बाजरा

Pennisetum glaucum \((2n = 14)\)

(कंबू, बाजरा, बुलरुश बाजरा - Cumbu, Bajra, Bulrush millet)

उत्पत्ति (Origin): पश्चिम अफ्रीका (West Africa)।

वर्गीकरण (Taxonomy): Pennisetum वंश (genus) में 140 से अधिक प्रजातियां (species) हैं। स्टैफ (Stapf, 1954) ने Pennisetum वंश को पांच वर्गों (sections) में विभाजित किया, जैसे:

  1. जिम्नोथ्रिक्स (Gymnothrix)
  2. यूपेनिसेटम (Eupennisetum)
  3. पेनिसिलारिया (Penicillaria)
  4. हेटेरोस्टैचिया (Heterostachya)
  5. ब्रेविवाल्वुला (Brevivalvula)

खेती की जाने वाली Pennisetum glaucum पेनिसिलारिया वर्ग से संबंधित है।

उत्पत्ति और संभावित जनक (Origin and putative parents):

स्टैफ ने पेनिसिलारिया में 32 प्रजातियों को शामिल किया। अफ्रीका में पाई जाने वाली इन 32 प्रजातियों में से छह वार्षिक (annuals) प्रजातियों को जंगली और खेती वाले बाजरे का संभावित पूर्वज (probable ancestors) माना जाता है। वे हैं:

  1. Pennisetum perottettii
  2. P. molllissimum
  3. P. violaceum
  4. P. versicolor
  5. P. adonense
  6. P. gymnothrix

ऐसा माना जाता है कि Pennisetum की खेती वाली प्रजाति की उत्पत्ति इन छह प्रजातियों के बीच संकरण (hybridization) से हुई है।

प्रजनन में उपयोग की जाने वाली जंगली प्रजातियां (Wild species utilised in breeding):

इस वर्ग की एक अन्य प्रजाति P. purpureum है, जो एक राइजोमेटस बहुवर्षीय (rhizomatus perennial) पौधा है जिसमें गुणसूत्र संख्या (chromosome number) \(2n = 28\) होती है।

अंतर-वंश संकरण (Inter generic crosses):

चारा सुधार (fodder improvement) के लिए बफेल घास (Buffel grass) Cenchrus ciliaris या Pennisetum ciliare का कंबू के साथ संकरण (cross) करने के लिए उपयोग किया जाता है।

प्रजनन के उद्देश्य (Breeding objectives):

  1. अधिक अनाज उपज के लिए प्रजनन (Breeding for high grain yield):

    अधिक उपज प्राप्त करने के लिए पौधे के निम्नलिखित गुण (characters) आवश्यक हैं:

    1. अधिक संख्या में टिलर (tillers)
    2. अच्छी तरह से भरी हुई, सघन (compact) और लंबी बालियां (panicle)।
    3. भारी दाने (heavy grains)।
    4. पकने में एकरूपता (Uniformity of ripening)।

    सिंचित परिस्थितियों (irrigated conditions) में बहुफसली (multiple) और रिले क्रॉपिंग (relay cropping) के लिए प्रकाश असंवेदनशीलता (photo insensitivity) और जल्दी पकना (early maturity) आवश्यक है।

  2. बेहतर अनाज गुणवत्ता के लिए प्रजनन (Breeding for improved grain quality):

    विटामिन ए (vitamin A) की मात्रा बढ़ाने के लिए पीले भ्रूणपोष (yellow endosperm) या प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए सफेद भ्रूणपोष (white endosperm) को शामिल करके इसे प्राप्त किया जा सकता है।

  3. सूखा सहिष्णुता के लिए प्रजनन (Breeding for drought tolerance):

    यह कम अवधि वाली लाइनें (lines) विकसित करके प्राप्त किया जा सकता है ताकि वे सूखे से बच (escape drought) सकें। अधिक अपस्थानिक जड़ों (adventitious roots), उच्च पत्ती जल विभव (high leaf water potential) और उच्च क्लोरोफिल स्थिरता सूचकांक (high chlorophyll stability index) वाली लाइनों को विकसित किया जाना चाहिए।

  4. रोग प्रतिरोधकता के लिए प्रजनन (Breeding for disease resistance):

    डाउनी मिल्ड्यू (Downy mildew) प्रमुख रोग है। इसके बाद एर्गोट (Ergot) और स्मट (smut) आते हैं। हाल ही में, बाद की अवस्था में रस्ट (rust) भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। स्थानीय बेल्लारी साइटोप्लाज्म (Local Bellary cytoplasm - 732 A) वाली लाइनें डाउनी मिल्ड्यू प्रतिरोधी (downy mildew resistant) देखी गई हैं。

