चुकंदर (Sugar Beet)

वानस्पतिक नाम: Beta vulgaris (2n = 18)
कुल: चीनोपोडिएसी (Chenopodiaceae)

उत्पत्ति स्थान (Place of Origin): उत्तरी यूरोप (Northern Europe)

वर्गीकरण (Classification):

जीनस Beta में तेरह प्रजातियां शामिल हैं जिन्हें चार वर्गों (sections) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। जैसे (Viz.):

खेती की जाने वाली Beta vulgaris में चुकंदर (Beet Sugar), सब्जी चुकंदर (Vegetable beet root) और चारा चुकंदर (forage beet root) शामिल हैं। वल्गेरिस वर्ग के सभी सदस्य आपस में आसानी से संकरण (inter cross freely) करते हैं।

चुकंदर में बोल्टिंग (Bolting in Sugar beet):

चुकंदर सामान्यतः एक द्विवर्षीय (biennial) पौधा है। यह पहले वर्ष में एक बड़ी रसीली जड़ (succulent root) और दूसरे वर्ष में एक बीज का डंठल (seed stalk) विकसित करता है। कभी-कभी कोई पौधा पहले वर्ष में ही बीज का डंठल पैदा कर देता है, जिसे बोल्टिंग (bolting) कहा जाता है। बोल्टर्स सामान्य जड़ का विकास नहीं करते हैं और इसलिए उपज कम हो जाती है। लंबी ठंडी अवधि (prolonged cool periods) द्वारा बोल्टिंग को प्रेरित किया जा सकता है जिसका उपयोग बीज उत्पादन के लिए किया जाता है। कुछ जंगली प्रजातियां स्वभाव से वार्षिक (annual) होती हैं।

प्रजनन कार्यक्रम में तेजी से पीढ़ी वृद्धि (rapid generation advancement) के साथ-साथ बीज उत्पादन के लिए फोटोथर्मल प्रेरण (Photothermal induction) की प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। इसमें निरंतर कृत्रिम प्रकाश (artificial light) और ठंडे तापमान (cool temperature) का उपयोग शामिल है।

चुकंदर के फोटोथर्मल प्रेरण की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. प्रेरण पूर्व अवधि (Pre induction period): पौधों को स्क्रीन हाउस में दो सप्ताह तक गमलों में उगाया जाता है। गमले से 30 इंच की ऊंचाई पर लगे 150 वॉट के बिजली के बल्ब से निरंतर प्रकाश प्रदान करें।
  2. प्रेरण उपचार (Induction treatment): प्रकाश का प्रावधान जारी रखें लेकिन यह 20 इंच की ऊंचाई से होना चाहिए। यह दस सप्ताह तक किया जाता है। इस दस सप्ताह की अवधि के दौरान तापमान \(46^\circ \text{F}\) से \(49^\circ \text{F}\) पर बनाए रखा जाता है।
  3. प्रेरण के बाद की अवधि (Post induction period): पौधे (seedlings) को खेत में रोपें (Transplant)। अगले दो सप्ताह तक प्रकाश व्यवस्था जारी रखें। गर्म तापमान से बचाव करें। इस तरह हम 6 महीने के भीतर बीज प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन प्राप्त बीजों की मात्रा कम होगी।

वनस्पति विज्ञान (Botany)

चुकंदर में आमतौर पर पर-परागण (cross pollination) होता है, वे उच्च स्तर की स्व-असंगतता (self-incompatibility) प्रदर्शित करते हैं जो पर-परागण का मुख्य कारण है। फूल अकेले या घने गुच्छों (dense clusters) में पैदा होते हैं। फूल छोटे, बिना पंखुड़ियों वाले (without petals) और पूर्ण (perfect) होते हैं। पुंकेसर (Stamens) की संख्या पांच होती है। अंडाशय (Ovary) आम तौर पर एक बीज वाला होता है। फूलों के गुच्छों का परिदलपुंज (perianth) एक साथ मिलकर एक बहु-बीज वाली स्थिति (multi-seeded condition) बनाता है, यानी बीज की गेंद (Seed Ball)।

