तिल (Gingelly, Til, Ellu)
Sesamum indicum \(2n = 26\)
उत्पत्ति का केंद्र (Centre of origin): अफ्रीका (Africa)
संबंधित प्रजातियां (Related species): अब तक सेसमम (sesamum) वंश (genus) में 36 प्रजातियां (species) दर्ज की गई हैं, जिनमें से 20 अफ्रीका में पाई जाती हैं।
प्रजनन कार्यक्रम (Breeding programme) में उपयोग की जाने वाली जंगली प्रजातियां (Wild species)
- S. alatum \(2n = 26\) : पर्णगुच्छ (Phyllody) के प्रति प्रतिरोधी (Resistant)। \(S. alatum \times S. indicum\)। alatum में प्रसुप्ति (dormancy) होती है।
- S. malabaricum \((2n = 26)\) : केरल के त्रावणकोर में पाया जाता है। यह खेती वाले तिल (cultivated gingelly) के साथ स्वतंत्र रूप से संकरण (crosses) करता है। तेल की मात्रा (Oil content) कम, 32% है। इसका उपयोग खेती वाले तिल में नर बंध्यता (male sterility) को प्रेरित (induce) करने के लिए किया जाता है।
- S. laciniatum \(2n = 32\) : पर्णगुच्छ, सूखा (drought) और जैसिड (jassid) के प्रति सहिष्णु (Tolerant)। उर्वर स्व-संकर बहुगुणित (Fertile auto allopolyploid) जो \(S. indicum \times S. laciniatum\) को संकरण (crossing) करके उत्पादित किया जाता है। (Sterile, Double.)
- S. prostratum : दक्षिण भारत (S.India) में पाया जाता है \((2n = 26)\)। सूखे के प्रति सहिष्णु (Tolerant to drought)।
प्रजनन के उद्देश्य (Breeding objectives)
- सूखे के प्रति सहिष्णु उच्च उपज देने वाली किस्मों (high yielding varieties) का प्रजनन (Breeding)।
- सफेद बीज वाली किस्मों (white seeded varieties) का प्रजनन: सफेद बीज वाली पंक्तियों (white seeded lines) से सर्वोत्तम गुणवत्ता (Finest quality) का तेल प्राप्त होता है।
- एकल तने वाली किस्मों (mono stemmed varieties) का विकास: इससे प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक जनसंख्या (population) और उपज (yield) बढ़ाई जा सकती है। एकल तने वाली किस्में कम उपज देने वाली (low yielders) होती हैं।
- बहु-संपुट (multicapsule) / अक्ष (axil) और बहु-अंडपी (multicarpellary) किस्मों का विकास।
- धान की परती वाली किस्में (Rice fallow varieties): अवधि (duration) में छोटी।
- न झड़ने वाली किस्में (Non-shattering varieties): अफ्रीकी पंक्तियाँ (African lines)।
- रोग प्रतिरोधी (Resistant to disease): चूर्णिल आसिता (Powdery mildew); पर्णगुच्छ - जंगली प्रजातियों से स्थानांतरण (transfer from wild species)।
प्रजनन के तरीके (Breeding Methods)
- पुरःस्थापन (Introduction): अफ्रीकी पंक्तियाँ।
- शुद्ध वंशक्रम चयन (Pure line selection):
- TMV4 - सत्तूर स्थानीय (Sattur local)
- TMV5 - श्रीवैकुण्डम स्थानीय (Srivaikundam local)
- TMV6 - आंध्र स्थानीय (Andhra local)
- SVPR1 - पश्चिमी घाट (Western Ghat) सफेद बीज की किस्म
- संकरण और चयन (Hybridization and selection):
- a) अंतर-किस्मीय (Inter varietial): Co1 (TMV 3 x SI 1878) x SI 1878, TMV 3 (दक्षिण अर्काट स्थानीय x मालाबार स्थानीय), Paiyur-1
- b) अंतर-विशिष्ट (Inter specific): S. malabaricum के साथ संकरण द्वारा विकसित नर बंध्य पंक्तियाँ (Male sterile lines)।
- समष्टि सुधार (Population improvement)
- बहुगुणिता प्रजनन (Polyploidy breeding)
- संकर ओज प्रजनन (Heterosis breeding): दललग्न प्रकृति (Epipetalous nature) के कारण विपुंसन (emasculation) और संकरण आसान हो जाता है। CMS पंक्तियों (lines) के उपयोग का भी प्रयास किया जा रहा है।
- भ्रूण बचाव तकनीक (Embryo rescue technique)
तमिलनाडु के लिए तिल की किस्में (SESAMUM VARIETIES FOR TAMIL NADU)
| किस्म (Variety) |
वंशावली (Parentage) |
अवधि |
| Co 1 | x SI 1878 | 90 |
