दलहन (PULSES)

दलहन की फसलें आमतौर पर अनाज (cereals) की तुलना में कम उपज देती हैं। दलहन प्रोटीन (protein) से भरपूर होते हैं और कार्बोहाइड्रेट (carbohydrates) की तुलना में समान वजन का प्रोटीन संश्लेषित करने के लिए अधिक ऊर्जा लगती है। जब आप विभिन्न चयापचय पथों (metabolic pathways) की ऊर्जा आवश्यकता की तुलना करते हैं, तो एक ग्राम ग्लूकोज (glucose) से \(0.8g\) कार्बोहाइड्रेट मिल सकता है, लेकिन औसतन केवल लगभग \(0.5g\) प्रोटीन और इससे भी कम तेल (oil) मिलता है।

इसके अलावा, जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) के रखरखाव के लिए प्रकाश संश्लेषित पदार्थों (photosynthate) के लंबे समय तक उपयोग की आवश्यकता होती है और इस प्रकार बीजों में भंडारण के लिए उपलब्ध ऊर्जा कम हो सकती है। कम उपज के अन्य कारण हैं:

  1. उप-सीमांत भूमि (submarginal lands) में उगाया जाना।
  2. अनिश्चित वृद्धि की आदत (indeterminate growth habit)।
  3. अनियमित रूप से फूल आना (irregular flowering)।
  4. प्रकाश संवेदनशीलता (photosensitiveness)।

दलहन से मिलने वाला प्रोटीन अधूरा होता है। फलियां (Legumes) लाइसिन (lysine), ट्रिप्टोफैन (tryptophan) और थ्रेओनिन (threonine) का अच्छा स्रोत हैं, लेकिन इनमें सल्फर (sulphur) युक्त अमीनो एसिड (amino acids) मेथियोनीन (methionine), सिस्टीन (cystine) और सिस्टीन (cystene) की मात्रा कम होती है, जो अनाज में पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसलिए भोजन के लिए अनाज और दलहन के मिश्रण की सिफारिश की जाती है। कई अनाज फलियों में विषाक्त अवरोधक (toxic inhibitors) होते हैं जिन्हें पकाते समय हटा दिया जाता है।

अरहर (RED GRAM)

अन्य नाम: अरहर (Arhar), तूर (Tur), पिजन पी (Pigeon pea)

वानस्पतिक नाम: Cajanus cajan (\(2n = 22\))

उत्पत्ति स्थान (Place of origin): अफ्रीका (Africa) / एशिया (Asia)

जंगली प्रजातियां (Wild Species): Cajanus kerstingii

संबंधित संकरणीय वंश (Related crossable genera): Rhynchosia

संभावित जनक (Putative parent):

यह माना जाता है कि खेती की जाने वाली Cajanus की उत्पत्ति Atylosia से हुई है। Atylosia lineata संभवतः Cajanus का पूर्वज हो सकता है। पश्चिमी घाट में A. lineata और A. sericea को स्थानीय लोग 'बार्न तूर' (barn tur - जंगली तूर) के रूप में जानते हैं, इसी तरह पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में A. scaraboides और A. cajanifolia को जंगली तूर कहते हैं। Atylosia वंश को अब Cajanus में शामिल कर लिया गया है।

वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से दो अलग-अलग किस्मों का वर्णन किया गया था:

लेकिन उपरोक्त वर्गीकरण अब मान्य नहीं है क्योंकि कई मध्यवर्ती रूप (intermediate forms) मौजूद हैं और फसल में अक्सर पर-परागण (cross pollination) की प्रकृति के कारण किस्मों में अंतर करना मुश्किल होता है।

प्रजनन के उद्देश्य (Breeding objectives)

  1. स्थानीय भूमि किस्मों (land races) को बदलने के लिए वर्षा आधारित (rainfed) क्षेत्रों के लिए उपयुक्त लंबी अवधि की उच्च उपज वाली किस्म का विकास:
  2. मूंगफली के साथ सिंचित / मिश्रित फसल (mixed crop) के लिए उपयुक्त कम अवधि (105 दिन) वाली किस्मों का विकास करना:
  3. वांछनीय बीज आवरण (seed coat) रंग के साथ बड़े दाने (bold grain) वाले प्रकार के लिए प्रजनन:
  4. सब्जी प्रकार (vegetable type) के लिए प्रजनन:
  5. कीटों के प्रति प्रतिरोधकता के लिए प्रजनन:
  6. रोग प्रतिरोधकता (disease resistance) के लिए प्रजनन:
  7. उच्च प्रोटीन सामग्री और गुणवत्ता (high protein content and quality) के लिए प्रजनन:
  8. मेड़ों (bunds) पर फसल उगाने के लिए उपयुक्त उच्च उपज वाली बहुवर्षीय अरहर का प्रजनन:

प्रजनन विधियाँ (Breeding methods)

