गेहूँ (Wheat) - Triticum sp. (x = 7)
(गोथुमई/ कोट्टम्पम/गोथी/गोडी/गेहूं)
गेहूँ विश्व का सबसे महत्वपूर्ण अनाज है, जो कुल उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा देता है, इसके बाद चावल का स्थान है। समशीतोष्ण (Temperate) क्षेत्रों में यह भोजन का प्रमुख स्रोत है। गेहूँ का मुख्य उपयोग रोटी (bread) बनाने के लिए आटा (flour) है।
गुणसूत्र संख्या (Chromosome number):
- द्विगुणित (Diploid): 2n = 14
- चतुर्गुणित (Tetraploid): 2n = 28
- षट्गुणित (Hexaploid): 2n = 42
उत्पत्ति स्थान (Place of origin):
- द्विगुणित: एशिया माइनर (Asia minor)
- चतुर्गुणित: एबिसिनिया (Abyssinia), उत्तरी अफ्रीका (North Africa)
- षट्गुणित: मध्य एशिया (Central Asia)
वर्गीकरण (Classification):
| गुणता स्तर (Ploidy level) |
प्रजाति (Species) |
सामान्य नाम (Common name) |
जीनोम (Genome) |
| द्विगुणित (2n=14) 2 प्रजातियां |
T. boeticum (T. aegilopoides) |
जंगली आइनकोर्न (Wild einkorn) |
AA |
| T. monococum |
आइनकोर्न (Einkorn) |
AA |
| चतुर्गुणित (2n=28) 7 प्रजातियां |
T. dicoccoides |
जंगली एम्मर (Wild Emmer) |
AABB |
| T. dicoccum |
एम्मर (Emmer) |
AABB |
| T. durum |
मैकरोनी गेहूँ (Macaroni wheat) |
AABB |
| T. persicum |
फारसी गेहूँ (Persian wheat) |
AABB |
| T. turgidum |
रिवेट गेहूँ (Rivet wheat) |
AABB |
| T. polonicum |
पोलिश गेहूँ (Polish wheat) |
AABB |
| T. timopheevi |
- |
AABB |
| षट्गुणित (2n=42) 5 प्रजातियां |
T. aestivum |
सामान्य या ब्रेड गेहूँ (Common or bread wheat) |
AABBDD |
| T. compactum |
क्लब गेहूँ (Club wheat) |
AABBDD |
| T. sphaerococcum |
वामन गेहूँ (Dwarf wheat) |
AABBDD |
| T. spelta |
स्पेल्ट गेहूँ (Spelt wheat) |
AABBDD |
| T. macha |
माचा गेहूँ (Macha wheat) |
AABBDD |
वाविलोव (Vavilov) के अनुसार गेहूँ की चौदह प्रजातियाँ (चित्र 1):
1. T. boeoticum, 2. T. monococcum, 3. T. dicoccoides, 4. T. dicoccum, 5. T. durum, 6. T. persicum, 7. T. turgidum, 8. T. polonicum, 9. T. timopheevi, 10. T. aestivum, 11. T. sphaerococcum, 12. T. compactum, 13. T. spelta, 14. T. macha.
द्विगुणित गेहूँ की उत्पत्ति (Origin of diploid wheat):
(जंगली आइनकोर्न) T. boeticum (T. aegilopoides)
↓ प्राकृतिक उत्परिवर्तन (Natural mutation) और चयन (selection)
T. monoccocum (खेती किया जाने वाला द्विगुणित) AA (2n = 14)
संभवतः T. boeoticum सभी खेती किए जाने वाले गेहूँ का पूर्वज (ancestor) है।
चतुर्गुणित गेहूँ की उत्पत्ति (Origin of Tetraploid wheats) और षट्गुणित गेहूँ की उत्पत्ति (Origin of hexaploid wheats):
T. boeoticum (AA, 2n=14) x Aegilops speltoides (BB, 2n=14)
↓
F1 बाँझ (Sterile) (AB, 2n=14)
↓ प्राकृतिक गुणित (Natural doubling)
T. dicoccoides (जंगली एम्मर - Wild emmer) AABB (2n = 28)
↓ प्राकृतिक चयन द्वारा (By natural selection)
T. dicoccum (एम्मर गेहूँ - Emmer wheat) AABB (2n=28) (खेती योग्य - Cultivated)
T. dicoccum (AABB, 2n=28) x Aegilops squarrosa (DD, 2n=14)
↓
F1 बाँझ ABD (2n = 21)
↓ प्राकृतिक उत्परिवर्तन और गुणित (Natural mutation and doubling)
T. aestivum AABBDD (2n = 42) (खेती योग्य - Cultivated)
Triticum की संबंधित प्रजातियाँ (Related Species of Triticum):
- T. boeoticum: एक से दो बीज वाले स्पाइकलेट (spikelets) के रूप पाए जाते हैं। पकने पर भंगुर बालियां (brittle ears) अलग-अलग स्पाइकलेट्स में टूट जाती हैं जो शूक (awns) से लैस होती हैं, जो बीज फैलाव का एक प्रभावी साधन प्रदान करती हैं।
- T. monococcum: आदिम (Primitive) द्विगुणित रूप जिसे पालतू (domesticated) बनाया गया, उत्परिवर्तन और चयन द्वारा T. boeoticum से विकसित हुआ।
- Aegilops speltoides: (2n=14; B जीनोम)। यह प्राकृतिक रूप से पर-परागित (cross-pollinating) है। यह B जीनोम का मान्यता प्राप्त दाता (donor) है।