| TMV 3 | दक्षिण अर्काट स्थानीय (South Arcot local) x मालाबार स्थानीय (Malabar local) | 80 |
| TMV 4 | शुद्ध वंशक्रम चयन | 80 |
| TMV 5 | श्रीवैकुण्डम स्थानीय से शुद्ध वंशक्रम चयन (PLS) | 80 |
| TMV 6 | आंध्र स्थानीय से चयन | 85 |
| SVPR 1 | पश्चिमी घाट सफेद (Western Ghat white) से चयन | 80 |
| Paiyur 1 | SI 2511 x SI 2314 | 90 |
| VRI 1 | त्रिपुत्तूर स्थानीय (Tripathur local) से चयन | 75 |
सरसों और तोरिया (MUSTARD and RAPE SEED)
Brassica sp \((2n = 16, 18, 20, 22, 36, 38 \text{ and } 48)\)
Brassicaceae or cruciferae
Brassica वंश में 3000 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें से 40 का आर्थिक महत्व (economic importance) है। खेती की जाने वाली (cultivated) ब्रासिका को मोटे तौर पर दो अलग-अलग प्रकारों (distinct types) में विभाजित किया जा सकता है:
- सब्जी का प्रकार (Vegetable type): पत्ता गोभी (Cabbage), फूलगोभी (Cauliflower), शलजम (turnip)
- तिलहन का प्रकार (Oil seed type): तोरिया (Rape seed) और सरसों (mustard)।
वर्गिकी (Taxonomy)
हर्बर्ड (Harberd, 1972) ने Brassica की 85 प्रजातियों का परीक्षण किया और वंश की प्रजातियों को साइटोडेम (cytodemes) में समूहीकृत (grouped) किया। ये साइटोडेम समान गुणसूत्र संख्या (chromosome number) वाली विभिन्न प्रजातियों से बने होते हैं जो संकर उर्वर (cross fertile) होती हैं, और अन्य में विभिन्न गुणसूत्र संख्या वाली प्रजातियां होती हैं जो संकर अनुर्वर (cross infertile) होती हैं। उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण कृषि प्रजातियां (agricultural species) चार द्विगुणित (diploids) और तीन परबहुगुणित (allopolyploids) हैं, जिनमें से प्रत्येक एक अलग साइटोडेम से संबंधित है।
चार द्विगुणित (Four diploids) हैं:
- B. nigra - काली सरसों (Black mustard)
- B. oleracea - पत्ता गोभी
- B. campestris - तोरिया
- B. tournefortii - जंगली शलजम (Wild turnip)
तीन परबहुगुणित (Three allopolyploids) हैं:
- B. napus - यूरोप की तोरिया (Rape seed of Europe)
- B. juncea - भारतीय सरसों (Indian mustard)
- B. carinata - इथियोपियन सरसों (Ethiopian mustard) (सब्जी / तिलहन)
तिलहन ब्रासिका (oilseed brassicas) के बीच आनुवंशिक संबंध (genetical relationship) को आरेखीय रूप (diagrammatically) से इस प्रकार दर्शाया गया है:
$$B. nigra (BB) \quad n=8$$
$$B. carinata (BC) \quad n=17$$
$$B. juncea (AB) \quad n=18$$
$$B. oleracea (CC) \quad n=9$$
$$B. napus (AC) \quad n=19$$
$$B. campestris (AA) \quad n=10$$
B. napus आसानी से B. campestris के साथ संकरण (cross) करेगा लेकिन B. oleracea के मामले में बहुत कठिनाई के साथ।
तोरिया और सरसों (Rape seed and Mustard)
| वनस्पतिक नाम (Botanical name) |
2n |
आर्थिक लक्षण (Economic characters) |
| तोरिया |
| 1. Brassica campestris |
20 |
भारतीय तोरिया (Indian Rape Seed)। प्रकृति में स्व-बंध्य (Self sterile)। उत्तर भारत की महत्वपूर्ण तिलहन फसल (oil seed crop)। 3 खेती योग्य प्रकार (Cultivated types):
B. campestris var. Brown sarson
B. campestris var. Yellow sarson
B. campestris var. toria |
| 2. B. napus |
38 |
यूरोपीय तोरिया (European Rape Seed)। स्व-उर्वर (Self fertile)। |
| सरसों |
| 1. B. nigra |
16 |
काली सरसों: यूरेशिया (Eurasia) का मूल निवासी। 28% स्थिर तेल (fixed oil)। दवा (medicine) के रूप में उपयोग किया जाता है, ग्लूकोसाइड सिनीग्रिन (glucoside sinigrin) के कारण तीखा (pungent)। |
| 2. B. alba |
24 |
सफेद सरसों (White mustard): युवा अंकुर (Young seedling) सलाद (Salad) के रूप में उपयोग किए जाते हैं, पीला बीज 30% तेल। |