बीज की गेंद अंकुरित होने पर पौधों का गुच्छा पैदा करती है जिसके लिए नमी (humidity) की आवश्यकता होती है। इसलिए मोनो-सीडेड (mono seeded) किस्मों की आवश्यकता होती है जो प्रजनन उद्देश्यों (breeding objectives) के लिए उपयोगी है।

संकरण तकनीक (Crossing technique):

स्व-उर्वर लाइनों (self fertile lines) में कागज के कवर के साथ स्व-परागण (selfing) किया जाता है। ऐसी लाइनों में विपुंसन (Emasculation) सुई (needle) और चिमटी (forceps) की मदद से परागकोष (anther) को बाहर निकालकर किया जाता है। पराग (pollen) का छिड़काव (dusting) एक सप्ताह के भीतर किया जा सकता है। स्व-बाँझ लाइनों (self sterile lines) में लाल रंग की हाइपोकोटिल लाइनों (hypocotyl lines) को परागणक (pollinators) (नर मूल / male parent) के रूप में उपयोग करके, हम आसानी से F1 संकरों की पहचान कर सकते हैं।

प्रजनन के उद्देश्य:

  1. रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन (Breeding for disease resistance):
    कर्ली टॉप वायरस (Curly top Virus), सर्कोस्पोरा लीफ स्पॉट (Cercospora leaf spot) और जड़ सड़न (root rot)।
  2. नॉन-बोल्टिंग प्रकारों के लिए प्रजनन (Breeding for Non-bolting types):
    जो पहले उगने वाले F1 को अनुमति देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप लंबी वृद्धि अवधि (longer growth period) मिलती है।
  3. मोनोजर्म बीज के लिए प्रजनन (Breeding for monogerm seed):
    फूल अकेले पैदा होते हैं।
  4. गुणवत्ता के लिए प्रजनन (Breeding for quality):
    कटाई (harvest) और प्रसंस्करण (processing) के बीच चुकंदर को आमतौर पर बड़े ढेरों में लंबे समय तक रखा जाता है, जहाँ चीनी का काफी भंडारण नुकसान (storage loss) होता है। बेहतर भंडारण गुणवत्ता (improved storage quality) के लिए प्रजनन में शामिल हैं:
    1. जड़ों में कम श्वसन दर (low respiration rate) के लिए चयन।
    2. भंडारण सड़न (storage rot) के लिए जड़ों का प्रतिरोध।
    अन्य गुणवत्ता लक्षण टीएसएस (TSS), रस की शुद्धता (purity of juice), रैफिनोज सामग्री (raffinose content), राख (ash) और नाइट्रोजन सामग्री (nitrogen content) हैं।

प्रजनन विधियाँ (Breeding Methods):

  1. सामूहिक चयन (Mass selection):
    इसका उपयोग कर्ली टॉप वायरस प्रतिरोधी किस्में (curly top virus resistant varieties) विकसित करने में किया जाता है।
  2. फैमिली लाइन ब्रीडिंग (Family line breeding):
    यह कमोबेश इयर टू रो ब्रीडिंग (ear to row breeding) के समान है। उपज और चीनी की मात्रा के लिए क्रॉस मदर बीट्स (Cross mother beets) को सावधानीपूर्वक चुना जाता है और संतति पंक्तियों (progeny rows) में उनका परीक्षण किया जाता है। संतति पंक्तियों में प्रदर्शन के परीक्षण के दौरान, बीज के एक हिस्से को प्रतिरोधी बीज (resistant seed) के रूप में रखा जाता है। संतति पंक्तियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों की पहचान करने के बाद, बचे हुए बीजों (remnant seeds) का उपयोग आगे के गुणन (multiplication) के लिए किया जाता है।
  3. संकरण और चयन (Hybridization and selection):
    फसल की द्विवर्षीय प्रकृति के कारण यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया (time-consuming process) है। फोटो थर्मल प्रेरण (photo thermal induction) का पालन करके तेजी से पीढ़ी वृद्धि संभव हो जाती है।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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