104. बीज प्रमाणीकरण एवं विनियामक अधिनियम: भारतीय बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968, केंद्रीय बीज समिति, केंद्रीय बीज प्रयोगशाला एवं बीज निरीक्षक के अधिकार व कर्तव्य (SEED CERTIFICATION AND REGULATORY ACTS: THE SEEDS ACT 1966, SEEDS RULES 1968, CENTRAL SEED COMMITTEE, SEED TESTING LABORATORIES & STATUTORY ENFORCEMENT)
1. भारतीय बीज अधिनियम, 1966 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य (Historical Background & Objectives of the Seeds Act, 1966)
भारत में हरित क्रांति के आगमन के साथ ही उन्नत किस्मों एवं संकर बीजों की मांग में भारी वृद्धि हुई। किसानों को उच्च गुणवत्तायुक्त, आनुवंशिक रूप से शुद्ध एवं उच्च अंकुरण क्षमता वाले बीज उपलब्ध कराने तथा बाजार में घटिया, मिलावटी एवं अमानक बीजों की बिक्री को रोकने के उद्देश्य से संसद द्वारा भारतीय बीज अधिनियम, 1966 (The Seeds Act, 1966 - Act No. 54 of 1966) पारित किया गया।
- पारित होने की तिथि: 29 दिसंबर 1966।
- लागू होने की तिथि: 2 अक्टूबर 1969 से यह अधिनियम संपूर्ण भारतवर्ष में पूर्णतः प्रभावी हुआ।
- अधिनियम का मुख्य उद्देश्य:
1. कृषि एवं बागवानी फसलों के अधिसूचित प्रकारों (Notified kinds) एवं किस्मों (Notified varieties) के बीजों की बिक्री, आयात एवं वितरण में गुणवत्ता मानकों का नियमन करना।
2. बीजों की भौतिक शुद्धता (Physical purity), अंकुरण क्षमता (Germination percentage) एवं आनुवंशिक शुद्धता (Genetic purity) के न्यूनतम मानक तय करना।
3. बीजों के सही लेबलिंग (Truthful labelling) एवं स्वैच्छिक प्रमाणीकरण (Voluntary certification) की वैधानिक व्यवस्था स्थापित करना।
2. महत्वपूर्ण वैधानिक परिभाषाएं (Important Statutory Definitions - Section 2)
- बीज (Seed - Section 2(11)): इसके अंतर्गत निम्नलिखित सभी जीवित पादप प्रवर्धन सामग्री शामिल है:
• खाद्यान्न, दालों, तिलहनों, कपास, चारे एवं सब्जियों के बोने योग्य बीज।
• कंद (Tubers), प्रकंद (Rhizomes), शल्ककंद (Bulbs), जड़ें (Roots), कटिंग्स (Cuttings), कलमें तथा प्रवर्धन हेतु प्रयुक्त रोपण सामग्री।
• जूट एवं रेशेदार फसलों के बीज।
- अधिसूचित प्रकार या किस्म (Notified Kind or Variety - Section 2(9)): वह फसल प्रकार या किस्म जिसे केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी कर अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया हो।
- केंद्रीय बीज समिति (Central Seed Committee - Section 3): केंद्र सरकार द्वारा गठित शीर्ष सलाहकार निकाय।
- बीज विश्लेषक (Seed Analyst - Section 12): राज्य या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत प्रयोगशाला विशेषज्ञ जो नमूनों का परीक्षण करता है।
- बीज निरीक्षक (Seed Inspector - Section 13): सरकार द्वारा नियुक्त वैधानिक अधिकारी जो बीज गुणवत्ता नियंत्रण एवं कानूनों के प्रवर्तन हेतु अधिकृत है।
3. केंद्रीय बीज समिति एवं उप-समितियां (Central Seed Committee - Section 3)
- गठन: केंद्र सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रशासन से उत्पन्न मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देने हेतु किया जाता है।
- समिति की संरचना:
• अध्यक्ष (Chairman): केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत विशेषज्ञ।
• सदस्य (Members): प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा मनोनीत 1-1 प्रतिनिधि, कृषि अनुसंधान संस्थानों (ICAR), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU) के प्रजनक तथा बीज उद्योग के प्रतिनिधि।
• सचिव: संयुक्त सचिव (बीज), भारत सरकार।
- केंद्रीय बीज समिति के मुख्य कार्य:
1. नई पादप किस्मों की अधिसूचना (Notification) की संस्तुति करना।
2. विभिन्न फसलों के न्यूनतम अंकुरण, भौतिक शुद्धता एवं आनुवंशिक शुद्धता मानकों का निर्धारण करना।
3. राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसियों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना।
4. केंद्रीय एवं राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं (Seed Testing Laboratories - Section 4)
- केंद्रीय बीज प्रयोगशाला (Central Seed Laboratory - CSL):
• भारत सरकार द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय रेफरल प्रयोगशाला (वर्तमान में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान - IARI, नई दिल्ली में कार्यरत)।
• कार्य: न्यायालयों से भेजे गए विवादित नमूनों (Referee samples) का अंतिम व बाध्यकारी विश्लेषण करना तथा राष्ट्रीय मानकों का मानकीकरण।
- राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं (State Seed Testing Laboratories - SSTL):
• प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा स्थापित प्रयोगशालाएं जहाँ बीज निरीक्षकों एवं बीज उत्पादकों द्वारा भेजे गए नियमित नमूनों की शुद्धता, अंकुरण एवं नमी की जांच की जाती है।
