मक्का

Zea mays (2n = 20)

उत्पत्ति का स्थान (Place of origin): मेक्सिको (Mexico)।

कृषित मक्का की उत्पत्ति (Origin of cultivated maize)

जीनस (Genus) Zea को पहले मोनोटाइपिक (monotypic) माना जाता था। बाद में टियोसिंटे (teosinte) को शामिल किया गया Euchlaena mexicana को Zea mexicana में बदल दिया गया।

एक अन्य जंगली संबंधी ट्रिप्सैकम (Tripsacum) (गामा घास - gamma grass) है। ये तीनों आपस में संकरण योग्य (inter crossable) हैं।

उत्पत्ति के बारे में तीन विचार (Three views about origin):

  1. इसकी उत्पत्ति टियोसिंटे से हुई। टियोसिंटे में भुट्टा (cob) और बाल (tassel) होते हैं और यह आसानी से संकरण योग्य (easily crossable) होता है। साइटोलॉजिकल (cytological) अध्ययनों के आधार पर इस सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया गया था।
  2. मक्का की उत्पत्ति पॉड कॉर्न (pod corn) Zea mays var. tunicata से प्राकृतिक उत्परिवर्तन (natural mutation) द्वारा हुई। यह विचार सबसे अधिक स्वीकृत है। लेकिन पॉड कॉर्न की उत्पत्ति ज्ञात नहीं है।
  3. ये तीनों एक समान पूर्वज (common ancestor) से आए थे, लेकिन यह समान पूर्वज विकास (evolution) के दौरान लुप्त हो गया।

मक्का में आदर्श पौधे का प्रकार (Ideal plant type in maize)

प्रजनन के उद्देश्य (Breeding objectives):

  1. उपज (Yield):

    यह पॉलीजीन (polygenes) द्वारा नियंत्रित एक जटिल लक्षण (complex character) है। आदर्श पौधे का प्रकार प्राप्त करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। मक्का प्रजनन विधि (maize breeding method) के रूप में किस्म संकरण (Varietal hybridization) को लोकप्रियता नहीं मिली। इसका मुख्य कारण श्रेष्ठ सेग्रीगेन्ट्स (superior segregants) प्राप्त करने में कठिनाई है।

  2. कीट और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन (Breeding for pest and disease resistance):

    तना मक्खी (Shoot fly), तना छेदक (Stem borer), हेलियोथिस (Heliothis) प्रमुख कीट (pests) हैं। मैक्सिकन किस्में प्रतिरोधी (resistant) हैं।

    डाउनी मिल्ड्यू (Downy mildews), लीफ ब्लाइट (leaf blight) और हेल्मिन्थोस्पोरियम (helminthosporium) प्रमुख रोग हैं। Co1, CoH 2 प्रतिरोधी हैं। ताइवान की लाइनें डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी हैं।

  3. उच्च प्रोटीन के लिए प्रजनन (Breeding for high protein):

    दो अंशों (fractions) से मिलकर बनता है:

  4. तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रजनन (Breeding for increased oil content):

    भ्रूण (germ) में 12-15%। भ्रूण का आकार बढ़ाकर हम तेल की मात्रा बढ़ा सकते हैं।

  5. कोशिकाद्रव्य के वैकल्पिक स्रोत (Alternate sources of cytoplasm):
  6. अधिक उपज देने वाली बेबी कॉर्न (High yielding baby corn):

    Z.m. var. sachharata, स्वीट कॉर्न (Sweet corn)। हरे भुट्टों को सलाद के रूप में खाया जा सकता है। बुवाई के 45 दिन बाद भुट्टों की कटाई की जा सकती है। CoBc 1 बेबी कॉर्न की नवीनतम किस्म है।

प्रजनन के तरीके (Breeding methods):

  1. पुरःस्थापन (Introduction):

    शुरू में सभी किस्में पुरःस्थापित (introduced) थीं।

    मैक्सिकन लाइन (Mexican line) को पहली बार 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों (Portuguese) द्वारा पुरःस्थापित किया गया था।

  2. समूह वरण (Mass Selection):

    1945 से पहले मक्का सुधार (maize improvement) के लिए समूह वरण एकमात्र विधि थी।

    समूह वरण तकनीक को अपनाकर प्रति चक्र (per cycle) उपज में 19% तक की वृद्धि प्राप्त करना संभव है।

