22. सहजन, कुंदरू एवं मीठी नीम (करी पत्ता) की वैज्ञानिक खेती एवं सस्य प्रबंधन (ORIGIN, AREA, PRODUCTION, VARIETIES, PACKAGE OF PRACTICES FOR DRUMSTICK, COCCINEA AND CURRY LEAF)
1. सहजन / मुनगा (Drumstick / Moringa - Moringa oleifera Lamk.)
वानस्पतिक विवरण, कुल एवं पोषण मान:
सहजन (Drumstick / Horse Radish Tree): Moringa oleifera Lamk. (गुणसूत्र संख्या: $2n = 28$), कुल: मोरिंगेसी (Moringaceae) (हिंदी: सहजन / मुनगा / सेंजन)।
सहजन भारत की एक अत्यंत मूल्यवान, बहुउद्देश्यीय एवं तीव्र गति से बढ़ने वाली वृक्षीय सब्जी फसल है। इसे पोषण का भंडार (Powerhouse of Nutrition) माना जाता है। इसकी कोमल फलियों (pods), पत्तियों और फूलों का उपयोग भोजन में किया जाता है। पत्तियां विटामिन 'A' ($11,300\text{ IU}$), विटामिन 'C' ($220\text{ mg}$), कैल्शियम ($440\text{ mg}$), आयरन ($7\text{ mg}$) और आवश्यक प्रोटीन से समृद्ध होती हैं। इसकी जड़ों में 'टेरीगोस्पर्मिन' (Pterygospermin) एवं 'स्पाइराचिन' (Spirachin) नामक शक्तिशाली प्रतिजैविक (antibiotic) यौगिक पाए जाते हैं। इसके बीजों से 'बेन ऑयल' (Ben oil) प्राप्त होता है जिसका उपयोग घड़ियों के स्नेहक और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है। बीज चूर्ण का उपयोग गंदे पानी को शुद्ध (water purification / flocculent) करने में किया जाता है।
सहजन के प्रकार एवं उन्नत किस्में:
- बहुवर्षीय सहजन (Perennial Drumstick): बड़े वृक्ष, प्रवर्धन तने की कटिंग (limb cuttings) द्वारा। किस्में: जाफना (Jaffna), चावाकाचेरी, चेम्मुुरुंगई, पलयमुरंगई।
- वार्षिक सहजन (Annual Drumstick): मध्यम ऊंचाई, बीज द्वारा प्रवर्धित (Seed propagated), रोपाई के 6 माह बाद ही फलन प्रारंभ। किस्में:
• PKM-1: TNAU द्वारा विकसित भारत की सर्वाधिक लोकप्रिय किस्म। फलियां लंबी ($65-75\text{ cm}$), सीधी, गूदेदार, प्रति वृक्ष $250-300$ फलियां प्रति वर्ष। उपज $50-55\text{ t/ha}$।
• PKM-2: संकर किस्म (MP 31 $\times$ MP 28), फलियां अत्यंत लंबी ($100-125\text{ cm}$), मांसल, अधिक उपजशील।
• रोहित-1, धनराज, कोकण सुरुचि: अन्य उन्नत किस्में।
सस्य क्रियाएं:
- बीज दर: वार्षिक सहजन हेतु $500\text{ g/ha}$ बीज।
- रोपाई एवं अंतरण: $45\text{ cm}^3$ के गड्ढे खोदकर $2.5 \times 2.5\text{ m}$ की दूरी पर रोपाई करें।
- शीर्ष कर्तन / पिंचिंग (Pinching): जब पौधा $75 - 100\text{ cm}$ ऊंचा हो जाए, तो मुख्य प्ररोह के शीर्ष को काट दें ताकि अधिक पार्श्व शाखाएं निकलें और फलन सघन हो।
- रेटूनिंग (Ratooning): प्रथम वर्ष की कटाई के बाद पौधों को जमीन से $1\text{ m}$ ऊंचाई पर काट दिया जाता है (ratooning), जिससे पुनः नए कल्ले निकलते हैं और लगातार $3-4$ वर्षों तक उत्पादन प्राप्त होता है।
2. कुंदरू / टेंडली (Coccinia / Ivy Gourd - Coccinia grandis L. Voigt)
वानस्पतिक विवरण एवं महत्व:
कुंदरू (Ivy Gourd): Coccinia grandis L. Voigt (गुणसूत्र संख्या: $2n = 24$), कुल: कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) (हिंदी: कुंदरू / भिम)।
कुंदरू एक द्विलिंगाश्रयी (Dioecious) तथा बहुवर्षीय (Perennial) आरोही लता है। इसके कोमल अपरिपक्व हरे फलों का उपयोग पकाई जाने वाली सब्जी में तथा कच्चा खाने में किया जाता है। यह मधुमेह (diabetes) के रोगियों में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में अत्यंत गुणकारी माना जाता है।
