आलू (Potato)
Solanum tuberosum (2n = 48)
चतुरगुणित (Tetraploid)
उत्पत्ति स्थान (Place of origin): दक्षिण अमेरिका (South America)।
पूर्वज (Ancestry):
- द्विगुणित (Diploid) कृष्य किस्म S. stenotomum (2n = 24) का प्राकृतिक द्विगुणन (Natural doubling)।
- द्विगुणित जंगली प्रजातियों (Wild species) S. sparsipilum और S. vernerii के प्राकृतिक संकरण (Natural crossing) द्वारा।
वर्गीकरण (Classification): Hawkes (1992) के अनुसार, Solanum tuberosum के अलावा आलू की लगभग छह अन्य कृष्य प्रजातियों (Cultivated species) और 230 से अधिक जंगली प्रजातियों को आमतौर पर मान्यता प्राप्त है।
- द्विगुणित (2n = 24)
- S. ajanhuiri - पाला प्रतिरोधी (Frost resistant)
- S. phureja - कम अवधि (Short duration)। 4 महीने, कोई सुप्तावस्था (Dormancy) नहीं।
- S. stenotomum - लंबी अवधि, 6 महीने की सुप्तावस्था।
- त्रिगुणित (Triploid) (2n = 36)
- S. chauca
- S. juseczuki
- चतुरगुणित (2n = 48)
Solanum tuberosum
- उप-प्रजातियां (Subspecies)
S. t. ssp tuberosum
S. t. ssp andigena - उच्च ऊंचाई वाला आलू (High altitude potato)
- पंचगुणित (Pentaploid)
- S. curtilobium - पाला प्रतिरोधी।
प्रजनन के उद्देश्य (Breeding objectives):
- उच्च उपज के लिए प्रजनन (Breeding for high yield):
कंदों (Tubers) की उपज कंदों की संख्या, कंद के आकार और कंद के वितरण द्वारा तय की जाती है।
- कंद की बेहतर आकारिकी (Morphology) वाली किस्मों के लिए प्रजनन:
कंद की बेहतर आकारिकी निम्न द्वारा निर्धारित होती है:
- आँख की गहराई (Eye depth)
- गूदे का रंग (Flesh colour)
- वृद्धि दरारें (Growth cracks)
- खोखला हृदय (Hollow heart)
- आकार (Shape)
- त्वचा का रंग (Skin colour)
- बेहतर गुणवत्ता के लिए प्रजनन (Breeding for better quality):
यह कई कारकों पर निर्भर करता है:
- पकाने के बाद काला पड़ना (After cooking blackening)
- शुष्क पदार्थ (Dry matter)
- एंजाइम ब्राउनिंग (Enzyme browning)
- ग्लाइकोअल्कलॉइड स्तर (Glycoalkaloid level)
- अपचायक शर्करा की मात्रा (Reducing sugar content)
- भंडारण गुण (Storage properties)
- रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन (Breeding for disease resistance):
अगेती झुलसा (Early blight), पछेती झुलसा (Late blight), चूर्णी खुरंड (Powdery scab), वर्टिसिलियम विल्ट (Verticillium wilt), वायरस रोग (Virus diseases)।
प्रतिरोधी स्रोत (Resistant source): S. demissum, S. acaule ssp. andigena
- कीट प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रजनन (Breeding for pest resistance):
निमेटोड (Nematode) प्रमुख कीट है। ssp. andigena - सहिष्णु (Tolerant)।
S. verineii एफिड्स (Aphids) और कोलोराडो बीटल (Colorado beetle) के प्रति प्रतिरोधी है।
प्रजनन की विधियाँ (Breeding methods):
- क्लोनीय प्रवर्धन (Clonal propagation):
