गन्ना

Saccharum sp

ये बहुवर्षीय घास (perennial grasses) की छह प्रजातियाँ हैं, जिनकी उत्पत्ति पुरानी दुनिया (old world) में हुई है। इन छह में से दो जंगली अवस्था (wild state) में पाई जाती हैं। ये हैं S. spontaneum (जिसका वितरण उत्तर-पूर्वी अफ्रीका से लेकर एशिया और प्रशांत महासागर तक है) और S. robustum (जो न्यू गिनी (New Guinea) और पड़ोसी द्वीपों तक सीमित है)। अन्य चार प्रजातियाँ कृष्य (cultigens) हैं:

  1. S. officinarum - न्यू गिनी का नोबल केन (Noble cane)
  2. S. barberi - उत्तर भारतीय गन्ना
  3. S. sinensis - चीनी गन्ना (Chinese cane)
  4. S. edule - मेलेनेशियन गन्ना (Melenesian cane)

वर्गीकरण, उत्पत्ति और वितरण (Systematics, origin and distribution)

1. Saccharum spontaneum (\(2n = 40 - 128\))

यह एक बहुवर्षीय घास है, जिसमें स्वतंत्र कल्ले (free tillering) निकलते हैं और अक्सर प्रकंद (Rhizomes) पाए जाते हैं। S. spontaneum एक बहुगुणित श्रृंखला (polyploid series) का प्रतिनिधित्व करता है। सबसे कम गुणसूत्र (chromosome) संख्या वाले रूप उत्तर भारत में पाए जाते हैं, जो शायद इसकी उत्पत्ति का केंद्र (centre of origin) है। S. officinarum के साथ प्राकृतिक संकरण (Natural hybridization) से S. barberi और S. sinense की उत्पत्ति हुई होगी।

S. spontaneum का आधुनिक वाणिज्यिक संकरों (commercial hybrids) के प्रजनन (breeding) में S. officinarum के साथ नोबलाइजेशन (nobilisation) की प्रक्रिया द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। S. spontaneum ओज (vigour), कठोरता (hardiness) और बीमारियों के खिलाफ प्रतिरोध (resistance against diseases) प्रदान करता है。

2. Saccharum robustum (\(2n = 60 - 194\))

उत्पत्ति: न्यू गिनी, ओजस्वी बहुवर्षीय (vigorous perennial)। S. robustum से ही संभवतः S. officinarum की उत्पत्ति हुई है, जिसके साथ यह अंतर-प्रजननक्षम (interfertile) है। S. robustum मोज़ेक वायरस (mosaic virus) और लीफ स्केल (leaf scale) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (highly susceptible) है, और इस कारण से प्रजनन कार्यक्रम (breeding programme) में इसका उपयोग बहुत सीमित है।

3. Saccharum officinarum (\(2n = 80\))

उत्पत्ति: दक्षिण प्रशांत (South pacific)।

चबाने वाला गन्ना (Chewing cane)। नोबल गन्ना।

यह गन्ना उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों (tropical conditions) के अनुकूल है और इसके अच्छे प्रदर्शन के लिए अनुकूल मिट्टी और जलवायु की आवश्यकता होती है। इसके तने मोटे, मजबूत (stout), उच्च सुक्रोज (high in sucrose) वाले, कम फाइबर (low in fibre) वाले और मुलायम छिलके (soft rind) वाले होते हैं। नोबल गन्ने अधिकांश बीमारियों के प्रति संवेदनशील (susceptible) होते हैं। कुछ शुरुआती कृष्य-प्रभेद (cultivars) बोरबॉन (Bourbon), चेरिबॉन (Cheribon), और नोबल गन्ने हैं।

4. Saccharum barberi (\(2n = 82 - 124\))

S. barberi मोटाई में छोटा-मध्यम से पतला (short medium to slender) होता है, जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक (high fibre content), सुक्रोज की मात्रा मध्यम (medium sucrose) और उपज कम (poor yielder) होती है।

5. Saccharum sinense (\(2n = 18\))

चीनी गन्ना। लंबा, ओजस्वी (vigorous), पतला (slender), उच्च फाइबर सामग्री। रस की गुणवत्ता खराब (Poor juice quality) होती है।

