ज्वार (Sorghum bicolor) (\(2n = 20\))
उत्पत्ति (Origin) : अफ्रीका (Africa)
16वीं शताब्दी से ही ज्वार वंश के लिए कई वर्गीकरण हुए हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध स्नोडेन (Snowden) का वर्गीकरण (1936) है, जिसे बाद में गार्बर (Garber) (1950) और डॉगेट (Dogget) (1970) द्वारा परिष्कृत (Refined) किया गया था।
नवीनतम वर्गीकरण हरलान (Harlan) और डी वेट (De Wet) (1972) द्वारा किया गया था। उनके अनुसार, खेती की जाने वाली ज्वार (Cultivated sorghum) Sorghum bicolor को अनाज पर तुष (Glume) के आवरण (Coverage) के आधार पर पांच मूल प्रजातियों (Basic races) में विभाजित किया गया है।
इसमें मूल प्रजातियों के सभी संयोजन (Combinations) शामिल हैं।
दो समूहों (Groups) में वर्गीकृत:
a) लंबे (Tall), उष्णकटिबंधीय (Tropical) देर से पकने वाले (Late maturing), छोटी दिन की लंबाई (Short day length) के अनुकूल, प्रकाश संवेदनशील (Photo sensitive), लंबे पोर (Longer internodes)। उदाहरण: देसी किस्में (Land races)।
b) समशीतोष्ण (Temperate), वामन पौधे (Dwarf plant) जो लंबी दिन की लंबाई (Longer day length) के अनुकूल, प्रकाश असंवेदनशील (Photo in sensitive), छोटे पोर (Shorter internodes), लंबी बालियां (Long panicles), उच्च उपज देने वाली किस्में (High yielding varieties)।
उच्च उपज (High yield): उत्पादकता जीन (Productivity genes) दुर्रा (Durra), रॉक्सबर्गी (Roxburghi), कॉडेटम (Caudatum) और ज़ेरा - ज़ेरा (Zera - Zera) में मौजूद होते हैं。
कम अवधि (Short duration): बहु-फसल कार्यक्रम (Multiple cropping programme) में फिट होने के लिए। Co22 सबसे कम अवधि वाली किस्म है जिसकी अवधि 70 दिन है। इस किस्म में कमी (Drawback) यह है कि यह बौनी (Dwarf) है और जिन किसानों को मवेशियों के चारे (Cattle feed) की आवश्यकता होती है, वे इसकी खेती नहीं कर सकते। 105 - 100 दिन इष्टतम (Optimum) है। इसे लंबी अवधि की देसी किस्म (Land race) के बजाय दो मौसमों में उगाया जा सकता है। उदाहरण: Co25 - Co 26।
उष्णकटिबंधीय रेखाओं (Tropical lines) में प्रमुख परिपक्वता जीन (Dominant maturity gene) Ma होता है और समशीतोष्ण रेखाओं (Temperate lines) में अप्रभावी जीन (Recessive gene) ma होता है।
वृद्धि के प्रारंभिक चरणों (Early stages of growth) में कम HCN सामग्री के साथ सूखा प्रतिरोधी (Drought resistant) किस्मों का प्रजनन:
75% ज्वार वर्षा आधारित परिस्थितियों (Rainfed condition) में उगाई जाती है। ऐसी किस्मों का प्रजनन (Breed) करना अत्यधिक आवश्यक है, जो प्रारंभिक (Initial) और साथ ही अंतिम सूखे (Terminal drought) का सामना कर सकें। इसके अलावा शुष्क भूमि की किस्मों (Dry land varieties) में प्रारंभिक वानस्पतिक चरण (Early vegetative phase) के दौरान तने में उच्च HCN सामग्री होगी। यह पशु चारा के रूप में किस्मों के उपयोग को सीमित करता है। इसे दूर करने के लिए कम HCN सामग्री वाली किस्मों का प्रजनन करना आवश्यक है। कम HCN सामग्री आंशिक प्रभुत्व प्रतिक्रिया (Partial dominance reaction) प्रदर्शित करती है। इस लक्षण को नियंत्रित करने में एक से अधिक जीन (Gene) शामिल होते हैं।