यह अंतर-विशिष्ट संकरणों (Inter-specific crosses) के मामले में उपयोगी है जहाँ संततियों (Progenies) में अक्सर कम उर्वरता (Low fertility) देखी जाती है। इसके अलावा हेटेरोसिस (Heterosis) को स्थिर करना आसान है। इसका नुकसान स्टॉक को बीमारी से मुक्त रखना है। लेकिन इन-विट्रो प्रवर्धन (In-vitro propagation) का पालन करके इसे दूर किया जा सकता है।
- नियंत्रित परागण (Controlled pollination):
आलू में यह कुछ हद तक आसान है क्योंकि फूल खिलने से पहले या उसके तुरंत बाद परागकोश (Anthers) नहीं फटते (Dehisce)। पराग (Pollen) हवा द्वारा आसानी से वितरित नहीं होता है। यदि हम कीट-रोधी स्क्रीन हाउस में संकरण ब्लॉक उगाते हैं, तो स्वपरागण (Selfing) और संकरण कवर के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है।
एकमात्र कठिनाई बीज सेट (Seed set) के प्रतिशत में संकरण है। संकरण \(22^\circ C\) पर की जानी चाहिए। पराग और बीजांड (Ovule) बंध्यता (Sterility) होती है।
- समष्टि प्रजनन (Population breeding):
आधार समष्टि (Base population) में सुधार के लिए इसका पालन किया जाता है।
- सत्य आलू बीज (True potato seed - TPS):
बीज के उपयोग के माध्यम से प्रवर्धन - चीन में प्रचलित है। इस विधि से वायरस रोगों से बचा जा सकता है।
- द्विगुणित (Diploids) और मोनोहेप्लॉइड (Monohaploids) का उत्पादन:
मूल रूप से द्विगुणित का उत्पादन tuberosum को द्विगुणित S. phureja के साथ क्रॉस कराके और अनिषेकजनन (Parthenogenesis) की अनुमति देकर किया गया था। लेकिन अब एंथर कल्चर (Anther culture) द्वारा इसका आसानी से उत्पादन किया जाता है।
- उत्परिवर्तन प्रजनन (Mutation breeding):
त्वचा का रंग बदलने के लिए इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
टैपिओका या कसावा (Tapioca / Cassava)
Manihot esculenta (2n = 36)
कुल (Family): यूफोरबिएसी (Euphorbiaceae)
उत्पत्ति (Origin): मध्य अमेरिका (Central America)।
कृष्य (Cultivated) Manihot esculenta में कोई जंगली प्रजाति नहीं देखी जाती है। कृष्य कसावा को दो व्यापक समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है: a) मीठा कसावा (Sweet cassava) और b) कड़वा कसावा (Bitter cassava)।
- मीठा कसावा: कम अवधि (Shorter in duration), कंद 6-9 महीनों में परिपक्व होते हैं। सायनोजेनिक ग्लूकोसाइड (Cyanogenic glucoside) मुख्य रूप से बाहरी त्वचा (Periderm) तक ही सीमित होता है।
- कड़वा कसावा: लंबी अवधि (Longer in duration), परिपक्व होने में 12-18 महीने लगते हैं। सायनोजेनिक ग्लूकोसाइड कोर (Core) सहित पूरे कंद में वितरित होता है। पीले गूदे (Yellow flesh) वाली किस्मों में ग्लूकोसाइड अधिक होगा।
कंद की संरचना (Structure of tuber):
- बाहरी त्वचा (Outer skin) / पेरीडर्म / छिलका (Peel)
- छाल (Rind) या कॉर्टेक्स (Cortex)
- कोर या पिथी (Pith) - खाने योग्य भाग (Edible)
- पेरीडर्म: मृत कोशिकाओं (Dead cells) से बना होता है जो कंद की सतह को सील कर देता है। आम तौर पर भूरे रंग का होता है।