5. बीज प्रमाणीकरण एजेंसी (Seed Certification Agency - Section 8)
- स्थापना: केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा स्वायत्त निकाय के रूप में राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी (SSCA) का गठन किया जाता है।
- कार्य एवं दायित्व:
1. बीज उत्पादक संस्थाओं व कृषकों के खेतों का समय-समय पर निरीक्षण करना।
2. पृथक्करण दूरी (Isolation distance), रोगिंग (Roguing) एवं फसल स्वास्थ्य की निगरानी करना।
3. मानक पाए जाने पर आधिकारिक प्रमाण-पत्र, नीला टैग (Blue tag) एवं सील जारी करना।
6. बीज निरीक्षक की शक्तियां, कर्तव्य एवं नमूनाकरण प्रक्रिया (Powers of Seed Inspector & Sampling - Sections 13 to 15)
बीज निरीक्षक की वैधानिक शक्तियां (Section 14):
- किसी भी स्थान (दुकान, गोदाम, फार्म, प्रसंस्करण संयंत्र या परिवहन वाहन) में जहाँ बीज बेचा, संग्रहीत या ले जाया जा रहा हो, बिना पूर्व सूचना के प्रवेश करना और तलाशी लेना।
- बिक्री हेतु प्रदर्शित या संग्रहीत किसी भी बीज लॉट का वैधानिक नमूना (Official Sample) प्राप्त करना।
- यदि बीज इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाए, तो संबंधित अभिलेख, रजिस्टर, बिल बुक जब्त करना तथा बीज के स्टॉक को अधिकतम 30 दिनों की अवधि हेतु सील/जब्त (Seize) करना।
नमूनाकरण की विस्तृत वैधानिक प्रक्रिया (Sampling Procedure - Section 15 & Form IV):
- बीज निरीक्षक विक्रेता को निर्धारित प्रपत्र-IV (Form IV) में लिखित सूचना देकर नमूना लेगा।
- लिए गए बीज नमूने को तीन समान भागों (3 Equal Parts) में विभाजित किया जाएगा और तीनों को नमी-रोधी पात्रों में भरकर आधिकारिक मोहर/सील (Seal) लगाई जाएगी:
• प्रथम भाग: उस बीज विक्रेता को दिया जाएगा जिससे नमूना लिया गया है।
• द्वितीय भाग: विश्लेषण हेतु निर्धारित राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला (SSTL) को भेजा जाएगा।
• तृतीय भाग: न्यायालयी साक्ष्य अथवा विवाद की स्थिति में केंद्रीय बीज प्रयोगशाला को भेजने हेतु सुरक्षित रखा जाएगा।
- बीज विश्लेषक द्वारा प्रपत्र-VII (Form VII) में विश्लेषण रिपोर्ट जारी की जाती है।
7. दण्ड के प्रावधान एवं न्यायालयी प्रक्रिया (Penalties & Legal Procedures - Sections 19 to 21)
- धारा 19 (Penalties): यदि कोई व्यक्ति बीज अधिनियम के किसी प्रावधान या नियमों का उल्लंघन करता है (जैसे अमानक बीज बेचना, गलत लेबल लगाना, निरीक्षक को रोकना):
• प्रथम अपराध (First Offence): ₹500 तक का आर्थिक जुर्माना।
• द्वितीय एवं परवर्ती अपराध (Subsequent Offence): अधिकतम 6 माह तक का कारावास अथवा ₹1000 तक का जुर्माना अथवा दोनों।
- जब्ती (Forfeiture - Section 20): अपराध सिद्ध होने पर न्यायालय द्वारा संबंधित बीज स्टॉक को सरकार के पक्ष में जब्त किया जा सकता है।
- कंपनियों द्वारा अपराध (Section 21): यदि अपराध किसी कंपनी/फर्म द्वारा किया गया है, तो कंपनी के साथ-साथ अपराध के समय व्यवसाय के संचालन हेतु प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी प्रत्येक निदेशक व प्रबंधक व्यक्तिगत रूप से दोषी माना जाएगा।
समीक्षा प्रश्न / वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Review Questions / MCQs)
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भारतीय बीज अधिनियम (The Seeds Act, 1966) पूरे देश में किस ऐतिहासिक तिथि से लागू हुआ?
(a) 2 अक्टूबर 1969 (सही उत्तर)
(b) 29 दिसंबर 1966
(c) 15 अगस्त 1947
(d) 26 जनवरी 1950
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बीज निरीक्षक द्वारा लिए गए आधिकारिक नमूने को कितने समान भागों में सील किया जाता है?
(a) 3 समान भागों में (सही उत्तर)
(b) 2 भागों में
(c) 4 भागों में
(d) 1 भाग में
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बीज अधिनियम की किस धारा के अंतर्गत बीज निरीक्षक को स्टॉक जब्त (Seize) करने का अधिकार प्राप्त है?
(a) धारा 14 (Section 14 - सही उत्तर)
(b) धारा 3
(c) धारा 8
(d) धारा 25
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विवाद की स्थिति में बीज नमूनों का अंतिम व बाध्यकारी विश्लेषण करने वाली भारत की सर्वोच्च प्रयोगशाला कौन सी है?
(a) केंद्रीय बीज प्रयोगशाला (Central Seed Laboratory, New Delhi - सही उत्तर)
(b) जिला प्रयोगशाला
(c) निजी लैब
(d) ब्लॉक लैब
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बीज अधिनियम के अंतर्गत परवर्ती अपराध (Subsequent Offence) हेतु अधिकतम कितनी सजा का प्रावधान है?
(a) 6 माह तक का कारावास अथवा ₹1000 जुर्माना अथवा दोनों (सही उत्तर)
(b) मृत्युदंड
(c) 10 वर्ष कारावास
(d) केवल चेतावनी
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अस्वीकरण (Disclaimer):
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