प्रवर्धन एवं सस्य प्रबंधन:
- प्रवर्धन: कुंदरू का व्यावसायिक प्रवर्धन तने की अर्ध-काष्ठीय कटिंग (Semi-hardwood stem cuttings) द्वारा किया जाता है। कटिंग की लंबाई $15 - 20\text{ cm}$ ($1.5 - 2.0\text{ cm}$ मोटी) होनी चाहिए।
- नर एवं मादा पौधों का अनुपात: खेत में परागण सुनिश्चित करने हेतु 1 नर पौधा प्रति 10 मादा पौधे (1:10 ratio) की दर से लगाना अनिवार्य है।
- मचान प्रणाली (Bower Training): लताओं को तारों और बांस के मचान पर चढ़ाया जाता है।
- उन्नत किस्में: सुलभा (Sulabha), इंदिरा कुंदरू-5, अर्का नीलगिरि, अर्का नीलांचल कुंखी।
- उपज: $15 - 20\text{ t/ha}$ (दूसरे और तीसरे वर्ष $25 - 30\text{ t/ha}$)।
3. मीठी नीम / करी पत्ता (Curry Leaf - Murraya koenigii L. Spreng)
वानस्पतिक विवरण, कुल एवं सुगंधित संघटन:
करी पत्ता (Curry Leaf): Murraya koenigii L. Spreng (गुणसूत्र संख्या: $2n = 18$), कुल: रूटेसी (Rutaceae) (हिंदी: मीठी नीम / कढ़ी पत्ता)।
करी पत्ता भारतीय व्यंजनों में छौंक, तड़का और सुगंध हेतु अनिवार्य रूप से प्रयुक्त होने वाला छोटा झाड़ीदार सदाबहार वृक्ष है। इसकी पत्तियों में विशिष्ट मनभावन सुगंध इसमें उपस्थित वाष्पशील तेल (कैरियोफिलीन, पिनीन, सेबिनिन) के कारण होती है। पत्तियां $eta$-कैरोटीन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होती हैं और पाचन सुधारने तथा बालों के स्वास्थ्य हेतु विख्यात हैं।
उन्नत किस्में एवं सस्य क्रियाएं:
- किस्में: DWD-1 (गहरे हरे पत्ते, अधिक तेल), DWD-2 / सुवासिनी (अत्यधिक सुगंधित, तेल $5.22\%$), सेनकाम्बु (लाल डंठल वाली पारंपरिक किस्म)।
- प्रवर्धन: ताजे बीजों (Fresh seeds without depulping) द्वारा या मूल चूषकों (Root suckers) द्वारा। बीजों की अंकुरण क्षमता शीघ्र समाप्त हो जाती है, अतः फल पकते ही तुरंत बुवाई करनी चाहिए।
- अंतरण: $1.2 \times 1.2\text{ m}$ या $1.5 \times 1.5\text{ m}$।
- कटाई एवं उपज: रोपाई के 12-15 माह बाद प्रथम कटाई। वर्ष में $3-4$ बार कटाई की जाती है। औसत हरी पत्ती उपज: $20 - 25\text{ t/ha/year}$।
समीक्षा प्रश्न / वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Review Questions / MCQs)
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वार्षिक सहजन (Annual drumstick) की बीज द्वारा प्रवर्धित सर्वाधिक प्रसिद्ध किस्म कौन सी है?
(a) जाफना
(b) PKM-1 (सही उत्तर)
(c) चेम्मुुरुंगई
(d) चावाकाचेरी
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कुंदरू (Coccinia) में व्यावसायिक फलन हेतु नर और मादा पौधों का अनुशंसित अनुपात क्या है?
(a) 1:1
(b) 1:5
(c) 1:10 (सही उत्तर)
(d) 1:20
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करी पत्ता (Curry leaf) का वानस्पतिक कुल कौन सा है?
(a) मोरिंगेसी
(b) रूटेसी (Rutaceae - सही उत्तर)
(c) कुकुरबिटेसी
(d) फैबेसी
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सहजन की जड़ों में कौन सा प्रतिजैविक (antibiotic) यौगिक पाया जाता है?
(a) सोलेनाइन
(b) टेरीगोस्पर्मिन (Pterygospermin - सही उत्तर)
(c) एलिसिन
(d) जिंजरॉल
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उच्च वाष्पशील तेल युक्त करी पत्ता की उन्नत किस्म 'सुवासिनी' (DWD-2) कहाँ से विकसित की गई है?
(a) TNAU, कोयंबटूर
(b) UAS, धारवाड़ (DWD - सही उत्तर)
(c) IIHR, बैंगलोर
(d) IARI, नई दिल्ली
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