6. Saccharum edule (\(2n = 118\))

पॉलिनेशियन गन्ना (Polynesian cane)। पतला, खरपतवार जैसा रूप (weed like form)। इसके बीज खाने योग्य (edible) होते हैं। इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता है।

गन्ने में नोबलाइजेशन (Nobilisation in Sugar cane)

नोबलाइजेशन का अर्थ है नोबल गन्ने S. officinatum का S. barberi या S. spontaneum के साथ संकरण (crossing) करना और नोबल गन्ने में बीमारी और कीट प्रतिरोध (disease and pest resistance) को शामिल करना। नोबलाइजेशन का पहला सफल उपयोग तब किया गया जब किस्म चेरिबॉन को S. barberi किस्म के साथ क्रॉस किया गया और सेरेह रोग (sereh disease) के प्रति प्रतिरोध रखने वाली संततियों (progenies) को विकसित किया गया। लेकिन वे मोज़ेक (mosaic) के प्रति संवेदनशील थे और सुक्रोज सामग्री (sucrose content) में घटिया (inferior) थे। बाद में S. officinatrum के साथ फिर से संकरण (यानी दूसरा और तीसरा नोबलाइजेशन) करके, POJ 2878 जैसी अच्छी किस्में विकसित की गईं।

भारत में, स्थानीय S. spontaneum का नोबलाइजेशन बार्बर (Barber) और वेंकट रमन (Venkata raman) द्वारा 1912 में एसबीआई कोयंबटूर (SBI Coimbatore) में शुरू किया गया था। कोयंबटूर में, शुरू में S. barberi (जो अनुत्पादक (unproductive) है लेकिन उत्तर भारत की जलवायु के अनुकूल (adapted) है) के स्थानीय प्रभेदों (strains) और उष्णकटिबंधीय नोबल गन्ने (मोटा मुलायम तना, उच्च सुक्रोज सामग्री लेकिन उत्तर भारत की जलवायु के लिए अनुपयुक्त) के बीच क्रॉस किए गए थे। बाद में इन परिणामी संकरों (resultant hybrid) को जंगली गन्ने S. spontaneum के साथ क्रॉस करके, उत्तर भारत के लिए उपयुक्त उच्च सुक्रोज सामग्री वाले गन्ने विकसित किए गए। इस तरह बड़ी संख्या में त्रि-संकर गन्ने (tri-hybrid canes) विकसित किए गए।

प्रजनन के उद्देश्य (Breeding objectives)

  1. गुड़ (Jaggery) बनाने के लिए उपयुक्त किस्मों का प्रजनन: Co 853, Co 62175, CoC67
  2. कारखाने के उद्देश्यों (factory purposes) के लिए किस्मों का प्रजनन - उच्च ब्रिक्स मान (high Brix value) और रिकवरी प्रतिशत (recovery %): Co 658, Co 772, Coc 8001
  3. सभी तीन मौसमों के लिए उपयुक्त किस्मों का प्रजनन:
  4. प्ररोह बेधक (shoot borer) के प्रति प्रतिरोधी किस्मों का प्रजनन।
  5. रोग प्रतिरोधी (disease resistance) किस्मों का प्रजनन - जैसे प्ररोह रोग (shoot disease), रस्ट (Rust), और ब्राउन स्पॉट (Brown spot)।
  6. उच्च पेड़ी क्षमता (high ratooning ability) वाली किस्मों का प्रजनन।
  7. सूखा प्रतिरोध (drought resistance) वाली किस्मों का प्रजनन।
  8. अधिक संख्या में उत्पादक कल्ले (productive tillers) वाली किस्मों का प्रजनन।
  9. उपज में कमी के बिना (without yield loss) छोटी अवधि (shorter duration) वाली किस्में: COC 671

कोयंबटूर के लिए गन्ने की किस्में (Sugar cane varieties for Coimbatore)

मौसम (Season) कारखाना (Factory) गुड़
अगेती COC 90063 COC 91061
मध्य COC 91061 COC 776
पछेती COC 774 Co 740
विशेष (Special) Co 8201 Co 8021

नवीनतम किस्म (Latest variety): COC 99061
(Co 6806 x Co 740)
मध्य और पछेती मौसम के लिए उपयुक्त (Suitable for mid and late season)।

🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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