  1. पुरःस्थापन (Introduction): उदाहरण: IARI से कम अवधि वाली किस्म प्रभात (Prabhat), ICRISAT से ICPL 87।
  2. शुद्ध वंशक्रम चयन (Pure line selection): पहले प्रजनन का कार्य इस धारणा पर आधारित था कि अरहर एक स्व-परागित (self-pollinated) फसल है। हालांकि, बाद में यह पाया गया कि यह अक्सर पर-परागित (cross-pollinated) फसल है। SAI, तिरुपत्तूर (Tirupathur) स्थानीय से एक शुद्ध वंशक्रम चयन है।
  3. संकरण और चयन (Hybridization and selection):
  4. सामूहिक चयन (Mass selection)
  5. समष्टि सुधार (Population improvement):
  6. उत्परिवर्तन प्रजनन:
  7. हेटेरोसिस प्रजनन (Heterosis breeding):

अरहर के आदर्श पौधे का प्रकार (Red gram Ideal plant type)

लंबी अवधि (Long duration):

कम अवधि (Short duration):

तमिलनाडु के लिए अरहर की किस्में (RED GRAM VARIETIES FOR TAMIL NADU)

किस्में (Varieties) वंशावली (Parentage) अवधि (Duration - दिन)
SA 1 तिरुप्पत्तूर स्थानीय (Thirupattur local) से शुद्ध वंशक्रम चयन (PLS) 160-180
Co 3 Co 1 का उत्परिवर्ती 90-95
Co 4 जीन पूल (gene pool) से शुद्ध वंशक्रम चयन 90-95
Co 5 Co 1 का उत्परिवर्ती 100-110
Co 6 SA 1 का उत्परिवर्ती 160-180
Vamban 1 (T12 x 102) 95-100
APK 1 ICPL 87101 से PLS 95-105
VBN 2 ICPL 341 x BSR local 170-185

संकर (Hybrids)

संकर वंशावली अवधि (Duration)
CoRH 1 Ms T 21 x ICPL 87109 110
CoRH 2 Ms Co 5 x ICPL 83027 110

CoRH 1 अरहर का संकर बीज उत्पादन (Hybrid Seed Production of CoRH 1 Pigeonpea)

व्यावसायिक खेती के लिए संकर ओज (hybrid vigour) के उपयोग में, संकर बीज का कुशल उत्पादन आवश्यक है। संकर बीज उत्पादन को अधिकतम करने और संकर बीज की गुणवत्ता में सुधार करने के दोहरे उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संकर बीज उत्पादन में शामिल विभिन्न चरणों का पूरा ज्ञान आवश्यक है।

संकर बीज उत्पादन के लिए, नर बंध्य (male sterile) और पराग जनक का 4:1 अनुपात अपनाया जाता है। संकर बीज उत्पादन भूखंड के लिए पर्याप्त अलगाव दूरी (isolation distance) यानी 200 मीटर से अधिक की आवश्यकता होती है। बीज उत्पादन भूखंड से 200 मीटर के दायरे में अरहर की कोई अन्य फसल नहीं होनी चाहिए। चूंकि टेस्ट क्रॉस (test cross) सिद्धांत का पालन करते हुए नर बंध्यता को विषमयुग्मजी (heterozygous) अवस्था में बनाए रखा जाता है, इसलिए नर बंध्य समष्टि में 1:1 के अनुपात में उर्वर (fertile) और बंध्य (sterile) पौधे होंगे। इसलिए फूल खिलने से पहले नर बंध्य समष्टि में नर उर्वर पौधों को हटाना अनिवार्य है। बचे हुए उर्वर पौधों के पराग द्वारा संदूषण (contamination) से बचने के लिए अवांछनीय पौधों को हटाने (roguing) का काम पूरी तरह से किया जाना चाहिए।

संकर बीज उत्पादन में शामिल चरण (Steps involved in hybrid seed production)

  1. स्थान का चयन (Selection of site):
  2. उर्वरक (Fertilizer):
  3. बुवाई (Sowing):
  4. सिंचाई (Irrigation):
  5. अवांछित पौधों को निकालना (Rogueing):
  6. कटाई (Harvesting):

नर बंध्य लाइन का उत्पादन और रखरखाव (Production and maintenance of male sterile line)

संकर बीज उत्पादन में आनुवंशिक नर बंध्यता (Genetic male sterility) का उपयोग किया जाता है। अरहर के मामले में, नर बंध्य लाइन 1:1 के अनुपात में उर्वर और बंध्य में पृथक्कृत (segregate) होगी। नर बंध्य समष्टि (जिसे अलगाव में उगाया जाना है) के रखरखाव के लिए, नर बंध्य पौधों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें टैग (tag) किया जाना चाहिए, और उर्वर पौधों को बिना टैग किए बनाए रखना चाहिए। नर बंध्य लाइनों को कीट परागणकर्ताओं (insect pollinators) के माध्यम से समष्टि में मौजूद नर उर्वर पौधों के पराग द्वारा प्राकृतिक रूप से परागित किया जाएगा। पकने के बाद, टैग किए गए नर बंध्य पौधों से बीज एकत्र किए जाते हैं और उनका उपयोग फिर से नर बंध्य लाइनें बनाने या संकर बीज बनाने के लिए किया जाएगा।

संकर बीज उत्पादन और नर बंध्य लाइन के रखरखाव के बीच मुख्य अंतर यह है कि संकर बीज उत्पादन के दौरान नर बंध्य समष्टि से नर उर्वर पौधों को हटा दिया जाता है, जबकि नर बंध्य लाइन के रखरखाव के दौरान उन्हें बनाए रखा जाता है।

🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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