गैर-गिरने वाली ज्वार (Non - lodging sorghum) का प्रजनन:
यह दक्षिणी जिलों के लिए आवश्यक है, उत्तर-पूर्वी मानसून (N.E monsoon) के दौरान उगाई जाने वाली संकर ज्वार (Hybrid sorghum) कोविलपट्टी टॉल (90 दिन की अवधि) में परिपक्वता (Maturity) के समय गांठों (Nodes) पर टूटने (Snap) और गिरने (Lodge) की प्रवृत्ति होती है। इससे काफी नुकसान होता है। इसे बदलने के लिए 105 दिनों की अवधि वाले नए संकर COH3 को पेश किया गया था। लेकिन यह उपयुक्त नहीं था क्योंकि यह अंतिम सूखे का सामना नहीं कर सका। वामन लक्षण (Dwarf character) जीन DW1 से DW4 द्वारा वातानुकूलित (Conditioned) होता है。
कीटों के प्रति प्रतिरोध (Resistance to pests):
प्ररोह मक्खी, तना छेदक (Stemborer), मिज (Midge) और बाली का कीड़ा (Earhead bug) ज्वार के महत्वपूर्ण कीट हैं। कीटों के खिलाफ S. nitidum, S. virgatum जैसे स्रोत उपलब्ध हैं। कुछ देसी किस्में जैसे स्थानीय इरुंगु चोलम प्ररोह मक्खी के प्रति प्रतिरोधी हैं। प्रतिरोधी किस्मों को विकसित (Evolve) करने के प्रयास चल रहे हैं।
प्रतिरोध हो सकता है -
बीमारियों के प्रति प्रतिरोध (Resistance to diseases):
ज्वार डाउनी फफूंदी (Sorghum downy mildew), हेलमिन्थोस्पोरियम ब्लाइट (Helminthosporium blight), अनाज मोल्ड (Grain mould) महत्वपूर्ण बीमारियां हैं। वंशागति (Inheritance) जटिल (Complex) और बहुजीनी (Poly genic) है。
मीठी ज्वार (Sweet sorghum) के लिए प्रजनन:
चावल में आत्मनिर्भरता (Self sufficiency) के कारण, मानव भोजन के रूप में ज्वार का उपयोग तेजी से कम हो रहा है। इसलिए ज्वार के वैकल्पिक उपयोगों का पता लगाने के लिए, मीठी ज्वार का प्रजनन एक रणनीति (Strategy) है। तने के रस से, इथेनॉल (Ethanol) का उत्पादन किया जा सकता है जो ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत (Renewable source) है। इसमें ब्राजील प्रथम स्थान पर है। ज्वार के दो प्रकार होते हैं:
a) सिरप की किस्में (Syrup varieties): इससे खाने के उद्देश्य (Table purpose) के लिए सिरप बनाया जा सकता है। यह इथेनॉल उत्पादन (Ethanol production) के लिए भी उपयुक्त है。
b) चीनी की किस्में (Sugar varieties): इसमें शर्करा (Sugars) अधिक और दहनशील कार्बनिक पदार्थ (Combustible organics) कम होते हैं। सिरप की किस्मों की तुलना में इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है。
सामान्य ज्वार में 12% TSS (ब्रिक्स - Brix) होता है, जबकि मीठी ज्वार में लगभग 18% TSS होता है। रस निकाला (Extracted) और निष्फल (Sterilised) किया जाएगा। नसबंदी (Sterilisation) के बाद रस को खमीर (Yeast) के साथ उपचारित किया जाता है। 48 घंटे के बाद, अल्कोहल (Alcohol) निकालने के लिए आसवन (Distillation) किया जाता है। लगभग 45% अल्कोहल प्राप्त होता है。
बिस्कुट बनाने के लिए उपयुक्त लाल अनाज (Red grain) वाली किस्मों का प्रजनन:
मदुरै - तिरुमंगलम (Madurai - Tirumangalam) क्षेत्र में बिस्कुट सेनचोलम (Sencholam) से बनाया जाता है。
सेलम (Salem) - उबले हुए लाल अनाज का उपयोग उपभोग (Consumption) के लिए किया जाता है。
पय्यूर 2 (Paiyur 2) किस्म लाल अनाज वाली किस्म है。