| 3. B. juncea |
36 |
भारतीय सरसों। राई (RAI) 35% तेल। जड़ी-बूटी (herb) के रूप में उपयोग की जाने वाली पत्तियों में सिनीग्रिन (sinigrin) होता है। |
सरसों के प्रजनन के उद्देश्य
- बीज की उपज (Seed yield): उपज कई जैविक प्रक्रियाओं (biological processes) का अंतिम उत्पाद है जो जटिल बहुजीनी प्रणालियों (complex polygenic systems) के नियंत्रण में हैं। एक आदर्श पौधे के प्रकार (ideal plant type) में शाखाओं की संख्या (branch number), प्रति पौधे फली (pods per plant), प्रति फली बीज (seeds per pod) और बीज का आकार (seed size) अधिक होना चाहिए। इसके अलावा बायोमास (biomass) और कटाई सूचकांक (harvest index) में वृद्धि के परिणामस्वरूप उपज में वृद्धि हो सकती है। प्रकाश श्वसन (photo respiration) में कमी और प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की प्रकाश संतृप्त दर (light saturated rate) में वृद्धि के परिणामस्वरूप बायोमास में वृद्धि हो सकती है।
- शीघ्र परिपक्वता (Early maturity): विभिन्न बहु-फसल अनुक्रमों (multiple cropping sequence) में उपयोग के लिए।
- अजैविक कारकों के प्रति प्रतिरोध (Resistance to abiotic factors): उपज के नुकसान को रोकने के लिए पाले से बचाव (Frost resistance) की आवश्यकता होती है। शीत कठोरता (Winter hardiness) बहुत महत्वपूर्ण है।
- जैविक तनाव के प्रति प्रतिरोध (Resistance to biotic stress):
- चूर्णिल आसिता
- ब्लैक लेग (Black leg)
- स्क्लेरोटिनिया रॉट (Sclerotinia rot), अल्टरनेरिया अंगमारी (alternaria blight)
- सरसों का एफिड (mustard aphid) - अब तक कोई प्रतिरोध स्रोत (resistance source) नहीं पहचाना गया है।
- शाकनाशी प्रतिरोध (Herbicide resistance): (एट्राज़िन सिमाज़िन - Atrazine simazine)। प्रतिरोध के कुछ स्रोत (sources of resistance) उपलब्ध हैं।
- झड़ने के प्रति प्रतिरोध (Shattering resistance):
- B. napus - अत्यधिक झड़ने वाला (highly shattering)
- B. juncea - सहिष्णु। अंतर्वेशी प्रजनन (Introgressive breeding) किया गया।
- बढ़ी हुई तेल की मात्रा और गुणवत्ता (Increased oil content and quality): उच्च तेल की मात्रा 45% पीली बीज वाली किस्मों (yellow seed varieties) > तेल। औद्योगिक उद्देश्य (industrial purpose) के लिए > इरुसिक एसिड (Erucic acid)। खाद्य उद्देश्य के लिए कम इरुसिक एसिड वाली किस्मों (cultivars) का विकास। कम लिनोलेनिक एसिड सामग्री (linolenic acid content) भी वांछनीय (desirable) है।
- भोजन की गुणवत्ता (Meal quality): कम ग्लूकोसिनोलेट सामग्री (Glucosinolate content) वाला भोजन (Meal)।
प्रजनन के तरीके
- पुरःस्थापन: स्वीडन (Sweden) से रेजिना (Regina)।
- सरल चयन (Simple selection): उदा. सीता (Seeta), कृष्णा (Krishna), क्रांति (Kranti)।
- संकरण और चयन:
- अंतर-किस्मीय (Intervarietal):
- पुंज विधि (Bulk method)
- वंशावली विधि (Pedigree method)
- एकल बीज वंशज (single seed descent)
- अंतर-विशिष्ट
- प्रतीप संकरण विधि (Back cross method)
- समष्टि सुधार: आवर्ती वरण (R S - Recurrent Selection), समूह चयन (mass selection)।
- संकर ओज प्रजनन: CMS पंक्तियाँ।
- उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation breeding): उदा. रेजिना, RLM 198।
- समयुग्मजी द्विगुणित (homozygous diploids) के उत्पादन के लिए ऊतक संवर्धन तकनीक (Tissue culture technique): लवणता प्रतिरोध स्क्रीनिंग (Saline resistance screening)। अगुणितों (haploids) में उत्परिवर्तन का प्रेरण (Induction of mutation)।
- अंतर-विशिष्ट संकरण (inter specific crosses) के लिए भ्रूण बचाव तकनीक।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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