अनुप्रयोग के लाभ (Advantage of \(GA_3\) application):
- बाली और वर्तिकाग्र उद्भेदन (panicle and stigma exertion) को बढ़ाता है।
- देर से निकलने वाले कल्लों (late tillers) के विकास को गति देता है और प्रभावी कल्लों को बढ़ाता है।
- फ्लैग पत्ती का कोण (flag leaf angle) बढ़ जाता है।
- बिना भरे हुए दानों (unfilled grains) को कम करता है।
- बीज सेटिंग (seed setting) और बीज उपज को बढ़ाता है।
छिड़काव की अवस्था: 5% बाली का निकलना (panicle emergence)
छिड़काव का समय: सुबह 8-10 बजे का समय सबसे अच्छा होता है।
- c) पूरक परागण (Supplementary pollination): फूल खिलने (anthesis) के दौरान रस्सी खींचकर या छड़ी चलाकर (rope-pulling or rod driving) R लाइनों की बालियों को हिलाने से संकरण दर (crossing rate) बढ़ सकती है। यह पीक एंथेसिस (सुबह 10-12 बजे) के दौरान किया जाता है।
- अवांछित पौधों को निकालना (Rogueing)
CMS लाइनों और R लाइनों की 98% शुद्धता प्राप्त करने के लिए, सख्त पृथक्करण (strict isolation) के अलावा, एक संपूर्ण रोगिंग (thorough rogueing) भी आवश्यक है।
- कटाई और प्रसंस्करण (Harvesting and processing)
- नर जनक (male parent) की कटाई पहले की जाती है।
- नर और मादा लाइनों के मिश्रण (admixture) से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
- मादा लाइन की मड़ाई (threshing) अलग से एक अच्छी तरह से साफ किए गए खलिहान (threshing floor) में की जानी चाहिए।
- बीज वाले खेत को छाया में 12% नमी की मात्रा (moisture content) तक सुखाया जाना चाहिए।
- ग्रेडिंग के बाद उपयुक्त, साफ गनी बैग (gunny bags) में पैक किया जाना चाहिए।
संकर धान CORH - 1 (MGR Rice) : 1994 में जारी
- कम अवधि (Short duration), मध्यम महीन दाना (medium fine grain) (वंशावली (Parentage) : IR 62829A x IR10198-66-2R)
- प्रजनन विधि (Breeding method) : तीन लाइन प्रजनन (Three line Breeding)
- मौसम (Season) : मई-जून (कर-कुरुवई)
- अवधि (Duration) : 110-115 दिन
- उपज (Yield) : 6380 किलोग्राम/हेक्टेयर
- अनुकूलन का क्षेत्र (Area of adaptation) : कोयंबटूर, मदुरै, चेंगलपट्टू, सलेम, नागपट्टिनम, पेरियार जिले।
CORH 2 संकर धान के लिए बीज उत्पादन तकनीक (SEED PRODUCTION TECHNIQUES FOR CORH 2 HYBRID RICE)
वंशावली : IR 58025 A x C 20 R
- खेत का चयन (Selection of Field) :
पिछली फसल धान की नहीं होनी चाहिए। यदि पिछली फसल धान है, तो खेत की सिंचाई करें और जिससे गिरे हुए बीज अंकुरित (germinate) हो जाएंगे जिन्हें कीचड़ (puddle) किया जा सकता है। यदि पिछली फसल में प्रसुप्ति (dormancy) है, तो हमें यह देखने के लिए सावधान रहना चाहिए कि गिरे हुए बीज सभी अंकुरित हो गए हैं और कीचड़ में मिला दिए गए हैं।
- पृथक्करण दूरी (Isolation distance) :
100 मीटर। यदि समय पृथक्करण का पालन किया जाना है, तो 100 मीटर के भीतर कोई धान की फसल नहीं होनी चाहिए, जो उस समय फूलने की प्रक्रिया में हो जब बीज उत्पादन भूखंड (seed production plot) में फसल में फूल आ रहे हों। पास की फसल के लिए फूल आने में 30 दिनों का अंतर होना चाहिए।
- मौसम : अप्रैल - मई और दिसंबर - जनवरी बुवाई का महीना।
- बीज दर (Seed rate) :
A लाइन : 20 किलोग्राम / हेक्टेयर
R लाइन : 10 किलोग्राम / हेक्टेयर
- नर्सरी (Nursery) :
नर्सरी में 2 किग्रा DAP डालें। A लाइन और R लाइन दोनों के लिए 1 किग्रा / सेंट नर्सरी अपनाएं। R लाइन उगाते समय, 5 किग्रा बीज उसी तारीख को उगाए जा सकते हैं जब A लाइन उगाई जाती है। बाकी 5 किग्रा बुवाई पहली बुवाई के पांच दिन बाद की जा सकती है।
- मुख्य खेत में खाद डालना (Manuring of main field) : 10 टन FYM / हेक्टेयर
| अवस्था (Stage) |
N (kg/ha) |
P (kg/ha) |
K (kg/ha) |
| बेसल ड्रेसिंग (Basal dressing) |
50 |
60 |
20 |
| कल्ले निकलने की अवस्था (Tillering stage) |
50 |
- |
20 |
| बूट लीफ अवस्था (Boot leaf stage) |
50 |
- |
20 |
- रोपण की तारीख (Planting date) :
A लाइन - बुवाई के 25 - 30 दिन बाद
R लाइन - बुवाई के 20 - 25 दिन बाद
- रोपण अनुपात (Planting Ratio) :
A लाइन की 8 पंक्तियाँ : R लाइन की 2 पंक्तियाँ
- दूरी (Spacing) :
- A लाइन : पंक्तियों के बीच 10 सेमी, पंक्तियों के भीतर 15 सेमी। प्रति हिल सिंगल पौधा (Single seedling / hill)।
- B लाइन / R लाइन : पंक्तियों के बीच 30 सेमी, पंक्तियों के भीतर 15 सेमी। प्रति हिल दो पौधे (Two seedlings / hill)।
- A लाइन और R लाइन के बीच की जगह 20 सेमी है।
- पौध संरक्षण (Plant protection) :
धान के लिए सुझाई गई पौध संरक्षण उपायों का पालन करें। फूल खिलने और परागण के दौरान यानी सुबह जल्दी के समय छिड़काव या डस्टिंग से बचें।
- अवांछित पौधों और पराग गिराने वालों को निकालना (Rogueing and removal of pollen shedders) :
शुरुआत से ही A लाइन और R लाइन दोनों में रोगिंग की जानी चाहिए। पराग गिराने वाले (Pollen shedders) पौधों को कल्लों (tillers) के साथ निकाल दिया जाना चाहिए। A लाइन में बीज सेट 40% से अधिक नहीं हो सकता है। यदि पौधों में 70 से 80% सेटिंग हो रही है तो इसका मतलब है कि वे रोग (rogues) हैं और उन्हें फसल काटने से पहले निकाल दिया जाना चाहिए।
- विशेष तकनीकें (Special techniques) :
- i. भूखंड के आर-पार रस्सियां खींचना (Pulling of ropes across the plot)
- ii. R लाइनों को बांस के खंभों (bamboo poles) से हिलाना।
- कटाई (Harvest) :
पहले R लाइन की कटाई करें। फिर संकर (hybrid) की कटाई करें। इसे ठीक से मड़ाई (thresh) करें, 12% नमी के साथ सुखाएं और इसे बैग में भरें।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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