- T. dicoccoides: यह T. boeoticum और Ae. speltoides के संकरण के परिणामस्वरूप बना एक एम्फिडिप्लॉइड (amphidiploid) रूप है।
- T. dicoccum: बालियां घनी, दाढ़ी वाली और पार्श्व रूप से संकुचित (laterally compressed) होती हैं, स्पाइकलेट्स दो दाने वाले होते हैं और मड़ाई (threshing) के बाद दाने ग्लूम्स (glumes) के भीतर ही रह जाते हैं (speltoid)। यह खेती किए जाने वाले गेहूँ में सबसे पुराना है।
- T. durum: नग्न दानों (naked grains) के साथ मुक्त रूप से मड़ाई (Free thrashing) वाला गेहूँ, चतुर्गुणित गेहूँ में महत्वपूर्ण है। दानों में उच्च ग्लूटेन (gluten) होता है।
- Ae. squarrosa: (2n=14; D जीनोम) यह खेती किए जाने वाले षट्गुणित गेहूँ में D जीनोम का स्रोत है, इसकी अनुकूलन क्षमता (adaptability) उच्च है।
- T. spelta: षट्गुणित प्रजाति, इसे T. dicoccoides और Ae. squarrosa के बीच संकरण (hybridization) से बना एक एम्फिडिप्लॉइड माना जाता है।
सभी षट्गुणित गेहूँ में सबसे महत्वपूर्ण सामान्य ब्रेड गेहूँ, T. aestivum है जो उष्णकटिबंधीय (tropics) और उप-उष्णकटिबंधीय (sub-tropics) के सभी भागों में उगाया जाता है। यह वह षट्गुणित गेहूँ है जिससे अधिकांश आधुनिक गेहूँ विकसित किए गए हैं। यह रूपात्मक (morphological) और शारीरिक (physiological) भिन्नता और पारिस्थितिक अनुकूलन (ecological adaptation) की एक अत्यंत विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करता है।
प्रजनन उद्देश्य (Breeding objectives):
-
उच्च उपज (High yield):
उच्च उपज निम्न पर निर्भर करती है:
- a) प्रति इकाई क्षेत्र में बालियों (heads) की संख्या
- b) प्रति बाली दानों की संख्या
- c) दाने का औसत वजन
उच्च उपज वाली किस्मों के प्रजनन के दौरान उपरोक्त सभी तीन घटकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। किसी एक को भी छोड़ने से परिणाम नहीं मिल सकता है। इसके अलावा उच्च उपज के लिए प्रजनन करते समय एक किस्म में सभी उपज प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाले जीनों का अनुकूल संयोजन (favourable combination) करना आवश्यक है।
-
गैर-लॉजिंग किस्मों का प्रजनन (Breeding non-lodging varieties):
यह जापानी किस्म नोरिन 10 (Norin 10) में वामन जीन (dwarfing gene) की पहचान के बाद प्राप्त किया गया है। हमारे अधिकांश वामन गेहूँ दो जीन वाले वामन (two-gene dwarfs) (two gene dwarfs) हैं। उदाहरण: सोनारा 63 (Sonara 63), सोनारा 64, कल्याण सोना (Kalyan sona)। अब जोर तीन जीन वाले बौनों (triple gene dwarfs) पर है।
-
रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन (Breeding for disease resistance):
रतुआ (Rust) प्रमुख बीमारी है। तना रतुआ (stem rust) और पत्ती रतुआ (leaf rust) दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। रतुआ की अलग-अलग प्रजातियाँ (races) होती हैं। इसलिए रतुआ प्रतिरोध के लिए प्रजनन करते समय क्षैतिज प्रतिरोध (horizontal resistance) को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बैक क्रॉस (Back cross) प्रजनन विधि और मल्टी लाइन्स (multi lines) का विकास इसकी विधियां हैं।
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कीट प्रतिरोध के लिए प्रजनन (Breeding for insect resistance):
हेसियन फ्लाई (Hessian fly) प्रमुख कीट है। अधिकांश किस्मों में प्रतिरोध एंटीबायोसिस (Antibiosis) के माध्यम से होता है।
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गुणवत्ता के लिए प्रजनन (Breeding for quality):
विभिन्न गेहूँ किस्मों की रासायनिक संरचना में बहुत भिन्नता होती है जो पर्यावरण से काफी प्रभावित होती है। कठोर गेहूँ (hard wheat) या ब्रेड गेहूँ की किस्मों में उच्च ग्लूटेन सामग्री होती है। नरम गेहूँ (soft wheat) में ग्लूटेन की मात्रा कम होती है जो केक, पेस्ट्री बनाने के लिए उपयुक्त है। मैकरोनी बनाने के लिए डुरम गेहूँ उपयुक्त हैं, हालांकि वे केक या ब्रेड के लिए अनुपयुक्त हैं।