- कॉर्टेक्स: 1-2 मिमी मोटा, आमतौर ক্রিম (White) रंग का लेकिन कभी-कभी गुलाबी या भूरा हो सकता है। पेरीडर्म और कॉर्टेक्स को सामूहिक रूप से छिलका कहा जाता है।
- कोर या पिथ (Core or Pith): यह खाने योग्य हिस्सा है और इसमें ज्यादातर पैरेन्काइमेटस कोशिकाएं (Parenchymatous cells) होती हैं जिनमें बड़ी मात्रा में संग्रहीत स्टार्च (Starch) होता है। कंद के गूदे (Flesh) और कॉर्टेक्स पर लेटेक्स (Latex) पाया जाता है।
जड़ कंद का विकास (Root tuber development):
कसावा कंद की उत्पत्ति तब होती है जब एक रेशेदार जड़ (Fibrous root) में द्वितीयक मोटाई (Secondary thickening) होती है जो पहले मिट्टी में प्रवेश कर चुकी होती है। इस प्रकार, कंद के विकास में अनिवार्य रूप से जड़ की परिधि (Girth) में वृद्धि होती है। परिधि में वृद्धि रोपण (Planting) के दूसरे महीने के अंत तक शुरू हो जाती है और बड़ी मात्रा में स्टार्च का संचय होता है। स्टार्च का संचय पहले समीपस्थ सिरे (Proximal end - जड़ के जुड़ाव की ओर) और बाद में दूरस्थ सिरे (Distal end - जुड़ाव से दूर) पर होता है। शारीरिक (Physiologically) रूप से कसावा कंद निष्क्रिय (Inactive) होता है, क्योंकि इसमें कोई आँखें (Eyes) या कलियाँ (Buds) मौजूद नहीं होती हैं, इसलिए कसावा कंद का उपयोग प्रवर्धन (Propagation) के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है।
शकरकंद (Sweet Potato)
Ipomoea batatas
(षट्गुणित (Hexaploid) - 2n = 90)
कुल: कनवल्वुलेसी (Convolvulaceae)
उत्पत्ति: मध्य अमेरिका
पूर्वज (Progenitors): संभावित पूर्वज Ipomoea tiliacea हैं - जो काफी हद तक I. batatas के समान हैं।
खरपतवार प्रजाति (Weedy species) - I. trifida
शकरकंद की उत्पत्ति एक चतुरगुणित (2n = 60) और एक द्विगुणित (2n = 30) के संकरण द्वारा एम्फिडिप्लॉइडी (Amphidiploidy) से हुई, जिससे एक त्रिगुणित (2n = 45) का उत्पादन हुआ, और उसके बाद गुणसूत्रों (Chromosomes) के द्विगुणन (Doubling) से षट्गुणित (2n = 90) बना।
$$ \text{Tetraploid } (2n = 60) \times \text{ Diploid } (2n = 30) $$
$$ \downarrow $$
$$ \text{Triploid } (2n = 45) $$
$$ \downarrow \text{Doubling} $$
$$ \text{Hexaploid } (2n = 90) $$
वर्गीकरण:
इस कुल में लगभग 45 जेनेरा (Genera) और 1000 प्रजातियां (Species) शामिल हैं। लेकिन भोजन के रूप में केवल Ipomoea batatas का ही आर्थिक महत्व (Economic importance) है। पकाने के बाद कंद की संरचना (Tuber structure) के आधार पर किस्मों (Cultivars) को तीन समूहों में बांटा जा सकता है:
- पकाने के बाद सख्त, शुष्क, चूर्णयुक्त गूदे (Firm, dry, mealy flesh) वाले
- पकाने के बाद नरम, नम, जिलेटिनस गूदे (Soft, moist, gelatinous flesh) वाले
- बहुत खुरदरे कंदों (Coarse tubers) वाले जो केवल पशु आहार (Animal feed) या औद्योगिक उपयोग (Industrial use) के लिए उपयुक्त हैं।
🔄 संस्करण 2.0 अद्यतन (Version 2.0 Update)
अंतिम अद्यतन (Last Updated): 7 सितंबर 2026
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