  3. ईयर टू रो सिलेक्शन (Ear to Row Selection):

    मक्का में तेल और प्रोटीन की मात्रा में सुधार के लिए सबसे पहले हॉपकिंस (Hopkins) द्वारा प्रस्तावित किया गया था। इस विधि में अलगाव (isolation) में उगाई गई आबादी (population) में से फेनोटाइपिक रूप से (phenotypically) वांछनीय कई भुट्टों (ears) का चयन (selection) शामिल है। चयनित भुट्टों को एकल पौधे (single plant) के आधार पर काटा जाता है और बीजों का एक हिस्सा रखा जाता है तथा शेष को पंक्तियों (rows) में बोया जाता है। अगले मौसम में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली पंक्तियों के आधार पर आरक्षित बीजों को बोया जाता है।

    यह विधि उन लक्षणों के लिए उपयुक्त है जिनकी आनुवंशिकता (heritability) उच्च होती है जैसे तेल की मात्रा और प्रोटीन की मात्रा। लेकिन इससे उपज बढ़ाने में मदद नहीं मिली।

  4. संशोधित ईयर टू रो विधि (Modified Ear to Row method):

    लोनक्विस्ट (Lonquist) द्वारा प्रस्तावित।

    प्रत्येक पंक्ति से सर्वोत्तम पांच पौधों का चयन करें और उन्हें अलग से काटें तथा उपज का रिकॉर्ड रखें। सभी स्थानों पर प्रदर्शन के आधार पर केवल शीर्ष 20% संततियों (progenies) का चयन किया जाता है। इन 20% में चयनित पांच पौधे शामिल होंगे।

  5. संकरण और चयन (Hybridization and Selection):

    यह लोकप्रिय नहीं हुआ क्योंकि श्रेष्ठ पुनर्संयोजकों (superior recombinants) का अलगाव नहीं किया गया था。

  6. हेटेरोसिस प्रजनन (Heterosis breeding):

    CGMS लाइनों का उपयोग करने के बजाय, भारत में मादा इनब्रेड लाइन (female inbred line) के विपुंसन (detasseling) का पालन किया जाता है। चूंकि CGMS लाइन का उपयोग विपुंसन की तुलना में अधिक खर्चीला है, इसलिए इसका पालन नहीं किया जाता है।

    स्वदेशी (indigenous) x विदेशी (exotic) मूल के इनब्रेड्स के संकरण से सर्वश्रेष्ठ संकरों (hybrids) का विमोचन हुआ।

    1. एकल संकरण संकर (Single cross hybrid) - CoH 1, CoH 2.
    2. त्रि-मार्गी संकरण संकर (Three way cross hybrids) - Ganga -5
    3. द्वि संकरण संकर (Double cross hybrids) - CoH 3
    4. डबल टॉप क्रॉप हाइब्रिड (Double top crop hybrid) - सफेद दाने वाले संकर (White kernel hybrids) - Ganga safed 2, Histarch, Ganga 4.
  7. जनसंख्या सुधार (Population Improvement):

    आवर्ती चयन (Recurrent selection) तकनीक 1963 में धवन (Dhawan) द्वारा शुरू की गई थी। सम्मिश्रों (composites) का प्रारंभिक संश्लेषण (synthesis) अधिक उपज देने वाले अंतर-किस्मीय संकरण (inter varietal crosses) से किया गया था जिसमें न्यूनतम अंतःप्रजनन ह्रास (inbreeding depression) प्रदर्शित हुआ।

    किसान (Kisan), जवाहर (Jawahar), विक्रम (Vikram), सोना (Sona), विजय (Vijay), अंबर (Amber)।

    Co 1, K. 1

भविष्य के लक्ष्य (Future thrust):

  1. आबादी (populations) के व्यापक आधार वाले, आनुवंशिक रूप से विविध जीन पूल (genetically diverse gene pool) का विकास।
  2. आवर्ती चयन प्रक्रिया (recurrent selection procedure) के माध्यम से इन मूल आबादी (base populations) के प्रदर्शन का मूल्यांकन।
  3. श्रेष्ठ इनब्रेड्स (superior inbreds) का विकास।
  4. श्रेष्ठ संकरों (superior hybrids) का विकास।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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