इसलिए उपयोग के आधार पर गुणवत्ता प्रजनन का उद्देश्य तय किया जाना चाहिए।
प्रजनन की विधियाँ (Methods of breeding):
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पुरःस्थापन (Introduction):
मेक्सिको से अर्ध-वामन गेहूँ (Semi dwarf wheat), सोनारा 63, सोनारा 64, मेयो 64 (Mayo 64), लेरमा रोजा 64 (Lerma Roja 64)।
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शुद्ध वंशक्रम चयन (Pure line selection):
पूसा संस्थान में विकसित P4, P6, P12 जैसी प्रारंभिक किस्में स्थानीय आबादी से शुद्ध वंशक्रम चयन का परिणाम हैं।
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संकरण और चयन (Hybridisation and selection):
- a) अंतर-किस्मीय (Inter varietal): IARI नई दिल्ली और पंजाब में कई सफल व्युत्पन्न (derivatives) विकसित किए गए। NP 809 - न्यू पूसा मल्टीपल क्रॉस व्युत्पन्न।
हालांकि अन्य देशों की तुलना में ये सभी किस्में गिरने वाली (lodging) और कम उपज देने वाली थीं। इसलिए 1963 के दौरान डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन द्वारा गेहूँ संकरण कार्यक्रम बदल दिया गया। बोरलॉग को हमारे देश में आमंत्रित किया गया और उन्होंने मेक्सिको से अर्ध-बौनी किस्मों को पेश करने का सुझाव दिया। परिणामस्वरूप चार वाणिज्यिक वसंत गेहूँ (spring wheat) किस्मों अर्थात् सोनारा 63, सोनारा 64, मेयो 64 और लेरमा रोजा 64 को पेश किया गया। हालांकि वे लाल कर्नेल वाले कठोर गेहूँ थे। इनका उपयोग हमारे प्रजनन कार्यक्रम में किया गया और कल्याण सोना, सफेद लेरमा, शरबती सोनारा जैसी एम्बर रंग की गेहूँ की किस्में जारी की गईं, ये डबल जीन वामन (double gene dwarfs) हैं।
- b) अंतर-विशिष्ट संकरण (Inter specific crosses): हेसियन फ्लाई प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए। इसी प्रकार रतुआ प्रतिरोध के लिए।
- c) बैक क्रॉस प्रजनन विधि (Back cross method of breeding): थैचर (Thatcher) से चीनी वसंत (Chinese spring) में रतुआ प्रतिरोध।
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संकर गेहूँ (Hybrid wheat):
कैनसस कृषि प्रयोग स्टेशन (Kansas Agri. Expt. Station) USA में T. timopheevi x T. aestivum बाइसन (Bison) किस्म का संकरण करके नर बंध्य लाइनों (male sterile lines) की पहचान की गई थी। बार-बार बैक संकरण करके बाइसन जैसी नर बंध्य लाइन विकसित की गई। वर्तमान में USA और कनाडा इस पर काम कर रहे हैं।
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उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation breeding):
डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन ने गामा किरणों (gamma rays) के साथ इस पर व्यापक काम किया। शरबती सोनारा को बढ़ी हुई प्रोटीन सामग्री के साथ विकसित किया गया था।
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मल्टीलाइन्स का विकास (Development of multilines):
बोरलॉग ने रतुआ के खिलाफ मल्टीलाइन्स विकसित कीं। MLKS 15 को IARI में विकसित किया गया था।
मल्टी लाइन शुद्ध लाइनों (pure lines) का मिश्रण है जो फेनोटाइपिक (phenotypically) रूप से समान हैं लेकिन जीनोटाइपिक (genotypically) रूप से भिन्न हैं। प्रत्येक लाइन प्रजनन की अलग बैक क्रॉस विधि द्वारा निर्मित होती है। प्रत्येक लाइन में किसी बीमारी की एक विशेष प्रजाति (race) के खिलाफ प्रतिरोध होता है।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह स्टडी मटेरियल ICAR के मूल कंटेंट का हिंदी अनुवाद है। हम इसकी पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं देते। यह फाइल अभी सुधार और परीक्षण (Improvement Purpose) के लिए उपलब्ध है। बहुत जल्द हम इसे PDF फॉर्मेट में भी अपडेट करेंगे।
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