पोषण गुणवत्ता (Nutritional quality) वाली किस्मों का प्रजनन:
सामान्य प्रोटीन = 7-8% जिसमें 1.9 से 2.5% लाइसिन (Lysine), 9.3 से 11.6% ल्यूसीन (Leucines) होता है。
प्रोटीन में 12% तक की वृद्धि संभव है, लेकिन समस्या अक्षमता (Disability) है। दो उच्च लाइसिन इथियोपियन रेखाएं (High lysine Ethiopean lines) IS 11167 और IS11758 जिनमें 15% प्रोटीन होता है। hl जीन मोनोजेनिक अप्रभावी (Monogenic recessive) है और बीज सिकुड़े हुए (Shrivelled) और लाल रंग के होते हैं。
स्थानीय आवश्यकताओं (Local needs) को पूरा करने के लिए:
'कली' (Kali) तैयार करने के लिए छोटे मोती जैसे सफेद अनाज (Small pearly white grain) का उपयोग किया जाता है, जिसकी भंडारण गुणवत्ता (Keeping quality) उच्च होती है। S. roxburghi (तलाई विरिचन चोलम) उपयुक्त है और इसे कई जिलों में उगाया जाता है。
Co19 और पय्यूर 2 किस्में इसके उदाहरण हैं。
कोशिकाद्रव्यी जेनिक नर बंध्य रेखाओं (Cytoplasmic genic male sterile lines) के वैकल्पिक स्रोतों (Alternate sources) को अलग करना:
मौजूदा CMS रेखाओं में आधार के रूप में A1 कोशिकाद्रव्य (A1 cytoplasm) होता है। अन्य स्रोत भी हैं जैसे, A2, A3, A4 और A5। लेकिन ये सभी घासीय ज्वार (Grassy sorghum) में हैं और पर्ण रोगों (Foliar diseases) के प्रति संवेदनशील (Susceptible) हैं। इसमें हमें सुधार (Improve) करना होगा। मालदांडी 35 GA (Maldandi 35 GA), G.I.A. जैसी स्थानीय किस्में भी हैं, लेकिन वे मौसम के लिए बाध्य (Season bound) और लंबी अवधि (Long duration) की हैं。
ज्वार एक बहुधा पर-परागित फसल (Often cross pollinated crop) है। इसलिए किस्म की शुद्धता (Varietal purity) बनाए रखने के लिए 400 मीटर की पृथक्करण दूरी (Isolation distance) आवश्यक है। अरहर (Red gram) जैसी अन्य बहुधा पर-परागित फसलों की तुलना में, ज्वार में अंतःप्रजात (Inbreds) का रखरखाव आसान है। भूरा कागज (Brown paper) रखकर और स्वपरागण (Selfing) कराके आनुवंशिक शुद्धता (Genetic purity) को बनाए रखा जा सकता है。
| किस्म (Variety) | वंशावली (Parentage) | अवधि (Duration - days) |
|---|---|---|
| K5 | IS 3541 से पुनर्चयन (Reselection) | 95 |
| K7 | K3 x M 35-1 | 110 |
| Co19 (तलाईविरिचन चोलम - Talaivirichan cholam) | Co 2 से म्यूटेंट (mutant) | 145 |
| Co 25 | थ्री-वे क्रॉस व्युत्पन्न | 105 |
| Co 26 | MS 8271 x IB 3691 | 110 |
| Co 27 | Co 11 x S. halapense | 60 |
| Co21 | CSV 5 का म्यूटेंट | 105 |
| K 8 | IS 12611 x SPV 105 | 85 |
| K 9 | M 36200 x तेनकासी वेल्लई (Tenkasi vellai) | 120 |
| K 10 | K 7 x SPV 102 | 115 |
| K 11 | K 7 x A 6552 | 115 |
| पय्यूर-1 (Paiyur-1) | Co19 x Co24 | 145 |
| BSR - 1 | मल्टीपल क्रॉस व्युत्पन्न (multiple cross derivative) | 110 |
| पय्यूर 2 (सेनचोलम - Sencholam) | IS 15845 से PLS | 95 |
| संकर | वंशावली | अवधि |
|---|---|---|
| CoH 2 (कोविल पट्टी टॉल - Kovil Patti Tall) | 2219 A x IS 3541 | 90 |
| CoH 3 | 2077 A x Co 21 | 110 |
| CoH 4 | 296 A x TN 30 | 110 |
| CSH 5 | 2077 A x CS 3541 | 100 |
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