  5. नर बंध्य लाइनों (male sterile lines) में कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) के वैकल्पिक स्रोत के लिए प्रजनन:

    टिफ्टन, जॉर्जिया में विकसित मूल टिफ्ट 23 ए (Original Tift 23 A) डाउनी मिल्ड्यू के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (highly susceptible) है। इस कारण एचबी सीरीज (HB series) की खेती बंद हो गई। बेल्लारी से प्राप्त स्वदेशी (indigenous) 732 A प्रतिरोधी है। इसी तरह लुधियाना की L 111A भी सहिष्णु (tolerant) है। यहाँ A1, A2, A3 और A4 कोशिकाद्रव्य हैं, जिनमें से 732 A, A4 साइटोप्लाज्म से संबंधित है।

  6. उच्च चारा मूल्य (high forage value) वाले मीठे कंबू के लिए प्रजनन:

    चारे वाले कंबू में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:

    1. तने के रस (stem juice) में उच्च शर्करा (sugar) की मात्रा।
    2. अधिक चौड़ाई के साथ पत्तियों की संख्या में वृद्धि।
    3. सुपाच्यता (Digestibility)।

    इस संबंध में, प्रकाश संवेदनशीलता (photo sensitiveness) वाले छोटे दिन वाले पौधे (short day plants) पसंद किए जाते हैं क्योंकि वे लंबी अवधि तक वानस्पतिक चरण (vegetative phase) में रहते हैं। कम तने की ऊंचाई वाली बौनी किस्मों (dwarf varieties) का प्रजनन करना आदर्श है।

    उपयोग की जाने वाली जंगली प्रजातियां (Wild species utilised): P. purpureum, P. squamulatum, P. orientale, P. ciliare.

प्रजनन की विधियाँ (Methods of breeding):

  1. पुरःस्थापन (Introduction): पंजाब से हाइब्रिड बाजरा। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) से Tift 23 A।
  2. चयन (Selection):
  3. संकरण और चयन (Hybridisation and selection):
  4. हेटेरोसिस प्रजनन (Heterosis breeding): हाइब्रिड बाजरा (Hybrid bajra)

    शुरुआती दिनों में नर बंध्य लाइनों की पहचान से पहले, प्रोटोगाइनस (protogynous - स्त्रीपूर्वता) प्रकृति का उपयोग करके संकर किस्में (hybrids) जारी की गई थीं। संकर किस्में दोनों जनकों को 1:1 के अनुपात में बोकर उत्पादित की गई थीं। X1, X2, X3 इसके उदाहरण हैं। इस मामले में दो संकर प्राप्त होते हैं।

    टिफ्टन, जॉर्जिया में बर्टन (Burton) द्वारा साइटोप्लाज्मिक जेनिक मेल स्टेराइल लाइन (CGMS line) टिफ्ट 23A की खोज के बाद संकरों का विकास हुआ। भारत के पहले संकर जैसे HB1, HB2 से HB5 टिफ्ट 23 A का उपयोग करके उत्पादित किए गए थे। लेकिन डाउनी मिल्ड्यू के प्रति संवेदनशीलता के कारण उनकी खेती बंद हो गई। बर्टन द्वारा CGMS लाइनों की खोज से पहले ही कोयंबटूर में माधव मेनन और उनके सहकर्मियों द्वारा इसकी खोज कर ली गई थी। दुर्परिणति से प्रकाशन न होने के कारण इसे मान्यता नहीं मिली।

    डाउनी मिल्ड्यू की समस्या को दूर करने के लिए नर बंध्य लाइनें L 111A और 732 A को पृथक (isolated) किया गया और वर्तमान में प्रजनन कार्यक्रम में उपयोग किया जाता है।

    नाथ सीड्स, महिको, महेंद्रा जैसी निजी एजेंसियों द्वारा विकसित कई CMS लाइनें हैं।

  5. समष्टि सुधार (Population improvement):

    ICRISAT की प्रविष्टि WCC 75 समष्टि सुधार का एक उदाहरण है। इसे आवर्ती चयन विधि (recurrent selection method) द्वारा विश्व सम्मिश्र (world composite) से विकसित किया गया था। इसे जर्मप्लाज्म के विविध स्रोतों और नाइजीरियाई जल्दी पकने वाली लैंड रेस (land races) जिन्हें 'गेरो' (Gero) बाजरा कहते हैं, के बीच कई क्रॉस (crosses) के डेरिवेटिव से विकसित किया गया था। ICRISAT का ICMV 155 एक और उदाहरण है। TNAU में 1987 के दौरान कम्पोजिट Co7 (Composite Co7) जारी किया गया था।

  6. संश्लेषित किस्में (Synthetic varieties):

    सिंथेटिक्स (Synthetics) का उत्पादन अलगाव (isolation) में कई लाइनों के संकरण द्वारा किया जाता है जिनका उनके GCA (General Combining Ability) के लिए परीक्षण किया गया है। उदाहरण: ICMS 7703। यह भारत की 7 इनब्रेड लाइनों (inbred lines) x अफ्रीकी क्रॉस के बीच संकरण का परिणाम है।

  7. उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation breeding):

    IARI में Tift 23 A को गामा विकिरण (gamma irradiated) दिया गया और डाउनी मिल्ड्यू के प्रति प्रतिरोधी 5071 A विकसित की गई। इसके साथ संकर (hybrid) NHB 3 विकसित किया गया।

भविष्य के लक्ष्य (Future thrust):

  1. अप्रयुक्त लैंड रेस (un exploited land races) और विदेशी किस्मों (exotics) का संग्रह, जर्मप्लाज्म का निर्माण (building up of germ plasm) और उनका उपयोग।
  2. अच्छी संयोजन क्षमता (combining ability) वाले जल्दी पकने वाले रिस्टोरर (restorers) का विकास।
  3. नर बंध्य लाइनों का आनुवंशिक (Genetic) और साइटोप्लाज्मिक विविधीकरण (cytoplasmic diversification)।
  4. व्यापक संकरण (wide hybridization) के लिए कार्यप्रणाली (methodologies) तैयार करना और रोग प्रतिरोधी किस्में (disease resistant varieties) विकसित करने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग (genetic engineering) का उपयोग।

तमिलनाडु के लिए उपयुक्त बाजरा की किस्में (Bajra varieties suitable for Tamil Nadu)

किस्म (Variety) वंशावली (Parentage) अवधि (Duration - days)
सम्मिश्र (Composites)
K 3 Composite 85
Co 7 Composite 90
WCC 75 Composite 95
संकर
X 6 732 A x PT 3090 90
X 7 L111A x PT 1890 90
NHB 3 5071 A x J 104 90

तेनई / फॉक्सटेल बाजरा (TENAI / Fox tail millet)

Setaria italica \((2n = 18)\)

A. पुष्पीय जीव विज्ञान (Floral biology)

पुष्पक्रम (Inflorescence) एक स्पाइक (spike) होता है, जो शीर्षस्थ (terminal) और झुका हुआ (drooping) होता है। स्पाइकलेट्स (spikelets) आकार में अंडाकार (oval) या दीर्घवृत्ताकार (elliptical) होते हैं जिनमें दो से तीन शूक (bristles) होते हैं। स्पाइकलेट्स में दो फूल होते हैं जो आंशिक रूप से दो झिल्लीदार ग्लूम (membranous glumes) द्वारा संरक्षित होते हैं। निचला पुष्पक (lower floret) L1 और P1 के साथ, बंध्य (sterile) होता है; ऊपरी पुष्पक (upper floret) L2, P2 के साथ, तीन पुंकेसर (stamens), दो वर्तिकाएं (styles) होती हैं, फल एक कैरियोप्सिस (caryopsis) है।

B. पुष्पन और परागण (Anthesis and pollination)

पुष्पन (Flowering) मुख्य बाली (main panicle) में ऊपर से नीचे की ओर बढ़ता है और इसी तरह बाली की प्रत्येक शाखा (panicle branches) में सिरे से नीचे की ओर बढ़ता है। स्टिग्मैटिक शाखाएं (stigmatic branches) सबसे पहले उभरती हैं। परागकोश (anthers) बाहर निकलने के बाद ऊपर से नीचे की ओर अनुदैर्ध्य स्लिट्स (longitudinal slits) द्वारा फटना (dehiscing) शुरू कर देते हैं, इस प्रक्रिया में लगभग तीन मिनट लगते हैं। पहले परागकोश के उभरने के पांच से दस मिनट बाद, अन्य दो बाहर धकेल दिए जाते हैं। परागण (pollination) के बाद लॉडिक्यूल (lodicules) सिकुड़ जाते हैं और ग्लूम (glumes) बंद होने लगते हैं। एक बाली (earhead) को अपना पुष्पन पूरा करने में दस से पंद्रह दिन का समय लगता है। उभरने के तीसरे से छठे दिन तक बड़ी संख्या में फूल खिलते हैं। एक दिन में फूल आने के दो समय होते हैं, एक रात 10 बजे से 12 बजे के बीच और दूसरा सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच। स्व-परागण (Self pollination) एक नियम है।

🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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